राजस्थान में टीईटी का विरोध, शिक्षक बोले- 2010 से पहले नियुक्त तो मिले छूट

Nitin Kumar Bhal | Sept 16, 2025, 09:52 IST
Share
rajasthan-teacher-tet-objection-hindi
Photograph: (TheSootr)

राजस्थान के शिक्षकों ने सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) अनिवार्य करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का विरोध किया। TheSootr में जानें क्या है इस फैसले के पीछे का कारण।

हाल ही में शिक्षकों ने सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य बनाने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया है। इस फैसले के अनुसार, अब कक्षा 8 तक पढ़ाने वाले सभी सेवारत शिक्षकों को टीईटी (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है, चाहे उनकी नियुक्ति की तिथि कुछ भी रही हो। पहले, जिन शिक्षकों के रिटायरमेंट में 5 साल या उससे कम समय बाकी थे, उन्हें इस परीक्षा से छूट दी गई थी।

सोमवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने इस फैसले के खिलाफ सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन किए और जिला कलेक्टरों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे। इस फैसले के खिलाफ शिक्षकों का गुस्सा और चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इसे उनके लिए असमान और असंवेदनशील माना जा रहा है।

यह खबर भी देखें ...

ज्वैल ऑफ इंडिया : जानिए उन सत्ताधीशों-अफसरों के नाम, जिन्होंने 4500 करोड़ की जमीन दे दी कौड़ियों के दाम

rajasthan-teacher-tet-objection-hindi
rajasthan-teacher-tet-objection-hindi

टीईटी की अनिवार्यता पर राजस्थान शिक्षक संघ का विरोध

राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का यह निर्णय शिक्षा प्रणाली के लिए हानिकारक हो सकता है। उनका मानना है कि यह निर्णय आरटीई अधिनियम 2009 (RTE Act 2009) और एनसीटीई की अधिसूचना 23 अगस्त, 2010 (NCTE Notification 23 August 2010) का उल्लंघन करता है। उनके अनुसार, ये दोनों दस्तावेज शिक्षकों के लिए दो श्रेणियों का निर्धारण करते थे।

पहली श्रेणी में वे शिक्षक शामिल थे जो 2010 से पहले नियुक्त हुए थे, जिनसे टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य नहीं था। दूसरी श्रेणी में वे शिक्षक थे जो 2010 के बाद नियुक्त हुए थे, जिनके लिए टीईटी को एक निश्चित समय सीमा में उत्तीर्ण करना आवश्यक था। लेकिन उच्चतम न्यायालय के निर्णय ने इस भेदभाव को नकार दिया है, जिससे राजस्थान के शिक्षकों में असंतोष फैल गया है।



राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने कहा कि आरटीई अधिनियम 2009 एवं एनसीटीई की अधिसूचना 23 अगस्त, 2010 के अनुसार दो अलग-अलग श्रेणियां मान्य थीं। एक 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक, जिन्हें योग्य माना और टीईटी से छूट दी थी। दूसरा वर्ग जो 2010 के बाद नियुक्त शिक्षक, जिन्हें एक निश्चित अवधि में टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक था। लेकिन न्यायालय के निर्णय ने इस भेद को अनदेखा कर दिया है।


टीईटी से जुड़ी छूट और उसकी प्रभावी स्थिति

रमेश चंद्र पुष्करणा ने बताया कि पहले टीईटी (TET) से संबंधित जो छूट दी गई थी, वह वैध और न्यायपूर्ण थी, क्योंकि इसका उद्देश्य शिक्षकों की योग्यता का मूल्यांकन करना था। 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को यह छूट दी गई थी, क्योंकि उन्हें टीईटी पास करने की आवश्यकता नहीं थी।

अब, अदालत के फैसले के बाद, पुरानी श्रेणी के शिक्षकों को भी टीईटी उत्तीर्ण करना होगा, जिसके कारण उनका पेशेवर जीवन असुरक्षित हो सकता है। इसके अलावा, यह निर्णय कई शिक्षकों को अवसाद और मानसिक तनाव में डाल सकता है, क्योंकि वे लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत हैं और अब उन्हें एक अनिवार्य परीक्षा पास करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

यह खबर भी देखें ...

राजस्थान विधानसभा में CCTV कैमरे को लेकर विवाद : महिला विधायकों ने उठाए गंभीर सवाल, निजता का उल्लंघन का आरोप

टेट परीक्षा क्या है?

टीईटी (TET) परीक्षा के बारे में मुख्य बातें:

  • पूरा नाम: शिक्षक पात्रता परीक्षा (Teacher Eligibility Test)
  • उद्देश्य: कक्षा 1 से 8 तक सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए पात्रता निर्धारित करना
  • आयोजक:
    • केंद्रीय स्तर पर: CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) द्वारा CTET आयोजित किया जाता है
    • राज्य स्तर पर: राज्य सरकारें अपनी-अपनी टीईटी परीक्षाएँ आयोजित करती हैं (जैसे UPTET, REET)
  • स्तर: यह परीक्षा दोनों—केंद्र और राज्य—स्तर पर आयोजित होती है
  • आवश्यकता: भारत में सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है
  • प्रमाण पत्र: टीईटी प्रमाणपत्र जीवनभर मान्य होता है, इसे जारी होने की तारीख से
  • प्रारूप:
    • परीक्षा बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित होती है
    • परीक्षा दो भागों में बाँटी जाती है:
      • पेपर-1: कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए
      • पेपर-2: कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए

टीईटी के लिए नए दिशानिर्देश: बदलाव और परिणाम

टीईटी (TET) के तहत शिक्षा जगत में किए गए बदलावों से यह बात स्पष्ट हो रही है कि सरकार और न्यायपालिका का उद्देश्य शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार करना है। हालांकि, शिक्षकों का मानना है कि यह फैसला असमर्थनीय है क्योंकि इसने उनके लिए पिछले वर्षों में किए गए कार्यों का मूल्यांकन करने का कोई मौका नहीं दिया है।

टीईटी की अनिवार्यता से उन शिक्षकों की सेवा में असुरक्षा का वातावरण बन सकता है, जो लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र में हैं और जिनके पास पहले से पर्याप्त अनुभव और योग्यता है। इसके परिणामस्वरूप, कई अनुभवी शिक्षक टीईटी (TET) परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो सकते हैं और यह उनके करियर के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकता है।

यह खबर भी देखें ...

सरिस्का CTH मामला : कांग्रेस बोली-माफिया ने केंद्र-राज्य सरकार को खरीदा, भूपेंद्र बोले-कांग्रेस कर रही दुष्प्रचार

rajasthan-teacher-tet-objection-hindi
rajasthan-teacher-tet-objection-hindi

क्या यह कदम शिक्षकों के लिए लाभकारी है?

राजस्थान में शिक्षकों का यह विरोध इसलिए बढ़ा है क्योंकि उनका मानना है कि इस फैसले से सिर्फ पुराने और अनुभवी शिक्षकों की नौकरी पर खतरा पैदा हो सकता है। 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को अब टीईटी (TET) परीक्षा के लिए तैयार होने का दबाव डाला जा रहा है। इससे उनका पेशेवर जीवन प्रभावित हो सकता है।

यह खबर भी देखें ...

सीएम आवास घेरने निकले नरेश मीणा, उन पर समर्थकों पर पत्थर फेंकने-लात मारने का आरोप

शिक्षकों की सेवा असुरक्षा और उसके नकारात्मक परिणाम

कई वर्षों से शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों की सेवा में असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। खासकर उन शिक्षकों के लिए जिन्होंने लंबी सेवा दी है और जिनका अनुभव इस समय के हिसाब से बहुत मूल्यवान है। इसीलिए राजस्थान में टीईटी का विरोध हो रहा है।

राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के नेताओं ने भी इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि इससे शिक्षकों में निराशा और मानसिक दबाव बढ़ेगा। एक तरफ जहां सरकार और न्यायपालिका का उद्देश्य शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार करना है, वहीं दूसरी तरफ यह कदम उनके लिए आत्मविश्वास की कमी और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।

rajasthan-teacher-tet-objection-hindi
rajasthan-teacher-tet-objection-hindi

टीईटी अनिवार्यता के समाधान पर शिक्षक संघ का सुझाव

शिक्षक संघ ने सुझाव दिया है कि सरकार को एक ऐसा मार्ग निकालना चाहिए, जो इन शिक्षकों की योग्यता का मूल्यांकन करे, न कि सिर्फ एक परीक्षा के माध्यम से। उनके अनुसार, लंबे समय तक सेवा देने वाले शिक्षकों को अनिवार्य रूप से टीईटी (TET) उत्तीर्ण करने का आदेश देने के बजाय, उनके पिछले कार्य अनुभव और शिक्षा में योगदान को महत्व देना चाहिए।

FAQ

  1. 1. राजस्थान में टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ क्या विरोध हो रहा है?
    राजस्थान में सेवारत शिक्षकों ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय उनके लिए असुरक्षित है, क्योंकि इससे पुराने शिक्षकों को भी टीईटी पास करने का दबाव डाला जा रहा है।
  2. 2. टीईटी परीक्षा क्या है?
    टीईटी (Teacher Eligibility Test) एक परीक्षा है, जिसे भारतीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य शिक्षकों की योग्यता का मूल्यांकन करना है।
  3. 3. राजस्थान में टीईटी की अनिवार्यता के फैसले का प्रभाव क्या होगा?
    इस फैसले का प्रभाव उन शिक्षकों पर पड़ सकता है जो 2010 से पहले नियुक्त हुए थे। उन्हें अब टीईटी (TET) परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी, जिससे उनकी सेवा में असुरक्षा का माहौल बन सकता है।
  4. 4. क्या पुराने शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से छूट मिलनी चाहिए थी?
    शिक्षकों का मानना है कि जिनकी नियुक्ति 2010 से पहले हुई है, उन्हें टीईटी परीक्षा से छूट मिलनी चाहिए थी, क्योंकि वे पहले से ही शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत हैं और उनके पास पर्याप्त अनुभव है।
  5. 5. राजस्थान शिक्षक संघ का टीईटी की अनिवार्यता के फैसले पर क्या कहना है?
    राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय का कहना है कि इस फैसले से शिक्षकों की सेवा में असुरक्षा उत्पन्न होगी और सरकार को इस फैसले में संशोधन करना चाहिए।


Tags:
  • teacher eligibility test
  • TET
  • राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय
  • राजस्थान में टीईटी का विरोध
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा