जेडीए रीजन के 3000 वर्ग किमी विस्तार पर उठे सवाल, आखिर क्यों दी जा रही मास्टर प्लान की बलि?
Mukesh Sharma | Mar 27, 2026, 17:28 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान की राजधानी जयपुर में जेडीए का एरिया 3000 वर्ग किलोमीटर बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। हाई कोर्ट हाल ही में इस बढ़े हुए एरिया के 679 गांवों में नए निर्माण पर अंतरिम रोक लगा चुका है।
News In Short
- जेडीए 3000 वर्ग किलोमीटर बढ़ाएगा अपना क्षेत्राधिकार।
- 679 गांवों में खेती खत्म होने से बर्बाद हो जाएगा पर्यावरण
- गांव खत्म होने से पशुधन पर मंडराएगा खतरा
- अन्य जिलों और गांवों पर कृषि और चारागाह का बढ़ेगा दबाव
- हाईकोर्ट 679 गांव में नए निर्माण पर लगा चुका है रोक
News In Detail
सिफारिशों की विपरीत बढ़ाया एरिया
विशेषज्ञों का कहना है कि जयपुर शहर से 60 किलोमीटर दूर स्थित गांवों को जेडीए रीजन में शामिल करने का तर्क समझ से परे है, क्योंकि इन ग्रामीण इलाकों का शहर के बुनियादी ढांचे से कोई प्रत्यक्ष जुड़ाव नहीं है। सवाल यह उठता है कि आखिर सरकार ने विशेषज्ञों की राय क्यों नहीं मानी?
फैसले से पहले स्टडी नहीं
मास्टर प्लान ही नहीं तो कैसे हुआ फैसला
गुलाब कोठारी फैसले की अनदेखी
कोर्ट ने स्प्ष्ट कहा था कि मास्टर प्लान में बदलाव से पहले विस्तृत जनसुनवाई अनिवार्य है। ग्रीन और ईकोलॉजिकल जोन को हर हाल में संरक्षित रखा जाए। पर्यावरण और इकोलॉजी पर पड़ने वाले प्रभाव का विशेषज्ञ आकलन आवश्यक है। सिर्फ असाधारण जनहित की स्थिति में ही ग्रीन जोन के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान फैसले में कहीं भी असाधारण जनहित नजर नहीं आता। 3000 वर्ग किमी की इस नई जमीन का उपयोग केवल भू-उपयोग परिवर्तन के जरिए बिल्डरों और रीयल एस्टेट माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए किया जाएगा।
खेती और पशुपालन पर मार
पर्यावरणविदों का कहना है कि गांवों के जेडीए में शामिल होने से चारागाह भूमि खत्म हो जाएगी, जिससे पशुपालन व्यवसाय पर गहरा संकट आएगा। जब जयपुर के आसपास की खेती खत्म होगी तो दूध, सब्जी और अनाज की आपूर्ति के लिए दौसा, टोंक और सीकर जैसे पड़ोसी जिलों पर दबाव बढ़ेगा। इससे वहां के प्राकृतिक संसाधनों का भी दोहन होगा।
पर्यावरणविदों की चिंता है कि जयपुर पहले से ही डार्क जोन की स्थिति में है। खेती की जमीन कम होने और निर्माण बढ़ने से वाटर रिचार्जिंग की प्रक्रिया रुक जाएगी। इससे आने वाले समय में भीषण जल संकट पैदा हो सकता है।
विनाश की भरपाई कैसे होगी
बिना बुनियादी ढांचे की स्टडी किए इतने बड़े क्षेत्र को जेडीए के अधीन करना केवल जमीनों के दाम बढ़ाकर सट्टेबाजी को बढ़ावा देने जैसा है। हालांकि, जेडीए के अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने तय नियमों के तहत ही जयपुर विस्तार का फैसला लिया।
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