हर तीसरा GenZ कर्ज में, 22 साल की उम्र में शुरू हो रहा लोन
Manya Jain | Aug 17, 2026, 13:07 IST
gen z unsecured loan rbi warning
भारत में GenZ तेजी से कर्ज के जाल में फंस रहे हैं। एक क्लिक में मिलने वाले पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड से युवा कॉन्सर्ट व लाइफस्टाइल खर्च पूरे कर रहे हैं।
एक क्लिक में आ गया पैसा और फिर…
आज उसके पास दो क्रेडिट कार्ड हैं और एक चालू पर्सनल लोन। हर महीने EMI और मिनिमम ड्यू मिलाकर करीब 9 हजार रुपए कटते हैं। यानी सैलरी का करीब 28% हिस्सा।
सोचिए एक बार। इतनी छोटी उम्र में इतना बड़ा हिस्सा सिर्फ कर्ज चुकाने में जा रहा है।
स्नेहा कहती है, लोन लेते वक्त ऐप पर एक क्लिक में पैसा आ गया, किसी ने समझाया नहीं कि EMI मिलाकर बोझ कितना बढ़ जाएगा। उसकी कहानी उस बड़े ट्रेंड से मेल खाती है जिसमें 35 साल से कम उम्र के कर्जदार देश की क्रेडिट एक्टिव आबादी का 39% बन चुके हैं।
मंगेतर पर इंप्रेशन जमाने कर्ज लिया, अब छह महीने से चुका रहा
बिल आया तो रकम अनुमान से करीब दोगुनी निकली। अर्जुन ने पूरा एकसाथ चुकाने के बजाय मिनिमम ड्यू भरना शुरू किया। और यही वो मोड़ था, जहां से ब्याज हर महीने बढ़ने लगा।
अब आते हैं असली सवाल पर। छह महीने बाद भी वो बिल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अर्जुन कहता है कि उसे कभी नहीं लगा कि एक ट्रिप की वजह से इतने लंबे समय तक ब्याज चुकाना पड़ेगा। उसकी स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी RBI की रिपोर्ट में अनसिक्योर्ड लोन के बढ़ते NPA के पीछे झलकती है।
सोचिए एक बार। हर दूसरा रुपया, जो एक भारतीय परिवार कर्ज के तौर पर लेता है, अब घर बनाने में नहीं, बल्कि रोजमर्रा के खर्च, कार्ड बिल या छोटी-मोटी शौक पूरी करने में जा रहा है। बड़ी चिंता ये है कि Buy Now- Pay later का सबसे बड़ा शिकार और कोई नहीं GenZ है।
यह आपसे क्यों जुड़ा है?
पहले क्या था
फिर UPI आया, डिजिटल लेंडिंग ऐप्स आए और बैंक खाता खोलने से लेकर लोन मिलने तक का पूरा रास्ता मोबाइल फोन में सिमट गया। यहीं से मामला पलटता है। कर्ज लेना अब मुश्किल काम नहीं रहा, बल्कि एक क्लिक की दूरी पर आ गया।
क्या हुआ और क्यों
genz expenses emi
यहां एक आसान उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आपके पड़ोस में सौ लोग हैं जिनके पास लोन लेने की योग्यता है। दस साल पहले इनमें से सिर्फ ग्यारह लोगों पर कोई कर्ज चलता था। आज अट्ठाईस लोगों पर चलता है। और इन अट्ठाईस में से बड़ा हिस्सा तीस साल से कम उम्र के लोगों यानी GenZ का है। यही वो बदलाव है जिस पर RBI की नजर टिकी है।
सबसे ज्यादा 50 हजार तक के लोन
क्या सुरक्षित भी है क्विक लोन
Buy Now- Pay Later: म्यूजिक कॉन्सर्ट पर हुए खर्च किए 2,000 करोड़
genz buy now pay later trend
एयरबीएनबी के जनवरी 2026 के सर्वे में सामने आया कि 62% युवा इस साल किसी कॉन्सर्ट या फेस्टिवल के लिए यात्रा की योजना बना रहे थे। 76% ने माना कि वे पहली बार किसी शहर में सिर्फ किसी इवेंट के लिए गए। इनका औसत खर्च करीब 51 हजार रुपए प्रति ट्रिप रहा।
दस में से छह युवा यात्री अपनी महीने की कमाई का 21 से 40% हिस्सा सिर्फ म्यूजिक-लेड ट्रैवल और अनुभवों पर खर्च करने को तैयार थे। दस में से एक तो आधी कमाई तक झोंकने को तैयार था।
कौन-कौन involved है
दोनों sides की बात
एक क्रेडिट ब्यूरो के अधिकारी के मुताबिक, असली सवाल यह नहीं कि कर्ज बढ़ रहा है, बल्कि यह कि क्या यह जरूरत आधारित है और कर्जदार की चुकाने की क्षमता कितनी परखी जा रही है।
दूसरी तरफ, कुछ अर्थशास्त्री इसे हल्के में लेने से बचने की सलाह देते हैं। एक अर्थशास्त्री, जो नाम उजागर नहीं करना चाहते, कहते हैं कि उपभोग के लिए बढ़ता कर्ज नीति-निर्माताओं की चर्चाओं में बार-बार आता रहा है, खासकर 2022 और 2023 के दौरान इसने ज्यादा चिंता खड़ी की थी। फिलहाल रकम छोटी होने की वजह से इसे बहुत गंभीर नहीं माना जा रहा, लेकिन बढ़ती संख्या पर नजर बनी हुई है।
MP का कनेक्शन
यानी छोटे शहरों और कस्बों से भी अब लोग औपचारिक कर्ज व्यवस्था में तेजी से जुड़ रहे हैं, वही रफ्तार जो देशभर में जेन जी और युवा कर्जदारों में दिख रही है।
TransUnion CIBIL के MD और CEO भावेश जैन के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार वे तीन राज्य रहे जहां क्रेडिट ग्रोथ सबसे तेज रही।
आगे क्या होगा
फिलहाल RBI इसे संकट नहीं मान रहा, लेकिन निगरानी बढ़ा रहा है। अगर आने वाले महीनों में नौकरियों की रफ्तार धीमी पड़ी या ब्याज दरें बढ़ीं, तो कम उम्र के कर्जदारों पर दबाव तेजी से दिख सकता है। लंबे समय में सवाल यह भी है कि क्या फिनटेक कंपनियों पर अंडरराइटिंग के नियम और सख्त होंगे, और क्या युवा उपभोक्ता कमाई के मुकाबले बचत की आदत वापस अपनाएंगे।
एक बात जो आप नहीं जानते थे
और यही वो moment है जहां पूरी तस्वीर बदल जाती है।
अब आप क्या करें: अपने घर के 20-30 साल के सदस्यों से कार्ड और लोन की कुल EMI देखें, न कि सिर्फ मासिक किस्त।
क्यों अभी: छोटे-छोटे अनसिक्योर्ड लोन मिलकर बड़ा बोझ बना सकते हैं, और इनका असर सिबिल स्कोर पर सीधा पड़ता है।
आगे देखें: RBI की अगली फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट, जो आम तौर पर दिसंबर में आती है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
FAQ
- जेन जी में अनसिक्योर्ड लोन इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा है?
डिजिटल लेंडिंग ऐप्स से लोन लेना अब बेहद आसान हो गया है। कॉन्सर्ट, ट्रैवल और लाइफस्टाइल खर्च के लिए युवा बचत की जगह कर्ज को प्राथमिकता दे रहे हैं। - क्या RBI ने इसे खतरा बताया है?
RBI ने इसे तुरंत का जोखिम नहीं बल्कि करीबी निगरानी की जरूरत वाला मामला बताया है, खासकर निचली रेटिंग वाले कर्जदारों के लिए। - क्या मध्य प्रदेश में भी यह ट्रेंड दिख रहा है?
हां, देश की क्रेडिट एक्टिव आबादी में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 2017 से 2026 के बीच 4% से बढ़कर 6% हो गई है।
Gen Z Shopping Trends: भारत में जेन जी चला रहे ऑनलाइन फैशन का बाजार
कहां जाती है जेन ज़ी की सैलरी? डेटा ने राज खोला
मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी छीनने वाले जेन जी क्या वाकई 2029 के किंगमेकर बनेंगे?
MP में जेन-जी के लिए बंपर जॉब्स: सरकार लाएगी 1 लाख नौकरियां, पेपर लीक पर लगेगी रोक
देश में मानसून की बेरुखी से 51% हिस्से में सूखे का संकट: खरीफ फसलों पर मार, बढ़ सकती है महंगाई और आम आदमी की मुश्किलें
By Aman Vaishnav, CHAKRESH
Live |उज्जैन में मस्जिद हटाने पर बवाल
By
राजस्थान नगर निगम चुनाव में BJP का दबदबा
By
गंगरेल बांध का विकराल रूप, खोले गए सभी 14 गेट, महानदी में बढ़ा जलस्तर
By
छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का असर: महादेव घाट पुल डूबा, शबरी पर बढ़ा खतरा; कई रास्तों पर आवाजाही बंद
By Umeshwari Baghel
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अक्टूबर से बदलेगा पढ़ाई का तरीका, कठिन विषयों की होंगी लाइव ऑनलाइन क्लास
By Harrison Masih
31 साल का साथ, फिर शादी पर उठे सवाल, ग्वालियर हाईकोर्ट ने दिलाया पत्नी होने का हक
By Sanjay Dhiman