50 से अधिक संस्थानों को नोटिस, पर अफसरों से सांठ-गांठ के खेल में दांव पर हजारों जिंदगी
Ashish Bhardwaj | Jun 05, 2026, 13:51 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के हिण्डौन सिटी में 50 से अधिक कमर्शियल संस्थानों को नोटिस थमाकर तत्काल फायर सेफ्टी उपाय करने को कहा। लेकिन, अधिकारियों से सांठ-गांठ के कारण ये नोटिस धूल फांक रहे हैं।
News In Short
- हिण्डौन सिटी में सवा साल में महज 37 संस्थानों को ही फायर एनओसी जारी की गई।
- नगर परिषद सर्वे में यह आया कि शहर के 100 बड़े संस्थान नियमों का उड़ा रहे मखौल।
- 50 से अधिक संस्थानों की सूची बनाकर नोटिस थमाए गए, इनमें कई नामी प्रतिष्ठान भी।
- अधिकारियों से सांठ-गांठ के कारण इन नोटिसों पर कोई नहीं हुआ एक्शन।
- अब प्रशासन का दावा, फायर सेफ्टी को लेकर किसी भी संस्थान को नहीं दी जाएगी ढील।
News In Detail
दिल्ली की होटल और बिहार के मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में भीषण आग लगने से हुई 26 मासूम लोगों की मौत की गूंज अभी थमी भी नहीं है। देश भर में इन हादसों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन हिण्डौन सिटी के जिम्मेदार प्रशासनिक महकमों की नींद पूरी तरह टूटने का नाम नहीं ले रही है।
हिण्डौन सिटी में आज सैकड़ों की संख्या में आलीशान होटल, नामी कोचिंग संस्थान, खचाखच भरी रहने वाली लाइब्रेरी, अस्पताल, शॉपिंग मॉल और बड़े व्यावसायिक संस्थान धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। मगर इन वीआईपी बिल्डिंग्स में सुरक्षा के दावों की पोल खोलती फायर एनओसी (Fire NOC) के आंकड़े ऊंट के मुंह में जीरा जैसे नजर आ रहे हैं।
अकेली हिण्डौन नगर परिषद के सरकारी दस्तावेज गवाही दे रहे हैं कि मार्च 2025 से मई 2026 तक के पूरे सवा साल के भीतर समूचे शहर में महज 37 संस्थानों को ही फायर एनओसी जारी की गई है। बाकी के सैकड़ों संस्थान बिना किसी अग्नि सुरक्षा प्रमाणन के, मौत का जाल बुनकर खुलेआम चल रहे हैं।
100 बड़े संस्थानों में नियमों का मखौल
नगर परिषद के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक आनन-फानन में इनमें से 50 से अधिक डिफाल्टर संस्थानों को नोटिस थमाकर तत्काल फायर सेफ्टी सिस्टम इंस्टॉल करने और एनओसी लेने के कड़े निर्देश दिए।
अग्नि शमन विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि आग लगने पर एक छोटी सी लापरवाही की चिंगारी महज चंद मिनटों में विकराल काल का रूप ले लेती है। इसके बावजूद हिण्डौन के कई रसूखदार संचालक फायर सेफ्टी और एनओसी को महज कागजी औपचारिकता मानकर हवा में उड़ा रहे हैं।
जिला अस्पताल खुद वेंटिलेटर पर
यहां रोजाना औसतन 3 से 4 हजार मरीज और उनके परिजन गंभीर अवस्था में इलाज और परामर्श के लिए पहुँचते हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि यहाँ भी अब तक अपडेटेड फायर सेफ्टी सिस्टम स्थापित नहीं किया जा सका है।
नगर परिषद प्रशासन की ओर से जिला अस्पताल प्रबंधन को अब तक दो बार आधिकारिक नोटिस जारी कर चेताया जा चुका है, लेकिन सरकारी तंत्र के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर खतरे को लेकर पूरी तरह बेपरवाह बने हुए हैं।
किन-किन पर लटकी है नोटिस की तलवार?
निजी स्कूल: करीब 15 से 20 नामी प्राइवेट स्कूल, जहां हजारों बच्चों का भविष्य बैठता है।
पेट्रोल पंप व मैरिज गार्डन: 7 बड़े पेट्रोल पंप और 12 आलीशान मैरिज गार्डन।
अस्पताल व कोचिंग: 2 बड़े निजी अस्पताल, दर्जनों शॉपिंग मॉल, खचाखच भरी लाइब्रेरी और नामी कोचिंग संस्थान।
इन नोटिसों को तामील हुए कई दिन बीत चुके हैं, पर संस्थान मालिकों और प्रबंधकों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
क्यों खामोश बैठ जाती है नगर परिषद?
फायर सेफ्टी सिस्टम लगवाने के भारी-भरकम खर्च और एनओसी की सरकारी कागजी प्रक्रियाओं में उलझने के बजाय, इन व्यावसायिक संस्थानों के मालिक सीधे तौर पर नगर परिषद के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क साध लेते हैं।
इस सांठ-गांठ के चलते फाइलों को दबाने और लेट-लतीफी का एक अंतहीन दौर शुरू हो जाता है। नतीजा यह होता है कि धरातल पर कभी फायर सेफ्टी सिस्टम लग ही नहीं पाता।
जनता अब पूछ रही है कि क्या नगर परिषद प्रशासन हादसों को रोकने के लिए अपना यह कथित लचीलापन छोड़कर इन लापरवाह और रसूखदार संस्थान मालिकों के खिलाफ कोई सख्त कानूनी एक्शन (जैसे सीलिंग या भारी जुर्माना) लेगा, या फिर हिण्डौन में भी किसी बड़ी मानव निर्मित
त्रासदी का इंतजार किया जा रहा है?
नगर परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार पूरे शहर में सिर्फ उंगलियों पर गिनने लायक संस्थानों के पास ही अधिकृत रूप से वैध फायर एनओसी है:
संस्थान का प्रकार एनओसी प्राप्त संस्थानों की संख्या
अस्पताल 15
होटल / बीयर बार / कॉलेज 05 (प्रत्येक श्रेणी में)
पेट्रोल पंप 03
शॉपिंग मॉल 02
मैरिज गार्डन / स्कूल 01 (प्रत्येक श्रेणी में)
बाकी के सैकड़ों संस्थान सरेआम नियमों का मखौल उड़ाते हुए जनता की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों का पक्ष:
कार्रवाई अब सख़्ती से होगी:
- हेमराज गुर्जर, एसडीएम एवं आयुक्त नगर परिषद, हिण्डौन सिटी।
मुख्यालय को भिजवाया है तकमीना:
'जिला अस्पताल में फायर सेफ्टी सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए नगर परिषद में फाइल पहले ही लगाई जा चुकी है। अस्पताल के नए भवन में तो आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह एक्टिव है, लेकिन पुरानी बिल्डिंग में सिस्टम लगाने के लिए वित्तीय स्वीकृति हेतु मुख्यालय को एस्टीमेट (तकमीना) बनाकर भिजवाया गया है। वर्तमान में हमारे पास पर्याप्त मात्रा में पोर्टेबल अग्निशमन यंत्र (फायर एक्स्टिंग्विशर) उपलब्ध हैं।
- डॉ. पुष्पेंद्र गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (PMO), राजकीय जिला अस्पताल, हिण्डौन सिटी।
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