2 जुलाई का इतिहास: जब मोहम्मद जियाउद्दीन बनकर अंग्रेजों की कैद से भागे थे नेताजी
Kaushiki | Jul 02, 2026, 08:00 IST
Subhash Chandra Arrest 1940
साल 1940 में 2 जुलाई के दिन अंग्रेजों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को गिरफ्तार किया था। कोलकाता के हॉलवेल स्मारक को हटाने के आंदोलन के कारण यह कार्रवाई हुई थी। इस घटना ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एक बहुत बड़ा और नया मोड़ दिया था।
Subhash Chandra Bose Arrest: ये बात साल 1940 की है। उस समय पूरी दुनिया में दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था। भारत में भी आजादी की लड़ाई बहुत तेज हो चुकी थी। अंग्रेज सरकार इस समय बेहद दबाव में काम कर रही थी।
तभी कोलकाता की सड़कों पर एक बड़ा आंदोलन शुरू हुआ। इस आंदोलन का नेतृत्व खुद नेताजी सुभाष चंद्र बोस कर रहे थे। वे अंग्रेजों के एक पुराने स्मारक के सख्त खिलाफ थे।
कोलकाता में मौजूद इस स्मारक का नाम हॉलवेल मोन्यूमेंट था। ये स्मारक भारतीयों के लिए किसी बड़े अपमान जैसा था। नेताजी इसे किसी भी कीमत पर हटाना चाहते थे।
नेताजी ने इस काम के लिए युवाओं को एकजुट किया। उन्होंने अंग्रेजों को ये स्मारक हटाने की कड़ी चेतावनी दी। इसके बाद कोलकाता का माहौल अचानक बहुत गर्म हो गया।
अंग्रेज सरकार नेताजी के इस कड़े रुख से डर गई। उन्हें लगा कि ये आंदोलन बहुत बड़ा रूप ले सकता है। इसलिए उन्होंने एक सख्त कदम उठाने का फैसला किया।
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तारीख थी 2 जुलाई और साल था 1940। पुलिस ने सुबह ही नेताजी के घर को घेर लिया। इसके बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें कोलकाता की प्रेसीडेंसी जेल में डाल दिया गया। इस खबर से पूरे देश में गुस्सा फैल गया।
जगह-जगह अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन होने लगे। नेताजी जेल के अंदर भी चुप बैठने वाले नहीं थे। उन्होंने जेल के अंदर ही आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनकी तबीयत लगातार खराब होने लगी थी।
अंग्रेज सरकार नेताजी की बिगड़ती हालत देखकर डर गई। उन्हें डर था कि जेल में कुछ होने पर दंगे भड़क सकते हैं। इसलिए उन्होंने नेताजी को जेल से रिहा कर दिया।
लेकिन अंग्रेज चालाक थे, उन्होंने नेताजी को पूरी तरह आजाद नहीं किया। सरकार ने उन्हें उन्हीं के घर में नजरबंद कर दिया। उनके घर के बाहर कड़ा पहरा लगा दिया गया।
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अब बात करते हैं कि यह हॉलवेल स्मारक आखिर था क्या। ये कहानी साल 1756 की ब्लैक होल घटना से जुड़ी है। अंग्रेजों ने इसके लिए एक मनगढ़ंत कहानी बनाई थी।
ब्रिटिश अधिकारी जे जेड हॉलवेल ने एक दावा किया था। उन्होंने कहा था कि बंगाल के नवाब ने कई अंग्रेजों को कैद किया था। एक छोटे कमरे में उन्हें बंद किया गया था। हॉलवेल के मुताबिक, उस रात कई अंग्रेज मारे गए थे। इसी की याद में अंग्रेजों ने कोलकाता में एक स्मारक बनाया था।
इसे ही हॉलवेल मोन्यूमेंट कहा जाता था। नेताजी का मानना था कि यह इतिहास पूरी तरह झूठा है। अंग्रेज इसके जरिए नवाब सिराजुद्दौला को बदनाम कर रहे थे।
ये स्मारक भारतीयों को नीचा दिखाने के लिए था। इसलिए नेताजी ने इसे हटाने के लिए बड़ा मार्च निकाला। उनके जेल जाने के बाद भी यह आंदोलन थमा नहीं। आखिरकार अंग्रेजों को झुकना पड़ा और स्मारक हटाना पड़ा।
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जब नेताजी को प्रेसीडेंसी जेल में बंद किया गया, तो उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने जेल प्रशासन के सामने साफ कर दिया कि वह बिना शर्त रिहाई चाहते हैं।
अंग्रेज सरकार उनकी बात मानने को तैयार नहीं थी। इसके विरोध में नेताजी ने 29 नवंबर 1940 से भूख हड़ताल शुरू कर दी। यह अनशन बहुत कड़ा था। लगातार सात दिनों तक भूखे रहने के कारण उनका वजन तेजी से गिरा।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि नेताजी की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। कोलकाता की जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका था। जेल के बाहर हजारों लोग जमा होने लगे थे।
माहौल बिगड़ता देख ब्रिटिश गवर्नर घबरा गया। आखिरकार 5 दिसंबर 1940 को अंग्रेजों को घुटने टेकने पड़े। उन्होंने नेताजी को जेल से बाहर निकाला, लेकिन चालाकी से उनके घर में ही कैद कर दिया।
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घर में नजरबंद रहने के दौरान नेताजी ने एक बहुत बड़ी योजना बनाई। उन्हें समझ आ गया था कि भारत में रहकर बड़ी लड़ाई लड़ना अब नामुमकिन है। उन्हें नजरबंद करने के लिए घर के बाहर 100 से ज्यादा सीक्रेट पुलिसवाले तैनात थे। लेकिन नेताजी ने अपने भतीजे शिशिर बोस के साथ मिलकर एस्केप प्लान तैयार किया।
16 जनवरी 1941 की आधी रात को एक ऐतिहासिक चमत्कार हुआ। नेताजी ने अपनी दाढ़ी बढ़ाई और एक मुस्लिम बीमा एजेंट 'मोहम्मद जियाउद्दीन' का भेष बदला। वह चुपचाप अपने घर से निकले और शिशिर बोस की कार में बैठकर धनबाद की तरफ निकल गए। वहां से उन्होंने पेशावर और फिर जर्मनी का सफर तय किया।
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अंग्रेज पुलिस कई दिनों तक उनके घर के बाहर पहरा देती रही। जब उन्हें पता चला कि नेताजी गायब हो चुके हैं, तो पूरे ब्रिटिश साम्राज्य में हड़कंप मच गया।
इस फौज ने अंग्रेजों की जड़ों को हिलाकर रख दिया। इसकी शुरुआत इसी 1940 की गिरफ्तारी से हुई थी। अगर नेताजी 1940 में गिरफ्तार न होते तो शायद इतिहास अलग होता।
इस एक गिरफ्तारी ने उन्हें एक नया रास्ता (NETAJI SUBHASH CHANDRA BOSE JAIL) दिखाया। इसी रास्ते ने उन्हें 'नेताजी' बनाया। आज भी 2 जुलाई का दिन इतिहास में दर्ज है। यह दिन हमें नेताजी के अदम्य साहस की याद दिलाता है। उनका यह बलिदान हमेशा देश को प्रेरित करता रहेगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस केंद्रीय जेल
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 02 जुलाई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 02 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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तभी कोलकाता की सड़कों पर एक बड़ा आंदोलन शुरू हुआ। इस आंदोलन का नेतृत्व खुद नेताजी सुभाष चंद्र बोस कर रहे थे। वे अंग्रेजों के एक पुराने स्मारक के सख्त खिलाफ थे।
कोलकाता में मौजूद इस स्मारक का नाम हॉलवेल मोन्यूमेंट था। ये स्मारक भारतीयों के लिए किसी बड़े अपमान जैसा था। नेताजी इसे किसी भी कीमत पर हटाना चाहते थे।
नेताजी ने इस काम के लिए युवाओं को एकजुट किया। उन्होंने अंग्रेजों को ये स्मारक हटाने की कड़ी चेतावनी दी। इसके बाद कोलकाता का माहौल अचानक बहुत गर्म हो गया।
अंग्रेज सरकार नेताजी के इस कड़े रुख से डर गई। उन्हें लगा कि ये आंदोलन बहुत बड़ा रूप ले सकता है। इसलिए उन्होंने एक सख्त कदम उठाने का फैसला किया।
नेता जी | सुभाष चंद्र बोस | आखिरी बार ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया
नेताजी की गिरफ्तारी का सच क्या था
जगह-जगह अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन होने लगे। नेताजी जेल के अंदर भी चुप बैठने वाले नहीं थे। उन्होंने जेल के अंदर ही आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनकी तबीयत लगातार खराब होने लगी थी।
अंग्रेज सरकार नेताजी की बिगड़ती हालत देखकर डर गई। उन्हें डर था कि जेल में कुछ होने पर दंगे भड़क सकते हैं। इसलिए उन्होंने नेताजी को जेल से रिहा कर दिया।
लेकिन अंग्रेज चालाक थे, उन्होंने नेताजी को पूरी तरह आजाद नहीं किया। सरकार ने उन्हें उन्हीं के घर में नजरबंद कर दिया। उनके घर के बाहर कड़ा पहरा लगा दिया गया।
सुभाषचंद्र बोस127वीं जयंती: नेता जी की मौत पर 10 से ज्यादा इन्वेस्टिगेशन्स, जानें क्या-क्या हुआ खुलासा - Panchdoot News
हॉलवेल स्मारक विवाद आखिर क्या था
ब्रिटिश अधिकारी जे जेड हॉलवेल ने एक दावा किया था। उन्होंने कहा था कि बंगाल के नवाब ने कई अंग्रेजों को कैद किया था। एक छोटे कमरे में उन्हें बंद किया गया था। हॉलवेल के मुताबिक, उस रात कई अंग्रेज मारे गए थे। इसी की याद में अंग्रेजों ने कोलकाता में एक स्मारक बनाया था।
इसे ही हॉलवेल मोन्यूमेंट कहा जाता था। नेताजी का मानना था कि यह इतिहास पूरी तरह झूठा है। अंग्रेज इसके जरिए नवाब सिराजुद्दौला को बदनाम कर रहे थे।
ये स्मारक भारतीयों को नीचा दिखाने के लिए था। इसलिए नेताजी ने इसे हटाने के लिए बड़ा मार्च निकाला। उनके जेल जाने के बाद भी यह आंदोलन थमा नहीं। आखिरकार अंग्रेजों को झुकना पड़ा और स्मारक हटाना पड़ा।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने गूंगे-बहरे जियाउद्दीन का भेष क्यों धरा? - The Lallantop
जेल में सात दिनों का ऐतिहासिक अनशन
अंग्रेज सरकार उनकी बात मानने को तैयार नहीं थी। इसके विरोध में नेताजी ने 29 नवंबर 1940 से भूख हड़ताल शुरू कर दी। यह अनशन बहुत कड़ा था। लगातार सात दिनों तक भूखे रहने के कारण उनका वजन तेजी से गिरा।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि नेताजी की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। कोलकाता की जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका था। जेल के बाहर हजारों लोग जमा होने लगे थे।
माहौल बिगड़ता देख ब्रिटिश गवर्नर घबरा गया। आखिरकार 5 दिसंबर 1940 को अंग्रेजों को घुटने टेकने पड़े। उन्होंने नेताजी को जेल से बाहर निकाला, लेकिन चालाकी से उनके घर में ही कैद कर दिया।
हिम्मत से अलग क्यों है 'अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ नेताजी सुभाष चंद्र बोस'? 129वीं जयंती पर बड़ा खुलासा
इस घटना ने कैसे बदला देश का इतिहास
16 जनवरी 1941 की आधी रात को एक ऐतिहासिक चमत्कार हुआ। नेताजी ने अपनी दाढ़ी बढ़ाई और एक मुस्लिम बीमा एजेंट 'मोहम्मद जियाउद्दीन' का भेष बदला। वह चुपचाप अपने घर से निकले और शिशिर बोस की कार में बैठकर धनबाद की तरफ निकल गए। वहां से उन्होंने पेशावर और फिर जर्मनी का सफर तय किया।
सुभाषचंद्र बोस का जीवन परिचय और विचार - Subhas Chandra Bose Biography and thoughts | GreatPeoples
अंग्रेज पुलिस कई दिनों तक उनके घर के बाहर पहरा देती रही। जब उन्हें पता चला कि नेताजी गायब हो चुके हैं, तो पूरे ब्रिटिश साम्राज्य में हड़कंप मच गया।
इस फौज ने अंग्रेजों की जड़ों को हिलाकर रख दिया। इसकी शुरुआत इसी 1940 की गिरफ्तारी से हुई थी। अगर नेताजी 1940 में गिरफ्तार न होते तो शायद इतिहास अलग होता।
इस एक गिरफ्तारी ने उन्हें एक नया रास्ता (NETAJI SUBHASH CHANDRA BOSE JAIL) दिखाया। इसी रास्ते ने उन्हें 'नेताजी' बनाया। आज भी 2 जुलाई का दिन इतिहास में दर्ज है। यह दिन हमें नेताजी के अदम्य साहस की याद दिलाता है। उनका यह बलिदान हमेशा देश को प्रेरित करता रहेगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस केंद्रीय जेल
02 जुलाई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 02 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1777 (दास प्रथा का अंत): अमेरिका के वरमोंट क्षेत्र ने अपने यहाँ दास प्रथा को पूरी तरह खत्म किया। यह दास प्रथा को समाप्त करने वाला पहला अमेरिकी क्षेत्र बना।
- 1871 (रोम पर कब्जा): इटली के राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय ने रोम पर कब्जा कर लिया, जिससे वहां सदियों से चले आ रहे पोप राज्यों के शासन का अंत हुआ।
- 1881 (अमेरिकी राष्ट्रपति पर हमला): अमेरिकी राष्ट्रपति जेम्स गारफील्ड को वॉशिंगटन के एक रेलवे स्टेशन पर गोली मार दी गई थी।
- 1890 (शेरमन एंटीट्रस्ट एक्ट): अमेरिकी कांग्रेस ने 'शेरमन एंटीट्रस्ट एक्ट' पास किया, जिसका मुख्य उद्देश्य बड़ी कंपनियों के एकाधिकार (Monopoly) को रोकना था।
- 1897 (रेडियो का पेटेंट): इतालवी वैज्ञानिक गुग्लिल्मो मार्कोनी को लंदन में रेडियो का पेटेंट मिला, जो संचार तकनीक के इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम था।
- 1937 (एमेलिया इयरहार्ट लापता): दुनिया की मशहूर महिला पायलट एमेलिया इयरहार्ट प्रशांत महासागर के ऊपर उड़ान भरते समय रहस्यमयी तरीके से लापता हो गई थीं।
- 1962 (पहला वॉलमार्ट स्टोर): दुनिया का सबसे पहला वॉलमार्ट स्टोर अमेरिका के रोजर्स शहर में खुला। आज यह दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी है।
- 1964 (सिविल राइट्स एक्ट): अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने 'सिविल राइट्स एक्ट' पर हस्ताक्षर किए, जिससे स्कूलों और दफ्तरों में नस्लीय भेदभाव करना गैरकानूनी हो गया।
- 1976 (वियतनाम का पुनर्मिलन): वियतनाम युद्ध खत्म होने के एक साल बाद उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम का आधिकारिक विलय हुआ और 'सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ वियतनाम' बना।
- 1990 (मक्का में भगदड़): सऊदी अरब के मक्का में हज के दौरान एक बड़ा हादसा हुआ, जहां मची भगदड़ में 1,426 हज यात्रियों की जान चली गई।
- 1997 (एशियाई वित्तीय संकट): एशिया में आए आर्थिक संकट के दौरान थाईलैंड की मुद्रा 'बाथ' (Baht) की कीमत में भारी गिरावट दर्ज की गई।
- 2000 (मैक्सिको में ऐतिहासिक चुनाव): विसेंट फॉक्स मैक्सिको के राष्ट्रपति चुने गए। वहां 71 साल के इतिहास में पहली बार किसी विपक्षी पार्टी को यह जीत मिली थी।
- 2002 (गुब्बारे से दुनिया का चक्कर): अमेरिकी एविएटर स्टीव फॉसेट हॉट एयर बैलून (गुब्बारे) में अकेले बैठकर पूरी दुनिया का चक्कर लगाने वाले पहले व्यक्ति बने।
- 2010 (कांगो टैंकर विस्फोट): कांगो में एक तेल टैंकर ट्रक में हुए भीषण विस्फोट के कारण 230 लोगों की मौत हो गई थी।
- 2013 (प्लूटो के चंद्रमाओं का नामकरण): इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (IAU) ने प्लूटो ग्रह के दो छोटे चंद्रमाओं का आधिकारिक नाम 'कर्बरोस' और 'स्टिक्स' रखा।
- 2015 (फिलीपींस नौका हादसा): फिलीपींस में यात्रियों से भरी एक नौका समुद्र में डूब गई, जिससे 62 लोगों की मौत हो गई थी।
- 1916 (भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण): भारत के खनिज संसाधनों का अध्ययन और खोज करने के लिए 'भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग' (GSI) की स्थापना की गई थी।
- 1940 (नेताजी की गिरफ्तारी): कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अंग्रेजों ने कोलकाता (तब कलकत्ता) में गिरफ्तार कर लिया था।
- 1972 (ऐतिहासिक शिमला समझौता): भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 के युद्ध (जिससे बांग्लादेश बना) के बाद भारतीय पीएम इंदिरा गांधी और पाकिस्तानी राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- 1983 (पहला स्वदेशी परमाणु केंद्र): मद्रास के पास कलपक्कम में देश के पहले पूरी तरह से स्वदेशी परमाणु बिजली केंद्र (Kalpakkam Atomic Power Station) ने काम करना शुरू किया।
- 1999 (कारगिल युद्ध में संयुक्त हमला): कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (LOC) पार कर घुसे पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकियों के खिलाफ चोटियों पर बड़ा संयुक्त हमला बोला था।
- 1921: भारत के वरिष्ठ और जानी-मानी राजनीतिक हस्ती अशोक घोष का जन्म हुआ।
- 1948: हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और लेखक आलोक धन्वा का जन्म हुआ।
- 1958: भारतीय सिनेमा और टीवी के बेहतरीन अभिनेता पवन मल्होत्रा का जन्म हुआ।
- 1968: दक्षिण भारतीय फिल्मों की मशहूर और लोकप्रिय अभिनेत्री गौतमी का जन्म हुआ।
- 1981: बॉलीवुड अभिनेत्री और मशहूर मॉडल अनुपमा वर्मा का जन्म हुआ।
- विश्व खेल पत्रकार दिवस (World Sports Journalists Day): हर साल 2 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय खेल पत्रकार दिवस मनाया जाता है। यह दिन खेल जगत की खबरों को दुनिया तक पहुंचाने वाले खेल पत्रकारों के योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित है।
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