क्या राजेंद्र राठौड़ या ज्योति मिर्धा की चमकेगी किस्मत या चौंकाएगा भाजपा का नया चेहरा?

Mukesh Sharma | May 15, 2026, 18:50 IST
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Ashish Bhardwaj - 2026-05-15T184943.824
Photograph: (the sootr)

राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा जहां ज्योति मिर्धा और राजेंद्र राठौड़ जैसे कद्दावर नेताओं पर दांव लगा सकती है, वहीं कांग्रेस की इकलौती सीट के लिए दिग्गज नेताओं के बीच खींचतान जारी है।

News In Short

  • राजस्थान में अगले महीने राज्यसभा की रिक्त हो रही तीन सीटें।
  • मौजूदा संख्याबल में भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलने की आस।
  • बंगाल फतह में अहम भूमिका निभाने वाले राजेंद्र राठौड़ और ज्योति मिर्धा भी रेस में।
  • मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा मौका देकर कैबिनेट में पदोन्नति देने की तैयारी।
  • एक सीट के लिए पवन खेड़ा और सीपी जोशी के बीच मेवाड़ से दावेदारी तेज।

News In Detail

राजस्थान में जून में राज्यसभा की रिक्त हो रही तीन सीट पर चुनाव होने हैं। भाजपा के राजेंद्र गहलोत और रवनीत सिंह बिट्टू और कांग्रेस के नीरज डांगी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। बिट्टू कांगेस नेता केसी वेणुगोपाल के लोकसभा में चुने जाने के कारण रिक्त सीट पर हुए उपचुनाव में 27 अगस्त 2024 को निर्वाचित हुए थे। वह अभी मोदी सरकार में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हैं।

मौजूदा संख्या बल को देखते हुए भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलना तय है। भाजपा सूत्रों के अनुसार इस बार मारवाड़ की एक महिला नेता की लॉटरी लग सकती है। हालांकि, भाजपा की ओर से किसी चौंकाने वाले नाम के सामने आने से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

बिट्टू का निर्वाचित होना तय

भाजपा की दो सीट में से एक सीट पर रवनीत सिंह बिट्टू को ही फिर से अवसर दिया जा सकता है। पंजाब के पूर्व सीएम स्वर्गीय बेअंत सिंह​ के पोते रवनीत सिंह 24 मार्च, 2024 को ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।

केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा के लिए जीत के बाद राजस्थान की अपनी राज्यसभा सीट छोड़ दी थी। अगस्त 2024 में इसी सीट से बिट्टू को भाजपा टिकट पर निर्विरोध निर्वाचित हुए थे।

भाजपा के सूत्रों के अनुसार जुलाई-2026 में संसद के मानसून सत्र शुरु होने से पहले मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल होना तय है। पार्टी सूत्रों कहना है कि बिट्टू को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की पूरी संभावना है। इसलिए उन्हें राज्यसभा में दोबारा मौका दिया जाना तय माना जा रहा है।

क्या राजेंद्र राठौड़ के नाम पर लगेगी मुहर

भाजपा में राज्यसभा जाने के इच्छूक नेताओं की फेरहिस्त लंबी है। इनमें पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां, पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ और पूर्व मंत्री राजपाल सिंह शेखावत जैसे नाम हैं। लेकिन, भाजपा सूत्रों के अनुसार पूनियां को इस बार भी मौका मिलता नहीं दिख रहा है।

राजेंद्र राठौड़ को बंगाल में ममता बनर्ती की सीट भवानीपुर की जिम्मेदारी दी गई थी। इस सीट को जीतने के लिए आरएसएस और भाजपा ने चुनिंदा लोगों की एक विशेष टीम बनाई थी। भाजपा ने ममता बनर्जी को इस सीट से 15 हजार से ज्यादा वोट से हराया है।

राठौड़ इस कारण ही सीधे गृह मंत्री अमित शाह और संघ के केंद्रीय नेताओं के संपर्क में थे। इसलिए माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व राजेंद्र राठौड़ को केंद्र में लेकर अन्य राज्यों में भी उनकी सेवाओं का फायदा उठाना चाहता है।

राठौड़ के अतिरिक्त पूर्व मंत्री राजपाल सिंह शेखावत को भी राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार उनको ​राज्यसभा का टिकट उसी हालत ​में मिल सकता है जबकि पूर्व सीएम वसुधंरा राजे की चलेगी अन्यथा उनको टिकट मिलना मुश्किल है।

खुलेगी ज्योति मिर्धा की किस्मत

महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने वाले बिल के इस मुद्धे पर भाजपा विपक्ष विशेषकर कांग्रेस को घेरती रही है। इसी कारण से भाजपा इस बार राजस्थान से राज्यसभा में नागौर की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा को भी मौका दे सकती है। इसके अलावा उन्हें राज्यसभा में भेजकर मंत्री भी बनाया जा सकता है।

यह सर्वविदित है कि मिर्धा परिवार का नागौर की राजनीति में लंबे समय तक गहरा प्रभाव और वर्चस्व रहा है। ज्योति मिर्धा दिग्गज जाट नेता दिवंगत नाथूराम मिर्धा की पोती हैं।

मिर्धा परिवार न केवल नागौर में प्रभावशाली रहा बल्कि नागौर से बाहर की भी कई सीटों पर जाट मतदाताओं को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

खींवसर उपचुनाव में भाजपा के जीतने के बाद से ज्योति मिर्धा का भाजपा में प्रभाव भी बढ़ा है। इस उपचुनाव में भाजपा के रेवंतराम डांगा ने नागौर सांसद और आरएलपी मुखिया हनुमान बेनीवाल की पत्नी को हराया था।

भाजपा की जीत में ज्योति मिर्धा की भी​ प्रमुख भूमिका रही थी। इसके अतिरिक्त ज्योति मिर्धा भाजपा में सर्वाधिक ताकतवर गृह मंत्री अ​मित शाह की भी पसंद बताई जाती हैं। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि भाजपा इस बार राजस्थान की दो राज्यसभा सीट में से एक पर उन्हें मौका दे।

कांग्रेस में एक सीट के लिए होगा मुकाबला

विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की संख्या के अनुसार कांग्रेस राज्यसभा की एक सीट आसानी से जीत जाएगी। इस एक सीट के लिए कांग्रेस में कई दिग्गज प्रयासरत हैं।

कांग्रेस से जुड़ा मुस्लिम तबका काफी समय से अपने लिए इस सीट की मांग कर रहा है। लेकिन एससी व एसटी समुदायों ने भी बराबर दबाव बनाया हुआ है।

कांग्रेसी सूत्रों का कहना है कि इस बार आलाकमान ऐसे किसी दबाव में नहीं आने वाला, क्योंकि पिछली बार सचिन पायलट को मात देते हुए पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने नीरज डांगी केा राज्यसभा सांसद बनवा दिया था।

डांगी तीन बार विधानसभा चुनाव हारे हुए हैं। गृह जिले पाली सहित राज्य के एससी समुदाय में उनका कोई प्रभाव नहीं है। बताया जा रहा है कि इस बार आलाकमान किसी ऐसे नेता को राज्यसभा में भेजेगा, जिसका पार्टी को राजनीतिक फायदा हो।

मेवाड़ के नाम पर खेड़ा की दावेदारी

कांग्रेस के केंद्रीय स्तर पर प्रवक्ता पवन खेड़ा उदयपुर में पले बढ़े हैं। वर्तमान में वह कांग्रेस के सर्वाधिक चर्चित नेताओं में से हैं और राहुल गांधी के भी नजदीक माने जाते हैं।

खेड़ा ने 2020 में भी राज्यसभा का टिकट मांगा था और नहीं मिलने पर नाराजगी भी जता दी थी। वे मेवाड़ में कांग्रेस के कमजोर होने के आधार पर टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।

उनके जवाब में कांग्रेस का एक गुट इसी आधार पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी जोशी को उपयुक्त उम्मीदवार बता रहा है। इनका कहना है कि जोशी मेवाड़ के सर्वाधिक कद्धावर नेता हैं। ऐसे में यदि उन्हें टिकट दिया गया तो मेवाड़ में कांग्रेस को फायदा होगा।

हालांकि कांग्रेस में इन दोनों के विपरीत सोचने वाला भी एक गुट है। यह गुट किसी मेवाड़ के किसी आदिवासी नेता को राज्यसभा से भेजने का दबाव बना रहा है लेकिन,इस गुट की ओर से अभी कोई नाम सामने नहीं आया है।

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