धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का छत्तीसगढ़ में पड़ेगा बड़ा असर, बीजेपी बोली धर्म बदलने पर लगेगा अंकुश
Arun Tiwari | Mar 24, 2026, 14:43 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण को लेकर अहम फैसला सुनाया है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने कहा कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा नहीं मिलेगा। इस फैसले का छत्तीसगढ़ में बड़ा असर पड़ेगा।
Raipur. सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण और अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को कहा कि जो व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, वह अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म बदलते ही SC का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का उन राज्यों पर बड़ा असर पड़ेगा जो धर्मांतरण की समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें छत्तीसगढ़ प्रमुख रुप से शामिल है।
इस फैसले का कई राज्यों में व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। खासकर उन राज्यों में जहां धर्मांतरण और आरक्षण के अधिकारों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में यह संदेश भी दिया कि अनुसूचित जाति का दर्जा केवल सामाजिक और ऐतिहासिक आधार पर ही नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार निर्धारित होता है।
इन राज्यों में छत्तीसगढ़ सबसे पहले आता है जहां धर्मांतरण एक बड़ा मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसला का छत्तीसगढ़ बीजेपी ने स्वागत किया है। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण एक बड़ा मुद्दा रहा है। हाल ही में विधानसभा में बीजेपी सरकार ने धर्मांतरण रोकने के लिए नए कानून के मसौदे को पारित किया है।
इससे अब छत्तीसगढ़ में नए कानून के बनने का रास्ता साफ हो गया है। यहां पर यह मांग उठती रही है कि धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता अनुराग अग्रवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वगत योग्य है। अब इससे धर्मांतरण पर अंकुश लग सकेगा।
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण रोकने के लिए संघ भी सक्रिय रहा है। धर्मांतरण के मामले कानून के रुप में तो दहाई के अंक तक सीमित हैं लेकिन सरकार से जुड़े जानकार मानते हैं कि यह संख्या अब लाखों में पहुंच गई है। आदिवासी गांवों से निकलकर धर्मांतरण ने बड़े शहरों की तरफ रुख किया है। पिछले कुछ सालों में छत्तीसगढ़ में चर्चों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार किसी ने अपना धर्म बदलकर ईसाई धर्म अपनाया तो उससे अनुसूचित जाति का दर्जा छिन जाएगा। कोर्ट ने अपने आदेश में संविधान के उस प्रावधान का हवाला दिया, जिसमें अनुसूचित जाति की पहचान को कुछ विशेष धर्मों हिंदू, सिख और बौद्ध तक सीमित रखा गया है।
अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति एक साथ दो अलग-अलग दावों को नहीं रख सकता। यानी वह एक ओर गैर-निर्दिष्ट धर्म को माने और दूसरी ओर SC का दर्जा भी बनाए रखे। ऐसा करना संविधान की भावना के विपरीत है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति बाद में फिर से हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में लौटने का दावा करता है, तो उसे इसके लिए सख्त मानकों को पूरा करना होगा। अदालत ने कहा कि केवल औपचारिक रूप से धर्म बदल लेने से SC का दर्जा स्वतः वापस नहीं मिलेगा।
इसके लिए यह साबित करना होगा कि व्यक्ति ने वास्तविक और सामाजिक रूप से भी उसी समुदाय में पुनः प्रवेश कर लिया है और उसे समाज द्वारा स्वीकार किया गया है। अदालत के अनुसार इस तरह के मामलों में तीन शर्तों का एक साथ पूरा होना जरूरी है।
जिनमें धर्म में वास्तविक वापसी उस धर्म के रीति-रिवाजों का पालन और संबंधित समुदाय द्वारा स्वीकृति शामिल है। जब तक ये सभी पहलू स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं होते। तब तक SC का दर्जा बहाल नहीं किया जा सकता।
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छत्तीसगढ़ पर बड़ा प्रभाव :
इन राज्यों में छत्तीसगढ़ सबसे पहले आता है जहां धर्मांतरण एक बड़ा मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसला का छत्तीसगढ़ बीजेपी ने स्वागत किया है। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण एक बड़ा मुद्दा रहा है। हाल ही में विधानसभा में बीजेपी सरकार ने धर्मांतरण रोकने के लिए नए कानून के मसौदे को पारित किया है।
इससे अब छत्तीसगढ़ में नए कानून के बनने का रास्ता साफ हो गया है। यहां पर यह मांग उठती रही है कि धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता अनुराग अग्रवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वगत योग्य है। अब इससे धर्मांतरण पर अंकुश लग सकेगा।
धर्मांतरण रोकने संघ भी सक्रिय :
धर्मांतरण पर सुप्रीम फैसला :
अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति एक साथ दो अलग-अलग दावों को नहीं रख सकता। यानी वह एक ओर गैर-निर्दिष्ट धर्म को माने और दूसरी ओर SC का दर्जा भी बनाए रखे। ऐसा करना संविधान की भावना के विपरीत है।
घर वापसी के कड़े मापदंड :
इसके लिए यह साबित करना होगा कि व्यक्ति ने वास्तविक और सामाजिक रूप से भी उसी समुदाय में पुनः प्रवेश कर लिया है और उसे समाज द्वारा स्वीकार किया गया है। अदालत के अनुसार इस तरह के मामलों में तीन शर्तों का एक साथ पूरा होना जरूरी है।
जिनमें धर्म में वास्तविक वापसी उस धर्म के रीति-रिवाजों का पालन और संबंधित समुदाय द्वारा स्वीकृति शामिल है। जब तक ये सभी पहलू स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं होते। तब तक SC का दर्जा बहाल नहीं किया जा सकता।
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