19 जून का इतिहास: कैसे शुरू हुआ भारत का पहला सैटेलाइट कनेक्शन, जानें पूरा इतिहास
Kaushiki | Jun 19, 2026, 08:00 IST
india first communication satellite
साल 1981 में भारत ने अपना पहला संचार उपग्रह एप्पल लॉन्च कर इतिहास रचा था। इस सैटेलाइट को बैलगाड़ी पर ले जाने की तस्वीरें आज भी मशहूर हैं। इसरो के इस कदम ने देश में आधुनिक संचार क्रांति की नींव रखी थी।
India First Communication Satellite Apple: आज भारत अंतरिक्ष की दुनिया में एक महाशक्ति बन चुका है। हमारा देश चांद और मंगल तक अपने कदम बढ़ा चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सफर कहां से शुरू हुआ था?
इस सफर की शुरुआत बहुत ही साधारण और चुनौतीपूर्ण हालातों में हुई थी। बात साल 1981 की है जब भारत के पास ज्यादा संसाधन नहीं थे। उस समय हमारे वैज्ञानिकों ने एक बड़ा चमत्कार कर दिखाया था।
भारत ने 19 जून 1981 को अपना पहला संचार उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा था। इस खास और पहले कम्युनिकेशन सैटेलाइट का नाम एप्पल (APPLE) था। इसने देश के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।
इस सैटेलाइट को बनाने और टेस्ट करने की कहानी बेहद फिल्मी है। हमारे वैज्ञानिकों ने इसे बहुत ही कम बजट में तैयार किया था। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक मिशन की पूरी दिलचस्प दास्तान।
![Anant Tech to launch India's first private satellite internet service - Sanskriti IAS]()
एप्पल का पूरा नाम पैसेंजर पेलोड एक्सपेरिमेंट (Ariane Passenger Payload Experiment) था। यह भारत का पहला पूरी तरह से घरेलू संचार उपग्रह था।
इसे इसरो के वैज्ञानिकों ने बेंगलुरु के एक साधारण शेड में बनाया था। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष से संचार तकनीकों का अनुभव हासिल करना था। यह एक एक्सपेरिमेंटल सैटेलाइट था जो तीन एक्सिस से नियंत्रित होता था।
इसके जरिए भारत यह देखना चाहता था कि अंतरिक्ष से सिग्नल कैसे काम करते हैं। इस मिशन की जिम्मेदारी देश के महान वैज्ञानिकों के कंधों पर थी। उन्होंने दिन-रात एक करके इस तीन मंजिला ऊंचे सैटेलाइट को तैयार किया था।
![स्टारलिंक - विकिपीडिया]()
इस मिशन से जुड़ी एक तस्वीर आज भी दुनिया भर में बहुत प्रसिद्ध है। इस तस्वीर में सैटेलाइट को एक लकड़ी की बैलगाड़ी पर देखा जा सकता है। लोग अक्सर सोचते हैं कि इसरो ने ऐसा गरीबी के कारण किया था। लेकिन सच यह है कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक कारण था।
दरअसल सैटेलाइट को लॉन्च से पहले एंटीना क्लीयरेंस टेस्ट से गुजरना था। इस टेस्ट के लिए एक ऐसी गाड़ी की जरूरत थी जो पूरी तरह गैर-चुंबकीय हो। अगर वैज्ञानिक किसी धातु या लोहे की ट्रक का इस्तेमाल करते तो टेस्ट खराब हो जाता।
ट्रक का लोहा सैटेलाइट के सिग्नलों में रुकावट पैदा कर सकता था। इसलिए वैज्ञानिकों ने लकड़ी की बैलगाड़ी का इस्तेमाल करने का अनोखा फैसला किया। बैलगाड़ी पूरी तरह से लकड़ी की बनी थी जो सिग्नलों को प्रभावित नहीं करती थी।
इस तरह महज 150 रुपए के किराए पर बैलगाड़ी मंगवाई गई। खुले मैदान में बैलगाड़ी पर रखकर सैटेलाइट का सफल टेस्ट पूरा किया गया। हमारे वैज्ञानिकों की इस सूझबूझ को पूरी दुनिया ने सलाम किया।
![APPLE: ISRO First Indian Geostationary Communication Satellite - News18 हिंदी]()
भारत के पास उस समय भारी सैटेलाइट लॉन्च करने वाले बड़े रॉकेट नहीं थे। इसलिए इसरो ने विदेशी अंतरिक्ष एजेंसी की मदद लेने का फैसला किया। इस सैटेलाइट को दक्षिण अमेरिका के फ्रेंच गुयाना अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया था।
इसे यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के 'एरियन-1' रॉकेट के जरिए भेजा गया। लॉन्चिंग का दिन 19 जून 1981 तय किया गया था। वैज्ञानिकों के दिलों की धड़कनें बहुत तेज थीं क्योंकि यह भारत का पहला बड़ा कदम था।
रॉकेट ने सुबह के समय उड़ान भरी और सैटेलाइट को उसकी कक्षा में पहुंचा दिया। यह मिशन पूरी तरह से सफल रहा और भारत का नाम इतिहास में दर्ज हो गया।
![पहली बार ISRO ने निजी कंपनियों की सैटेलाइट टेस्टिंग के लिए खोला अपना सेंटर - Trending AajTak]()
इस छोटे से उपग्रह ने भारत में संचार क्रांति की असली शुरुआत की थी। इसके आने से देश के टेलीकॉम सेक्टर को एक नई दिशा मिली। एप्पल सैटेलाइट की मदद से देश में पहली बार टीवी नेटवर्क का विस्तार हुआ।
इसके जरिए दूरदर्शन के कार्यक्रमों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसी सैटेलाइट के जरिए देश को संबोधित किया था।
इस उपग्रह का उपयोग रेडियो नेटवर्क को सुधारने में भी किया गया। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने इसके जरिए कई महत्वपूर्ण कंप्यूटर और डेटा लिंक टेस्ट किए। इसने भविष्य के 'इनसेट' (INSAT) सैटेलाइट सीरीज के लिए रास्ता साफ किया।
![APPLE: ISRO First Indian Geostationary Communication Satellite - News18 हिंदी]()
एप्पल सैटेलाइट (अंतरिक्ष यात्रा)ने लगभग दो साल तक अंतरिक्ष में रहकर देश की सेवा की। इसने साबित कर दिया कि भारतीय वैज्ञानिक सीमित साधनों में भी कमाल कर सकते हैं।
इस मिशन से इसरो (ISRO satellites) को अंतरिक्ष में सैटेलाइट कंट्रोल करने का बड़ा अनुभव मिला। हमारे वैज्ञानिकों ने सीख लिया कि अंतरिक्ष में उपग्रह को कैसे संभाला जाता है। आज भारत अपने खुद के रॉकेट से सैकड़ों सैटेलाइट लॉन्च करता है।
लेकिन इस शानदार (ISRO Satellite Launching)सफर की नींव इसी 'एप्पल' सैटेलाइट ने रखी थी। यह कहानी हमें सिखाती है कि साधन कम होने पर भी हौसला बड़ा होना चाहिए। इसरो की यह बैलगाड़ी वाली कहानी आज भी करोड़ों युवाओं को प्रेरित करती है।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 19 जून का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 19 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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इस सफर की शुरुआत बहुत ही साधारण और चुनौतीपूर्ण हालातों में हुई थी। बात साल 1981 की है जब भारत के पास ज्यादा संसाधन नहीं थे। उस समय हमारे वैज्ञानिकों ने एक बड़ा चमत्कार कर दिखाया था।
भारत ने 19 जून 1981 को अपना पहला संचार उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा था। इस खास और पहले कम्युनिकेशन सैटेलाइट का नाम एप्पल (APPLE) था। इसने देश के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।
इस सैटेलाइट को बनाने और टेस्ट करने की कहानी बेहद फिल्मी है। हमारे वैज्ञानिकों ने इसे बहुत ही कम बजट में तैयार किया था। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक मिशन की पूरी दिलचस्प दास्तान।
Anant Tech to launch India's first private satellite internet service - Sanskriti IAS
भारत का पहला संचार उपग्रह एप्पल क्या था
इसे इसरो के वैज्ञानिकों ने बेंगलुरु के एक साधारण शेड में बनाया था। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष से संचार तकनीकों का अनुभव हासिल करना था। यह एक एक्सपेरिमेंटल सैटेलाइट था जो तीन एक्सिस से नियंत्रित होता था।
इसके जरिए भारत यह देखना चाहता था कि अंतरिक्ष से सिग्नल कैसे काम करते हैं। इस मिशन की जिम्मेदारी देश के महान वैज्ञानिकों के कंधों पर थी। उन्होंने दिन-रात एक करके इस तीन मंजिला ऊंचे सैटेलाइट को तैयार किया था।
स्टारलिंक - विकिपीडिया
इसरो ने सैटेलाइट को बैलगाड़ी पर क्यों रखा था
दरअसल सैटेलाइट को लॉन्च से पहले एंटीना क्लीयरेंस टेस्ट से गुजरना था। इस टेस्ट के लिए एक ऐसी गाड़ी की जरूरत थी जो पूरी तरह गैर-चुंबकीय हो। अगर वैज्ञानिक किसी धातु या लोहे की ट्रक का इस्तेमाल करते तो टेस्ट खराब हो जाता।
ट्रक का लोहा सैटेलाइट के सिग्नलों में रुकावट पैदा कर सकता था। इसलिए वैज्ञानिकों ने लकड़ी की बैलगाड़ी का इस्तेमाल करने का अनोखा फैसला किया। बैलगाड़ी पूरी तरह से लकड़ी की बनी थी जो सिग्नलों को प्रभावित नहीं करती थी।
इस तरह महज 150 रुपए के किराए पर बैलगाड़ी मंगवाई गई। खुले मैदान में बैलगाड़ी पर रखकर सैटेलाइट का सफल टेस्ट पूरा किया गया। हमारे वैज्ञानिकों की इस सूझबूझ को पूरी दुनिया ने सलाम किया।
APPLE: ISRO First Indian Geostationary Communication Satellite - News18 हिंदी
एप्पल सैटेलाइट को कहां से लॉन्च किया गया था
इसे यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के 'एरियन-1' रॉकेट के जरिए भेजा गया। लॉन्चिंग का दिन 19 जून 1981 तय किया गया था। वैज्ञानिकों के दिलों की धड़कनें बहुत तेज थीं क्योंकि यह भारत का पहला बड़ा कदम था।
रॉकेट ने सुबह के समय उड़ान भरी और सैटेलाइट को उसकी कक्षा में पहुंचा दिया। यह मिशन पूरी तरह से सफल रहा और भारत का नाम इतिहास में दर्ज हो गया।
पहली बार ISRO ने निजी कंपनियों की सैटेलाइट टेस्टिंग के लिए खोला अपना सेंटर - Trending AajTak
एप्पल सैटेलाइट ने भारत में क्या बड़े बदलाव किए
इसके जरिए दूरदर्शन के कार्यक्रमों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसी सैटेलाइट के जरिए देश को संबोधित किया था।
इस उपग्रह का उपयोग रेडियो नेटवर्क को सुधारने में भी किया गया। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने इसके जरिए कई महत्वपूर्ण कंप्यूटर और डेटा लिंक टेस्ट किए। इसने भविष्य के 'इनसेट' (INSAT) सैटेलाइट सीरीज के लिए रास्ता साफ किया।
APPLE: ISRO First Indian Geostationary Communication Satellite - News18 हिंदी
इस ऐतिहासिक मिशन से भारत को क्या सीख मिली
इस मिशन से इसरो (ISRO satellites) को अंतरिक्ष में सैटेलाइट कंट्रोल करने का बड़ा अनुभव मिला। हमारे वैज्ञानिकों ने सीख लिया कि अंतरिक्ष में उपग्रह को कैसे संभाला जाता है। आज भारत अपने खुद के रॉकेट से सैकड़ों सैटेलाइट लॉन्च करता है।
लेकिन इस शानदार (ISRO Satellite Launching)सफर की नींव इसी 'एप्पल' सैटेलाइट ने रखी थी। यह कहानी हमें सिखाती है कि साधन कम होने पर भी हौसला बड़ा होना चाहिए। इसरो की यह बैलगाड़ी वाली कहानी आज भी करोड़ों युवाओं को प्रेरित करती है।
19 जून की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 19 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1996: चीन और अमेरिका के बीच बौद्धिक संपदा कानून (IPR) पर ऐतिहासिक समझौता हुआ।
- 1996: दुनिया के मशहूर क्रिकेट अंपायर डिकी बर्ड को MCC की आजीवन सदस्यता से सम्मानित किया गया।
- 1999: जर्मनी के कोलोन शहर में शक्तिशाली देशों के समूह-8 (G-8) की शिखर बैठक शुरू हुई।
- 2002: पाकिस्तान के विदेश सचिव इनामुल हक को देश का नया विदेश मंत्री नियुक्त किया गया।
- 2003: फिनलैंड की पहली महिला प्रधानमंत्री एनेली जाटिनमांकी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
- 2005: मशहूर फोर्ब्स पत्रिका ने ओपराह विनफ्रे को दुनिया की 100 सबसे ताकतवर हस्तियों में पहला स्थान दिया।
- 2006: जापान ने उत्तर कोरिया को उसके परमाणु परीक्षण मामले पर कड़े शब्दों में चेतावनी दी।
- 2007: परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तान के सूचना मंत्री मोहम्मद अली दुर्रानी को उनके पद से हटा दिया।
- 2007: दुनिया के सबसे अस्थिर राजनीतिक देशों की सूची में पाकिस्तान को 12वां स्थान मिला।
- 2008: उत्तराखंड सरकार ने गंगा नदी पर बन रही पाला मनेरी और भैरोंधारी पनबिजली परियोजनाओं को रोक दिया।
- 2008: गाजा पट्टी में हिंसक संघर्ष रोकने के लिए इजरायल और हमास के बीच युद्ध विराम समझौता लागू हुआ।
- 1871: हिंदी भाषा के प्रखर चिंतक, स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार माधवराव सप्रे का जन्म हुआ था।
- 1931: उत्तराखंड और सिक्किम के पूर्व राज्यपाल सुदर्शन अग्रवाल का जन्म हुआ था।
- 1948: मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज भारतीय राजनीतिज्ञ ओकरम इबोबी सिंह का जन्म हुआ था।
- 1970: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता और सांसद राहुल गांधी का जन्म हुआ था।
- 1981: भारत के पहले 'टेस्ट ट्यूब बेबी' के जनक और महान वैज्ञानिक डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय का निधन हुआ था।
- 2018: भारत के मशहूर और दिग्गज मिमिक्री कलाकार नेरेला वेणु माधव का निधन हुआ था।
- 2021: भारत के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित आईएएस (IAS) अधिकारी गुरुप्रसाद मोहापात्रा का निधन हुआ था।
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