23 जून का इतिहास: वो सुबह, जब प्लेन क्रैश में थमी संजय गांधी की सांसें
Kaushiki | Jun 23, 2026, 08:00 IST
history 23 june sanjay gandhi plane crash
साल 1980 में 23 जून की सुबह एक बड़े विमान हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई थी। नई दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट के पास उनका पिट्स स्पेशल विमान क्रैश हो गया था। इस घटना ने देश की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया था।
Sanjay Gandhi Plane Crash 1980: भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ तारीखें ऐसी हैं जिन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकता। 23 जून 1980 की सुबह भी एक ऐसी ही तारीख साबित हुई। इस सुबह ने देश की सत्ता और एक बड़े परिवार को हमेशा के लिए बदल दिया।
उस समय देश में इंदिरा गांधी की सरकार वापस आ चुकी थी। उनके छोटे बेटे संजय गांधी राजनीति के केंद्र में उभर रहे थे। उन्हें इंदिरा गांधी का स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना जा रहा था।
संजय गांधी को एडवेंचर और हवाई उड़ान का बहुत शौक था। वे अक्सर सुबह-सुबह दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट पर उड़ान भरने जाते थे। वह दिन भी बाकी दिनों की तरह ही सामान्य लग रहा था।
![Sanjay Gandhi]()
संजय गांधी सुबह करीब साढ़े सात बजे सफदरजंग फ्लाइंग क्लब पहुंचे थे। उनके साथ दिल्ली फ्लाइंग क्लब के पूर्व कैप्टन सुभाष सक्सेना भी थे। दोनों एक नए विमान में बैठने वाले थे।
यह विमान हाल ही में भारत लाया गया था। इसका नाम पिट्स स्पेशल टू-सीटर विमान था। यह एक बेहद मॉडर्न और एग्रेसिव स्टंट करने वाला विमान माना जाता था।
संजय गांधी ने विमान में बैठकर इंजन स्टार्ट किया। उन्होंने रनवे पर दौड़ते हुए आसमान की तरफ उड़ान भरी। मौसम बिल्कुल साफ था और हवाएं भी सामान्य चल रही थीं।
विमान ने दिल्ली के आसमान में कुछ चक्कर लगाए। संजय गांधी हवा में कुछ स्टंट करने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच विमान अचानक नीचे की तरफ आने लगा।
![विमान हादसे में हुई थी संजय गांधी की मौत, ऐसा था मंजर - Education AajTak]()
अचानक विमान का नियंत्रण पूरी तरह खो गया। जमीन पर खड़े लोग समझ गए थे कि कुछ गलत होने वाला है। विमान तेजी से रिहायशी इलाके की तरफ बढ़ा। सफदरजंग एयरपोर्ट के ठीक बाहर एक रिहायशी इलाका था।
विमान वहां के पेड़ों से टकराता हुआ सीधे जमीन पर गिर गया। एक जोरदार धमाके के साथ सब कुछ शांत हो गया। आस-पास के लोग तुरंत मलबे की तरफ दौड़े। विमान पूरी तरह टूट चुका था।
मलबे में से धुंआ निकल रहा था लेकिन आग नहीं लगी थी। हादसे की खबर मिलते ही सुरक्षाकर्मी वहां पहुंचे। संजय गांधी और कैप्टन सुभाष सक्सेना मलबे के नीचे दबे हुए थे। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
![संजय गाँधी का विमान हवा में स्टंट करते हुए गिरा था - BBC News हिंदी]()
जैसे ही ये खबर प्रधानमंत्री आवास पहुंची, वहां हड़कंप मच गया। इंदिरा गांधी तुरंत बिना किसी सुरक्षा प्रोटोकॉल के अस्पताल के लिए भागीं। उनके चेहरे पर गहरा सदमा था।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने संजय गांधी की मौत की पुष्टि की। बेटे का शव देखकर इंदिरा गांधी पूरी तरह टूट गईं। फिर भी उन्होंने खुद को बहुत मजबूती से संभाला। संजय गांधी की मौत की खबर रेडियो पर प्रसारित की गई।
पूरे देश में इस खबर से सन्नाटा पसर गया। कांग्रेस के तमाम बड़े नेता दिल्ली पहुंचने लगे।यह केवल एक मां के लिए नहीं बल्कि पूरी पार्टी के लिए झटका था। संजय गांधी पार्टी के संगठन को पूरी तरह संभाल रहे थे। उनका जाना एक बड़ा शून्य छोड़ गया।
![Sanjay Gandhi Death Anniversary an accident changed the course of Indian Politics - एक दुर्घटना ने बदल दी देश की राजनीति की दिशा - News18 हिंदी]()
संजय गांधी की मौत के बाद भारत की राजनीति पूरी तरह बदल गई। इंदिरा गांधी को अपने काम में मदद के लिए एक नए साथी की जरूरत थी। उनका ध्यान बड़े बेटे पर गया। उनके बड़े बेटे राजीव गांधी उस समय एक प्रोफेशनल पायलट थे।
वे राजनीति में बिल्कुल भी रुचि नहीं रखते थे। उन्हें देश की राजनीति से दूर रहना पसंद था। हालात को देखते हुए राजीव गांधी को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। मां का साथ देने के लिए वे राजनीति के मैदान में उतरे।
यहीं से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई। अगर 1980 में वह विमान हादसा न हुआ होता तो शायद इतिहास कुछ और होता। संजय गांधी देश के अगले प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार थे।
![Sanjay Gandhi death anniversery: शव के टुकड़ों को समेटने में लग गए थे तीन घंटे, हिल गया था पूरा गांधी परिवार | Sanjay Gandhi death anniversery 23 june, sanjay gandhi plane crash]()
हादसे के बाद इस घटना की उच्च स्तरीय जांच बैठाई गई। जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं पाई गई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक यह हादसा केवल एक ह्यूमन एरर था।
संजय गांधी बहुत कम ऊंचाई पर विमान से खतरनाक स्टंट कर रहे थे। इसी वजह से नियंत्रण खो गया। पिट्स स्पेशल विमान बहुत संवेदनशील माना जाता था। इसके लिए बहुत ज्यादा अभ्यास की जरूरत होती थी।
संजय गांधी के पास इस विमान का पर्याप्त अनुभव नहीं था। इस तरह एक छोटी सी भूल ने देश के एक बड़े नेता की जान ले ली। 23 जून 1980 का वह दिन आज भी भारतीय इतिहास का एक टर्निंग पॉइंट माना जाता है।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 23 जून का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 23 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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उस समय देश में इंदिरा गांधी की सरकार वापस आ चुकी थी। उनके छोटे बेटे संजय गांधी राजनीति के केंद्र में उभर रहे थे। उन्हें इंदिरा गांधी का स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना जा रहा था।
संजय गांधी को एडवेंचर और हवाई उड़ान का बहुत शौक था। वे अक्सर सुबह-सुबह दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट पर उड़ान भरने जाते थे। वह दिन भी बाकी दिनों की तरह ही सामान्य लग रहा था।
Sanjay Gandhi
संजय गांधी की आखिरी उड़ान की कहानी
यह विमान हाल ही में भारत लाया गया था। इसका नाम पिट्स स्पेशल टू-सीटर विमान था। यह एक बेहद मॉडर्न और एग्रेसिव स्टंट करने वाला विमान माना जाता था।
संजय गांधी ने विमान में बैठकर इंजन स्टार्ट किया। उन्होंने रनवे पर दौड़ते हुए आसमान की तरफ उड़ान भरी। मौसम बिल्कुल साफ था और हवाएं भी सामान्य चल रही थीं।
विमान ने दिल्ली के आसमान में कुछ चक्कर लगाए। संजय गांधी हवा में कुछ स्टंट करने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच विमान अचानक नीचे की तरफ आने लगा।
विमान हादसे में हुई थी संजय गांधी की मौत, ऐसा था मंजर - Education AajTak
सफदरजंग में हुआ दर्दनाक प्लेन क्रैश
विमान वहां के पेड़ों से टकराता हुआ सीधे जमीन पर गिर गया। एक जोरदार धमाके के साथ सब कुछ शांत हो गया। आस-पास के लोग तुरंत मलबे की तरफ दौड़े। विमान पूरी तरह टूट चुका था।
मलबे में से धुंआ निकल रहा था लेकिन आग नहीं लगी थी। हादसे की खबर मिलते ही सुरक्षाकर्मी वहां पहुंचे। संजय गांधी और कैप्टन सुभाष सक्सेना मलबे के नीचे दबे हुए थे। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
संजय गाँधी का विमान हवा में स्टंट करते हुए गिरा था - BBC News हिंदी
इंदिरा गांधी पर टूटा दुखों का पहाड़
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने संजय गांधी की मौत की पुष्टि की। बेटे का शव देखकर इंदिरा गांधी पूरी तरह टूट गईं। फिर भी उन्होंने खुद को बहुत मजबूती से संभाला। संजय गांधी की मौत की खबर रेडियो पर प्रसारित की गई।
पूरे देश में इस खबर से सन्नाटा पसर गया। कांग्रेस के तमाम बड़े नेता दिल्ली पहुंचने लगे।यह केवल एक मां के लिए नहीं बल्कि पूरी पार्टी के लिए झटका था। संजय गांधी पार्टी के संगठन को पूरी तरह संभाल रहे थे। उनका जाना एक बड़ा शून्य छोड़ गया।
Sanjay Gandhi Death Anniversary an accident changed the course of Indian Politics - एक दुर्घटना ने बदल दी देश की राजनीति की दिशा - News18 हिंदी
भारतीय राजनीति पर पड़ा गहरा असर
वे राजनीति में बिल्कुल भी रुचि नहीं रखते थे। उन्हें देश की राजनीति से दूर रहना पसंद था। हालात को देखते हुए राजीव गांधी को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। मां का साथ देने के लिए वे राजनीति के मैदान में उतरे।
यहीं से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई। अगर 1980 में वह विमान हादसा न हुआ होता तो शायद इतिहास कुछ और होता। संजय गांधी देश के अगले प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार थे।
Sanjay Gandhi death anniversery: शव के टुकड़ों को समेटने में लग गए थे तीन घंटे, हिल गया था पूरा गांधी परिवार | Sanjay Gandhi death anniversery 23 june, sanjay gandhi plane crash
विमान हादसे के पीछे की असली वजह
संजय गांधी बहुत कम ऊंचाई पर विमान से खतरनाक स्टंट कर रहे थे। इसी वजह से नियंत्रण खो गया। पिट्स स्पेशल विमान बहुत संवेदनशील माना जाता था। इसके लिए बहुत ज्यादा अभ्यास की जरूरत होती थी।
संजय गांधी के पास इस विमान का पर्याप्त अनुभव नहीं था। इस तरह एक छोटी सी भूल ने देश के एक बड़े नेता की जान ले ली। 23 जून 1980 का वह दिन आज भी भारतीय इतिहास का एक टर्निंग पॉइंट माना जाता है।
23 जून की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 23 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1761: पानीपत के तीसरे युद्ध के सदमे के कारण महान मराठा पेशवा बालाजी बाजीराव का निधन हुआ था।
- 1853/1953: जनसंघ के संस्थापक और महान चिंतक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की कश्मीर में कैद के दौरान अस्पताल में रहस्यमय मौत हो गई थी।
- 1980: भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे और युवा नेता संजय गांधी की एक विमान दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई थी।
- 1994: संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने दक्षिण अफ्रीका की सदस्यता दोबारा मंजूर की और उत्तरी कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने की घोषणा की।
- 1995: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अपने 50 साल के इतिहास में साइप्रस में शांति सैनिकों की अवधि बढ़ाने के लिए 100वाँ प्रस्ताव पारित किया था।
- 2008: मशहूर बंगाली अभिनेता सौमित्र चटर्जी को 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' देने के लिए चयन समिति ने अपनी सिफारिश भेजी थी।
- 2008: भारत की जेके टायर कंपनी ने 270 करोड़ डॉलर में मैक्सिको की टायर कंपनी 'टोर्नल' का अधिग्रहण किया था।
- 2008: नेपाल की तत्कालीन सरकार ने देश में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNMIN) की अवधि बढ़ाने को मंजूरी दी थी।
- 2014: यूनेस्को द्वारा गुजरात के ऐतिहासिक ‘रानी की वाव’ और हिमाचल प्रदेश के 'ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क' को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।
- 2017: सऊदी अरब के राजा ने मोहम्मद बिन नायफ को हटाकर मोहम्मद बिन सलमान (MBS) को देश का नया क्राउन प्रिंस (उत्तराधिकारी) नियुक्त किया था।
- 1901: भारत की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी पर झूलने वाले अमर शहीद क्रांतिकारी राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी का जन्म हुआ था।
- 1912: आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जनक माने जाने वाले अंग्रेज़ गणितज्ञ एलेन ट्यूरिंग का जन्म हुआ था।
- 1934: प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक, पर्यावरणविद् और चिपको आंदोलन के प्रणेता चण्डी प्रसाद भट्ट का जन्म हुआ था।
- 1934: हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे दिग्गज कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह का जन्म हुआ था।
- 1936: भारत के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल खिलाड़ियों और दिग्गज कोचों में से एक प्रदीप कुमार बनर्जी (पी.के. बनर्जी) का जन्म हुआ था।
- 1936: आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और 'तेलुगु देशम पार्टी' के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ एन. भास्कर राव का जन्म हुआ था।
- 1939: भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व खिलाड़ी और प्रसिद्ध रेफरी सैयद शाहिद हाकिम का जन्म हुआ था।
- 1972: भारतीय जनता पार्टी के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव कुमार बालयान का जन्म हुआ था।
- 1914: उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध राजनेता, पत्रकार और समाज सुधारक गंगाप्रसाद वर्मा का निधन हुआ था।
- 1939: बच्चों की शिक्षा में नए प्रयोग करने वाले गुजराती भाषा के महान लेखक और शिक्षाशास्त्री गिजुभाई बधेका का निधन हुआ था।
- 1971: भारत के स्वतंत्रता सेनानी, प्रमुख क्रांतिकारी और पाकिस्तान में भारत के पहले उच्चायुक्त श्रीप्रकाश का निधन हुआ था।
- 1980: ट्रेड यूनियन नेता, स्वतंत्रता सेनानी और भारत के चौथे राष्ट्रपति वराहगिरी वेंकट गिरी (वी.वी. गिरी) का निधन हुआ था।
- 2015: मदर टेरेसा की संस्था 'मिशनरीज ऑफ़ चैरिटीज' की पूर्व प्रमुख सिस्टर निर्मला जोशी का निधन हुआ था।
- दुनिया भर में विधवा महिलाओं के अधिकारों और उनके सम्मान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 'अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस' मनाया जाता है।
- विकास कार्यों में लोक सेवकों के योगदान को सराहने के लिए वैश्विक स्तर पर 'संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा दिवस' मनाया जाता है।
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