नॉर्वे कार्टून विवाद: एक कार्टून में छुपे तीन बड़े सवाल
Pawan Modiya | May 20, 2026, 20:43 IST
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नॉर्वे के अखबार आफ्टेनपोस्टेन ने पीएम मोदी को सपेरे के रूप में दिखाया। इसमें पेट्रोल पाइप को सांप बताया गया। दरअसल यह कार्टून नस्लवाद, प्रेस फ्रीडम और भारत की ऊर्जा नीति तीनों पर एक साथ बड़े सवाल खड़े करता है। आइए समझते हैं कैसे...
समझें क्या है पूरा मामला
- पीएम मोदी के नॉर्वे दौरे से पहले वहां के अखबार आफ्टेनपोस्टेन (Aftenposten) ने उन्हें सपेरे के रूप में दिखाने वाला कार्टून छापा।
- उस कार्टून में पेट्रोल पंप की पाइप को सांप की जगह दिखाया गया था।
- नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने मोदी से प्रेस फ्रीडम पर सवाल पूछा, जिसके बाद उनके सोशल मीडिया अकाउंट सस्पेंड हो गए।
- भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर तीखा जवाब दिया।
- इस एक घटना में नस्लवाद, प्रेस की आजादी और ऊर्जा राजनीति तीनों धागे एक साथ उलझे हुए हैं।
कार्टून की पूरी कहानी क्या है?
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पीएम नरेंद्र मोदी 15 से 20 मई 2026 के बीच पांच देशों के दौरे पर थे। यूएई (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली इस दौरे के पड़ाव थे। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचने से कुछ घंटे पहले वहां के सबसे बड़े अखबारों में से एक आफ्टेनपोस्टेन ने अपने संपादकीय पन्ने पर एक कार्टून Cartoon छापा।
उस कार्टून में मोदी को जमीन पर बैठकर बीन बजाते हुए दिखाया गया। उनके सामने सांप की जगह एक पेट्रोल पंप की फ्यूल पाइप ऊपर उठते हुए बनाई गई थी। कार्टून के साथ लेख की हेडलाइन थी, "A clever and slightly annoying man" यानी "एक चालाक और थोड़ा परेशान करने वाला आदमी।" लेख में चर्चा थी कि भारत की नजर नॉर्डिक देशों पर क्यों है।
कार्टून वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। बड़ी संख्या में यूजर्स ने इसे नस्लवादी बताया। एक्स पर एक यूजर ने लिखा कि यह पत्रकारिता नहीं, बल्कि औपनिवेशिक काल की सोच है, जो कमेंट के रूप में परोसी जा रही है। एक अन्य यूजर प्रद्युम्न ने लिखा कि पीएम मोदी खुद दशकों से उस "सपेरों की भूमि" वाली छवि से लड़ते रहे हैं और ओस्लो में एक बड़े अखबार ने उन्हें ठीक उसी रूप में दिखाया।
सपेरे वाली छवि आई कहां से?
पीएम मोदी ने 2014 में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में इस छवि का सीधे जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि दुनिया कभी भारत को "स्नेक चार्मर्स" (Snake Charmers) यानी सपेरों का देश कहती थी, लेकिन आज भारत आईटी (Information Technology) और टेक्नोलॉजी की ताकत बन गया है।
यह पहली बार नहीं हुआ। अक्टूबर 2022 में स्पेन के अखबार ला वैनगार्डिया (La Vanguardia) ने भारत की आर्थिक तरक्की पर रिपोर्ट में सपेरे का चित्र इस्तेमाल किया था। उस वक्त भी जोरदार विरोध हुआ था। आलोचकों का कहना है कि यह "रेशियल स्टीरियोटाइपिंग" (Racial Stereotyping) यानी नस्लीय रूढ़िवादिता का साफ उदाहरण है।
पेट्रोल पाइप सांप क्यों बना?
मोदी का यह दौरा मुख्यतः ऊर्जा सुरक्षा के मकसद से था। ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास बाधाओं की वजह से 2026 में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही थीं। भारत अपनी लगभग 85 फीसद कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी।
नॉर्वे तेल और गैस का बड़ा उत्पादक देश है। नॉर्डिक शिखर सम्मेलन (Nordic Summit) में ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और ब्लू इकॉनमी (Blue Economy) पर चर्चा होनी थी। कार्टून में पेट्रोल पाइप को सांप बनाना दरअसल भारत की ऊर्जा जरूरत पर एक व्यंग्य था, यानी यह कहने की कोशिश थी कि भारत तेल के लिए "बीन बजा रहा है।"
इन देशों में पेट्रोल की कीमत क्या है?
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नॉर्वे में पेट्रोल की कीमत करीब 22 नॉर्वेजियन क्रोन (NOK) प्रति लीटर यानी लगभग 170 से 175 रुपए प्रति लीटर है। नीदरलैंड यूरोपीय संघ में सबसे महंगा पेट्रोल वाला देश है, जहां कीमत करीब 2.34 यूरो प्रति लीटर यानी करीब 215 रुपए के आसपास पड़ती है। स्वीडन में यह कीमत करीब 2.15 यूरो प्रति लीटर यानी करीब 197 रुपए है। इटली में पेट्रोल का रेट लगभग 1.84 यूरो प्रति लीटर है जो लगभग 168 रुपए के बराबर है।
तुलना के लिए भारत में मई 2026 में पेट्रोल की कीमतें बड़े शहरों में करीब 97 से 105 रुपए प्रति लीटर के आसपास हैं, हालांकि 15 मई को 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी थी। यानी जिन देशों से मोदी ऊर्जा सहयोग लेने गए, वे खुद तेल के दाम भारत से दोगुना से भी ज्यादा चुकाते हैं।
कारण यह है कि नॉर्वे जैसे देश तेल उत्पादक होने के बावजूद ईंधन पर भारी टैक्स लगाते हैं। इसके पीछे मकसद है लोगों को कम ईंधन जलाने और इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) की तरफ धकेलना। नॉर्वे में पेट्रोल और डीजल पर रोड यूज टैक्स (Road Use Tax), CO2 टैक्स और 25 फीसद वैट (VAT) लगता है। नीदरलैंड में पेट्रोल इसीलिए सबसे महंगा है क्योंकि एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) सबसे ऊंची है।
यानी कार्टून की विडंबना यह है कि भारत जिस देश से ऊर्जा सहयोग माँगने गया, वह देश खुद पेट्रोल के लिए भारत से दोगुने दाम चुकाता है।
पत्रकार हेले लिंग का मामला
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नॉर्वे के अखबार डागसावीसेन (Dagsavisen) की पत्रकार और कमेंटेटर हेले लिंग स्वेन्दसेन (Helle Lyng Svendsen) ने पीएम मोदी और नॉर्वे के पीएम जोनास गाहर स्टोरे (Jonas Gahr Store) की संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग के दौरान चिल्लाते हुए पूछा कि मोदी दुनिया की सबसे आजाद प्रेस के सवाल क्यों नहीं लेते।
मोदी और नॉर्वे के पीएम बिना जवाब दिए चले गए। इसके बाद हेले ने एक्स पर लिखा कि नॉर्वे विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (World Press Freedom Index) में पहले नंबर पर है जबकि भारत 157वें स्थान पर, फिलिस्तीन, यूएई और क्यूबा के साथ। उन्होंने कहा कि नॉर्वे में जब विदेशी नेता आते हैं तो मीडिया को सवाल पूछने का मौका मिलता है, लेकिन मोदी के मामले में ऐसा नहीं था।
इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ भारी नफरत का माहौल बना। कुछ यूजर्स ने उन्हें "विदेशी जासूस," "चीनी प्रॉक्सी" तक बताया। इन आरोपों का हेले ने खंडन किया। उन्होंने साफ लिखा, "मुझे यह कहना पड़ रहा है, मैं किसी भी तरह की विदेशी जासूस नहीं हूँ।"
20 मई 2026 को हेले ने एक्स पर बताया कि मेटा (Meta) ने उनके इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट सस्पेंड कर दिए। इंस्टाग्राम का नोटिस बताता था कि अकाउंट 19 मई को सस्पेंड हुआ और अपील के लिए 180 दिन का समय है। हेले ने इसे "प्रेस फ्रीडम की छोटी सी कीमत" बताया।
भारत की तरफ से MEA (Ministry of External Affairs) के सचिव सिबि जॉर्ज (Sibi George) ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत को जाने बिना अधूरी जानकारी के आधार पर इस तरह के सवाल न उठाएं। उन्होंने सिर्फ दिल्ली में 200 से ज्यादा न्यूज चैनलों का उल्लेख किया। उन्होंने भारत की ऐतिहासिक देन, शतरंज, योग और कोविड वैक्सीन सप्लाई का भी जिक्र किया। बाद में जवाब देते-देते वे नाराज भी दिखे।
तीन सवाल जो यह पूरा मामला उठाता है
इस पूरी घटना से तीन बड़े सवाल सामने आते हैं
दूसरा, प्रेस फ्रीडम का मतलब क्या है? नॉर्वे नंबर एक पर है, भारत 157वें पर। लेकिन क्या संख्या से सच्चाई पूरी तरह सामने आती है? और यह भी देखना होगा कि जिस देश के अखबार ने नस्लीय कार्टून बनाया, उसी देश की पत्रकार प्रेस की आजादी का सबक देने आई थी।
तीसरा, ऊर्जा की राजनीति और कूटनीति का रिश्ता। भारत अपनी 85 फीसद ऊर्जा जरूरत आयात से पूरी करता है। मध्य पूर्व में जारी तनाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही थीं। ऐसे में मोदी का यह पाँच देशों का दौरा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि हर भारतीय के पेट्रोल-डीजल के दाम से जुड़ा सीधा सवाल था। एक कार्टून उस पूरी कवायद का मजाक उड़ाता है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
जरूरी FAQ
आफ्टेनपोस्टेन अखबार ने पीएम मोदी के ओस्लो दौरे से कुछ घंटे पहले यह कार्टून एक ओपिनियन लेख के साथ छापा। कार्टून में मोदी को पारंपरिक सपेरे की तरह बीन बजाते दिखाया गया, जबकि सांप की जगह पेट्रोल पंप की फ्यूल पाइप थी। इसका सीधा संदेश यह था कि भारत ऊर्जा आपूर्ति के लिए नॉर्डिक देशों को "लुभाने" की कोशिश कर रहा है। साथ ही इसमें सपेरे वाली वह पुरानी औपनिवेशिक छवि भी थी जो भारत को पिछड़ा दिखाने के लिए इस्तेमाल होती रही है। लोगों ने इसे नस्लवादी इसीलिए बताया क्योंकि यह भारत को आधुनिक शक्ति के बजाय एक पुरानी स्टीरियोटाइप में बाँधता है।
नॉर्वे जैसे देश खुद तेल उत्पादक हैं, फिर भी वहां पेट्रोल इतना महंगा क्यों है?
यह बहुत दिलचस्प तथ्य है। नॉर्वे दुनिया के बड़े तेल उत्पादकों में से एक है, लेकिन वहां पेट्रोल की कीमत करीब 22 नॉर्वेजियन क्रोन यानी लगभग 170-175 रुपए प्रति लीटर है। इसकी वजह है सरकार की नीति। नॉर्वे पेट्रोल पर भारी रोड यूज टैक्स, CO2 टैक्स और 25 फीसद वैट लगाता है। मकसद है कि लोग ईंधन कम जलाएं, कार्बन उत्सर्जन घटे और इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ें। नीदरलैंड में तो पेट्रोल करीब 215 रुपए प्रति लीटर है जो पूरे यूरोपीय संघ में सबसे महंगा है। इसके उलट भारत में सरकार सब्सिडी और कीमत नियंत्रण के जरिए ईंधन की कीमतें कुछ हद तक काबू में रखती है।
पत्रकार हेले लिंग के सोशल मीडिया अकाउंट क्यों सस्पेंड हुए और भारत का इसमें क्या रोल था?
पत्रकार हेले लिंग स्वेन्दसेन ने ओस्लो में पीएम मोदी से प्रेस फ्रीडम पर सवाल पूछा। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ जबरदस्त प्रतिक्रिया आई। मेटा ने उनके इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट सस्पेंड कर दिए। हेले ने खुद इसकी जानकारी एक्स पर दी। उन्होंने कहा कि यह प्रेस फ्रीडम की एक छोटी कीमत है। अब तक यह साफ नहीं है कि मेटा ने यह कदम किसकी शिकायत पर या किस नियम उल्लंघन के आधार पर उठाया। भारत सरकार ने मेटा को कोई निर्देश दिया हो, इसका कोई आधिकारिक साक्ष्य सामने नहीं आया है। हेले ने जासूसी जैसे आरोपों को सिरे से खारिज किया।
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