हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, शहरी सेवा शिविर में सरकारी जमीन के नियमन पर रोक
Mukesh Sharma | Jul 06, 2026, 16:40 IST
शहरी सेवा शिविरों में सरकारी जमीन नियमन पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
राजस्थान हाई कोर्ट ने शहरी सेवा शिविरों में सरकारी जमीनों और कच्ची बस्तियों के नियमन पर अंतरिम रोक लगा दी है। अब तक जारी पट्टों को भी स्थगित कर दिया गया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान हाई कोर्ट ने शहरी सेवा शिविरों में सरकारी जमीन के नियमन पर लगाई रोक।
- कोर्ट ने प्रदेश में अब तक शिविरों के जरिए जारी हो चुके पट्टे भी कर दिए स्थगित।
- यूडीएच के 10 जून 2026 के उस सर्कुलर पर रोक, जिसके तहत शिविर चल रहे।
- यूडीएच सचिव से व्यक्तिगत शपथ पत्र मांगा, पूछा कि किस हैसियत से ये आदेश जारी हुए।
- बार-बार नियमन सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले और शहरों के नियोजित विकास के खिलाफ।
कोर्ट ने नगरीय विकास एवं आवासन विभाग (यूडीएच राजस्थान) के 10 जून, 2026 को जारी परिपत्र पर रोक लगा दी है। इस सर्कुलर के जरिए सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को नियमित करने के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। यह शिविर 12 जून से 15 जुलाई तक चलेंगे।
जारी हो चुके पट्टे रहेंगे स्थगित
कोर्ट ने यूडीएच के अतिरिक्त मुख्य सचिव और सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं। उनसे यह बताने को कहा है कि उन्होंने किस हैसियत से यह पूर्णतः गैर-कानूनी आदेश जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि अनधिकृत निर्माणों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी गलत सहानुभूति होगी। नियमन योजनाएं केवल अपवादस्वरूप परिस्थितियों में लाई जा सकती हैं। इसमें विस्तृत सर्वे के बाद आवासीय मकानों के लिए केवल एक बार के उपाय के रूप में हो सकती हें।
राजस्थान सरकार पहले ही 1 जनवरी, 1999 तक के अतिक्रमणों के नियमन की एकमुश्त छूट दे चुकी है। ऐसे में बार-बार नियमन योजनाएं लाना अवैध कब्जाधारियों और भू-माफियाओं को संरक्षण देने जैसा है।
सरकार के ऐसे कदमों से आम जनता में गलत संदेश जाता है। पहले सरकारी जमीन पर कब्जा कर लो और बाद में सरकार उसे वैध कर देगी।
इस कारण ही आमजन बिना डर के जानबूझकर अतिक्रमण करने को प्रेरित होते हैं। इससे शहरों का नियोजित विकास बाधित होता है।
प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। अवैध कब्जों को नियमित करने से कानून का पालन करने वाले ईमानदार नागरिकों के हितों की अनदेखी होती है।
इन कामों पर लगी रोक
- सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों का नियमन।
- कच्ची बस्तियों का नियमन।
- खांचा भूमि (Gap Land) का आवंटन/नियमन।
- बिना रजिस्टर्ड दस्तावेज (बिना रजिस्ट्री वाले कागजात) के जरिए खरीदी गई जमीनों का नियमन।
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