राजस्थान हाईकोर्ट ने तीन हजार मदरसों के संचालन पर सरकार से मांगा जवाब, अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को

Jageshwar prasad | Sept 29, 2026, 22:40 IST
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राजस्थान हाई कोर्ट ने 3 हजार मदरसों पर मांगा जवाब
राजस्थान हाई कोर्ट ने 3 हजार मदरसों पर मांगा जवाब

राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से 3,000 मदरसों के संचालन के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने सरकार को हलफनामा पेश करने के लिए कहा है। इस याचिका में मदरसों के शैक्षिक नियंत्रण पर सवाल उठाए गए हैं। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें मदरसा शिक्षा में सुधार की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • हाईकोर्ट ने 3 हजार मदरसों पर मांगा जवाब।
  • सरकार को हलफनामा पेश करने के निर्देश।
  • मदरसा बोर्ड अधिनियम पर उठे सवाल।
  • योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की मांग।
  • अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को।
राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से करीब 3 हजार मदरसों के संचालन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण पर जवाब मांगा है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की बेंच ने यह निर्देश दिया।

अदालत ने सरकार को हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। यह मामला प्रतिपाल सिंह और अन्य की याचिका पर चल रहा है। याचिका में मदरसों में प्रभावी नियंत्रण और शैक्षणिक पर्यवेक्षण की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी।

याचिका में क्या कहा गया

वकील मोती सिंह ने याचिका की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राजस्थान मदरसा बोर्ड अधिनियम, 2020 में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रबंधन के पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं। इसी आधार पर यह याचिका दायर की गई है।

याचिका में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की गई है। साथ ही शिक्षा के स्तर में सुधार और पारदर्शी प्रबंधन की बात कही गई है। इसमें कई अहम सुझाव भी दिए गए हैं।

विरासत को बचाने राजस्थान हाईकोर्ट का दखल, जयपुर के वर्ल्ड हेरिटेज स्टेटस पर संकट
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राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर में अवैध निर्माणों के मामले में गंभीरता दिखाई है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर सुधार नहीं किए गए, तो शहर का यूनेस्को द्वारा दिया गया विश्व धरोहर का दर्जा खतरे में पड़ सकता है। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है और सरकारी संगठनों के बीच समन्वय की कमी पर भी ध्यान दिया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर में अवैध निर्माणों के मामले में गंभीरता दिखाई है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर सुधार नहीं किए गए, तो शहर का यूनेस्को द्वारा दिया गया विश्व धरोहर का दर्जा खतरे में पड़ सकता है। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है और सरकारी संगठनों के बीच समन्वय की कमी पर भी ध्यान दिया है।

क्या-क्या सुझाव दिए गए?

याचिका में आरबीएसई (RBSE – Rajasthan Board of Secondary Education) और सीबीएसई (CBSE – Central Board of Secondary Education) से जुड़े मदरसों की सूची बनाने का सुझाव है। साथ ही शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप चलाने की मांग की गई है।

इसमें स्कूल के रूप में रजिस्टर्ड संस्थाओं को मदरसा बोर्ड से मिलने वाले अनुदान की समीक्षा का सुझाव है। वित्तीय सहायता की भी समीक्षा करने की बात कही गई है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के मदरसों के लिए शिक्षा विभाग की ओर से निर्धारित पाठ्यक्रम लागू करने की मांग है।

याचिका में डाइट (DIET – District Institute of Education and Training) के माध्यम से समान परीक्षा आयोजित कराने का सुझाव भी दिया गया। साथ ही मदरसा विद्यार्थियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए विशेष पोर्टल विकसित करने की बात कही गई।

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
28 Sept 2026 ,
By Ashish Bhardwaj
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि तलाक के बाद पिता का नाम पासपोर्ट पर आवश्यक नहीं है। अदालत ने मां के अधिकारों को मान्यता देते हुए आदेश दिया कि बच्चे का पासपोर्ट केवल मां के नाम से जारी किया जा सकता है। पासपोर्ट कार्यालय द्वारा पिता का नाम मांगना कोर्ट ने अनुचित बताया और पूर्व में जारी पासपोर्ट को ध्यान में रखा।
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि तलाक के बाद पिता का नाम पासपोर्ट पर आवश्यक नहीं है। अदालत ने मां के अधिकारों को मान्यता देते हुए आदेश दिया कि बच्चे का पासपोर्ट केवल मां के नाम से जारी किया जा सकता है। पासपोर्ट कार्यालय द्वारा पिता का नाम मांगना कोर्ट ने अनुचित बताया और पूर्व में जारी पासपोर्ट को ध्यान में रखा।
शिक्षकों के मानदेय पर सवाल

याचिका में यह मांग भी रखी गई कि प्रत्येक विद्यार्थी को विशिष्ट पहचान संख्या दी जाए। इससे उनका पूरा रिकॉर्ड एक जगह उपलब्ध हो सके। इसमें संविदा और पैरा-टीचर्स के मानदेय पर भी सवाल उठाया गया।

याचिका के मुताबिक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता न रखने वाले शिक्षकों के मानदेय पर रोक लगनी चाहिए। साथ ही धार्मिक शिक्षा देने वाले मौलवी और मुफ्ती को सरकारी कोष से वेतन भुगतान नहीं करने की मांग की गई है।

आरटीई अधिनियम का मुद्दा

याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सिफारिशों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गैर-मुस्लिम बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने वाले मदरसों से सामान्य विद्यालयों में आरटीई (RTE – Right to Education) अधिनियम के तहत शिक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

याचिका में यह मांग भी रखी गई कि मानकों का पालन नहीं करने वाले मदरसा संस्थानों का पंजीकरण रद्द किया जाए। साथ ही ऐसे संस्थानों को आवंटित भूमि वापस लेने की बात कही गई है।

हाई कोर्ट की सख्ती, पृथ्वीराज नगर के 429 अवैध निर्माणों पर जेडीए से मांगा जवाब
17 Aug 2026 ,
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राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के पृथ्वीराज नगर में हाईटेंशन लाइन के सेफ्टी कॉरिडोर व 60-फुट सड़क पर हुए 429 अवैध निर्माणों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने संबंधित जेडीए अधिकारियों से जवाब मांगते हुए सभी संपत्ति मालिकों को नोटिस थमाने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के पृथ्वीराज नगर में हाईटेंशन लाइन के सेफ्टी कॉरिडोर व 60-फुट सड़क पर हुए 429 अवैध निर्माणों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने संबंधित जेडीए अधिकारियों से जवाब मांगते हुए सभी संपत्ति मालिकों को नोटिस थमाने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता बी.एल. भाटी को निर्देश दिए हैं। उन्हें राज्य सरकार की ओर से मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण और संचालन के लिए उठाए जा रहे कदमों का विवरण देना है।

साथ ही प्रस्तावित कदमों की जानकारी देते हुए विस्तृत हलफनामा पेश करना है। अदालत ने याचिकाकर्ता के सुझावों पर भी विचार करने को कहा है। अब सरकार को 27 अक्टूबर तक अपना पक्ष रखना है।

क्यों अहम है यह मामला?

राजस्थान में करीब 3 हजार मदरसे संचालित हैं। इनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ते हैं। इनकी शिक्षा की गुणवत्ता और प्रबंधन का मुद्दा अहम है।

अदालत ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। इससे मदरसा शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। अब यह देखना जरूरी है कि सरकार अपने हलफनामे में क्या जानकारी देती है।

  1. राजस्थान हाईकोर्ट ने मदरसों के संचालन के संबंध में सरकार से क्या जवाब मांगा है?
    राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार से करीब 3 हजार मदरसों के संचालन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण पर जवाब मांगा है, साथ ही हलफनामा पेश करने के भी निर्देश दिए हैं।
  2. याचिका में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कौन-कौन से सुझाव दिए गए हैं?
    याचिका में सुझाव दिया गया है कि आरबीएसई और सीबीएसई से जुड़े मदरसों की सूची बनाई जाए, शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप चलाने की मांग की जाए और मदरसा विद्यार्थियों के लिए डिजिटल रिकॉर्ड का विशेष पोर्टल विकसित किया जाए।
  3. इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी और इसका महत्व क्या है?
    इस मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी। यह मामला राजस्थान में मदरसों की शिक्षा की गुणवत्ता और प्रबंधन के सुधार के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के शिक्षा स्तर में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
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