9 जनवरी का इतिहास: Operation Gangotri, भारत का पहला अंटार्कटिका मिशन

Kaushiki | Jan 09, 2026, 08:00 IST
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antarctica expedition
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9 जनवरी 1982 को भारत का पहला वैज्ञानिक दल सफलतापूर्वक अंटार्कटिका पहुंचा। डॉ. कासिम के नेतृत्व में भारत ने विज्ञान और साहस का परचम लहराया। जानें

आज के दिन की कहानी: बात 9 जनवरी 1982 की है जब दुनिया ने भारत का लोहा माना था। इसी दिन भारत का पहला वैज्ञानिक दल बर्फीले महाद्वीप अंटार्कटिका पहुंचा था। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि भारत के विज्ञान और साहस की जीत थी। इस मिशन को पूरी दुनिया में ऑपरेशन गंगोत्री के नाम से जाना गया।

डॉ. एसजे कासिम के नेतृत्व में इस टीम ने असंभव को संभव कर दिखाया। उस समय भारत के पास आधुनिक तकनीक बहुत कम मात्रा में उपलब्ध थी। फिर भी हमारे वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका की जमा देने वाली ठंड को मात दी।

How India established its first research station in Antarctica - The Hindu
How India established its first research station in Antarctica - The Hindu


कैसे शुरू हुआ ये गुप्त और ऐतिहासिक मिशन

अंटार्कटिका मिशन की तैयारी भारत सरकार ने बेहद गुप्त तरीके से की थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी चाहती थीं कि भारत भी अंटार्कटिका में शामिल हो। इसके लिए समुद्री विकास विभाग ने एक बहुत ही विशेष योजना बनाई थी।

इस मिशन के लिए 21 सदस्यीय टीम का चयन बहुत बारीकी से हुआ। इसमें वैज्ञानिक, सेना के जवान और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल किए गए थे। इस टीम ने गोवा के तट से 'एमवी पोलर सर्कल' जहाज से यात्रा शुरू की।

डॉ. कासिम ने अपनी डायरी में लिखा था कि उस पल कड़ाके की ठंड भी हमें महसूस नहीं हो रही थी, क्योंकि हमारे दिलों में अपने देश का गौरव धड़क रहा था। भारत दुनिया का 15वां देश बन गया था जिसने अंटार्कटिका पर अपना पैर जमाया था।

भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम - विकिपीडिया
भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम - विकिपीडिया


बर्फीली लहरों और तूफानों के बीच का सफर

गोवा से अंटार्कटिका तक का सफर बिल्कुल भी आसान और सरल नहीं था। हिंद महासागर की ऊंची लहरों ने जहाज को कई बार बुरी तरह झकझोरा। वैज्ञानिकों को भयानक समुद्री बीमारियों और भीषण ठंड का सामना करना पड़ा।

जहाज जैसे-जैसे दक्षिण की ओर बढ़ा, तापमान लगातार गिरता ही चला गया। विशाल हिमखंडों के बीच से रास्ता बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गई थी। अंततः 9 जनवरी 1982 को टीम ने अंटार्कटिका की जमीन पर कदम रखा।

दक्षिण गंगोत्री, 1983 — Google Arts & Culture
दक्षिण गंगोत्री, 1983 — Google Arts & Culture


असंभव हालात में 10 दिनों की रिसर्च

अंटार्कटिका में रुकना मौत को दावत देने जैसा था। वहां 200-300 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बर्फीले तूफान चलते थे, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने वहां 10 दिनों तक डेरा डाला। उन्होंने...

  • वहां की मिट्टी और चट्टानों के नमूने लिए।
  • चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic field) की जांच की।
  • मौसम और समुद्री जीवन का डेटा इकट्ठा किया।
इसी मिशन के दौरान भारत ने अपने पहले मानव रहित स्टेशन 'दक्षिण गंगोत्री' की नींव रखी। यह एक छोटा सा ढांचा था, लेकिन इसने दुनिया को बता दिया कि भारत अब किसी से पीछे नहीं है।

Dakshin Gangotri - Wikipedia
Dakshin Gangotri - Wikipedia


अंटार्कटिका की जमीन पर लहराया तिरंगा

अंटार्कटिका पहुंचते ही सबसे पहले भारत का राष्ट्रीय ध्वज शान से फहराया गया। वैज्ञानिकों ने वहां 10 दिनों तक रुककर कई इम्पोर्टेन्ट रिसर्च वर्क किए। उन्होंने वहां की मिट्टी, हवा, बर्फ और मैग्नेटिक फील्ड का स्टडी किया।

इसी मिशन ने भारत के पहले स्थाई स्टेशन 'दक्षिण गंगोत्री' की नींव रखी। भारत इस कॉन्टिनेंट पर पहुंचने वाला दुनिया का 15वां देश बन गया था। इस सफलता ने दुनिया को भारत की बढ़ती वैज्ञानिक ताकत का संदेश दिया।

दक्षिण गंगोत्री - विकिपीडिया
दक्षिण गंगोत्री - विकिपीडिया


इस मिशन का भारत के लिए क्या महत्व था

अंटार्कटिका मिशन (Operation Gangotri 1982) ने भारत को अंटार्कटिक संधि में शामिल होने में मदद की। अब भारत इस महाद्वीप के भविष्य पर निर्णय लेने का अधिकार रखता है।

आज भारत के पास 'मैत्री' और 'भारती' जैसे मॉडर्न रिसर्च स्टेशन मौजूद हैं। ये सब उसी पहले साहसी मिशन की बदौलत ही संभव हो पाया है। डॉ. कासिम की टीम आज भी हर इंडियन साइंटिस्ट के लिए इंस्पिरेशन है।

ये कहानी आज भी हर हिंदुस्तानी को याद दिलाती है कि हम बर्फ की चादर पर भी अपना भविष्य लिखने की ताकत रखते हैं। ये हमें सिखाती है कि डेटर्मिनेशन से कुछ भी मुमकिन है।

Reference Links

  1. Ministry of Earth Sciences - History of Antarctica Program
  2. NCPOR - Indian First Expedition 1982 Archives
  3. Encyclopedia Britannica - India's Antarctic Missions
  4. National Archives of India - Scientific Research Records
जानिए 16 अगस्त का इतिहास
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09 जनवरी की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 09 जनवरी का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।

आइए जानते हैं 09 जनवरी (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-

विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1718: फ्रांस ने स्पेन के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया।
  • 1721: इंग्लैंड में 'साउथ सी बबल' घोटाले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई।
  • 1768: फिलिप एस्टली ने लंदन में दुनिया के पहले आधुनिक सर्कस का आयोजन किया।
  • 1771: सम्राट गो-मोमोज़ोनो ने जापान का सिंहासन संभाला।
  • 1792: रूस और तुर्क साम्राज्य के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए 'जेसी की संधि' हुई।
  • 1799: ब्रिटिश पीएम विलियम पिट ने नेपोलियन के खिलाफ फंड जुटाने के लिए इनकम टैक्स (आयकर) शुरू किया।
  • 1816: खदानों में रोशनी के लिए सर हम्फ्री डेवी के 'डेवी लैंप' का पहला सफल परीक्षण हुआ।
  • 1839: फोटोग्राफी की दुनिया में क्रांतिकारी 'डागरेरेोटाइप' प्रक्रिया की घोषणा की गई।
  • 1857: कैलिफोर्निया में 7.9 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया।
  • 1873: फ्रांस के पूर्व शासक नेपोलियन बोनापार्ट तृतीय का निधन हुआ।
  • 1909: अर्नेस्ट शेकलटन ने दक्षिणी ध्रुव के सबसे करीब (180 किमी दूर) ब्रिटिश झंडा फहराया।
  • 1951: न्यूयॉर्क में आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र (UN) का मुख्यालय खुला।
  • 1960: मिस्र में नील नदी पर विशाल आसवान बांध का निर्माण शुरू हुआ।
  • 1972: कभी दुनिया का सबसे बड़ा जहाज रहा 'RMS क्वीन एलिजाबेथ' हांगकांग में आग से नष्ट हुआ।
  • 2002: पॉप स्टार माइकल जैक्सन को अमेरिकन म्यूजिक अवार्ड्स में 'आर्टिस्ट ऑफ द सेंचुरी' मिला।
  • 2007: एप्पल के सीईओ स्टीव जॉब्स ने दुनिया के सामने पहले iPhone की घोषणा की।
  • 2012: फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने लगातार दूसरी बार फीफा का 'बैलोन डी’ओर' पुरस्कार जीता।

भारत की महत्वपूर्ण घटनाएं

  • 1922: भारतीय मूल के महान वैज्ञानिक और नोबेल विजेता हरगोविंद खुराना का जन्म हुआ।
  • 1974: बॉलीवुड के टैलेंटेड डायरेक्टर और एक्टर फरहान अख्तर का आज जन्मदिन है।
  • 1982: भारत का पहला वैज्ञानिक अभियान दल सफलतापूर्वक अंटार्कटिका की जमीन पर पहुंचा।
  • 1998: शतरंज में अनातोली कार्पोव ने विश्वनाथन आनंद को हराकर अपना खिताब बरकरार रखा।

आज का इतिहास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...

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