ईको-सेंसिटिव जोन घोषित: 3 जिलों के 94 गांवों में खनन, ईंट-भट्टे और होटल-रिसॉर्ट पर सख्त रोक

Purshottam Kumar Joshi | Jan 17, 2026, 17:42 IST
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aravalli
Photograph: (the sootr)

केंद्र सरकार ने राजस्थान में कुंभलगढ़ अभयारण्य के चारों ओर 1 किलोमीटर का ईको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित किया, जिसमें खनन, ईंट-भट्टे और होटल-रिसॉर्ट पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए।

News In Short

  1. केंद्र सरकार ने कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर 1 किलोमीटर का क्षेत्र ईको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित किया।
  2. 94 गांवों में खनन, ईंट-भट्टे और नए होटल-रिसॉर्ट पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया।
  3. कुंभलगढ़ क्षेत्र अरावली पर्वतमाला का हिस्सा और जलग्रहण क्षेत्र है।
  4. स्थानीय निवासियों के आवास और पारिस्थितिकी पर्यटन के लिए नियमों के तहत अनुमति दी जाएगी।
  5. राज्य सरकार को मास्टर प्लान तैयार करने के लिए 2 साल का समय दिया गया।

News In Detail

केंद्र सरकार ने कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर 1 किलोमीटर तक के क्षेत्र को ईको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित किया है। इसके तहत 94 गांवों में खनन, औद्योगिक गतिविधियों, ईंट-भट्टों और होटल-रिसॉर्ट्स पर सख्त प्रतिबंध लगे हैं। यह क्षेत्र अरावली पर्वतमाला का हिस्सा होने के साथ जलग्रहण क्षेत्र भी है। स्थानीय निवासियों को आवास और पारिस्थितिकी पर्यटन जैसी गतिविधियों के लिए अनुमति मिलेगी। राज्य सरकार को 2 साल में मास्टर प्लान तैयार करना होगा।

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में नया पर्यावरण प्रावधान

केंद्र सरकार ने राजस्थान के कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर 1 किलोमीटर के क्षेत्र को पारिस्थितिकी-संवेदी क्षेत्र (ईको-सेंसिटिव ज़ोन) घोषित किया है। यह कदम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत लिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य कुंभलगढ़ और उसके आसपास की जैव विविधता, वनस्पतियों और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस क्षेत्र में फैले 94 गांवों में खनन, बड़े औद्योगिक उपक्रम, ईंट-भट्टे, और नए होटल-रिसॉर्ट की स्थापना पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

खनन और औद्योगिक गतिविधियों पर रोक

अधिसूचना के अनुसार, कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य राजसमंद, पाली और उदयपुर जिलों में फैला हुआ है और यह अरावली पर्वत श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस क्षेत्र को अरावली के सबसे नाजुक पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक माना जाता है, जिससे यहां खनन और औद्योगिक गतिविधियां जैव विविधता को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके साथ ही, यह क्षेत्र बनास और लूणी नदी प्रणालियों के जलग्रहण क्षेत्र के रूप में भी महत्वपूर्ण है, जिससे पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

स्थानीय गतिविधियों पर नियम और परमिशन

नए प्रावधानों के तहत, स्थानीय निवासियों की आवासीय जरूरतों और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के लिए अनुमति दी जाएगी। साथ ही, गैर-प्रदूषणकारी लघु उद्योगों और पारिस्थितिकी पर्यटन से संबंधित गतिविधियों को भी नियमन के तहत अनुमति दी जा सकेगी। हालांकि, प्रदूषणकारी उद्योगों, वाणिज्यिक खनन, पत्थर उत्खनन, और पवन चक्कियों की स्थापना पर पूरी तरह से रोक रहेगी।

राज्य सरकार की जिम्मेदारी

अधिसूचना में राज्य सरकार को यह निर्देश दिया गया है कि वह दो साल के भीतर स्थानीय लोगों से परामर्श करके एक आंचलिक मास्टर प्लान तैयार करें। इस योजना में जलस्रोतों का संरक्षण, वन पुनर्स्थापन, जैव विविधता की रक्षा और पर्यावरण-अनुकूल आजीविका के उपाय शामिल किए जाएंगे। यह कदम कुंभलगढ़ क्षेत्र की पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और समग्र पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्य बिंदू :

  • केंद्र सरकार ने ईको-सेंसिटिव जोन के तहत खनन, बड़े औद्योगिक उपक्रम, पत्थर उत्खनन, ईंट-भट्टे और पवन चक्कियों की स्थापना पर रोक लगा दी है।
  • कुंभलगढ़ सेंचुरी को अरावली पर्वतमाला का हिस्सा होने और जैव विविधता तथा पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र माना गया है, इसलिए इसे ईको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित किया गया।
  • राज्य सरकार को दो वर्षों के भीतर स्थानीय लोगों से परामर्श लेकर आंचलिक मास्टर प्लान तैयार करना होगा, जिसमें जलस्रोतों का संरक्षण, वन पुनर्स्थापन और जैव विविधता की रक्षा के उपाय शामिल होंगे।

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