महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी, आधी आबादी का सिमट रहा प्रतिनिधित्व
Mukesh Sharma | Jun 22, 2026, 16:57 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान की राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी हाशिए पर है। 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में महिला जनप्रतिनिधियों की भागीदारी 10 प्रतिशत के आसपास सिमट कर रह गई।
ऐसे समझें पूरा मामला
- राजस्थान में टिकट वितरण में महिलाओं की हिस्सेदारी महज 10% के आसपास सिमटी।
- 33% महिला आरक्षण के शोर के बीच भाजपा और कांग्रेस ने नहीं दिखाई उदारता।
- राजस्थान विधानसभा में 15% का आंकड़ा भी नहीं छू सकीं महिलाएं,
- 2013 में 28 के मुकाबले 2023 में घटकर रह गईं सिर्फ 20 महिला विधायक।
- संसद में केवल 14% महिला प्रतिनिधित्व, वैश्विक रैंकिंग में भारत 151वें स्थान पर।
चुनावी में महिलाओं की हिस्सेदारी 10% के आसपास
विधानसभा चुनाव 2023 में कुल 1,875 उम्मीदवारों ने भाग्य आजमाया। इसमें से केवल 9.76 प्रतिशत ही महिलाएं थीं।
लोकसभा चुनाव 2024 में प्रदेश की 25 सीटों में से भाजपा और कांग्रेस दोनों ने मिलकर महज 8 महिलाओं को ही टिकट दिया।
यह रही भाजपा और कांग्रेस की स्थिति
भारतीय जनता पार्टी (BJP)
लोकसभा 2024: प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों में से भाजपा ने सिर्फ 5 महिलाओं को टिकट दिया। इनमें इंदु देवी जाटव, प्रियंका बालन मेघवाल, मंजू शर्मा, ज्योति मिर्धा, महिमा कुमारी शामिल थीं।
कांग्रेस (Congress)
लोकसभा 2024: कांग्रेस ने 25 सीटों में से महज 3 महिलाओं पर भरोसा जताया। इनमें संजना जाटव, संगीता बेनीवाल और उर्मिला जैन भाया रहीं।
आधी आबादी, सिमटता प्रतिनिधित्व
इस चुनाव के तुरंत बाद नवंबर 1953 में हुए बांसवाड़ा विधानसभा उपचुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी की यशोदा देवी निर्वाचित हुई थीं।
इसके बाद जून 1954 के उपचुनाव में कमला बेनीवाल दूसरी महिला विधायक बनी थीं। 2008 और 2013 में सबसे अधिक 28 महिलाएं विधानसभा पहुंची थीं।
2013 में 28, 2018 में 24 और 2023 में 20 महिला विधायक निर्वाचित हुईं। वर्ष 2023 के चुनाव में महिला विधायकों की संख्या घटकर 20 रह गई है, जो कि 2018 (24 महिलाएं) के मुकाबले भी कम है।
राजस्थान विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कभी भी 15% के आंकड़े को पार नहीं कर पाया है।
संसद में भारत की स्थिति
भारतीय आबादी में 49% महिलाएं होने के बावजूद वर्तमान लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व केवल 14% के आसपास है। वैश्विक रैंकिंग में इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) के अनुसार, संसदों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामले में भारत दुनिया के 185 देशों में 151वें स्थान पर है।
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