मुहाना युवक मौत केस में मानव अधिकार आयोग सख्त, IPS से जांच; 23 अक्टूबर तक मांगी रिपोर्ट
Mukesh Sharma | Oct 07, 2026, 22:18 IST
मुहाना थाना ऋतुराज मौत
जयपुर के मुहाना थाने से जुड़े युवक ऋतुराज की इलाज के दौरान मौत के बाद परिवार ने पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस इससे इनकार कर रही। इस मामले में बुधवार को राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग ने थाने के CCTV सुरक्षित रखने और IPS अधिकारी से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
जयपुर के मुहाना थाने से जुड़े युवक ऋतुराज की इलाज के दौरान मौत का मामला अब राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग तक पहुंच गया। परिवार का आरोप है कि पुलिस की पिटाई से उसकी हालत बिगड़ी और बाद में सवाई मान सिंह अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस इससे इनकार कर रही और उसका कहना है कि युवक के साथ होटल में मारपीट हुई थी। अब मानव अधिकार आयोग ने पूरे मामले की जांच तेज कर दी है। आयोग ने थाने के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के साथ IPS स्तर के अधिकारी से जांच कराने को कहा है।
मामला ऋतुराज नाम के युवक की मौत से जुड़ा है। उसे ठगी के एक मामले का आरोपी बताया गया है। ऋतुराज मध्य प्रदेश के मंदसौर का रहने वाला था। ऋतुराज की 5 अक्टूबर को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वह करीब 15 दिन से अस्पताल में भर्ती था। उसकी हालत गंभीर थी और उसे वेंटिलेटर पर भी रखा गया था। मौत के बाद परिवार ने मुहाना थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना था कि ऋतुराज के साथ मारपीट हुई थी। इसी कारण उसकी हालत बिगड़ी। परिवार ने पोस्टमार्टम कराने से भी इनकार कर दिया था।
मुहाना थाना पुलिस ने परिवार के आरोपों को गलत बताया है। पुलिस का कहना है कि ऋतुराज के साथ थाने में कोई मारपीट नहीं हुई। पुलिस के मुताबिक उसके साथ होटल में मारपीट हुई थी। पुलिस का दावा है कि होटल में हुई घटना के CCTV फुटेज भी मौजूद हैं। यानी परिवार और पुलिस की कहानी अलग-अलग है। इसी वजह से अब जांच में CCTV फुटेज और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड काफी अहम हो गए हैं।
मामला मीडिया में सामने आने के बाद राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग ने 6 अक्टूबर को इस पर खुद संज्ञान लिया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था बनाए रखना है। किसी भी व्यक्ति के साथ पुलिस कस्टडी में मारपीट नहीं की जा सकती। आयोग ने अखबारों में छपी खबरों और पुलिस के पक्ष दोनों का जिक्र किया है। आयोग का कहना है कि मामला गंभीर है और इसकी पूरी सच्चाई सामने आना जरूरी। इसके बाद जयपुर पुलिस कमिश्नर, जयपुर कलेक्टर और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मानवाधिकार को निर्देश दिए गए।
राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग ने मुहाना पुलिस थाने के संबंधित समय के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को कहा है। फुटेज को सीलबंद हालत में रखने और उसके सबूत आयोग के सामने पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही घटना की पूरी रिपोर्ट भी जल्द आयोग को देने को कहा गया है। आयोग ने मामले की जांच IPS स्तर के अधिकारी से कराने के निर्देश भी दिए हैं। जांच के बाद तथ्यात्मक रिपोर्ट आयोग के सामने पेश करनी होगी।
मानव अधिकार आयोग ने संबंधित अधिकारियों को तुरंत नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे तय की गई है। इससे पहले अधिकारियों को आयोग के निर्देशों पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होगी। लेकिन 7 अक्टूबर को सामने आई नई जानकारी के बाद आयोग ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया।
7 अक्टूबर को एक अखबार में इस मामले को लेकर नई रिपोर्ट प्रकाशित हुई। इसमें दावा किया गया कि युवक को अवैध तरीके से कस्टडी में रखकर टॉर्चर किया गया था। सिर में चोट लगने से उसकी मौत होने का दावा भी किया गया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि युवक को सांप के काटने की बात कही गई थी और उसे 10 एंटीवेनम इंजेक्शन दिए गए। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक जांच में सांप के काटने का कोई निशान नहीं मिला। हालांकि, इन दावों की सच्चाई अब जांच में ही साफ होगी। आयोग ने इस नई रिपोर्ट को भी गंभीर माना है।
मीडिया रिपोर्ट में दो चश्मदीदों के हवाले से भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ने दावा किया कि उनके सामने मुहाना थाने के पुलिसकर्मियों ने ऋतुराज के साथ मारपीट की। एक आरोप यह भी है कि उसका सिर पकड़कर दीवार से मारा गया। इन दावों के सामने आने के बाद मानव अधिकार आयोग ने अपनी तरफ से भी अलग जांच कराने का फैसला किया है।
राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग ने अपने आईजी हिंगलाजदान और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संध्या यादव को मामले की जांच की जिम्मेदारी दी है। दोनों अधिकारियों को अखबार में बताए गए गवाहों के बयान लेने को कहा गया है। इसके अलावा उन दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों से भी जानकारी ली जाएगी, जहां ऋतुराज का इलाज हुआ था।
आयोग ने युवक के इलाज से जुड़े सभी जरूरी कागजात लेने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल से इन दस्तावेजों की प्रमाणित कॉपी ली जाएगी। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि युवक को अस्पताल लाए जाने के समय उसकी हालत कैसी थी। उसके शरीर पर क्या चोटें थीं और डॉक्टरों ने इलाज के दौरान क्या पाया था। सांप के काटने और एंटीवेनम इंजेक्शन दिए जाने से जुड़े दावों की भी जांच हो सकेगी।
आयोग ने जांच टीम को केवल घटना वाले दिन का CCTV लेने तक सीमित नहीं रखा है। मुहाना पुलिस थाने से घटना की तारीख से पहले के एक सप्ताह का CCTV फुटेज भी मांगा गया है। इसे पेन ड्राइव में लेने के निर्देश हैं। इस फुटेज से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि युवक को थाने में कब लाया गया था, वह कितने समय तक वहां रहा और उस दौरान क्या हुआ। आयोग ने जांच को तेजी से पूरा करने के लिए रोजाना के आधार पर काम करने को कहा है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऋतुराज को चोट कहां और कैसे लगी। परिवार पुलिस पर मारपीट का आरोप लगा रहा है। दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि युवक के साथ थाने में मारपीट नहीं हुई और घटना होटल में हुई थी। पुलिस ने होटल के CCTV फुटेज होने का दावा भी किया है। अब थाने और होटल के CCTV, गवाहों के बयान, डॉक्टरों की जानकारी और अस्पताल के रिकॉर्ड से तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
मानव अधिकार आयोग की जांच टीम को अपनी अलग रिपोर्ट 23 अक्टूबर को पेश करनी है। उसी दिन पहले से तय सुनवाई भी होगी। अब जांच से तय होगा कि ऋतुराज के मामले में वास्तव में क्या हुआ था।
मुहाना थाने में युवक की मौत का मामला
मुहाना पुलिस ने थाने में मारपीट के आरोपों से किया इनकार
मानव अधिकार आयोग ने खुद लिया संज्ञान
आयोग ने मुहाना थाने के CCTV सुरक्षित रखने के दिए आदेश
आयोग ने 23 अक्टूबर तक रिपोर्ट पेश करने को कहा
नई खबर के बाद जांच का दायरा बढ़ा
दो चश्मदीदों से भी आयोग के अधिकारी अलग से करेंगे पूछताछ
आयोग की टीम भी करेगी जांच
इलाज के सभी कागज भी लिए जाएंगे
एक सप्ताह का CCTV भी मांगा
पुलिस और परिवार के दावे अलग
मानव अधिकार आयोग की जांच टीम को अपनी अलग रिपोर्ट 23 अक्टूबर को पेश करनी है। उसी दिन पहले से तय सुनवाई भी होगी। अब जांच से तय होगा कि ऋतुराज के मामले में वास्तव में क्या हुआ था।
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