दस बार स्टेट सर्विस में फेल हुए आईएएस अवनीश शरण, कहते हैं- सपनों की कोई सीमा नहीं होती
Anjali Dwivedi | Mar 12, 2026, 13:21 IST
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10वीं में मात्र 44% और 10 बार PCS में फेल, पर इरादे नहीं डगमगाए! बिहार के अवनीश शरण की कहानी साबित करती है कि आपकी मार्कशीट नहीं, बल्कि आपकी मेहनत और नेवर गिव अप एटीट्यूड आपको IAS बनाता है।
कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो कमजोर शुरुआत भी बड़ी मंजिल तक पहुंचा सकती है। बिहार के एक साधारण परिवार से निकलकर आईएएस अधिकारी अवनीश शरण ने यह साबित कर दिया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की शुरुआत होती है।
बिहार के रहने वाले अवनीश शरण ने अपनी शुरुआती पढ़ाई एक सरकारी स्कूल से की। पढ़ाई में वे कोई टॉपर नहीं थे। उनके 10वीं कक्षा में केवल 44.7 प्रतिशत अंक आए थे। अवनीश शरण कहते हैं- आमतौर पर इतने कम नंबर देखकर कई लोग अपने बड़े सपनों को छोड़ देते हैं, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया।
12वीं में मैंने 65 प्रतिशत अंक हासिल किए और ग्रेजुएशन में करीब 60 प्रतिशत नंबर आए। मैं जानता था कि मैं एक औसत छात्र हूं , लेकिन मन में एक बड़ा सपना था आईएएस अधिकारी बनने का।
UPSC की तैयारी शुरू करने के बाद भी उनका रास्ता आसान नहीं था। उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में हाथ आजमाया। सीडीएस (Combined Defence Services) परीक्षा दी। सीपीएफ (Central Police Forces) परीक्षा दी। राज्य पीसीएस प्रीलिम्स में कई बार प्रयास किया, लेकिन नतीजा हर बार निराशाजनक रहा। इतना ही नहीं, वे पीसीएस प्रीलिम्स में 10 बार असफल हुए। कई लोग यहां तक पहुंचकर हार मान लेते, लेकिन अवनीश शरण ने हार नहीं मानी।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा में भी उनका पहला प्रयास आसान नहीं रहा। पहली बार उन्होंने इंटरव्यू तक का सफर तय किया, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम नहीं आया। यह पल किसी के लिए भी बहुत निराशाजनक हो सकता था, लेकिन अवनीश ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
अवनीश शरण ने और अधिक मेहनत की और अंतत: अपने सपनों को साकार किया। कड़ी मेहनत, लगातार अभ्यास और मजबूत हौसले के साथ उन्होंने दोबारा परीक्षा दी। इस बार परिणाम आया तो उनकी ऑल इंडिया में रैंक 77 आई। साल 2009 में उनका आईएएस बनने का सपना सच हो गया।
साल 2009 में IAS बनने के बाद छत्तीसगढ़ कैडर से प्रशासनिक जिम्मेदारियां की शुरुआत हुई। एसडीएम और सीईओ जिला पंचायत के रूप में कई जिलों का काम- ग्रामीण विकास योजनाओं का संचालन किए। कलेक्टर- बलरामपुर-रामानुजगंज जिला, दुर्ग जिला, बिलासपुर, इन दोनों जिलों में प्रशासनिक सुधार, शिक्षा और सामाजिक योजनाओं को लेकर उनकी कार्यशैली चर्चा में रही। राज्य स्तर के प्रमुख पद आज अवनीश शरण एक सफल आईएएस अधिकारी हैं और छत्तीसगढ़ में अपनी प्रशासनिक सेवाएं दे रहे हैं। उनकी कहानी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। अवनीश शरण की सफलता यह बताती है कि-
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साधारण छात्र, लेकिन असाधारण सपना
12वीं में मैंने 65 प्रतिशत अंक हासिल किए और ग्रेजुएशन में करीब 60 प्रतिशत नंबर आए। मैं जानता था कि मैं एक औसत छात्र हूं , लेकिन मन में एक बड़ा सपना था आईएएस अधिकारी बनने का।
मेरी यात्रा:
10वीं : 44.7%
12वीं : 65%
ग्रैजूएशन: 60%
CDS : फेल
CPF: फेल
राज्य लोक सेवा आयोग: 10 से अधिक बार प्रारंभिक परीक्षा में फेल
UPSC सिविल सेवा परीक्षा :
1. प्रथम प्रयास में साक्षात्कार
2. दूसरे प्रयास में AIR 77
— Awanish Sharan 🇮🇳 (@AwanishSharan) July 22, 2022
असफलताओं की लंबी सूची
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यूपीएससी में भी पहली बार मिली निराशा
अवनीश शरण ने और अधिक मेहनत की और अंतत: अपने सपनों को साकार किया। कड़ी मेहनत, लगातार अभ्यास और मजबूत हौसले के साथ उन्होंने दोबारा परीक्षा दी। इस बार परिणाम आया तो उनकी ऑल इंडिया में रैंक 77 आई। साल 2009 में उनका आईएएस बनने का सपना सच हो गया।
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अवनीश शरण के करियर का टाइमलाइन
जिला स्तर की जिम्मेदारियां
कलेक्टर के रूप में पोस्टिंग
- कमिश्नर,
- डायरेक्टर,(DPI)
- राज्य शासन में सचिव / विशेष सचिव स्तर की जिम्मेदारियां
- वर्तमान जिम्मेदारी
- CEO आरडीए
आज छत्तीसगढ़ में दे रहे सेवा
- कम नंबर होना असफलता नहीं है
- बार-बार की हार भी अंतिम हार नहीं होती
- अगर लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता देर से सही लेकिन जरूर मिलती है
- 44% से आईएएस तक का यह सफर हमें सिखाता है कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती, बस हिम्मत नहीं टूटनी चाहिए।
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