सोशल मीडिया और शौक छोड़े बिना 23 साल की उम्र में IAS बने सिद्धार्थ पलानीचामी
Jageshwar prasad | Jun 14, 2026, 14:40 IST
आईएएस सिद्धार्थ पलानीचामी
राजस्थान कैडर के IAS सिद्धार्थ पलानीचामी ने संतुलित जीवनशैली अपनाकर UPSC क्रैक किया। NIT त्रिची से इंजीनियरिंग करने वाले सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया और शौक जारी रखते हुए पहले प्रयास में AIR 155 हासिल की।
जब कोई अभ्यर्थी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) की तैयारी शुरू करता है, तो सबसे पहली सलाह उसे अपने फोन से सोशल मीडिया ऐप्स डिलीट करने और खुद को एक कमरे में बंद करने की मिलती है। लेकिन आईएएस सिद्धार्थ पलानीचामी ने इस धारणा को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है।
उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ फिल्में देखना, टेनिस खेलना, क्रिकेट मैच का लुत्फ उठाना और इंस्टाग्राम व ट्विटर चलाना जारी रखा। उनके इसी संतुलित और व्यावहारिक एप्रोच ने उन्हें देश के सबसे युवा आईएएस अधिकारियों में से एक बना दिया।
सिद्धार्थ का बैकग्राउंड पूरी तरह से टेक्निकल रहा है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, तिरुचिरापल्ली (NIT Trichy) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक (B.Tech) की डिग्री पूरी की। कॉलेज के शुरुआती सालों तक उनका सिविल सेवा में आने का कोई इरादा नहीं था।
सिद्धार्थ को स्कूली दिनों से ही अखबार पढ़ने की आदत थी। बी.टेक के आखिरी साल में आते-आते उनकी रुचि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में बढ़ने लगी। उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर, महात्मा गांधी और कई वैश्विक नेताओं के विचारों और किताबों को पढ़ना शुरू किया।
जैसे-जैसे उनकी सामाजिक समझ बढ़ी, उन्हें अहसास हुआ कि समाज में जमीनी स्तर पर बदलाव लाने और देश की नीतियों को प्रभावित करने के लिए सिविल सर्विसेज से बेहतर और कोई विकल्प नहीं हो सकता। साथ ही, यह एक सुरक्षित और बेहतरीन करियर भी दे रहा था। ग्रेजुएशन के तुरंत बाद, उन्होंने दिल्ली जाकर एक साल तक पूरी शिद्दत से तैयारी की।
सिद्धार्थ ने साल 2019 की यूपीएससी परीक्षा में पॉलिटिकल साइंस और इंटरनेशनल रिलेशंस (PSIR) को अपना वैकल्पिक विषय चुना। इसके साथ ही उनकी रणनीति पारंपरिक रट्टा-मार पढ़ाई से बिल्कुल अलग थी।
सिद्धार्थ के अनुसार, उन्होंने तैयारी के दौरान इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह नहीं छोड़ा। इन प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे समसामयिक विमर्श, मीम्स और लोगों के अलग-अलग विचारों से उन्हें समाज की नब्ज समझने में मदद मिली।
खासकर यूपीएससी के एथिक्स के पेपर में विभिन्न दृष्टिकोणों से उत्तर लिखने में उन्हें इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से नया नजरिया मिला।
वे दिन-रात सिर्फ किताबों में डूबे नहीं रहते थे। वे पॉडकास्ट सुनते थे, अपना पसंदीदा टेनिस खेलते थे, सोशल मीडिया स्क्रोल करते थे और फिल्में भी देखते थे। उनका मानना था कि दिमाग को तरोताजा रखने से पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ती है, न कि उसकी अवधि।
उनकी इस स्मार्ट स्टडी और संतुलित दिनचर्या का परिणाम बेहद सुखद रहा। साल 2019 की परीक्षा के पहले ही प्रयास में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। उनके लिखित परीक्षा (Mains) में 796 अंक आए। इंटरव्यू में 190 अंक। इस प्रकार उन्होंने कुल 986 अंक प्राप्त किए।
ऑल इंडिया रैंक 155 के साथ वे मात्र 23 वर्ष की उम्र में देश के सबसे युवा आईएएस अधिकारियों की सूची में शामिल हो गए। उन्हें राजस्थान कैडर (2020 बैच) आवंटित किया गया।
आईएएस बनने के बाद सिद्धार्थ ने राजस्थान के विभिन्न जिलों में अपनी बेहतरीन प्रशासनिक सेवाएं दी हैं। उन्होंने बीकानेर में असिस्टेंट कलेक्टर और एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के रूप में फील्ड ट्रेनिंग पूरी की। इसके बाद वे भरतपुर और फिर सिरोही जिले के माउंट आबू में सब-डिवीजनल ऑफिसर (SDO/SDM) के पद पर तैनात रहे।
प्रशासनिक अनुभव को बढ़ाते हुए उन्होंने बाड़मेर जिले में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में ग्रामीण विकास और पंचायती राज के कार्यों को बेहद करीब से संभाला। वर्तमान में, वे बीकानेर के कमिश्नर (नगर निगम) के पद पर कार्यरत हैं।
![23 वर्षीय IAS सिद्धार्थ पलानीचामी ने संतुलित जीवनशैली अपनाकर UPSC क्रैक किया]()
सिद्धार्थ पलानीचामी की कहानी सिर्फ एक युवा IAS अधिकारी की कहानी नहीं है, यह उस सोच को चुनौती है जो कहती है कि बड़ी सफलता के लिए बड़े त्याग की जरूरत होती है।
सिद्धार्थ पलानीचामी कहते हैं कि मैंने कभी यह नहीं सोचा कि मुझे अपनी जिंदगी से वह सब हटा देना चाहिए जिसे मैं प्यार करता हूं। मैंने बस उन चीजों को पढ़ाई के साथ संतुलित किया और इसी संतुलन ने मुझे मंजिल तक पहुंचाया।
युवा पीढ़ी के लिए सिद्धार्थ एक मिसाल हैं कि आप अपने फोन में इंस्टाग्राम, ट्विटर रखते हुए भी देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर सकते हैं, बशर्ते आपको पता हो - कब, क्या, कितना और क्यों।
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उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ फिल्में देखना, टेनिस खेलना, क्रिकेट मैच का लुत्फ उठाना और इंस्टाग्राम व ट्विटर चलाना जारी रखा। उनके इसी संतुलित और व्यावहारिक एप्रोच ने उन्हें देश के सबसे युवा आईएएस अधिकारियों में से एक बना दिया।
एनआईटी त्रिची से इंजीनियरिंग
जब इंजीनियरिंग से बढ़ा सोशल अवेयरनेस की ओर रुझान
जैसे-जैसे उनकी सामाजिक समझ बढ़ी, उन्हें अहसास हुआ कि समाज में जमीनी स्तर पर बदलाव लाने और देश की नीतियों को प्रभावित करने के लिए सिविल सर्विसेज से बेहतर और कोई विकल्प नहीं हो सकता। साथ ही, यह एक सुरक्षित और बेहतरीन करियर भी दे रहा था। ग्रेजुएशन के तुरंत बाद, उन्होंने दिल्ली जाकर एक साल तक पूरी शिद्दत से तैयारी की।
सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल
सिद्धार्थ के अनुसार, उन्होंने तैयारी के दौरान इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह नहीं छोड़ा। इन प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे समसामयिक विमर्श, मीम्स और लोगों के अलग-अलग विचारों से उन्हें समाज की नब्ज समझने में मदद मिली।
खासकर यूपीएससी के एथिक्स के पेपर में विभिन्न दृष्टिकोणों से उत्तर लिखने में उन्हें इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से नया नजरिया मिला।
वे दिन-रात सिर्फ किताबों में डूबे नहीं रहते थे। वे पॉडकास्ट सुनते थे, अपना पसंदीदा टेनिस खेलते थे, सोशल मीडिया स्क्रोल करते थे और फिल्में भी देखते थे। उनका मानना था कि दिमाग को तरोताजा रखने से पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ती है, न कि उसकी अवधि।
पहली ही बार में ही सफलता
ऑल इंडिया रैंक 155 के साथ वे मात्र 23 वर्ष की उम्र में देश के सबसे युवा आईएएस अधिकारियों की सूची में शामिल हो गए। उन्हें राजस्थान कैडर (2020 बैच) आवंटित किया गया।
राजस्थान कैडर में प्रशासनिक सेवाएं
प्रशासनिक अनुभव को बढ़ाते हुए उन्होंने बाड़मेर जिले में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में ग्रामीण विकास और पंचायती राज के कार्यों को बेहद करीब से संभाला। वर्तमान में, वे बीकानेर के कमिश्नर (नगर निगम) के पद पर कार्यरत हैं।
सिद्धार्थ पलानीचामी की युवाओं को सलाह
23 वर्षीय IAS सिद्धार्थ पलानीचामी ने संतुलित जीवनशैली अपनाकर UPSC क्रैक किया
सिद्धार्थ पलानीचामी की कहानी सिर्फ एक युवा IAS अधिकारी की कहानी नहीं है, यह उस सोच को चुनौती है जो कहती है कि बड़ी सफलता के लिए बड़े त्याग की जरूरत होती है।
सिद्धार्थ पलानीचामी कहते हैं कि मैंने कभी यह नहीं सोचा कि मुझे अपनी जिंदगी से वह सब हटा देना चाहिए जिसे मैं प्यार करता हूं। मैंने बस उन चीजों को पढ़ाई के साथ संतुलित किया और इसी संतुलन ने मुझे मंजिल तक पहुंचाया।
युवा पीढ़ी के लिए सिद्धार्थ एक मिसाल हैं कि आप अपने फोन में इंस्टाग्राम, ट्विटर रखते हुए भी देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर सकते हैं, बशर्ते आपको पता हो - कब, क्या, कितना और क्यों।
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