जल जीवन मिशन घोटाला : पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी की जमानत याचिका खारिज, जानें राजस्थान हाईकोर्ट ने क्या कहा

Nitin Kumar Bhal | Aug 26, 2025, 11:43 IST
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Photograph: (The Sootr)

राजस्थान के पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन घोटाले में हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली, जमानत याचिका खारिज हुई। ED ने 24 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया था।

राजस्थान (Rajasthan) में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) घोटाले से जुड़े मामले में गिरफ्तार पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी (Mahesh Joshi) की जमानत याचिका राजस्थान हाईकोर्ट खारिज कर दी है। बता दें कांग्रेस नेता महेश जोशी की गिरफ्तारी (Arrest) ने राज्य और देशभर में हलचल मचा दी थी। महेश जोशी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 24 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया था। इस मामले में 979.45 करोड़ रुपए (₹979.45 Crore) के घोटाले की जांच चल रही है। गिरफ्तारी के बाद महेश जोशी ने जमानत के लिए राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी। जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) घोटाले में जोशी की गिरफ्तारी के बाद जमानत के लिए की गई याचिका पर 3 दिन तक न्यायाधीश प्रवीर भटनागर ने सुनवाई की। इस मामले में 9 अगस्त 2025 को सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा था।

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महेश जोशी की गिरफ्तारी कब हुई थी?

राजस्थान पूर्व मंत्री महेश जोशीकी गिरफ्तारी 24 अप्रैल 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate - ED) ने की थी। जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के तहत यह घोटाला सामने आया, जिसमें 979.45 करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप है। ED ने महेश जोशी को गिरफ्तार करते हुए कहा कि वे इस घोटाले में सीधे तौर पर शामिल थे, और उनके खिलाफ PMLA (Prevention of Money Laundering Act) की धाराओं (Sections of PMLA Act) में आरोप लगाए गए हैं।

ED ने 20 जून को विशेष अदालत में चार्जशीट पेश की, जिसमें महेश जोशी और अन्य आरोपियों पर गंभीर आरोप लगाए गए। इस मामले में ED के अधिवक्ता अक्षय भारद्वाज ने पैरवी की, और कोर्ट में सभी तथ्यों को पेश किया। अदालत ने पूर्व मंत्री महेश जोशी की जमानत याचिका खारिज कर दी।



महेश जोशी ने अपनी गिरफ्तारी के बाद राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) में जमानत की याचिका दायर की थी, लेकिन जस्टिस प्रवीर भटनागर (Justice Praveer Bhatanagar) ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। जोशी की जमानत पहले 13 जून 2025 को ईडी कोर्ट (ED Court) से भी खारिज हो चुकी थी।


राजस्थान का जल जीवन मिशन घोटाला क्या है

  • फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र का इस्तेमाल

    • साल 2021 में श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के ठेकेदार पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र (Fake Experience Certificates) दिखाकर जलदाय विभाग (PHED) से करोड़ों रुपए के टेंडर हासिल किए थे।
  • श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी का घोटाला

    • श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी कार्य प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर पीएचईडी (PHED) की 68 निविदाओं (Tenders) में भाग लिया।
    • इन निविदाओं में से 31 में एल-1 (L-1) के रूप में 859.2 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए थे।
  • श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी की भूमिका

    • श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने 169 निविदाओं में भाग लिया।
    • इनमें से 73 निविदाओं में एल-1 (L-1) का दर्जा प्राप्त किया और 120.25 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए थे।
  • घोटाले का खुलासा और एसीबी की कार्रवाई

    • जब इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ, तो एसीबी (Anti Corruption Bureau) ने तुरंत जांच शुरू की।
    • कई भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ा गया और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
  • ईडी और सीबीआई की जांच

    • ईडी (ED) ने केस दर्ज कर महेश जोशी और उनके सहयोगी संजय बड़ाया सहित अन्य के ठिकानों पर दबिश दी।
    • इसके बाद सीबीआई (CBI) ने 3 मई 2024 को केस दर्ज किया।
    • ईडी ने अपनी जांच पूरी कर 4 मई को एसीबी को सबूत और दस्तावेज सौंपे थे।

जल जीवन मिशन घोटाला क्या है?

जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) का उद्देश्य हर घर में नल से जल (Water Supply to Every Household) की सुविधा उपलब्ध कराना है। लेकिन इस मिशन में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है, जिसमें करोड़ों रुपए की हेराफेरी की गई है। ED के अनुसार, महेश जोशी और उनके सहयोगियों ने सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया और जल जीवन मिशन के तहत कई परियोजनाओं में अनियमितताएं कीं। जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार में कई अन्य अधिकारी और ठेकेदार भी शामिल हैं, जिन पर जांच जारी है। ED ने कई ठिकानों पर छापेमारी (Raid) की और कुछ अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह घोटाला राज्य के विकास कार्यों में गहरी साजिश का प्रतीक माना जा रहा है।

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जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर ईडी सतर्क

प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य जांच एजेंसियां (Investigating Agencies) इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी तत्परता से काम कर रही हैं। उन्होंने महेश जोशी के अलावा कई अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू की है और कई स्थानों पर छापेमारी की है। ED ने महेश जोशी के संपत्ति विवरण (Assets Details) को भी जब्त किया है और जांच के दौरान कई दस्तावेज़ों की जांच की जा रही है।

पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार इस घोटाले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही हैं। इस घोटाले के कारण जल जीवन मिशन में सरकार के धन का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है, और इसका असर उन नागरिकों पर पड़ा है जो अभी तक इस योजना के तहत जल आपूर्ति का लाभ नहीं उठा पाए हैं।

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FAQ

  1. 1. राजस्थान के पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को क्यों गिरफ्तार किया गया था?
    पूर्व मंत्री महेश जोशी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 24 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया था। उन पर जल जीवन मिशन घोटाले में संलिप्तता के आरोप हैं।
  2. 2. राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी की जमानत याचिका क्यों खारिज हुई?
    महेश जोशी की जमानत याचिका राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें जमानत देने से इंकार किया।
  3. 3. राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले में कितने रुपए का घोटाला हुआ है?
    जल जीवन मिशन घोटाले में 979.45 करोड़ रुपए (₹979.45 Crore) की हेराफेरी की गई है, जैसा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बताया है।
  4. 4. जल जीवन मिशन का उद्देश्य क्या था?
    जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) का उद्देश्य भारत के हर घर में नल से जल (Water Supply to Every Household) की सुविधा प्रदान करना था, लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और घोटाले सामने आए।
  5. 5. राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी और अन्य आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है?
    महेश जोशी और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य जांच एजेंसियां गंभीर आरोपों की जांच कर रही हैं। छापेमारी (Raid) और संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाइयां की जा रही हैं।
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