निकाय चुनाव विवाद: डोटासरा बोले- OBC आरक्षण में गड़बड़ी, खर्रा ने कहा- आंकड़े गलत हो सकते
Saurabh Mishra | Aug 14, 2026, 12:16 IST
झाबर सिंह खर्रा और गोविन्द सिन डोटासरा
राजस्थान में नगर निकाय और पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी के बाद ओबीसी आरक्षण को लेकर सियासी घमासान मच गया है। कांग्रेस ने आंकड़ों में गड़बड़ी का आरोप लगाया। भाजपा ने सफाई दी।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में निकाय-पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी के बाद सियासत तेज।
- कांग्रेस ने सरकार पर OBC हिस्सेदारी घटाने का आरोप लगाया।
- प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आंकड़ों में गड़बड़ी बताई।
- जिला परिषद-पंचायत समितियों में आबादी के अनुपात में ओबीसी को कम वार्ड मिले।
- नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह ने आंकड़ों में त्रुटि की संभावना से इनकार नहीं किया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि सरकार ने जो आंकड़े पेश किए, उनमें कई विसंगतियां हैं। उनका कहना है कि ओबीसी को आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
नगरीय निकाय-पंचायत चुनाव के आरक्षण पर विवाद
इसी तरह 457 पंचायत समितियों के 8245 निर्वाचन क्षेत्रों में ओबीसी को केवल 1101 वार्ड मिले। यह लगभग 13.35 फीसदी है। अगर आरक्षण 21 फीसदी के आधार पर होता तो यह आंकड़ा 1731 वार्ड तक पहुंच सकता था। यहां भी 630 वार्ड कम आरक्षित हुए।
भाजपा सरकार ने नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के सभापतियों की लॉटरी में OBC, SC और ST वर्ग के साथ अन्याय किया है, बेईमानी की है।
ये सिर्फ आरक्षण के आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि संविधान की उस भावना को कुचलने की कोशिश है, जो हर वंचित और पिछड़े वर्ग को उसकी आबादी के अनुपात में… pic.twitter.com/o69Lv6J6PP
— Govind Singh Dotasra (@GovindDotasra) August 13, 2026
कांग्रेस का आरोप- एससी-एसटी के लिए कम वार्ड हुए आरक्षित
उन्होंने कहा कि अलवर, चित्तौड़गढ़, दौसा, करौली और श्रीगंगानगर में ओबीसी सीटों का आरक्षण करीब 9.9% है, जबकि डीडवाना-कुचामन, पाली, फलोदी और राजसमंद में यह 11.11% रखा गया। ऐसे में सवाल यह है कि जिन जिलों में ओबीसी आबादी 45 से 50% या उससे अधिक बताई जा रही है, वहां आरक्षण का आधार क्या तय किया गया है?
सरकार को साफ करना चाहिए कि इन जिलों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए कौन से आंकड़े और किस प्रक्रिया को आधार बनाया गया। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि ओबीसी से जुड़े आंकड़े किस सर्वे, वैज्ञानिक पद्धति और मानक के आधार पर तैयार किए गए हैं।
PCC चीफ गोविंद डोटासरा के तीखे सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जातिगत जनगणना से बचती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जातियों को आपस में लड़ाना चाहती है।
नगरीय विकास मंत्री मंत्री खर्रा का जवाब
आयोग का आधा स्टाफ बीच में एसआइआर के काम में लगा दिया गया। बाद में स्टाफ का एक हिस्सा जनगणना कार्य में भेजा गया। समय और मैनपावर की कमी के चलते डेटा में कुछ त्रुटि हो सकती है, यह बात आयोग ने खुद स्वीकार की है।
FAQ
- राजस्थान में नगर निकाय-पंचायत चुनाव की लॉटरी के बाद ओबीसी आरक्षण पर विवाद क्यों शुरू हुआ?
निकाय और पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी के बाद कांग्रेस ने ओबीसी हिस्सेदारी कम करने का आरोप लगाया। पार्टी ने आंकड़ों में गड़बड़ी बताई है। - प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का मुख्य आरोप क्या है?
गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि ओबीसी को उसकी आबादी के अनुपात में वार्ड आरक्षण नहीं मिला। उन्होंने कई जिलों के आंकड़ों में अंतर बताया है। - नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने इस पर क्या सफाई दी?
मंत्री खर्रा ने कहा कि आयोग को पर्याप्त समय और स्टाफ नहीं मिला। इसलिए आंकड़ों में त्रुटि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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