नरेश मीणा की प्रोपर्टी का मांगा रिकॉर्ड, 10 दिन पहले जारी हुआ था गिरफ्तारी वारंट
Ashish Bhardwaj | Jul 23, 2026, 14:47 IST
नरेश मीणा
राजस्थान के प्रसिद्ध थप्पड़कांड के आरोपी नरेश मीणा की जमानत रद्द होने के बाद अब पुलिस ने उनकी चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड मांगा है। इसे कोर्ट में पेश किया जाएगा, फिर गिरफ्तारी की आशंका है।
समझें क्या है पूरा मामला
- टोंक थप्पड़कांड के आरोपी नरेश मीणा की जमानत रद्द हो चुकी है।
- कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
- पुलिस ने उनकी चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड मांगा है।
- यह रिकॉर्ड एससी-एसटी विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
- सहयोगियों ने कार्रवाई को राजनीतिक दबाव बताया है।
पुलिस ने क्यों मांगा संपत्ति रिकॉर्ड
पत्र में कहा गया है कि टोंक कोर्ट ने अभियुक्त नरेश मीणा का चल-अचल संपत्ति रिकॉर्ड मांगा है। नरेश मीणा, कल्याण सिंह मीणा के पुत्र हैं और नयागांव उर्फ नानवता, थाना मोठपुर, जिला बांरा के निवासी हैं।
पत्र में यह भी कहा गया है कि यह रिकॉर्ड इसलिए मांगा जा रहा है ताकि इसे कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
कोर्ट ने क्यों जारी किया गिरफ्तारी वारंट
इसी आधार पर नगरफोर्ट थाना पुलिस ने विशेष लोक अभियोजक रामावतार सोनी के जरिए एससी, एसटी कोर्ट में जमानत रद्द करने का आवेदन दिया था। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पुलिस के तथ्यों को आधार मानते हुए जमानत रद्द कर दी।
इसके बाद कोर्ट ने नरेश मीणा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए थे।
सहयोगी ने लगाया राजनीतिक दबाव का आरोप
वहीं नरेश मीणा के सहयोगी राकेश बैंसला का कहना है कि सरकार उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबरा गई है। उनके अनुसार पंचायत चुनाव से पहले नरेश मीणा को जेल में रखकर किसानों और छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है।
बैंसला ने आरोप लगाया कि पहले स्पेशल लोक अभियोजक नियुक्त कर जमानत रद्द कराई गई। अब उनकी संपत्ति का रिकॉर्ड मंगवाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे न्यायपालिका के आदेश का सम्मान करते हैं और उन्हें भरोसा है कि अदालत नरेश मीणा को न्याय देगी।
पुलिस या प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या है थप्पड़कांड और समरावता हिंसा
इस घटना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। इसके बाद उनके समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया और वाहनों में आग लगा दी। समर्थकों ने नरेश मीणा को पुलिस हिरासत से भी छुड़ा लिया था।
अगले दिन, 14 नवंबर को भारी पुलिस बल ने नरेश मीणा को गिरफ्तार किया। इस मामले में पुलिस ने कुल 59 लोगों को नामजद किया था।
समरावता मामले में बाद में नरेश मीणा को राजस्थान हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी और वे टोंक जेल से रिहा हो गए थे।
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