IIT टॉपर से UPSC टॉपर तक, कनिष्क कटारिया की वो लव स्टोरी, जिसने IAS बनने का सपना बुना
Jinesh Jain | Apr 04, 2026, 13:05 IST
Photograph: (the sootr)
आईएएस कनिष्क की कामयाबी की कहानी बड़ी दिलचस्प है। वे यूपीएससी में अपनी टॉप रैंक के साथ ही लव स्टारेी के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने यूपीएससी की सफलता के लिए बाकायदा गर्लफ्रेंड को भी क्रेडिट दिया।
यूपीएससी की दुनिया में कनिष्क कटारिया का नाम ऐसा है, जो न सिर्फ उनकी रैंक के लिए बल्कि उनकी लव स्टोरी के लिए भी चर्चित रहा है। कनिष्क कटारिया 2018 की यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की और फिर मीडिया के सामने खुलकर कहा कि इस सफलता का श्रेय उनके परिवार के साथ उनकी गर्लफ्रेंड सोनल को भी जाता है। आज भी जब UPSC की तैयारी करने वाले लाखों युवा सफलता के सूत्र ढूंढते हैं, तो कनिष्क की कहानी सिर्फ एक टॉपर की कहानी नहीं, बल्कि भरोसे, त्याग और समर्पण की मिसाल बन जाती है।
मूल रूप से जयपुर के रहने वाले कनिष्क कटारिया ने सेंट पॉल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कोटा से स्कूल की पढाई की। प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे पहले उन्होंने जेईई परीक्षा 2010 में ऑल इंडिया रैंक 43 हासिल की थी। यह उनकी प्रतिभा का पहला बड़ा प्रमाण था। इसके बाद उन्होंने IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। यहीं पर उनकी मुलाकात सोनल चौहान से हुई। दोनों एक ही ब्रांच में पढ़ते थे। दोस्ती से शुरू हुआ सफर, धीरे-धीरे प्यार में बदल गया।
पढ़ाई पूरी करने के बाद कनिष्क और सोनल दोनों को जापान की एक कंपनी में नौकरी मिल गई। इसके बाद उन्होंने साउथ कोरिया में सैमसंग के Suwon R&D लैब में भी काम किया। करोड़ों का पैकेज और विदेशी लाइफस्टाइल की चमक-दमक सब कुछ था। लेकिन नौकरी में वह संतुष्टि नहीं मिल रही थी, जिसकी वह तलाश कर रहे थे।
उनके परिवार में भी सिविल सर्विसेस का बोलबाला था।
पिता सांवर मल वर्मा IAS अधिकारी थे और चाचा केसी वर्मा जयपुर में डिविजनल कमिश्नर। बचपन से ही उन्होंने पिता और चाचा को देश की सेवा करते देखा था। वह भी वही रास्ता चुनना चाहते थे। इसीलिए उनके मन में एक सवाल बार-बार कौंधता था- मैं अपने देश के लिए क्या कर रहा हूं?
कनिष्क ने जब UPSC की तैयारी का फैसला किया तो सोनल ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा- जाओ, मैं तुम्हारे साथ हूं। कनिष्क ने सैमसंग की नौकरी छोड़ी, कोरिया से वापस लौटे और जयपुर आकर दो साल तक जमकर पढ़ाई की। इस पूरे सफर में सोनल उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी रही।
2018 की यूपीएससी परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी हुआ था। कनिष्क ने पहली बार परीक्षा दी और सीधे ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की थी। यह सुनते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। लेकिन सबसे खास पल तब आया, जब सोनल ने फेसबुक पर लिखा- I Love You. यह सिर्फ शब्द नहीं थे, बल्कि उस साथ और भरोसे की पुष्टि थी, जो उन्होंने सालों से बनाए रखा था।
कनिष्क उन लोगों में से हैं, जो अपने रिश्ते को छिपाकर नहीं रखते। रिजल्ट आने के बाद मीडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने खुलकर कहा- मेरी इस सफलता में मेरे परिवार का भी हाथ है और मेरी गर्लफ्रेंड सोनल का भी। यह बात सुर्खियों में आई। उस दौरान उनकी लव स्टोरी ने यूपीएससी की किताबी दुनिया के बीच एक अलग ही चर्चा बटोरी।
मसूरी में आईएएस ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 2020 में कनिष्क और सोनल ने शादी कर ली। शादी के बाद सोनल ने भी विदेशी कंपनी की नौकरी छोड़ दी। आज वह Kizoplay नामक कंपनी की को-फाउंडर हैं। दोनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और अक्सर अपनी कपल फोटो शेयर करते हैं। फॉलोअर्स उनकी पोस्ट्स पर खूब प्रतिक्रिया देते हैं।
कनिष्क हमेशा कहते हैं कि यूपीएससी की तैयारी में कोई जादुई फॉर्मूला नहीं होता। उनके अनुसार सफलता के लिए जरूरी हैं कि सही किताबें चुनो और बार-बार दोहराओ ताकि बेसिक्स पर मजबूत पकड़ बने। लगातार मेहनत करो और खुद पर भरोसा रखो।
सोशल मीडिया को पढ़ाई के काम में इस्तेमाल करो, मनोरंजन में कम। तकनीकी और कॉर्पोरेट अनुभव को यूपीएससी में अपनी ताकत बनाओ। सबसे अहम-इस तैयारी की यात्रा का आनंद लो।
कनिष्क के पिता सांवर मल वर्मा राजस्थान में सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के निदेशक रह चुके हैं। चाचा केसी वर्मा जयपुर में डिविजनल कमिश्नर रह चुके हैं। लेकिन कनिष्क ने यह मुकाम सिर्फ परिवार की विरासत के सहारे नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और लगन से हासिल किया।
कनिष्क कटारिया की कहानी उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सफलता बताती है कि अगर मेहनत में ईमानदारी हो, रास्ते में भरोसा रखने वाला कोई साथ हो, और मंजिल का सपना दिल में हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
अभी कनिष्क कटारिया भरतपुर विकास प्राधिकरण में कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक अधिकारी की नहीं, बल्कि उस युवा की है जिसने करोड़ों का पैकेज छोड़ा, विदेश की नौकरी ठुकराई और देश की सेवा का रास्ता चुना। और इस रास्ते पर उनका साथ दिया उनके प्यार ने।
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जब IIT बॉम्बे में मिली पहली सफलता
Kanishka-Kataria
कोरिया से वापसी का सफर
उनके परिवार में भी सिविल सर्विसेस का बोलबाला था।
पिता सांवर मल वर्मा IAS अधिकारी थे और चाचा केसी वर्मा जयपुर में डिविजनल कमिश्नर। बचपन से ही उन्होंने पिता और चाचा को देश की सेवा करते देखा था। वह भी वही रास्ता चुनना चाहते थे। इसीलिए उनके मन में एक सवाल बार-बार कौंधता था- मैं अपने देश के लिए क्या कर रहा हूं?
कनिष्क ने जब UPSC की तैयारी का फैसला किया तो सोनल ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा- जाओ, मैं तुम्हारे साथ हूं। कनिष्क ने सैमसंग की नौकरी छोड़ी, कोरिया से वापस लौटे और जयपुर आकर दो साल तक जमकर पढ़ाई की। इस पूरे सफर में सोनल उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी रही।
जब सोनल ने फेसबुक पर लिखा- I Love You
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मीडिया के सामने खुलकर बताई लव स्टोरी
ट्रेनिंग के बाद की शादी
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IAS बनने का मंत्र, जो कनिष्क कटारिया ने बताया
सोशल मीडिया को पढ़ाई के काम में इस्तेमाल करो, मनोरंजन में कम। तकनीकी और कॉर्पोरेट अनुभव को यूपीएससी में अपनी ताकत बनाओ। सबसे अहम-इस तैयारी की यात्रा का आनंद लो।
पिता-चाचा भी हैं IAS
स्टूडेंट्स के लिए सबक
अभी कनिष्क कटारिया भरतपुर विकास प्राधिकरण में कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक अधिकारी की नहीं, बल्कि उस युवा की है जिसने करोड़ों का पैकेज छोड़ा, विदेश की नौकरी ठुकराई और देश की सेवा का रास्ता चुना। और इस रास्ते पर उनका साथ दिया उनके प्यार ने।
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