अपनों की जंग-सड़कों पर हंगामा, मारवाड़ से मेवाड़ तक क्यों बिखर रहे हैं पूर्व राजघराने
The Sootr | Mar 12, 2026, 16:14 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह के कथित दूसरे विवाह को लेकर जसोल परिवार की जंग सुर्खियों में है। आपसी विवाद और संपत्ति की कलह को लेकर अधिकतर पूर्व राजघरानों में 'अपनों' के खिलाफ तलवारें खिंची हुई हैं।
योगेन्द्र योगी@जयपुर
राजस्थान की धरती वीरों की गाथाओं और उनके त्याग के लिए जानी जाती है। एक दौर था जब यहां के राजघरानों की तलवारें सीमा की रक्षा और शत्रु के दमन के लिए म्यान से बाहर निकलती थीं। लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि आज वही तलवारें अपनों के ही खिलाफ खिंची हुई हैं।
रियासतकाल में जिन राजपरिवारों की निजी बातें चहारदीवारी से बाहर नहीं आती थीं, आज उनके आपसी विवाद, संपत्ति की कलह और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप सोशल मीडिया की सुर्खियों और अदालतों के कमरों तक पहुंच गए हैं। पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह के कथित दूसरे विवाह को लेकर मारवाड़ के जसोल घराने में छिड़ा घमासन इन दिनों सुर्खियों में है।
मारवाड़ के सबसे प्रतिष्ठित परिवारों में से एक और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय जसवंत सिंह के घर की कलह इन दिनों चर्चा में है। कद्दावर नेता जसवंत सिंह के बेटे पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह और उनकी मां शीतल कंवर के बीच तीखी नोकझोंक का एक वीडियो वायरल होने के बाद राजपरिवार की छवि को गहरा धक्का लगा है।
विवाद की जड़ में मानवेंद्र सिंह की दूसरी शादी का मुद्दा बताए जा रहा है। वर्ष 2024 में सड़क दुर्घटना में पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरे विवाह को लेकर शुरू हुआ यह व्यक्तिगत विवाद अब सार्वजनिक हो चुका है, जिसने मारवाड़ की जनता को हैरत में डाल दिया है।
मेवाड़ राजपरिवार में भी विवाद चरम पर है। दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्तियों को लेकर पुत्र लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और उनकी दोनों बहनों (पद्मजा और भार्गवी) के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है। वसीयत को चुनौती देने वाला यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित हो गया है।
हाल ही में महेंद्र सिंह मेवाड़ के निधन के बाद उनके पुत्र विश्वराज सिंह मेवाड़ (भाजपा विधायक) को जब पैलेस में प्रवेश करने से रोका गया, तो स्थिति हिंसक हो गई। समर्थकों और पुलिस के बीच हुई झड़प में कई लोग घायल हुए। 'धूणी स्थल' पर नमन करने जैसे धार्मिक अधिकारों को लेकर उपजा यह विवाद अब ईगो और अधिकार की लड़ाई बन चुका है।
भरतपुर राजपरिवार में पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह और उनके बेटे अनिरुद्ध सिंह के बीच की जंग ने काफी सुर्खियां बटोरीं। अनिरुद्ध ने अपने ही पिता पर 'बंध बारैठा' की पैतृक कोठी को अवैध रूप से बेचने का आरोप लगाया था। इस विवाद में मां दिव्या सिंह भी बेटे के साथ थीं। मामला सोशल मीडिया पर तीखे बयानों तक पहुंचा। हालांकि, हाल ही में पिता-पुत्र की एक साथ वायरल हुई तस्वीर ने संकेत दिया है कि इस परिवार में अब सुलह की बयार बह रही है।
बीकानेर के जूनागढ़ किले के भीतर का विवाद किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। यहां भाजपा विधायक सिद्धि कुमारी और उनकी बुआ राज्यश्री कुमारी के बीच ट्रस्टों और संपत्तियों पर मालिकाना हक को लेकर तकरार है। स्थिति तब गंभीर हो गई जब राज्यश्री कुमारी को किले के मंदिर में दर्शन करने से रोक दिया गया। दो घंटे की बहस के बाद उन्हें बिना दर्शन के लौटना पड़ा। राज्यश्री ने पुलिस पर सत्ता के दबाव का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश बताता रहा।
जैसलमेर में पूर्व महारावल बृजराज सिंह और उनकी चाची रेणुका भाटी के बीच 7 साल तक संपत्ति विवाद चला। इसमें अंततः अदालत ने पूर्व महारावल के पक्ष में फैसला सुनाया।
बूंदी में 14 साल तक धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के आरोपों के बीच कानूनी लड़ाई चली। अंततः पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह और विपक्षी पक्ष के बीच दिल्ली हाईकोर्ट में समझौता हुआ।
धौलपुर में पिता हेमंत सिंह और पुत्र सांसद दुष्यंत सिंह के बीच 29 साल तक संघर्ष चला। वर्ष 2005 में वसुंधरा राजे की उपस्थिति में समझौता हुआ, जिसके तहत दिल्ली की संपत्ति पिता को और राजस्थान की शाही संपत्तियां बेटे को मिलीं।
भारत में रियासतें खत्म हुए दशकों बीत चुके हैं। पूर्व राजपरिवारों ने अपनी साख बचाए रखने के लिए लोकतंत्र का रास्ता चुना और राजनीति में सक्रिय हुए। उनके निजी विवादों ने मरुधरा की जनता को ध्यान खींचा है।
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राजस्थान की धरती वीरों की गाथाओं और उनके त्याग के लिए जानी जाती है। एक दौर था जब यहां के राजघरानों की तलवारें सीमा की रक्षा और शत्रु के दमन के लिए म्यान से बाहर निकलती थीं। लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि आज वही तलवारें अपनों के ही खिलाफ खिंची हुई हैं।
रियासतकाल में जिन राजपरिवारों की निजी बातें चहारदीवारी से बाहर नहीं आती थीं, आज उनके आपसी विवाद, संपत्ति की कलह और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप सोशल मीडिया की सुर्खियों और अदालतों के कमरों तक पहुंच गए हैं। पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह के कथित दूसरे विवाह को लेकर मारवाड़ के जसोल घराने में छिड़ा घमासन इन दिनों सुर्खियों में है।
मारवाड़: जसवंत सिंह के परिवार में 'अपनों' की जंग
विवाद की जड़ में मानवेंद्र सिंह की दूसरी शादी का मुद्दा बताए जा रहा है। वर्ष 2024 में सड़क दुर्घटना में पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरे विवाह को लेकर शुरू हुआ यह व्यक्तिगत विवाद अब सार्वजनिक हो चुका है, जिसने मारवाड़ की जनता को हैरत में डाल दिया है।
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हाल ही में महेंद्र सिंह मेवाड़ के निधन के बाद उनके पुत्र विश्वराज सिंह मेवाड़ (भाजपा विधायक) को जब पैलेस में प्रवेश करने से रोका गया, तो स्थिति हिंसक हो गई। समर्थकों और पुलिस के बीच हुई झड़प में कई लोग घायल हुए। 'धूणी स्थल' पर नमन करने जैसे धार्मिक अधिकारों को लेकर उपजा यह विवाद अब ईगो और अधिकार की लड़ाई बन चुका है।
भरतपुर: पिता-पुत्र के बीच 'कोठी' का विवाद और फिर सुलह
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बूंदी में 14 साल तक धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के आरोपों के बीच कानूनी लड़ाई चली। अंततः पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह और विपक्षी पक्ष के बीच दिल्ली हाईकोर्ट में समझौता हुआ।
धौलपुर में पिता हेमंत सिंह और पुत्र सांसद दुष्यंत सिंह के बीच 29 साल तक संघर्ष चला। वर्ष 2005 में वसुंधरा राजे की उपस्थिति में समझौता हुआ, जिसके तहत दिल्ली की संपत्ति पिता को और राजस्थान की शाही संपत्तियां बेटे को मिलीं।
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