बॉर्डर एरिया में धार्मिक स्थलों पर एक्शन से उड़ी नींद, मामला अब कोर्ट में पहुंचा
Mukesh Sharma | Jul 06, 2026, 18:35 IST
बॉर्डर एरिया में धार्मिक स्थलों पर एक्शन, 12 मस्जिदें गिराईं, मामला कोर्ट में
राजस्थान बॉर्डर पर अतिक्रमण हटाओ मुहिम ने नया मोड़ ले लिया है। इसमें सरकारी जमीनों पर अवैध बने धार्मिक स्थल निशाने पर हैं। पंचायत चुनाव से ठीक पहले इस मुद्दे ने कानूनी एवं सियासी रूप ले लिया है।
पाकिस्तान से सटी राजस्थान सीमा के गांवों में बेचैनी है। अंतरराष्ट्रीय सीमा के 15 किलोमीटर दायरे में अतिक्रमण हटाओ अभियान ने इन गांवों की नींद उड़ा दी है।
यह पूरा मामला सीमावर्ती गांवों की मस्जिदों से जुड़ा है। प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत अभी तक एक दर्जन से अधिक धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया है।
बाड़मेर के एक अधिकारी का कहना है कि अभी जिले में और भी धार्मिक स्थल रडार पर हैं। सूत्रों का कहना है कि अकेले इस जिले में सीमावर्ती गांवों में ऐसी 125 मजिस्दों की पहचान की है, जो अतिक्रमण दायरे में हैं।
हाल ही में बाड़मेर के केरकोरी और सियाई गांवों में दशकों पुरानी मस्जिदों को मलबे में तब्दील कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि कि जो धार्मिक ढांचे वर्षों से मौजूद थे, उन्हें अचानक बिना किसी ठोस चेतावनी के ढहा दिया गया।
बाड़मेर के केरकोरी गांव के कोने में खड़े हिशामुद्दीन सिंधी कहते हैं, हमने इस मस्जिद को एक-एक पाई जोड़कर बनाया था। अब सब कुछ खत्म हो गया है। उनका दावा है कि यह 10 किलोमीटर के दायरे में अकेली मस्जिद थी।
यही स्थिति सियाई गांव की भी है, जो केरकोरी से करीब 15 किलोमीटर दूर है। वहां के ग्रामीणों का कहना है कि उनकी 40 साल पुरानी मस्जिद थी। इसकी नीली-पेंटेड मीनार पर लगा सोने का कलश अब जमींदोज हो चुका है।
![बॉर्डर एरिया में धार्मिक स्थलों पर एक्शन, 12 मस्जिदें गिराईं, मामला कोर्ट में]()
ग्रामीणों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इन दुर्गम इलाकों में देश की अग्रिम पंक्ति के सजग प्रहरी बनकर रह रहे हैं। आज उन्हें अपने ही देश में अवांछित माना जा रहा है।
केरकोरी के ग्रामीण रफीक बताते हैं, सात बड़े ट्रक और 6-7 पुलिस जीपें अचानक गांव में घुस आईं। दो दिन तक लगातार तोड़फोड़ चलती रही। इससे बच्चे और महिलाएं सहम गए।
ग्रामीणों का यह भी तर्क है कि गांवों में कई अन्य तरह के निर्माण भी गोचर भूमि पर बने हुए हैं। इनमें स्कूल, अस्पताल और अन्य समुदायों के स्थल शामिल हैं, लेकिन प्रशासन ने केवल चुनिंदा ढांचों को ही निशाना बनाया है।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के बाड़मेर जिला अध्यक्ष सफी जमील ने कहा, इस कार्रवाई के जरिए आपसी भाईचारे में दरार पैदा करने की कोशिश हो रही है। हमारे इस सीमावर्ती इलाके का ताना-बाना बहुत मजबूत है। कोई किसी धर्म को हो, हम सब एक हैं।
अतिक्रमण हटाने का यह मामला अदालत में पहुंच चुका है। पीर मोहम्मद शाह जिलानी दरगाह समिति ने राजस्थान हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इस ध्वस्तीकरण को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन ने राजस्थान लैंड रेवेन्यू एक्ट, 1956 की धारा 91 के तहत जो नोटिस जारी किए, वे पूरी तरह से पूर्व-निर्धारित तरीके से तैयार किए गए थे। अब तक बाड़मेर में 8 और बीकानेर में 4 मस्जिदों को ध्वस्त किया गया है।
याचिका में दलील दी गई है कि केरकोरी में ग्रामीणों को 11 जून का बैक-डेटेड नोटिस 17 जून को तामील कराया गया। अगले ही दिन 18 जून को कोर्ट में पेश होने या जगह खाली करने का फरमान सुना दिया गया। वहीं सियाई गांव में 20 जून को नोटिस मिलने के ठीक अगले दिन ही जेसीबी चला दी गई।
याचिका में कहा है कि यह एक्शन सुप्रीम कोर्ट के 13 नवंबर 2024 के उस फैसले का उल्लंघन है, जिसमें कहा था कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के ध्वस्तीकरण कानून के शासन को कमजोर करते हैं। प्रभावित पक्षों को कम से कम 15 दिनों का पूर्व नोटिस मिलना अनिवार्य है। फिलहाल, इस मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होनी है।
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सरकार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए इस अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा है। सरकारी पक्ष के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सीमा के 50 किलोमीटर के बेल्ट के भीतर किसी भी धार्मिक ढांचे के निर्माण के लिए कलेक्टर की पूर्वानुमति अनिवार्य है।
प्रशासन का दावा है कि इन ढांचों के निर्माण में इस नियम की अनदेखी की गई थी। ये गोचर (चरागाह) या सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण थे।
बाड़मेर कलेक्टर चिन्मय गोपाल और पुलिस अधीक्षक चूनाराम जाट ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यही स्थिति बीकानेर जिला प्रशासन की है।
आगामी पंचायत चुनावों से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई ने राजस्थान की सियासत में भी उबाल ला दिया है। हाल ही में कांग्रेस ने बाड़मेर में सर्वधर्म रैली की थी। इसमें बाड़मेर के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने इस सम्पूर्ण कार्रवाई को गलत बताया।
विपक्ष ने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने भी इस मुद्दे पर संतुलित लेकिन कड़ा रुख अपनाया है।
भाटी का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। इससे कोई समझौता नहीं हो सकता। लेकिन सामाजिक समरसता और मानवीय अधिकारों की बलि नहीं दी जा सकती।
दूसरी तरफ, राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि हम जाति या धर्म के आधार पर किसी को परेशान नहीं करते हैं। यदि ऐसा कुछ हुआ है तो वह सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण के कारण हुआ होगा।
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पारड़िया के सरपंच सोरता राम मेघवाल ने सर्वधर्म रैली में शामिल होकर प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, गोचर भूमि पर कई तरह के ढांचे बने हुए हैं। जिनमें मंदिर भी शामिल हैं। हम किसी अतिक्रमण का समर्थन नहीं कर रहे, लेकिन अगर सरकार को हटाना ही है तो सबके लिए एक समान नीति अपनाए।
इसी तरह रानासर गांव के सरपंच नंद किशोर का कहना है कि इस सीमावर्ती क्षेत्र ने कभी साम्प्रदायिक तनाव नहीं देखा। अगर सरकार चरागाह भूमि को मुक्त कराना चाहती है तो यह अभियान सबके लिए होना चाहिए। एक विशेष समुदाय को लक्षित नहीं किया जाना चाहिए।
सीमावर्ती गांवों से हटाने को लेकर सबसे अधिक कार्रवाई बाड़मेर और बीकानेर में हुई है। जैसलमेर जिला प्रशासन अभी एक्शन में नहीं है।
बीकानेर में सीमावर्ती गांवों में अतिक्रमण हटाने के विरोध में लगातार प्रदर्शन जारी है। इस जिले में अभी तक चार धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया गया है।
पाकिस्तान से राजस्थान का कुल 1,070 किमी एरिया लगा हुआ है। इसमें बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जिले का हिस्सा आता है।
मई के अंतिम सप्ताह में बीकानेर दौरे पर आए केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सीमा के 15 किलोमीटर दायरे में किसी भी अवैध निर्माण कार्य पर गंभीरता से एक्शन के निर्देश दिए थे।
हालांकि, बाद में गृह मंत्रालय ने राजस्थान बॉर्डर के 50 किलोमीटर दायरे को स्पेशल वॉच जोन में शामिल किया। अब इसके हिसाब से सुरक्षा का नया ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है।
कुछ सालों में राजस्थान में सीमा पार से ड्रोन से वॉचिंग और तस्करी का नेटवर्क खड़ा होने के मामले सामने आए हैं। इनसे निपटने के लिए अब आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।
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यह पूरा मामला सीमावर्ती गांवों की मस्जिदों से जुड़ा है। प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत अभी तक एक दर्जन से अधिक धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया है।
बाड़मेर के एक अधिकारी का कहना है कि अभी जिले में और भी धार्मिक स्थल रडार पर हैं। सूत्रों का कहना है कि अकेले इस जिले में सीमावर्ती गांवों में ऐसी 125 मजिस्दों की पहचान की है, जो अतिक्रमण दायरे में हैं।
मलबे में तब्दील आस्था
बाड़मेर के केरकोरी गांव के कोने में खड़े हिशामुद्दीन सिंधी कहते हैं, हमने इस मस्जिद को एक-एक पाई जोड़कर बनाया था। अब सब कुछ खत्म हो गया है। उनका दावा है कि यह 10 किलोमीटर के दायरे में अकेली मस्जिद थी।
यही स्थिति सियाई गांव की भी है, जो केरकोरी से करीब 15 किलोमीटर दूर है। वहां के ग्रामीणों का कहना है कि उनकी 40 साल पुरानी मस्जिद थी। इसकी नीली-पेंटेड मीनार पर लगा सोने का कलश अब जमींदोज हो चुका है।
बॉर्डर एरिया में धार्मिक स्थलों पर एक्शन, 12 मस्जिदें गिराईं, मामला कोर्ट में
ग्रामीणों में दिख रही नाराजगी
केरकोरी के ग्रामीण रफीक बताते हैं, सात बड़े ट्रक और 6-7 पुलिस जीपें अचानक गांव में घुस आईं। दो दिन तक लगातार तोड़फोड़ चलती रही। इससे बच्चे और महिलाएं सहम गए।
ग्रामीणों का यह भी तर्क है कि गांवों में कई अन्य तरह के निर्माण भी गोचर भूमि पर बने हुए हैं। इनमें स्कूल, अस्पताल और अन्य समुदायों के स्थल शामिल हैं, लेकिन प्रशासन ने केवल चुनिंदा ढांचों को ही निशाना बनाया है।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के बाड़मेर जिला अध्यक्ष सफी जमील ने कहा, इस कार्रवाई के जरिए आपसी भाईचारे में दरार पैदा करने की कोशिश हो रही है। हमारे इस सीमावर्ती इलाके का ताना-बाना बहुत मजबूत है। कोई किसी धर्म को हो, हम सब एक हैं।
आरोप - सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन ने राजस्थान लैंड रेवेन्यू एक्ट, 1956 की धारा 91 के तहत जो नोटिस जारी किए, वे पूरी तरह से पूर्व-निर्धारित तरीके से तैयार किए गए थे। अब तक बाड़मेर में 8 और बीकानेर में 4 मस्जिदों को ध्वस्त किया गया है।
याचिका में दलील दी गई है कि केरकोरी में ग्रामीणों को 11 जून का बैक-डेटेड नोटिस 17 जून को तामील कराया गया। अगले ही दिन 18 जून को कोर्ट में पेश होने या जगह खाली करने का फरमान सुना दिया गया। वहीं सियाई गांव में 20 जून को नोटिस मिलने के ठीक अगले दिन ही जेसीबी चला दी गई।
याचिका में कहा है कि यह एक्शन सुप्रीम कोर्ट के 13 नवंबर 2024 के उस फैसले का उल्लंघन है, जिसमें कहा था कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के ध्वस्तीकरण कानून के शासन को कमजोर करते हैं। प्रभावित पक्षों को कम से कम 15 दिनों का पूर्व नोटिस मिलना अनिवार्य है। फिलहाल, इस मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होनी है।
बॉर्डर एरिया में धार्मिक स्थलों पर एक्शन, 12 मस्जिदें गिराईं, मामला कोर्ट में
सरकारी पक्ष ने दिया राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला
प्रशासन का दावा है कि इन ढांचों के निर्माण में इस नियम की अनदेखी की गई थी। ये गोचर (चरागाह) या सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण थे।
बाड़मेर कलेक्टर चिन्मय गोपाल और पुलिस अधीक्षक चूनाराम जाट ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यही स्थिति बीकानेर जिला प्रशासन की है।
पंचायत चुनाव से पहले गर्माया मुद्दा
विपक्ष ने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने भी इस मुद्दे पर संतुलित लेकिन कड़ा रुख अपनाया है।
भाटी का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। इससे कोई समझौता नहीं हो सकता। लेकिन सामाजिक समरसता और मानवीय अधिकारों की बलि नहीं दी जा सकती।
दूसरी तरफ, राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि हम जाति या धर्म के आधार पर किसी को परेशान नहीं करते हैं। यदि ऐसा कुछ हुआ है तो वह सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण के कारण हुआ होगा।
राजस्थान बॉर्डर पर अतिक्रमण हटाओ मुहिम, 12 धार्मिक स्थल ध्वस्त, मामला कोर्ट पहुंचा
एक्शन के लिए समान नीति अपनाए
इसी तरह रानासर गांव के सरपंच नंद किशोर का कहना है कि इस सीमावर्ती क्षेत्र ने कभी साम्प्रदायिक तनाव नहीं देखा। अगर सरकार चरागाह भूमि को मुक्त कराना चाहती है तो यह अभियान सबके लिए होना चाहिए। एक विशेष समुदाय को लक्षित नहीं किया जाना चाहिए।
जैसलमेर में अभी होनी है कार्रवाई
बीकानेर में सीमावर्ती गांवों में अतिक्रमण हटाने के विरोध में लगातार प्रदर्शन जारी है। इस जिले में अभी तक चार धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया गया है।
पाकिस्तान से राजस्थान का कुल 1,070 किमी एरिया लगा हुआ है। इसमें बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जिले का हिस्सा आता है।
अमित शाह ने ये दिए थे निर्देश
हालांकि, बाद में गृह मंत्रालय ने राजस्थान बॉर्डर के 50 किलोमीटर दायरे को स्पेशल वॉच जोन में शामिल किया। अब इसके हिसाब से सुरक्षा का नया ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है।
कुछ सालों में राजस्थान में सीमा पार से ड्रोन से वॉचिंग और तस्करी का नेटवर्क खड़ा होने के मामले सामने आए हैं। इनसे निपटने के लिए अब आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।
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