कभी खराब अंग्रेजी के लिए बना मजाक, बाद में उसको ही बनाया ताकत और बन गईं आईएएस सुरभि गौतम

Abhilasha Saksena Chakraborty | Feb 01, 2026, 14:49 IST
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IAS Surbhi Gautam
IAS Surbhi Gautam

अंग्रेजी नहीं आने के कारण एक समय कॉलेज में मजाक का सामना करना पड़ता था, लेकिन, सुरभि गौतम में उससे हार नहीं मानी। आईएएस बनने के पहले इसरो, बार्क और आईएस जैसी कई परीक्षाएं पास करने वाली सुरभि गौतम आज देशभर की बेटियों के लिए प्रेरणा हैं।

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा ( UPSC ) को अक्सर अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों की परीक्षा माना जाता है। कई बार हिंदी पृष्ठभूमि से आने वाले उम्मीदवार अंग्रेजी के डर से अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। हालांकि मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर आईएएस सुरभि गौतम ने इस सोच को पूरी तरह गलत साबित कर दिया।साल 2016 में ऑल इंडिया रैंक 50 हासिल कर उन्होंने यह दिखा दिया कि भाषा कभी भी काबिलियत से बड़ी नहीं होती।

गांव से सपनों की शुरुआत

सुरभि गौतम मध्य प्रदेश के सतना जिले के अमदरा गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता मैहर सिविल कोर्ट में वकील हैं, जबकि मां डॉ सुशीला गौतम एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका रहीं। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद घर में शिक्षा को लेकर गंभीर माहौल था।
सुरभि की शुरुआती पढ़ाई गांव के हिंदी माध्यम स्कूल से हुई, जहां न संसाधन पर्याप्त थे और न ही शैक्षणिक सुविधाएं। कई बार उन्हें लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ी, लेकिन हालात कभी उनके हौसले पर भारी नहीं पड़े।

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बचपन से ही मेधावी छात्रा

सुरभि शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहीं। कक्षा पांचवीं की बोर्ड परीक्षा में उन्होंने गणित में पूरे अंक हासिल किए, जो उस समय अपने आप में एक रिकॉर्ड माना गया।
दसवीं बोर्ड परीक्षा में उन्होंने 93.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और यहीं से उनके मन में कलेक्टर बनने का सपना स्पष्ट होने लगा। दसवीं के बाद उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सेवा में जाना है।

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बीमारी भी नहीं रोक पाई हौसले को

पढ़ाई के दौरान सुरभि रूमेटिक फीवर जैसी गंभीर बीमारी से भी जूझीं। हर 15 दिन में उन्हें गांव से करीब 120 किलोमीटर दूर जबलपुर इलाज के लिए ले जाया जाता था। बता दें कि रूमेटिक फीवर एक गंभीर सूजन संबंधी बीमारी है जो मुख्य रूप से बच्चों में होती है। तेज दर्द, बुखार और हाई-डोज इंजेक्शन के बावजूद सुरभि ने पढ़ाई नहीं छोड़ी।यह दौर उनके जीवन की सबसे कठिन परीक्षा था, लेकिन यहीं से उनकी मानसिक मजबूती और आत्मअनुशासन और निखरकर सामने आया।

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इंजीनियरिंग और नई चुनौती: अंग्रेजी

12वीं के बाद सुरभि ने स्टेट इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम पास किया और भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया।
कॉलेज पहुंचते ही उन्हें सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा- अंग्रेजी भाषा। हिंदी माध्यम से पढ़ी होने के कारण न सिर्फ उन्हें बोलने में दिक्कत होती थी, बल्कि कई बार मजाक का भी सामना करना पड़ा।

एक समय ऐसा भी आया जब अंग्रेजी में सवाल न समझ पाने पर उनकी योग्यता पर सवाल उठाए गए। यह पल उन्हें तोड़ सकता था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को बदलने का फैसला किया।

अंग्रेजी को कमजोरी नहीं, ताकत बनाया

सुरभि ने अंग्रेजी से डरने के बजाय उसे सीखने का रास्ता चुना। इसके लिए उन्होंनें हर दिन 5-10 नए अंग्रेजी शब्द सीखना, शब्दों की पर्चियां बनाकर कमरे में चिपकाना, खुद से अंग्रेजी में बात करने की आदत डालना, किताबों से स्पेलिंग और ग्रामर पर काम करना जैसे काम किए।

लगातार अभ्यास का नतीजा यह हुआ कि पहले ही सेमेस्टर में उन्होंने पूरी यूनिवर्सिटी में टॉप किया और गोल्ड मेडल हासिल किया। आज वे खुद कहती हैं कि उनके सपने भी अंग्रेजी में आते हैं।

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बिना कोचिंग पाई कई परीक्षाओं में सफलता

सुरभि ने कभी किसी विषय के लिए कोचिंग नहीं ली। उन्होंने सेल्फ स्टडी को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने कई कठिन परीक्षाएं पास कीं। ISRO में ऑल इंडिया सेकेंड रैंक हासिल की। BARC में भी उन्होंने न्यूक्लियर साइंटिस्ट के रूप में काम किया। IES में ऑल इंडिया फर्स्ट रैंक हासिल की।

पहले ही प्रयास में IAS बनने का सपना हुआ साकार

लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सुरभि गौतम ने 2016 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 50 हासिल की और आईएएस अधिकारी बनीं। खास बात यह है किउनके अंक बताते हैं कि वे सिर्फ मेहनती ही नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद मजबूत उम्मीदवार थीं।

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यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए टिप्स

ऑप्शनल विषय का स्मार्ट चयन: ऐसा ऑप्शनल चुनें, जिस पर आपकी अच्छी पकड़ हो। सुरभि ने अपनी बीटेक की पढ़ाई का लाभ उठाने के लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को ऑप्शनल चुना। सिर्फ ट्रेंड में चल रहे विषयों को तब तक न चुनें, जब तक आप उन्हें कम समय में पूरी तरह साध न सकें। फोकस्ड स्टडी और रिवीजन: कम लेकिन जरूरी किताबों पर टिके रहें और उन्हें बार-बार दोहराएं। सुरभि ने प्रीलिम्स और मेंस से पहले 3-2-1 रिवीजन लूप अपनाया, जिससे तथ्यों और कॉन्सेप्ट्स पर मजबूत पकड़ बनी। आंसर राइटिंग प्रैक्टिस: उत्तरों को हमेशा परिचय, उपशीर्षक, डायग्राम और संतुलित निष्कर्ष के साथ लिखने पर जोर देती थीं।

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करियर एक नज़र

  • नाम: आईएएस सुरभि गौतम
  • जन्म:
  • जन्मस्थान: अमदरा गांव, सतना (मध्य प्रदेश)
  • एजुकेशन: बीटेक
  • बैच: 2017
  • कैडर: गुजरात

पदस्थापना

सुरभि गौतम वर्तमान में वडोदरा में रीजनल कमिश्नर ऑफ म्यूसिपैलिटीज हैं। इसके पहले वो असिस्टेंट कलेक्टर वडोदरा और जिला विकास अधिकारी विरमगाम, अहमदाबाद रह चुकी हैं।

सुरभि गौतम आज उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा हैं, जो यह मान लेते हैं कि अंग्रेजी न आना उनकी यह कमजोरी है। वे गर्व से कहती हैं कि पहली से बारहवीं तक उनकी पढ़ाई हिंदी माध्यम से हुई, और यही उनकी पहचान है। वो मानती हैं कि भाषा नहीं, असली बाधा सोच बनती है।

सुरभि मानती हैं कि सपने देखने के पैसे नहीं लगते। अगर आप खुद पर भरोसा रखते हैं और लगातार मेहनत करते हैं तो सफलता मिलना तय है।

FAQ

  1. सुरभि गौतम ने यूपीएससी किस वर्ष और किस रैंक के साथ पास की?
    सुरभि गौतम ने 2016 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 50 हासिल कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना साकार किया।
  2. क्या सुरभि गौतम हिंदी माध्यम से पढ़ी हुई हैं?
    हां, सुरभि गौतम ने पहली से बारहवीं तक की पढ़ाई हिंदी माध्यम से की है और वे गर्व से अपनी हिंदी पृष्ठभूमि को अपनी ताकत मानती हैं।
  3. सुरभि गौतम का ऑप्शनल विषय क्या था?
    सुरभि गौतम ने अपनी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि का लाभ उठाते हुए इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को यूपीएससी में ऑप्शनल विषय के रूप में चुना।




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