मिसिंग बाघिनों के बाद वन विभाग ने बढ़ाई चौकसी, हाईटेक सिस्टम से निगरानी
Jageshwar prasad | Jun 07, 2026, 11:10 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में पहली बार GSM और सैटेलाइट तकनीक से लैस कैमरों से बाघों की लाइव निगरानी की जाएगी। दो बाघिनों के मिसिंग होने के बाद वन विभाग ने यह निर्णय लिया। थर्मल कैमरों को भी रि-एक्टिवेट किया जा रहा है।
News In Short
- रणथंभौर में पहली बार GSM कैमरों से बाघों की लाइव निगरानी शुरू होगी।
- दो बाघिनों के मिसिंग होने के बाद वन विभाग ने यह फैसला किया।
- GSM कैमरों में सिम कार्ड लगता है, जिससे मोबाइल जरिए लाइव मॉनिटरिंग संभव।
- रणथंभौर में थर्मल कैमरों को भी रि-एक्टिवेट किया जा रहा है, 9 कैमरे लग चुके हैं।
- इस तकनीक से पेरीफेरी इलाकों में रहने वाले 8-10 बाघों की मॉनिटरिंग की जाएगी।
News In Detail
प्रदेश में पहली बार ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस (GSM) तकनीक से लैस कैमरों और सैटेलाइट सिस्टम का उपयोग करके बाघों की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। शुरुआती चरण में रिजर्व के पेरीफेरी (बाहरी/सीमावर्ती) इलाकों में सक्रिय 8 से 10 बाघों की गतिविधियों को इसके दायरे में लिया जाएगा।
क्या है GSM कैमरा तकनीक?
इन अत्याधुनिक कैमरों में मोबाइल सिम कार्ड लगाए जाएंगे, जो सीधे उपलब्ध मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से काम करेंगे। कैमरे के सामने होने वाली किसी भी गतिविधि या बाघ की मूवमेंट की लाइव तस्वीरें और वीडियो एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन (App) के जरिए सीधे संबंधित वन अधिकारियों के फोन और कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएंगी।
इसके जरिए वन विभाग को वन्यजीवों की वास्तविक समय की लोकेशन और स्थिति का पता चल सकेगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत एक्शन लिया जा सकेगा।
GSM-Camera-surveillance-Ranthabhore
आखिर क्यों पड़ी इस हाईटेक सिस्टम की अचानक जरूरत?
दो बाघिनों का अचानक लापता होना: पिछले कुछ दिनों से रणथंभौर टाइगर रिजर्व की दो प्रमुख बाघिनें- आरबीटी-2504 (माही) और आरबीटी-2510 वन विभाग की नजरों से ओझल (मिसिंग) हैं। इनकी तलाश में जंगल के भीतर 5 विशेष टीमें लगातार पैदल पेट्रोलिंग कर रही हैं और 100 से अधिक पारंपरिक कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं, लेकिन अभी तक कोई पुख्ता सुराग नहीं मिला है। इसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए रीयल-टाइम ट्रैकिंग शुरू की जा रही है।
बाघों की बढ़ती आबादी और टेरिटरी की जंग: रणथंभौर में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण लगभग 10 बाघ रिजर्व के मुख्य कोर एरिया से बाहर निकलकर पेरीफेरी (सीमावर्ती) क्षेत्रों में रह रहे हैं। ये बाघ अक्सर नए सुरक्षित रास्तों की तलाश में रहते हैं।
थर्मल कैमरे रि-एक्टिवेट और टाइगर कॉरिडोर की पहचान
इस सैटेलाइट और जीएसएम आधारित तकनीक को धरातल पर उतारने के लिए रणथंभौर वन प्रशासन ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) को प्रस्ताव भेजकर आधिकारिक अनुमति मांगी है। अनुमति मिलते ही सीमावर्ती क्षेत्रों में इन्हें इंस्टॉल कर दिया जाएगा।
निगरानी को मजबूत करने के लिए रिजर्व में पहले से स्थापित थर्मल कैमरों को दोबारा ठीक कर चालू किया जा रहा है। अब तक 9 थर्मल कैमरों को रि-एक्टिवेट किया जा चुका है, जो किसी भी बाहरी घुसपैठ या हलचल की सूचना तुरंत मैसेज के जरिए अधिकारियों को भेज देते हैं।
प्राकृतिक कॉरिडोर का विकास
FAQ
- रणथंभौर टाइगर रिजर्व क्या है?
रणथंभौर टाइगर रिजर्व भारत के सबसे बड़े और सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व में से एक है। यह मुख्य रूप से अपने बंगाल टाइगर्स की आबादी और उनके प्राकृतिक आवास के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। - रणथंभौर टाइगर रिजर्व कहां स्थित है?
यह रिजर्व भारत के राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर जिले में स्थित है। यह अरावली और विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं के मिलन स्थल पर बना हुआ है। - रणथंभौर को टाइगर रिजर्व कब घोषित किया गया?
रणथंभौर टाइगर रिजर्व को 1955में वन्यजीव अभयारण्य बनाया गया। 1973 में इसे भारत सरकार के प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल कर टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। 1980 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला।
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