राजस्थान हाई कोर्ट ने किया बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, सत्यनारायण व्यास बने जोधपुर महानगर के जिला जज

Jageshwar prasad | Oct 01, 2026, 12:21 IST
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राजस्थान हाई कोर्ट प्रशासन ने 16 न्यायिक अधिकारियों के तबादले किए
राजस्थान हाई कोर्ट प्रशासन ने 16 न्यायिक अधिकारियों के तबादले किए

राजस्थान हाई कोर्ट ने 16 न्यायिक अधिकारियों के तबादले का आदेश दिया है। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू किया गया है। जिन अधिकारियों को नई तैनाती मिली है, उनमें जिला जज और विशेष अदालतों के जज शामिल हैं। इस फेरबदल के माध्यम से न्यायिक प्रणाली में गतिशीलता को बढ़ाने का प्रयास किया गया है। इससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • हाई कोर्ट ने 16 न्यायिक अधिकारियों के तबादले किए
  • सत्यनारायण व्यास बने जोधपुर महानगर के जिला जज
  • दिनेश त्यागी जयपुर महानगर प्रथम के जिला जज
  • कई अधिकारियों को मिली नई तैनाती
  • रजिस्ट्रार जनरल ने जारी किया आदेश
राजस्थान हाई कोर्ट प्रशासन ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा के आदेशानुसार 16 न्यायिक अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इन अधिकारियों को अलग-अलग जिलों और अदालतों में नई तैनाती दी गई है।

इस फेरबदल में कई अहम नियुक्तियां की गई हैं। जिला जजों के पद पर कई अधिकारियों को लगाया गया है। साथ ही विशेष अदालतों में भी नई तैनातियां हुई हैं। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू माना जा रहा है।

कौन बने जिला जज?

आदेश के मुताबिक सत्यनारायण व्यास जोधपुर महानगर के जिला जज बने हैं। दिनेश त्यागी जयपुर महानगर प्रथम के जिला जज होंगे। ब्रजेन्द्र कुमार जयपुर महानगर द्वितीय के जिला जज बनाए गए हैं।

माधवी दिनकर को झुंझुनूं का जिला जज बनाया गया है। मशरूर आलम खान भरतपुर के जिला जज होंगे। हेमराज गौड़ कोटा के जिला जज बनाए गए हैं। तारा अग्रवाल जयपुर जिला की जिला जज होंगी। अनु अग्रवाल सवाई माधोपुर की जिला जज नियुक्त हुई हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट ने तीन हजार मदरसों के संचालन पर सरकार से मांगा जवाब, अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को
29 Sept 2026 ,
By Mukesh Sharma
राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से 3,000 मदरसों के संचालन के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने सरकार को हलफनामा पेश करने के लिए कहा है। इस याचिका में मदरसों के शैक्षिक नियंत्रण पर सवाल उठाए गए हैं। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें मदरसा शिक्षा में सुधार की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से 3,000 मदरसों के संचालन के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने सरकार को हलफनामा पेश करने के लिए कहा है। इस याचिका में मदरसों के शैक्षिक नियंत्रण पर सवाल उठाए गए हैं। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें मदरसा शिक्षा में सुधार की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
किन अदालतों में तैनाती?

सचिन गुप्ता को एनआईए (NIA – National Investigation Agency) विशेष अदालत जयपुर महानगर प्रथम में लगाया गया है। प्रह्लाद राय शर्मा को बम विस्फोट मामलों की अदालत जयपुर महानगर द्वितीय में तैनाती मिली है।

धर्मराज मीणा अतिरिक्त जिला जज झालावाड़ बनाए गए हैं। राजीव दत्तात्रय को महिला अत्याचार मामलात अतिरिक्त सत्र न्यायालय संख्या-2 कोटा में लगाया गया है। अरुण प्रकाश आर्य वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अलवर बनाए गए हैं।

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
28 Sept 2026 ,
By Ashish Bhardwaj
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि तलाक के बाद पिता का नाम पासपोर्ट पर आवश्यक नहीं है। अदालत ने मां के अधिकारों को मान्यता देते हुए आदेश दिया कि बच्चे का पासपोर्ट केवल मां के नाम से जारी किया जा सकता है। पासपोर्ट कार्यालय द्वारा पिता का नाम मांगना कोर्ट ने अनुचित बताया और पूर्व में जारी पासपोर्ट को ध्यान में रखा।
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि तलाक के बाद पिता का नाम पासपोर्ट पर आवश्यक नहीं है। अदालत ने मां के अधिकारों को मान्यता देते हुए आदेश दिया कि बच्चे का पासपोर्ट केवल मां के नाम से जारी किया जा सकता है। पासपोर्ट कार्यालय द्वारा पिता का नाम मांगना कोर्ट ने अनुचित बताया और पूर्व में जारी पासपोर्ट को ध्यान में रखा।
सीबीआई और अन्य तैनातियां

चेतना को सीबीआई (CBI – Central Bureau of Investigation) विशेष न्यायाधीश संख्या-5 जयपुर महानगर प्रथम बनाया गया है। आशुतोष कुमावत अतिरिक्त जिला जज जोधपुर जिला बनाए गए हैं।

कीर्ति सिंहमार को ओएसडी (OSD – Officer on Special Duty) राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बेंच में लगाया गया है। इन सभी नियुक्तियों का आदेश रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी किया गया।

क्यों होते हैं तबादले?

न्यायिक अधिकारियों के तबादले समय-समय पर होते रहते हैं। इससे अधिकारियों को अलग-अलग जिलों का अनुभव मिलता है। साथ ही न्यायिक व्यवस्था में गतिशीलता बनी रहती है।

इससे मुकदमों के निपटारे में तेजी आती है। हर जिले की न्यायिक व्यवस्था पर बेहतर ध्यान दिया जा सकता है। इसीलिए हाईकोर्ट प्रशासन समय-समय पर ऐसे फेरबदल करता रहता है।

हाई कोर्ट की सख्ती, पृथ्वीराज नगर के 429 अवैध निर्माणों पर जेडीए से मांगा जवाब
17 Aug 2026 ,
By Mukesh Sharma
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के पृथ्वीराज नगर में हाईटेंशन लाइन के सेफ्टी कॉरिडोर व 60-फुट सड़क पर हुए 429 अवैध निर्माणों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने संबंधित जेडीए अधिकारियों से जवाब मांगते हुए सभी संपत्ति मालिकों को नोटिस थमाने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के पृथ्वीराज नगर में हाईटेंशन लाइन के सेफ्टी कॉरिडोर व 60-फुट सड़क पर हुए 429 अवैध निर्माणों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने संबंधित जेडीए अधिकारियों से जवाब मांगते हुए सभी संपत्ति मालिकों को नोटिस थमाने के निर्देश दिए हैं।
क्यों अहम है यह फेरबदल?

यह फेरबदल न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम है। जिला स्तर पर नए अधिकारियों की तैनाती से कामकाज में तेजी आएगी। विशेष अदालतों में तैनाती से महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई प्रभावित नहीं होगी।

साथ ही एनआईए और सीबीआई जैसी अदालतों में नई तैनाती से जांच एजेंसियों के मामलों को गति मिलेगी। इससे लंबित मुकदमों का निपटारा समय पर हो सकेगा।
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