आरयू में PHD एडमिशन पर उठे सवाल, राज्यपाल को भेजी शिकायत
Ashish Bhardwaj | Jun 18, 2026, 18:27 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान विश्वविद्यालय की PhD इंटरव्यू सूची में वर्गवार आरक्षण का विवरण नहीं दिया गया। 18 से अधिक विभागों में यही पैटर्न है। अभ्यर्थियों ने राज्यपाल से शिकायत और कोर्ट याचिका का फैसला किया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान विश्वविद्यालय की PhD प्रवेश प्रक्रिया वर्गवार जानकारी न देने पर विवाद में आ गई है।
- अभ्यर्थियों का आरोप है कि आरक्षण नियमों के पालन की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
- हिंदी विभाग सहित 18 से अधिक विभागों की इंटरव्यू सूची में सीट मैट्रिक्स स्पष्ट नहीं किया गया।
- छात्रों ने राज्यपाल से शिकायत और कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है।
- विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी से चयन प्रक्रिया में मनमानी की आशंका बढ़ गई है।
विश्वविद्यालय के अपने अध्यादेश में आरक्षण नियमों के पालन की बात लिखी है। इसके बावजूद वर्गवार जानकारी छुपाई जाने से पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। अभ्यर्थियों ने राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से शिकायत और कोर्ट में याचिका दायर करने का फैसला किया है।
हिंदी विभाग से शुरू हुआ विवाद
विश्वविद्यालय ने इन 31 सीटों के मुकाबले 62 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया। लेकिन सूची में यह नहीं बताया गया कि किस वर्ग की सीटों के लिए कितने उम्मीदवार चुने गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि बिना वर्गवार जानकारी के यह जांचना असंभव है कि आरक्षण नियमों का पालन हुआ है या नहीं।
18 से अधिक विभागों में एक जैसा हाल
हर जगह सीटों का आरक्षण तो तय है लेकिन इंटरव्यू सूची में उसका कोई स्पष्ट विवरण नहीं है। इससे यह संभावना बनती है कि अंतिम चयन में इंटरव्यू अंकों के आधार पर मनमाने फैसले लिए जा सकते हैं।
अध्यादेश में क्या लिखा है
बैक डोर एंट्री की आशंका
राज्यपाल और कोर्ट का रास्ता
कन्वीनर से नहीं हो सका संपर्क
FAQ
- राजस्थान विश्वविद्यालय PhD विवाद क्या है?
विश्वविद्यालय ने PhD इंटरव्यू के लिए अभ्यर्थियों की सूची जारी की लेकिन वर्गवार आरक्षण का विवरण नहीं दिया। इससे यह नहीं पता चल रहा कि SC, ST, OBC जैसे आरक्षित वर्गों के लिए कितने उम्मीदवार बुलाए गए हैं। विश्वविद्यालय के अपने अध्यादेश में आरक्षण नियमों के पालन की बात लिखी है। - राजस्थान विश्वविद्यालय एडमीशन पर अभ्यर्थी अब क्या करने वाले हैं?
अभ्यर्थियों ने राज्यपाल को शिकायत देने और कोर्ट में याचिका दाखिल करने का फैसला किया है। उनकी मांग है कि सभी विभागों की वर्गवार इंटरव्यू सूची और सीट मैट्रिक्स सार्वजनिक की जाए। तब तक वे चयन प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं मानेंगे। - राजस्थान विश्वविद्यालय एडमीशन कितने विभागों में समस्या है?
हिंदी समेत 18 से अधिक विभागों में यही पैटर्न देखा गया है। इनमें अंग्रेजी, केमिस्ट्री, लॉ, मैनेजमेंट, बायोटेक्नोलॉजी समेत कई विभाग शामिल हैं। हर जगह सीटों का आरक्षण तय है लेकिन इंटरव्यू सूची में उसका विवरण नदारद है।
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