जिला प्रमुख लॉटरी में OBC का आरक्षण घटा, SC-ST का क्यों बढ़ा? जानें पूरा गणित

Jageshwar prasad | Aug 14, 2026, 13:17 IST
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OBC की आबादी 43%, आरक्षण 15.15% से घटकर 12.19% हुआ
OBC की आबादी 43%, आरक्षण 15.15% से घटकर 12.19% हुआ

राजस्थान में निकाय और जिला प्रमुख पदों की लॉटरी के बाद OBC आरक्षण विवाद गहराया। जिला प्रमुख में OBC आरक्षण 15.15% से घटकर 12.19% हुआ। SC-ST का बढ़ा। 50% की संवैधानिक सीलिंग बनी वजह।

समझें क्या है पूरा मामला

  • OBC की आबादी 43%, आरक्षण 15.15% से घटकर 12.19% हुआ।
  • SC-ST आरक्षण बढ़ा, OBC का घटा, लॉटरी के बाद बड़ा विवाद।
  • गुर्जर नेता हिम्मत सिंह बोले, सड़कों पर आने से नहीं रोक सकते।
  • 50% की सीलिंग बनी OBC की असली रुकावट, SC-ST पर लागू नहीं यह बंधन।
  • जिला परिषद 33 से बढ़कर 41 हुईं, OBC की सीटें 5 की 5 ही रहीं।
राजस्थान में नगरीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के आगामी चुनाव की लॉटरी के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी (OBC – Other Backward Class) के आरक्षण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

13 अगस्त को निकाली गई लॉटरी में जिला प्रमुख पदों पर ओबीसी का आरक्षण पिछली बार की तुलना में 2.96 फीसदी घट गया। जबकि एससी (SC – Scheduled Caste) और एसटी (ST – Scheduled Tribe) का आरक्षण बढ़ा है।

जस्टिस मदन लाल भाटी की अध्यक्षता वाले राज्य ओबीसी आयोग रिपोर्ट के आधार पर यह लॉटरी निकाली गई। ओबीसी नेता और कांग्रेस ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

क्या सच में OBC आरक्षण कम हुआ?

हां, जिला प्रमुख के पदों पर ओबीसी को पिछले चुनाव में 15.15% आरक्षण मिला था, इस बार 12.19% ही मिला। दरअसल, जिला परिषदों की संख्या 33 से बढ़कर 41 हो गई है। लेकिन ओबीसी की सीटें पहले की तरह 5 ही रहीं। इससे प्रतिशत में गिरावट आई।

निकाय प्रमुखों के 309 पदों में ओबीसी को 60 सीटें यानी 19.41% मिलीं। 2019-20 में 19.89% और 2014-15 में 19.78% था। ओबीसी को 21% आरक्षण न इस बार मिला और न ही पहले के दोनों चुनावों में।

OBC आरक्षण 15.15% से घटकर 12.19% हुआ
OBC आरक्षण 15.15% से घटकर 12.19% हुआ


SC-ST का आरक्षण क्यों बढ़ा?

जिला प्रमुख पदों में SC का आरक्षण 18.18% से बढ़कर 19.51% और ST का 15.15% से बढ़कर 17.07% हो गया। एससी-एसटी को आबादी के अनुपात में आरक्षण मिलता है जो संविधान में स्पष्ट है। लेकिन ओबीसी के लिए यह फॉर्मूला लागू नहीं होता। यही असमानता की असली वजह है।

50% की सीलिंग बनी रुकावट

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं में आरक्षण की अधिकतम सीमा यानी सीलिंग 50 फीसदी है। इससे ज्यादा आरक्षण नहीं दे सकते।

लॉटरी में पहले SC, फिर ST और उसके बाद OBC का आरक्षण तय होता है। जब SC-ST की आबादी बढ़ती है तो उनकी सीटें बढ़ती हैं लेकिन 50% की सीमा के कारण OBC को कम जगह मिलती है।

ओबीसी नेताओं की मांग और आंदोलन की चेतावनी

गुर्जर नेता हिम्मत सिंह ने कहा कि कोर्ट के आदेश के अनुसार 21% आरक्षण के हिसाब से नगर निकाय में 66 और जिला प्रमुख की 9 सीटें ओबीसी को मिलनी चाहिए थीं।

उन्होंने कहा कि ओबीसी जातियों को सड़कों पर आने से नहीं रोका जा सकता। जल्द सामाजिक नेताओं की बैठक कर सरकार के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।

क्यों नहीं मिलता OBC को पूरा 21% आरक्षण?

स्थानीय निकाय चुनावों में OBC का आरक्षण संविधान में स्वैच्छिक (Voluntary) श्रेणी में है, SC-ST की तरह अनिवार्य नहीं। इसलिए 50% सीलिंग के बाद SC-ST की सीटें तय होती हैं और जो बचता है उसमें OBC को आरक्षण मिलता है।

FAQ

  1. राजस्थान में OBC का जिला प्रमुख आरक्षण कितना घटा?
    पिछले चुनाव में जिला प्रमुख पदों पर OBC को 15.15% आरक्षण था जो इस बार घटकर 12.19% हो गया। जिला परिषदें 33 से 41 होने के बावजूद OBC की सीटें 5 की 5 ही रहीं।
  2. SC-ST का आरक्षण बढ़ा लेकिन OBC का क्यों घटा?
    50% की संवैधानिक सीलिंग के कारण पहले SC-ST की सीटें तय होती हैं। आबादी बढ़ने पर उनकी सीटें बढ़ती हैं और OBC के लिए कम जगह बचती है। OBC का आरक्षण संविधान में स्वैच्छिक श्रेणी में है, अनिवार्य नहीं।
  3. ओबीसी नेताओं की क्या मांग है?
    21% आरक्षण के अनुसार नगर निकाय में 66 और जिला प्रमुख में 9 सीटें मांगी जा रही हैं। आंदोलन की चेतावनी दी गई है और सामाजिक नेताओं की बैठक बुलाने की बात कही गई है।

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