महाकाली नंदगिरी बनीं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर, जानें कौन है ये अघोरी साधिका
Jitendra Shrivastava | Mar 14, 2026, 17:45 IST
Photograph: (thesootr)
UJJAIN. महाकाली नंदगिरी, तेलंगाना की सबसे कम उम्र की अघोरी साधिका को किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर नियुक्त किया गया। अघोरी साधना और सनातन परंपरा के लिए जानी जाती हैं।
News In Short
- महाकाली नंदगिरी बनीं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर।
- अघोरी साधना से प्रसिद्ध महाकाली नंदगिरी की यात्रा।
- सनातन परंपरा के प्रचार में महाकाली नंदगिरी सक्रिय।
- महाकाली नंदगिरी का तंत्र साधना और अघोरी परंपरा से संबंध।
- अघोरी शब्द का सही अर्थ समझाती हैं महाकाली नंदगिरी।
News In Detail
महाकाली नंदगिरी का सफर
महाकाली नंदगिरी को किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाना एक ऐतिहासिक घटना है। इस फैसले के बाद उन्होंने उज्जैन मेंकहा कि लोग अक्सर अघोरी शब्द का गलत मतलब निकालते हैं। उनके अनुसार अघोरी केवल डर से मुक्त होकर आत्मिक उन्नति की ओर बढ़ने का मार्ग है। उन्होंने अपने साधना के अनुभवों के बारे में भी विस्तार से बताया।
गौ रक्षा के कार्य में सक्रिय
विवादों के बाद भी साधना जारी
अघोर साधना और इसका महत्व
नंदगिरी का कहना है कि इस साधना में साधक को अपने अंदर की शक्ति और डर से मुक्त होकर आध्यात्मिक उन्नति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
जानें अघोरी साधना के बारे में...
अघोरी साधना क्या है?
इस साधना का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के भीतर के डर और बंधनों को समाप्त करना और उसे सत्य, वैराग्य, और आत्मिक जागृति के मार्ग पर आगे बढ़ाना है। अघोर साधना के दौरान, साधक अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण पाता है और भूत, प्रेत, और अन्य अंधेरे शक्तियों से मुक्त हो जाता है।
अघोरी साधना कहां की जाती है?
काशी में गंगा नदी के किनारे अघोरी साधक अपनी साधना करते हैं। इसके अलावा, अन्य प्रमुख तांत्रिक स्थल जैसे कालसर्प पूजा स्थल और साधना के गुफाएं भी अघोरी साधकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
क्यों की जाती है अघोरी साधना?
अघोरी साधक अपने जीवन के उद्देश्य को समझने के लिए मृत्यु, जीवन और संसार के अदृश्य पहलुओं की खोज करते हैं। यह साधना उन्हें आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक शांति, और जीवन के सही उद्देश्य को समझने में मदद करती है। इसके अलावा अघोर परंपरा का उद्देश्य भौतिक और मानसिक शांति की प्राप्ति के साथ-साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। किन्नर अखाड़ा
FAQ
- महाकाली नंदगिरी को किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर क्यों बनाया गया?
महाकाली नंदगिरी को किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर इस कारण बनाया गया क्योंकि उन्होंने अघोर साधना और सनातन परंपरा के प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका नाम अघोरी साधिका के रूप में प्रसिद्ध है और वे गौ संरक्षण और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए कार्य कर रही हैं। - महाकाली नंदगिरी ने अघोर साधना कब शुरू की थी?
महाकाली नंदगिरी ने अघोर साधना की शुरुआत लगभग 18 साल पहले असम स्थित कामाख्या धाम से की थी। इसके बाद से वे लगातार अघोर साधना में संलग्न रही हैं और आज उन्हें 'लेडी अघोरी माता' के नाम से जाना जाता है।
इंदौर यशवंत क्लब के बाहर नगर निगम ने ढोल बजवा करवा दी मुनादी, 2.64 करोड़ संपत्ति कर बकाया
UGC के नए नियमों का विरोध: ब्राह्मण समाज रविवार को राजधानी में करेगा आंदोलन
दिव्यांगों से बोले विधायक पन्नालाल शाक्य; ट्राइसाइकिल भीख मांगने के लिए नहीं दी
PNG और LPG कनेक्शन: एक ही घर में हो सकते हैं दोनों कनेक्शन? जानें नए नियम
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari