वित्त आयोग की रिपोर्ट: इन्फ्रास्ट्रक्चर में पीछे रहा राजस्थान, झारखंड भी निकला आगे

Ashish Bhardwaj | Feb 02, 2026, 19:56 IST
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Photograph: (the sootr)

राजस्थान का पूंजीगत व्यय अन्य राज्यों के मुकाबले काफी कम है। इससे राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास में रुकावटें आ रही हैं। वित्तीय प्रबंधन, राजस्व घाटा और पूंजीगत निवेश की कमी से राज्य पिछड़ सकता है। समाधान के लिए सुधार की आवश्यकता है।

News In Short

  • राजस्थान का पूंजीगत व्यय बहुत कम है। इससे बुनियादी ढांचा कमजोर हो रहा है।
  • 2023-24 में राज्य ने जीएसडीपी का 1.8% ही पूंजीगत व्यय पर खर्च किया।
  • 2023-24 में झारखंड ने जीएसडीपी का 5.3 प्रतिशत खर्च किया।
  • ओडिशा और गुजरात ने बेहतर वित्तीय प्रबंधन से पूंजीगत खर्च बढ़ाया।
  • राजस्थान का राजस्व घाटा बढ़कर जीएसडीपी का 2.6% हो गया।

News In Detail

राजस्थान में बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास को लेकर चिंता की स्थिति उत्पन्न हो रही है। राज्य का पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) कई अन्य राज्यों के मुकाबले बेहद कम है। यह स्थिति राज्य के विकास में आ रही रुकावटों को उजागर करती है।

राजस्थान का पूंजीगत व्यय क्यों कम है?

वर्ष 2023-24 के लिए 16वें वित्त आयोग ने रिपोर्ट जारी की थी। राजस्थान ने अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद का केवल 1.8 प्रतिशत ही पूंजीगत व्यय पर खर्च किया। जो प्रमुख गैर-पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे कम है। इसके मुकाबले, अन्य राज्यों ने इस दिशा में बड़ा निवेश किया। जो उनकी दीर्घकालिक विकास की योजना को मजबूत बना रहा है।

उदाहरण: अन्य राज्यों में पूंजीगत व्यय

  • ओडिशा ने अपने जीएसडीपी का 5.9 प्रतिशत खर्च किया।
  • झारखंड ने 5.3 प्रतिशत खर्च किया।
  • उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने क्रमशः 4.7 प्रतिशत और 4.5 प्रतिशत खर्च किया।
इन राज्यों ने अपने बुनियादी ढांचे, जैसे सड़कों, जल आपूर्ति, बिजली परियोजनाओं और औद्योगिक विस्तार पर बड़ा निवेश किया।

राजस्थान की प्राथमिकताएँ

राजस्थान में विकास कार्यों की तुलना में राजस्व खर्च अधिक है। इससे भविष्य के लिए जरूरी पूंजी जुटाने में दिक्कतें आ रही हैं। राज्य के राजस्व घाटे के कारण संसाधन की कमी हो रही है। पूंजीगत निवेश पर प्रतिकूल असर डाल रही है।

राजस्व घाटा: एक बड़ी बाधा

वित्त आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में राजस्थान का राजस्व घाटा बढ़कर जीएसडीपी का 2.6 प्रतिशत हो गया था। इससे राज्य के दैनिक खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है और भविष्य में पूंजीगत निवेश के लिए आवश्यक संसाधन की कमी हो रही है।

केंद्र की सहायता का सीमित असर

केंद्र सरकार ने राज्यों को पूंजीगत निवेश बढ़ाने के लिए ब्याज मुक्त ऋण योजना के तहत सहायता दी। लेकिन राजस्थान में इसका अपेक्षित असर नहीं देखा गया।

  • अन्य राज्यों का उदाहरण:
  • ओडिशा ने अपने राजस्व को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया और 2023-24 में लगभग 6 प्रतिशत जीएसडीपी पूंजीगत खर्च किया।
  • गुजरात ने भी संतुलित वित्तीय नीति के साथ 2.9 प्रतिशत जीएसडीपी को बुनियादी ढांचे पर खर्च किया।
  • राजस्थान की धीमी प्रगति की तुलना में इन राज्यों ने अधिक पूंजीगत खर्च किया और विकास को बढ़ावा दिया।

राजस्थान की चुनौतियां और समाधान

राज्य का बड़ा भौगोलिक क्षेत्र, बिखरी हुई आबादी, और अधिक सब्सिडी भार विशेष चुनौतियाँ उत्पन्न करते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर राज्य पूंजीगत निवेश में वृद्धि नहीं करता है, तो औद्योगिक निवेश और शहरी विकास की दौड़ में राजस्थान पिछड़ सकता है

निष्कर्ष और भविष्य की दिशा

राजस्थान को अगर औद्योगिक निवेश और शहरी विकास में अपनी स्थिति मजबूत करनी है तो उसे अपनी पूंजीगत व्यय की नीति पर पुनः विचार करना होगा। अन्य राज्यों से सीख लेकर बेहतर वित्तीय प्रबंधन और पूंजीगत निवेश की दिशा में काम करना होगा, ताकि राज्य का विकास स्थिर और दीर्घकालिक हो सके।

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