मेरा ही चला गया...तो मैं तुम्हारे लिए क्या करूं, जानिए बार-बार क्यों छलक रहा वसुंधरा राजे का दर्द?

The Sootr | Apr 10, 2026, 16:56 IST
Share
Ashish Bhardwaj (32)
Photograph: (the sootr)

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का दर्द एक बार फिर छलक पड़ा। वे गाहे-बगाहे सीएम नहीं बनाए जाने की अपनी पीड़ा को जाहिर करती रहीं हैं।

​योगेंद्र योगी@जयपुर

'मुझे ख़बर है कि इक मुश्ते-ख़ाक (मुट्ठी भर धूल) हूं, फिर भी तू क्या समझ के हवा में उड़ा रहा है मुझे।' राजस्थान की राजनीति के गलियारों में आजकल यह शेर चर्चा का विषय बना हुआ है। यह पंक्तियां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मौजूदा सियासी हालात को पूरी तरह बयां करती हैं।

कभी राजस्थान भाजपा की एकछत्र नेता रहीं वसुंधरा राजे आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी हैं, जहां उनके पास सत्ता तो नहीं है, लेकिन उनके शब्दों की धार और तेवर आज भी सत्ता के गलियारों में हलचल मचा देते हैं। राजस्थान में भजनलाल सरकार के गठन के बाद से ही वसुंधरा का सीएम नहीं बनाए जाने का दर्द ढाई साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है। वे गाहे-बगाहे प्रतीकों, शेरों-शायरी और तीखे बयानों के जरिए सियासी संदेश दे रही हैं।

​झालावाड़ में छलका दर्द

सियासत में जब दर्द जुबां पर आता है, तो वह केवल शब्द नहीं होते, बल्कि भविष्य की रणनीति का इशारा होते हैं। एक दिन पहले झालावाड़-बारां सांसद और अपने बेटे सांसद दुष्यंत सिंह की जनसंवाद यात्रा के दौरान वसुंधरा राजे का दर्द सार्वजनिक रूप से छलक पड़ा। राजे ने मुस्कुराते हुए कहा, भैया, मैं नहीं लड़ सकती जब... मेरा ही चला गया... तो मैं तुम्हारे लिए क्या करूं?
​ उन्होंने आगे कहा कि लोग उनसे आकर शिकायत करते हैं कि किसी को मकान नहीं मिल रहा, किसी को पेंशन नहीं मिल रही। राजे ने तंज लहजे में कहा, मैंने कह दिया कि मेरे साथ भी यही हो गया। मैं अपने आप के लिए कुछ नहीं कर सकी तो तुम्हारे लिए क्या करूं।

भले ही यह बात हल्के-फुल्के अंदाज में कही गई हो, लेकिन इसके सियासी मायने बहुत गहरे हैं। यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पद न मिलने और अपनी ही सरकार में खुद को असहाय महसूस करने की एक बड़ी स्वीकारोक्ति है।

कार्यकर्ताओं के बहाने ताकत का एहसास

यह पहला मौका नहीं है, जब वसुंधरा ने खुले तौर पर अपने दर्द का इजहार किया है। पूर्व सीएम ने कुछ दिन पहले जयपुर में पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में एक बयान देकर सियासी घमासान शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक नियुक्तियों में प्राथमिकता पार्टी के वफादार, निष्ठावान, समर्पित और संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को ही दी जाए, न कि दल बदलुओं को।

लेकिन, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी के हरियाणा प्रभारी डॉ. सतीश पूनियां ने राजे के बयान के विपरीत कहा कि पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के अलावा बीजेपी में दूसरी पार्टी से आए नेताओं को भी राजनीतिक नियुक्तियों में जगह मिलनी चाहिए। पूनिया ने कहा कि बीजेपी अब बड़ा परिवार है। दूसरी पार्टी से समय समय पर बीजेपी में आए नेताओं ने भी पार्टी के लिए काम किया है। पार्टी एक झंडे के नीचे है। इसलिए नियुक्तियों में बाहरी और अंदर का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

पूनिया से रहा छत्तीस का आंकड़ा

वसुंधरा और पूनिया का छत्तीस का आंकड़ा रहा है। दरअसल, राजस्थान में बोर्ड, निगमों और आयोगों में लंबे समय से पद खाली पड़े हैं। बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता इन बोर्ड-निगमों में अध्यक्ष और सदस्य बनने की कतार में हैं। कई बोर्ड और निगम के मुखिया के पद तो मंत्रियों जितने या उनसे अधिक ताकतवर हैं। पार्टी के कई सीनियर नेता भी इन पदों की कतार में है।

पीतल की लौंग और सराफ का वो चर्चित किस्सा

वसुंधरा राजे के बयानों में सबसे ज्यादा चर्चा सितंबर 2025 के उस बयान की हुई, जिसने जयपुर से दिल्ली तक सबको चौंका दिया। सिक्किम के राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर के सम्मान समारोह में राजे ने बिना नाम लिए मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, कई लोगों को पीतल की लौंग क्या मिल जाती है, वो अपने आप को सराफ (जौहरी) समझ बैठते हैं।

​उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि चाहत बेशक आसमां छूने की रखो, लेकिन पांव हमेशा धरती पर होने चाहिए। इस बयान को खुद राजे ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किया। इससे साफ हो गया कि यह कोई अनौपचारिक टिप्पणी नहीं बल्कि एक सोचा-समझा राजनीतिक हमला था। मंच पर मुख्यमंत्री मौजूद थे, लेकिन उन्होंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

कहीं पे निगाहें, कहीं पर निशाना

वसुंधरा ने 4 सितंबर 2025 को जयपुर के बिड़ला सभागार में सिक्किम के राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर के नागरिक अभिनन्दन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इशारों ही इशारों में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधा था। उन्होंने बिना नाम लिए कहा, कई लोगों को पीतल की लौंग क्या मिल जाती है, वो अपने आप को सराफ समझ बैठते हैं। बड़ी बात यह रही कि वसुंधरा राजे ने अपने इस बयान को खुद ऑफिशियल एक्स हैंडल पर शेयर किया।

वसुंधरा राजे ने कहा राज्यपाल माथुर को संबोधित करते हुए यह बात कही थी। राजे ने आगे कहा कि मैं आज ये कहना चाहूंगी कि चाहत बेशक आसमां छूने की रखो, लेकिन पांव हमेशा धरती पर रखो। हालांकि कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिली।

किसी के एहसान से किया इनकार

पार्टी के आकाओं द्वारा दरकिनार कर दिए जाने पर वसुंधरा ने कई मौकों पर यह जताने का भी प्रयास किया है कि जब भी पानी पीया है, पत्थर तोड़ कर पिया है, समंदर का एक बूंद भी एहसान नहीं है मुझ पर।

जयपुर के कॉन्सिट्यूशन क्लब में इस साल 24 जनवरी 2026 को आयोजित जाट महिला शक्ति संगम कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में पुरुषों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, तब जाकर उन्हें पहचान और स्थान मिलता है। उन्होंने कहा कि यह सच्चाई है, लेकिन महिलाएं अपने संघर्ष और संकल्प से लगातार आगे बढ़ रही हैं।

कार्यकर्ताओं के बहाने साधा निशाना

इससे पहले 3 जनवरी को जयपुर में कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में ही भाजपा की संगठनात्मक कार्यशाला में वसुंधरा राजे ने तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कहा था कि कार्यकर्ता की एक घंटी पर अधिकारी फोन उठाएं और काम करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके अनुसार कार्यकर्ता की आवाज प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की आवाज के समान है और इसे मजबूती से सुना जाना चाहिए।

उन्होंने जोर दिया कि गांव स्तर पर बूथ अध्यक्ष, मंडल में मंडल अध्यक्ष और जिलों में जिलाध्यक्ष संगठन के एंबेसेडर हैं और उनके हस्ताक्षर से जनता के काम होने चाहिए। इसके जरिए वसुंधरा ने भाजन लाल सरकार को राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया कि प्रदेश में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

क्या यह राम की तरह वापसी का संकेत है?

​29 अगस्त 2025 को धौलपुर के रामकथा कार्यक्रम में वसुंधरा ने खुद के राजनीतिक हालात की तुलना वनवास से कर दी। उन्होंने कहा कि वनवास सिर्फ भगवान श्री राम की नियति नहीं थी, बल्कि हर इंसान के जीवन में कभी न कभी ऐसा दौर आता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो आता है, वो जाता भी है।

2018 के बाद से ही वसुंधरा राजे भाजपा में एक तरह के वनवास की स्थिति में हैं। 2023 के चुनाव में पार्टी ने उन्हें चेहरा नहीं बनाया और सामूहिक नेतृत्व के नाम पर चुनाव लड़ा। जीत के बाद कमान नए चेहरे भजनलाल शर्मा को सौंप दी गई। राजे का धैर्य और इंतजार वाला यह बयान समर्थकों को उम्मीद देता है कि महारानी की वापसी जल्द होगी।

​वो उंगली, जिसे पकड़कर लोग चलना सीखे

​जून 2024 में उदयपुर के एक कार्यक्रम में वसुंधरा ने अपनी ही पार्टी के उन नेताओं को घेरा जिन्हें कभी उन्होंने राजनीति में उंगली पकड़कर चलना सिखाया था। उन्होंने कहा, आज लोग उसी उंगली को पहले काट देते हैं, जिसे पकड़कर वे चलना सीखते हैं।

राजे का इशारा उन कद्दावर नेताओं की तरफ था, जिन्होंने उनके 15 साल के एकछत्र राज में मलाई खाई, लेकिन जैसे ही दिल्ली से इशारे बदले, उन्होंने वसुंधरा से दूरियां बना लीं।

कब खत्म होगा इंतजार?

पिछले ढाई सालों में वसुंधरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई बार मुलाकात की। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से भी उनकी मुलाकात चर्चा में रही। हर बार समर्थकों को लगा कि अब शुभ समाचार आएगा, लेकिन दिल्ली का दरबार फिलहाल टस से मस होता नहीं दिख रहा।

राष्ट्रीय नेतृत्व को पता है कि राजस्थान में फिलहाल भजन लाल सरकार सुरक्षित है। लेकिन राजनीति संभावनाओं का खेल है। वसुंधरा राजे के तरकश में अभी भी कई तीर बाकी हैं। जब तक उनकी सम्मानित वापसी नहीं होती, तब तक राजस्थान की राजनीति में तंज और रंज का यह दौर जारी रह सकता है।

ये भी पढे़:-

हाईवे की हवा खराब: टोल से भर रहा खजाना, लेकिन भ्रष्टाचार की दरारें छीन रही हैं रफ्तार

एसआई भर्ती 2021: चयनित थानेदारों ने सरकार को दिया एफिडेविट, बोले-हम अग्निपरीक्षा से गुजरने को तैयार

राजस्थान में फिर भर्ती की तैयारी, नर्सिंग ऑफिसर और ANM के 19 हजार पदों पर होगी परीक्षा

गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे होंगे वापस, आश्रितों को मिलेगी सरकारी नौकरी

Tags:
  • पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे
  • सांसद दुष्यंत सिंह
  • राजस्थान भाजपा
  • स्थापना दिवस
  • भजनलाल सरकार
  • ओमप्रकाश माथुर
  • हरियाणा प्रभारी डॉ. सतीश पूनियां
  • वसुंधरा राजे का दर्द
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा