20 जून का इतिहास: जानें Queen Victoria Era की पूरी कहानी, जो बन गई इतिहास
Kaushiki | Jun 20, 2026, 08:00 IST
Queen Victoria Biography
साल 1837 में आज ही के दिन मात्र 18 साल की उम्र में महारानी विक्टोरिया ने यूनाइटेड किंगडम की गद्दी संभाली थी। उन्होंने लगभग 64 वर्षों तक शासन किया, जिसे 'विक्टोरियन युग' कहा जाता है। इस दौरान भारत पर भी ब्रिटिश हुकूमत का सीधा नियंत्रण शुरू हुआ।
Queen Victoria History: साल 1837 की वह सुबह बहुत अलग थी। ब्रिटेन के राजा विलियम चतुर्थ का निधन हो चुका था। शाही नियमों के मुताबिक अब देश को एक नया शासक चाहिए था। उत्तराधिकार की कतार में सबसे आगे एक युवा लड़की खड़ी थी।
इस लड़की का नाम अलेक्जेंड्रिना विक्टोरिया था। उस वक्त उनकी उम्र केवल 18 साल थी। उन्हें सुबह तड़के जगाया गया और इस भारी जिम्मेदारी की जानकारी दी गई। उन्होंने बहुत ही शांत मन से इस फैसले को स्वीकार किया। उसी दिन 20 जून 1837 को उन्होंने आधिकारिक रूप से गद्दी संभाल ली।
इसके बाद अगले साल जून 1838 में उनका भव्य राज्याभिषेक हुआ। एक छोटी सी लड़की अब दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य की क्वीन बन चुकी थी। लोगों को उम्मीद नहीं थी कि वह 64 सालों का लंबा शासनकाल राज करेंगी। आइए जानते हैं क्या था पूरा मामला।
![Queen Victoria Succession]()
महारानी विक्टोरिया के गद्दी संभालते ही एक नए युग की शुरुआत हुई। इतिहासकार इसे विक्टोरियन एरा या विक्टोरियन युग कहते हैं। यह समय ब्रिटेन के लिए बहुत ही सुनहरा और तरक्की से भरा साबित हुआ। इस दौरान ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर औद्योगिक क्रांति यानी इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन हुआ।
नए-नए कारखाने खुले और रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार होने लगा। विज्ञान और तकनीक के मामले में ब्रिटेन दुनिया का लीडर बन गया। समाज में भी कई तरह के बड़े बदलाव देखने को मिल रहे थे। हालांकि इस चमक-दमक के पीछे एक कड़वा सच भी छिपा हुआ था।
गरीब मजदूरों की हालत बहुत खराब थी और उनसे फैक्ट्रियों में बहुत काम कराया जाता था। इसके बावजूद ब्रिटेन की आर्थिक ताकत पूरी दुनिया में सबसे ऊपर पहुंच गई थी। क्वीन विक्टोरिया ने इस पूरे बदलाव को बहुत करीब से देखा और संभाला। उनके राज में ब्रिटिश साम्राज्य की सीमाएं लगातार बढ़ती ही चली गईं।
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महारानी विक्टोरिया के शासनकाल का भारत के इतिहास पर सबसे गहरा असर पड़ा। उनके गद्दी संभालने के वक्त भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का राज था। कंपनी व्यापार के बहाने भारत के बड़े हिस्से पर कब्जा कर चुकी थी। लेकिन साल 1857 में भारत में एक बहुत बड़ा विद्रोह हुआ।
इसे हम भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम या 1857 की क्रांति कहते हैं। इस क्रांति ने ब्रिटिश हुकूमत की नींव को हिलाकर रख दिया था। क्रांति के शांत होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया। साल 1858 में ब्रिटिश संसद ने 'Government of India Act' पास किया। इसके तहत ईस्ट इंडिया कंपनी से सारे अधिकार वापस ले लिए गए।
भारत का पूरा शासन सीधे ब्रिटेन के शाही परिवार के हाथ में आ गया। महारानी विक्टोरिया अब भारत की भी सर्वेसर्वा यानी असली शासक बन चुकी थीं। उन्होंने भारतीय प्रजा के लिए एक घोषणा पत्र भी जारी किया था। इस घोषणा पत्र को 'महारानी का घोषणा पत्र' (The Queen's Proclamation) कहा जाता है।
इसमें उन्होंने भारतीयों को समान अधिकार देने का वादा किया था। हालांकि जमीन पर हालात बहुत ज्यादा नहीं बदले और शोषण जारी रहा। साल 1876 में उन्हें आधिकारिक रूप से 'Empress of India' की उपाधि दी गई।
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महारानी विक्टोरिया के दौर में कई प्रशासनिक और कानूनी बदलाव किए गए थे। इनमें से कई व्यवस्थाएं आज भी आजाद भारत में चल रही हैं। सबसे बड़ा उदाहरण भारतीय दंड संहिता यानी IPC (Indian Penal Code) का है। इसकी ड्राफ्टिंग और लागू होने की प्रक्रिया उसी दौर में पूरी हुई थी। इसके अलावा भारत का मौजूदा सिविल सर्विसेज ढांचा भी उसी समय मजबूत हुआ था।
प्रशासनिक अधिकारियों की भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं शुरू की गईं। भारत का रेलवे नेटवर्क भी विक्टोरियन युग में बहुत तेजी से फैला। हालांकि इसका मकसद ब्रिटिश सेना और व्यापार को आसान बनाना था।
आज भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है। डाक और तार व्यवस्था का आधुनिक स्वरूप भी उसी समय तैयार हुआ था। ब्रिटिश काल की अदालती व्यवस्था का ढांचा भी आज के कोर्ट से मिलता-जुलता है।
इन सब व्यवस्थाओं ने भारत के आधुनिक इतिहास को काफी प्रभावित किया। कोलकाता का प्रसिद्ध विक्टोरिया मेमोरियल आज भी उनकी याद दिलाता है। यह इमारत उनके शासनकाल और प्रभाव के प्रतीक के रूप में खड़ी है।
![Queen Victoria Succession]()
महारानी विक्टोरिया का निजी जीवन भी इतिहास में काफी चर्चा में रहा। उन्होंने साल 1840 में प्रिंस अल्बर्ट से प्रेम विवाह किया था। प्रिंस अल्बर्ट ने ब्रिटेन के विकास और औद्योगिक नीति में बड़ी भूमिका निभाई।
दोनों के कुल नौ बच्चे थे, जिनकी शादियां यूरोपीय राजघरानों में हुईं। इसी वजह से महारानी विक्टोरिया को 'यूरोप की दादी' (Grandmother of Europe) भी कहा जाता है। पूरा यूरोप उनके परिवार से जुड़ गया था। साल 1861 में प्रिंस अल्बर्ट की अचानक बीमारी से मृत्यु हो गई।
इस घटना ने महारानी विक्टोरिया को पूरी तरह से तोड़ दिया था। वे गहरे डिप्रेशन में चली गईं और कई सालों तक जनता के बीच नहीं आईं। उन्होंने जीवनभर काले कपड़े पहनकर अपने पति का शोक मनाया।
अपने आखिरी दिनों में वे अपने भारतीय सेवक अब्दुल करीम के बहुत करीब थीं। अब्दुल करीम उनके हिंदी और उर्दू के शिक्षक यानी 'मुंशी' थे। महारानी ने अब्दुल करीम को शाही दरबार में बहुत ऊंचा स्थान दिया था।
इस बात से ब्रिटिश शाही परिवार के बाकी सदस्य काफी नाराज रहते थे। इन तमाम उतार-चढ़ाव के बीच उन्होंने 63 साल, 7 महीने तक राज किया। यह उस समय तक ब्रिटिश इतिहास का सबसे लंबा शासनकाल था।
![ब्रिटेन पर राज करने वाली इस महारानी को नहीं था अपनी मां, पति पर भरोसा - Education AajTak]()
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 20 जून का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 20 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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इस लड़की का नाम अलेक्जेंड्रिना विक्टोरिया था। उस वक्त उनकी उम्र केवल 18 साल थी। उन्हें सुबह तड़के जगाया गया और इस भारी जिम्मेदारी की जानकारी दी गई। उन्होंने बहुत ही शांत मन से इस फैसले को स्वीकार किया। उसी दिन 20 जून 1837 को उन्होंने आधिकारिक रूप से गद्दी संभाल ली।
इसके बाद अगले साल जून 1838 में उनका भव्य राज्याभिषेक हुआ। एक छोटी सी लड़की अब दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य की क्वीन बन चुकी थी। लोगों को उम्मीद नहीं थी कि वह 64 सालों का लंबा शासनकाल राज करेंगी। आइए जानते हैं क्या था पूरा मामला।
Queen Victoria Succession
क्या था विक्टोरियन युग
नए-नए कारखाने खुले और रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार होने लगा। विज्ञान और तकनीक के मामले में ब्रिटेन दुनिया का लीडर बन गया। समाज में भी कई तरह के बड़े बदलाव देखने को मिल रहे थे। हालांकि इस चमक-दमक के पीछे एक कड़वा सच भी छिपा हुआ था।
गरीब मजदूरों की हालत बहुत खराब थी और उनसे फैक्ट्रियों में बहुत काम कराया जाता था। इसके बावजूद ब्रिटेन की आर्थिक ताकत पूरी दुनिया में सबसे ऊपर पहुंच गई थी। क्वीन विक्टोरिया ने इस पूरे बदलाव को बहुत करीब से देखा और संभाला। उनके राज में ब्रिटिश साम्राज्य की सीमाएं लगातार बढ़ती ही चली गईं।
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महारानी विक्टोरिया का भारत से कनेक्शन
इसे हम भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम या 1857 की क्रांति कहते हैं। इस क्रांति ने ब्रिटिश हुकूमत की नींव को हिलाकर रख दिया था। क्रांति के शांत होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया। साल 1858 में ब्रिटिश संसद ने 'Government of India Act' पास किया। इसके तहत ईस्ट इंडिया कंपनी से सारे अधिकार वापस ले लिए गए।
भारत का पूरा शासन सीधे ब्रिटेन के शाही परिवार के हाथ में आ गया। महारानी विक्टोरिया अब भारत की भी सर्वेसर्वा यानी असली शासक बन चुकी थीं। उन्होंने भारतीय प्रजा के लिए एक घोषणा पत्र भी जारी किया था। इस घोषणा पत्र को 'महारानी का घोषणा पत्र' (The Queen's Proclamation) कहा जाता है।
इसमें उन्होंने भारतीयों को समान अधिकार देने का वादा किया था। हालांकि जमीन पर हालात बहुत ज्यादा नहीं बदले और शोषण जारी रहा। साल 1876 में उन्हें आधिकारिक रूप से 'Empress of India' की उपाधि दी गई।
Queen Victoria Succession
विक्टोरिया के समय की व्यवस्थाएं जो आज भी हैं
प्रशासनिक अधिकारियों की भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं शुरू की गईं। भारत का रेलवे नेटवर्क भी विक्टोरियन युग में बहुत तेजी से फैला। हालांकि इसका मकसद ब्रिटिश सेना और व्यापार को आसान बनाना था।
आज भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है। डाक और तार व्यवस्था का आधुनिक स्वरूप भी उसी समय तैयार हुआ था। ब्रिटिश काल की अदालती व्यवस्था का ढांचा भी आज के कोर्ट से मिलता-जुलता है।
इन सब व्यवस्थाओं ने भारत के आधुनिक इतिहास को काफी प्रभावित किया। कोलकाता का प्रसिद्ध विक्टोरिया मेमोरियल आज भी उनकी याद दिलाता है। यह इमारत उनके शासनकाल और प्रभाव के प्रतीक के रूप में खड़ी है।
Queen Victoria Succession
कैसा था महारानी विक्टोरिया का जीवन
दोनों के कुल नौ बच्चे थे, जिनकी शादियां यूरोपीय राजघरानों में हुईं। इसी वजह से महारानी विक्टोरिया को 'यूरोप की दादी' (Grandmother of Europe) भी कहा जाता है। पूरा यूरोप उनके परिवार से जुड़ गया था। साल 1861 में प्रिंस अल्बर्ट की अचानक बीमारी से मृत्यु हो गई।
इस घटना ने महारानी विक्टोरिया को पूरी तरह से तोड़ दिया था। वे गहरे डिप्रेशन में चली गईं और कई सालों तक जनता के बीच नहीं आईं। उन्होंने जीवनभर काले कपड़े पहनकर अपने पति का शोक मनाया।
अपने आखिरी दिनों में वे अपने भारतीय सेवक अब्दुल करीम के बहुत करीब थीं। अब्दुल करीम उनके हिंदी और उर्दू के शिक्षक यानी 'मुंशी' थे। महारानी ने अब्दुल करीम को शाही दरबार में बहुत ऊंचा स्थान दिया था।
इस बात से ब्रिटिश शाही परिवार के बाकी सदस्य काफी नाराज रहते थे। इन तमाम उतार-चढ़ाव के बीच उन्होंने 63 साल, 7 महीने तक राज किया। यह उस समय तक ब्रिटिश इतिहास का सबसे लंबा शासनकाल था।
ब्रिटेन पर राज करने वाली इस महारानी को नहीं था अपनी मां, पति पर भरोसा - Education AajTak
महारानी विक्टोरिया से जुड़ी दिलचस्प बातें
- The Hemophilia Carrier: महारानी विक्टोरिया को 'रॉयल डिजीज' यानी हीमोफीलिया नाम की जेनेटिक बीमारी थी। उनके जरिए यह बीमारी यूरोप के कई राजघरानों (जैसे रूस और स्पेन) के राजकुमारों में फैली, जिसने आगे चलकर वहां के इतिहास और क्रांतियों को प्रभावित किया।
- Spoken Hindustani (Urdu/Hindi): अपने आखिरी सालों में महारानी विक्टोरिया भारत से इतनी प्रभावित थीं कि उन्होंने अपने भारतीय सेवक अब्दुल करीम से बाकायदा 'हिंदुस्तानी' भाषा (उर्दू और हिंदी) लिखना और बोलना सीखा था। वे अपनी डायरी में इस भाषा में नोट्स लिखती थीं।
- Surviver of 8 Assassination Attempts: अपने पूरे शासनकाल के दौरान महारानी विक्टोरिया पर कुल 8 बार जानलेवा हमले या हत्या की कोशिशें हुईं। लेकिन वे हर बार सुरक्षित बच गईं और उन्होंने कभी भी जनता के बीच जाना बंद नहीं किया।
- The Origin of White Wedding Dress: आज दुनिया भर में जो शादियों में 'व्हाइट वेडिंग गाउन' पहनने का ट्रेंड है, उसकी शुरुआत महारानी विक्टोरिया ने ही की थी। 1840 में अपनी शादी में उन्होंने पारंपरिक शाही पोशाक के बजाय सफेद रंग का लेस गाउन चुना था।
- First Monarch to Travel by Train: महारानी विक्टोरिया ब्रिटिश इतिहास की पहली ऐसी शासक (Monarch) थीं, जिन्होंने ट्रेन में सफर किया था। 13 जून 1842 को उन्होंने पहली बार रेलवे यात्रा का अनुभव लिया, जिसके बाद ब्रिटेन में रेल का क्रेज बढ़ गया।
- The Empress of India without Visiting India: महारानी विक्टोरिया को 'भारत की साम्राज्ञी' (Empress of India) घोषित किया गया था और वे भारत पर राज करती थीं, लेकिन अपने पूरे जीवनकाल में वे कभी भी एक बार भी भारत दौरे पर नहीं आ सकीं।
- Strict Instructions for Her Funeral: अपनी मौत से पहले क्वीन विक्टोरिया ने अपने अंतिम संस्कार के लिए बहुत ही सीक्रेट और सख्त निर्देश लिखे थे। उन्होंने अपनी वसीयत में लिखा था कि उनके ताबूत में उनके पति अल्बर्ट के साथ-साथ उनके भारतीय सेवक अब्दुल करीम की भी कुछ चीजें और तस्वीरें रखी जाएं।
- British rule ब्रिटिश राजशाही की आधिकारिक वेबसाइट - महारानी विक्टोरिया का इतिहास
- ब्रिटैनिका एन्साइक्लोपीडिया - विक्टोरियन युग और महारानी का जीवन
- बीबीसी हिस्ट्री - महारानी विक्टोरिया का शासनकाल और नीतियां
- british empire नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी लंदन - क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक तस्वीरें और टाइमलाइन
20 जून की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 20 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1998: विश्वनाथन आनंद ने व्लादिमीर क्रैमनिक को हराकर पांचवां फ्रैंकफर्ट क्लासिक शतरंज टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया था.
- 1999: मैक्सिको सिटी, बीजिंग, शंघाई, तेहरान और कोलकाता को दुनिया के 5 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल किया गया था.
- 2000: काहिरा में विकासशील देशों के समूह-15 (G-15) का 10वां शिखर सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था.
- 2001: जनरल परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और ताइवान ने अपना मिसाइल परीक्षण किया.
- 2002: पाकिस्तान सरकार ने अशरफ जहांगीर काजी को संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में अपना नया राजदूत नियुक्त किया था.
- 2005: रूस का मालवाहक अंतरिक्ष यान एम-53 सफलतापूर्वक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंचा था.
- 2006: जापान सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपनी सेनाओं को इराक से पूरी तरह वापस बुलाने का निर्णय लिया था.
- 2008: बीज निर्माता कंपनी अवदात इंडिया लिमिटेड ने अमेरिकी कंपनी लिमाग्रेन के सोयाबीन बीज कारोबार को खरीदा था.
- 2008: यूरोपीय संघ (EU) ने क्यूबा के खिलाफ लगाए गए अपने सभी प्रतीकात्मक प्रतिबंधों को हटाने का फैसला किया था.
- 2014: भारत के प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह को देश के सर्वोच्च साहित्य सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की घोषणा हुई थी.
- 1760: लॉर्ड वेलेज़ली का जन्म हुआ था, जो साल 1798 से 1805 तक भारत के गवर्नर-जनरल रहे थे.
- 1869: भारत के प्रसिद्ध और दिग्गज उद्योगपति लक्ष्मण काशीनाथ किर्लोस्कर का जन्म हुआ था.
- 1910: हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध एकांकीकार और लेखक भुवनेश्वर का जन्म हुआ था.
- 1923: भारत के कुशल पत्रकार और बेहतरीन लेखक गौर किशोर घोष का जन्म हुआ था.
- 1940: प्रसिद्ध भारतीय हिंदी साहित्यकार और आलोचक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी का जन्म हुआ था.
- 1952: देश के जाने-माने साहित्यकार, मशहूर उपन्यासकार और कवि विक्रम सेठ का जन्म हुआ था.
- 1958: भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और भारत की वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जन्म हुआ था.
- 1965: हिंदी भाषा के ध्वजवाहक, जाने-माने पत्रकार और वरिष्ठ साहित्यकार वेंकटेश नारायण तिवारी का निधन हुआ था.
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