यूजीसी नियमों पर धर्मेंद्र प्रधान बोले, शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार का भेदभाव बर्दाश्त नहीं
Ashish Bhardwaj | Jan 27, 2026, 21:16 IST
Photograph: (the sootr)
यूजीसी के नए नियमों को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
न्यूज़ इन शार्ट
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी के इक्विटी नियमों को लेकर पहली बार सार्वजनिक बोले
मंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार का भेदभाव या उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यूजीसी ने 15 जनवरी 2026 से नए इक्विटी नियम लागू किए, जिनका उद्देश्य कैंपस में भेदभाव को समाप्त करना है।
कॉलेजों में इक्विटी सेल अनिवार्य किए जाने पर खासकर ओबीसी को शामिल किए जाने को लेकर विवाद उठे हैं।
देशभर में नियमों के पक्ष और विपक्ष में छात्रों के हो रहे हैं प्रदर्शन
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर जारी विवाद के बीच अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मंगलवार को डीडवाना-कुचामन के छोटी खाटू में एक कार्यक्रम में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार के भेदभाव या डिस्क्रिमिनेशन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ना ही किसी को इन नियमों का दुरुपयोग करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे यूजीसी हो, भारत सरकार हो या राज्य सरकारें, सभी को संविधान के तहत कार्य करना होगा।
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) ने 15 जनवरी 2026 से पूरे देश में नए 'इक्विटी' नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति, जेंडर या बैकग्राउंड के आधार पर भेदभाव को खत्म करना है। यह कदम उन छात्रों के लिए सुरक्षा का कवच साबित हो सकता है, जो अब तक किसी न किसी रूप में भेदभाव का शिकार होते आए हैं।
यूजीसी का कहना है कि पुराने 2012 के नियम अब आउटडेटेड हो चुके थे। इनकी जगह नए, सख्त नियमों की आवश्यकता थी। इन नए नियमों के तहत, अब हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में एक 'इक्विटी सेल' बनाया जाएगा। यह सेल छात्रों की भेदभाव संबंधी शिकायतों का समाधान करेगी। साथ ही संस्थान को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए जल्दी से जल्दी कार्रवाई करनी होगी, ताकि किसी भी छात्र के साथ भेदभाव ना हो।
इन नियमों को लेकर देशभर में काफी हंगामा मच गया है। कई छात्र और अन्य वर्गों का कहना है कि नए नियमों से भेदभाव को बढ़ावा मिल सकता है, वहीं एक समूह इसके पक्ष में आया हुआ है। इन नियमों के पक्ष और विपक्ष में देशभर में आंदोलन हो रहे हैं।
ओबीसी को '
नए नियमों में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को भी 'जातिगत भेदभाव' की श्रेणी में शामिल किया गया है। इससे जनरल कैटेगरी के छात्रों का यह मानना है कि ओबीसी को पहले ही आरक्षण जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, फिर भी उन्हें इस कैटेगरी में शामिल करना अन्य छात्रों के साथ अन्याय होगा।
सोशल मीडिया पर कुछ छात्रों और शिक्षाविदों का कहना है कि भारत की यूनिवर्सिटीज पहले ही ग्लोबल रैंकिंग में पिछड़ रही हैं। उन्हें लगता है कि सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना चाहिए, न कि नए-नए नियम लागू करके और विवाद उत्पन्न कर न दे।
नए नियमों के अनुसार, अब हर कॉलेज में एक 'इक्विटी सेल' बनाएगा, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। अगर किसी छात्र को लगता है कि उसके साथ भेदभाव हुआ है, तो वह इस सेल के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके बाद, कॉलेज को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी के इक्विटी नियमों को लेकर पहली बार सार्वजनिक बोले
मंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार का भेदभाव या उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यूजीसी ने 15 जनवरी 2026 से नए इक्विटी नियम लागू किए, जिनका उद्देश्य कैंपस में भेदभाव को समाप्त करना है।
कॉलेजों में इक्विटी सेल अनिवार्य किए जाने पर खासकर ओबीसी को शामिल किए जाने को लेकर विवाद उठे हैं।
देशभर में नियमों के पक्ष और विपक्ष में छात्रों के हो रहे हैं प्रदर्शन
News In Detail
ये हैं यूजीसी के नए नियम
यूजीसी का कहना है कि पुराने 2012 के नियम अब आउटडेटेड हो चुके थे। इनकी जगह नए, सख्त नियमों की आवश्यकता थी। इन नए नियमों के तहत, अब हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में एक 'इक्विटी सेल' बनाया जाएगा। यह सेल छात्रों की भेदभाव संबंधी शिकायतों का समाधान करेगी। साथ ही संस्थान को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए जल्दी से जल्दी कार्रवाई करनी होगी, ताकि किसी भी छात्र के साथ भेदभाव ना हो।
यूजीसी के नए नियमों पर विवाद क्यों
ओबीसी को 'जातिगत भेदभाव ' में शामिल करना
ग्लोबल रैंकिंग और क्वालिटी की चिंता
यूजीसी का नया 'इक्विटी सेल'
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