असफलताओं से मिला कामयाबी का सूत्र, फिर आईएएस जसमीत सिंह संधू बन गए टॉपर
Jageshwar prasad | May 15, 2026, 18:15 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान कैडर के आईएएस जसमीत सिंह संधू का आईएएस बनने का सफर रोचक है। आईआईटी रुड़की से ग्रेजुएट जसमीत सिंह संधू ने लगातार तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में यूपीएससी में तीसरी रैंक हासिल की।
संघर्ष की भट्टी में तपकर ही व्यक्तित्व में निखार आता है, और इस बात को चरितार्थ किया है साल 2015 के यूपीएससी टॉपर जसमीत सिंह संधू ने।
जब हम सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते हैं, तो अक्सर दो-तीन असफलताओं के बाद हिम्मत हारने लगते हैं। लेकिन जसमीत की कहानी हमें सिखाती है कि यदि इरादे फौलादी हों और गलतियों से सीखने का जज्बा हो, तो देश की सबसे कठिन परीक्षा में टॉप-3 में जगह बनाना मुमकिन है।
आज के इस लेख में हम जसमीत सिंह संधू के शुरुआती जीवन, उनकी संघर्षपूर्ण तैयारी, उनकी सटीक रणनीति और वर्तमान में एक कुशल प्रशासक के रूप में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
जसमीत सिंह संधू का जन्म पंजाब के लुधियाना में हुआ। उनकी शुरुआती शिक्षा लुधियाना के ही सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल से हुई। वे बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी थे, जिसका परिणाम यह रहा कि उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT रुड़की से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।
तकनीकी पृष्ठभूमि से होने के बावजूद, उनके मन में समाज के लिए कुछ बड़ा करने की इच्छा थी, जिसने उन्हें यूपीएससी की ओर प्रेरित किया।
जसमीत का यूपीएससी सफर कोई शॉर्टकट नहीं था। उन्होंने साल 2010 में अपनी तैयारी शुरू की थी। शुरुआत के दो प्रयासों में उन्हें असफलता का स्वाद चखना पड़ा। कई बार ऐसी स्थिति में छात्र अपना रास्ता बदल लेते हैं, लेकिन जसमीत ने हार नहीं मानी।
साल 2014 में अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने 332वीं रैंक हासिल की। उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए हुआ। अधिकांश लोग आईआरएस की नौकरी मिलने के बाद संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन जसमीत की आंखों में IAS बनने का सपना था।
जब वे फरीदाबाद में आईआरएस की ट्रेनिंग कर रहे थे, उसी दौरान उन्होंने अपने चौथे और अंतिम प्रयास की तैयारी जारी रखी।
![दृढ़ता की कहानी: जसमीत संधू, रैंक 3 - सिविल्सडेली]()
चौथे प्रयास में जसमीत ने वो कर दिखाया जिसकी कल्पना हर अभ्यर्थी करता है। उन्होंने न केवल परीक्षा पास की, बल्कि ऑल इंडिया रैंक 3 (AIR-3) हासिल की।
यह सफलता उनके धैर्य और निरंतरता का परिणाम थी। खास बात यह है कि इसी साल (2015) की टॉपर टीना डाबी और अतहर आमिर खान उनके बैचमेट रहे।
जसमीत की सफलता के पीछे कोई जादुई फॉर्मूला नहीं था, बल्कि उनकी अपनी बनाई हुई कुछ खास रणनीतियां थीं:
कोचिंग के बिना तैयारी: जसमीत ने पूरी तैयारी सेल्फ की। उन्होंने केवल एक महीने के लिए कोचिंग का सहारा लिया था, वह भी केवल कुछ बुनियादी समझ विकसित करने के लिए।
कोई कठोर टाइम-टेबल नहीं: वे घंटों के हिसाब से नहीं पढ़ते थे। उनका मानना था कि जब भी पढ़ें, पूरी तन्मयता और एकाग्रता के साथ पढ़ें। उनके लिए क्वालिटी पढ़ाई क्वांटिटी से ज्यादा महत्वपूर्ण थी।
वैकल्पिक विषय का चुनाव: यह उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था। पहले दो प्रयासों में उन्होंने साइकोलॉजी और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन रखा था, जिसमें वे असफल रहे। चौथे प्रयास में उन्होंने अपनी जड़ों की ओर रुख किया और पंजाबी लिटरेचर को वैकल्पिक विषय चुना, जिसने उन्हें टॉपर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।
मॉक टेस्ट और सुधार: सिलेबस खत्म करने के बाद वे नियमित मॉक टेस्ट देते थे। वे अपनी गलतियों को एक डायरी में नोट करते थे और सुनिश्चित करते थे कि परीक्षा के दिन वही गलती दोबारा न हो।
2016 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी के रूप में जसमीत सिंह संधू ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वर्तमान में वे भीलवाड़ा के जिला कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
जब राजस्थान में नए जिलों का गठन हुआ, तो अगस्त 2023 में उन्हें फलौदी जिले की कमान सौंपी गई। वे फलौदी के पहले कलेक्टर बने। एक नए जिले की बुनियादी संरचना तैयार करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।
सलूम्बर कलेक्टर के रूप में उनका कार्यकाल मील का पत्थर साबित हुआ। उन्होंने दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संबल अभियान चलाया।
उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें 'The Indian Express' द्वारा एक्सीलेंस इन गवर्नेंस अवार्ड और राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से भी नवाजा गया है।
उन्होंने अलवर और जयपुर जिला परिषद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में भी बेहतरीन कार्य किया है।
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व्यक्तिगत जीवन
आईएएस जसमीत सिंह संधू का व्यक्तिगत जीवन भी उतना ही प्रेरणादायक है। उन्होंने आईएएस अर्तिका शुक्ला से शादी की है। दिलचस्प बात यह है कि साल 2015 की परीक्षा में जहां जसमीत ने तीसरी रैंक पाई थी, वहीं अर्तिका ने चौथी रैंक हासिल की थी। दोनों ही अधिकारी अपनी सादगी और नैतिकता के लिए जाने जाते हैं।
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जब हम सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते हैं, तो अक्सर दो-तीन असफलताओं के बाद हिम्मत हारने लगते हैं। लेकिन जसमीत की कहानी हमें सिखाती है कि यदि इरादे फौलादी हों और गलतियों से सीखने का जज्बा हो, तो देश की सबसे कठिन परीक्षा में टॉप-3 में जगह बनाना मुमकिन है।
आज के इस लेख में हम जसमीत सिंह संधू के शुरुआती जीवन, उनकी संघर्षपूर्ण तैयारी, उनकी सटीक रणनीति और वर्तमान में एक कुशल प्रशासक के रूप में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा का आधार
तकनीकी पृष्ठभूमि से होने के बावजूद, उनके मन में समाज के लिए कुछ बड़ा करने की इच्छा थी, जिसने उन्हें यूपीएससी की ओर प्रेरित किया।
असफलताओं का दौर और गिरकर संभलने की कला
साल 2014 में अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने 332वीं रैंक हासिल की। उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए हुआ। अधिकांश लोग आईआरएस की नौकरी मिलने के बाद संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन जसमीत की आंखों में IAS बनने का सपना था।
जब वे फरीदाबाद में आईआरएस की ट्रेनिंग कर रहे थे, उसी दौरान उन्होंने अपने चौथे और अंतिम प्रयास की तैयारी जारी रखी।
दृढ़ता की कहानी: जसमीत संधू, रैंक 3 - सिविल्सडेली
जब रच दिया इतिहास
यह सफलता उनके धैर्य और निरंतरता का परिणाम थी। खास बात यह है कि इसी साल (2015) की टॉपर टीना डाबी और अतहर आमिर खान उनके बैचमेट रहे।
जसमीत सिंह संधू की अनूठी रणनीति
कोचिंग के बिना तैयारी: जसमीत ने पूरी तैयारी सेल्फ की। उन्होंने केवल एक महीने के लिए कोचिंग का सहारा लिया था, वह भी केवल कुछ बुनियादी समझ विकसित करने के लिए।
कोई कठोर टाइम-टेबल नहीं: वे घंटों के हिसाब से नहीं पढ़ते थे। उनका मानना था कि जब भी पढ़ें, पूरी तन्मयता और एकाग्रता के साथ पढ़ें। उनके लिए क्वालिटी पढ़ाई क्वांटिटी से ज्यादा महत्वपूर्ण थी।
वैकल्पिक विषय का चुनाव: यह उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था। पहले दो प्रयासों में उन्होंने साइकोलॉजी और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन रखा था, जिसमें वे असफल रहे। चौथे प्रयास में उन्होंने अपनी जड़ों की ओर रुख किया और पंजाबी लिटरेचर को वैकल्पिक विषय चुना, जिसने उन्हें टॉपर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।
मॉक टेस्ट और सुधार: सिलेबस खत्म करने के बाद वे नियमित मॉक टेस्ट देते थे। वे अपनी गलतियों को एक डायरी में नोट करते थे और सुनिश्चित करते थे कि परीक्षा के दिन वही गलती दोबारा न हो।
एक कुशल प्रशासक
जब राजस्थान में नए जिलों का गठन हुआ, तो अगस्त 2023 में उन्हें फलौदी जिले की कमान सौंपी गई। वे फलौदी के पहले कलेक्टर बने। एक नए जिले की बुनियादी संरचना तैयार करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।
सलूम्बर कलेक्टर के रूप में उनका कार्यकाल मील का पत्थर साबित हुआ। उन्होंने दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संबल अभियान चलाया।
उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें 'The Indian Express' द्वारा एक्सीलेंस इन गवर्नेंस अवार्ड और राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से भी नवाजा गया है।
उन्होंने अलवर और जयपुर जिला परिषद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में भी बेहतरीन कार्य किया है।
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व्यक्तिगत जीवन
आईएएस जसमीत सिंह संधू का व्यक्तिगत जीवन भी उतना ही प्रेरणादायक है। उन्होंने आईएएस अर्तिका शुक्ला से शादी की है। दिलचस्प बात यह है कि साल 2015 की परीक्षा में जहां जसमीत ने तीसरी रैंक पाई थी, वहीं अर्तिका ने चौथी रैंक हासिल की थी। दोनों ही अधिकारी अपनी सादगी और नैतिकता के लिए जाने जाते हैं।
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