नाता प्रथा पर हाई कोर्ट का अहम फैसला, रामप्यारी को मिलेगा पेंशन का अधिकार
Purshottam Kumar Joshi | Jan 20, 2026, 20:25 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने नाता प्रथा के तहत बड़ा फैसला सुनाते हुए महिला को पेंशन का अधिकार दिया। यह फैसला नाता प्रथा से जुड़ी महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
News In Short
- राजस्थान हाई कोर्ट ने नाता प्रथा के तहत रामप्यारी को पति की मृत्यु के बाद पेंशन का अधिकार दिया।
- रामप्यारी को पेंशन मिलने का रास्ता साफ हुआ, कोर्ट ने उन्हें वैधानिक पत्नी माना।
- नाता प्रथा राजस्थान की पुरानी परंपरा है, जिसमें महिला को दूसरे पुरुष से संबंध बनाने की सहमति मिलती है।
- रामप्यारी की कानूनी लड़ाई की जीत को एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
- रामप्यारी ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।
News In Detail
रामप्यारी का मामला
रामप्यारी की कानूनी लड़ाई
नाता प्रथा की परिभाषा
हाई कोर्ट का फैसला
नाता प्रथा के मुख्य पहलू:
- इसे सामाजिक रूप से मान्य 'पुनर्विवाह' या 'सहमति से साथ रहना' (Live-in) माना जाता है। परंपरागत रूप से, यह विधवा या परित्यक्ता महिलाओं को नया जीवन शुरू करने का अवसर प्रदान करती थी।
- जब एक विवाहित महिला किसी दूसरे पुरुष के साथ 'नाता' करती है, तो नए साथी को महिला के पूर्व पति या उसके परिवार को एक निश्चित राशि देनी पड़ती है, जिसे 'झगड़ा राशि' कहा जाता है। यह राशि समुदाय के पंचों द्वारा तय की जाती है।
- इसे ब्राह्मण, वैश्य और राजपूत समाजों को छोड़कर अन्य कई जातियों जैसे गुर्जर, अहीर, और दलित समुदायों में मान्यता प्राप्त है।
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस प्रथा के दुरुपयोग (जैसे कि महिलाओं और नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त) पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने इसे खत्म करने के लिए सख्त कानून बनाने का सुझाव दिया है।
- हाल की रिपोर्टों के अनुसार, नाता प्रथा के कारण कानूनी तलाक के दस्तावेजों की कमी होती है। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जैसी योजनाओं के लाभ मिलने में बाधा आती है क्योंकि रिकॉर्ड अपडेट नहीं हो पाते।
- इस प्रथा के कारण कई बार बच्चों को अपनी मां से अलग होना पड़ता है, जिससे उनके पालन-पोषण और शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है
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