3 मार्च का इतिहास: 90 हजार पाक सैनिकों को घुटने टेकने पर मजबूर करने वाले शेर की कहानी
Kaushiki | Apr 03, 2026, 08:00 IST
sam-manekshaw-biography
फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का जन्म 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में हुआ। 1971 के युद्ध में उन्होंने 90 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।
भारतीय सेना के इतिहास में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ (Sam Manekshaw) का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में जन्मे सैम बहादुर एक ऐसे जांबाज जनरल थे।
इनकी सूझबूझ और निडरता ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया था। वे भारतीय सेना के पहले अधिकारी थे जिन्हें फील्ड मार्शल की पांच-सितारा रैंक से नवाजा गया।
अपनी बेबाक शैली और सैम बहादुर के नाम से मशहूर इस महान योद्धा की कहानी सिर्फ जंग जीतने की नहीं, बल्कि अटूट हौसले और लीडरशिप की मिसाल है। आज हम उन्हीं की बहादुरी और गौरवशाली जीवन की कहानी को विस्तार से जानेंगे।
![Sam Bahadur: An Ode to India's Finest Soldier | YourStory]()
सैम का बचपन अमृतसर की गलियों में बीता और वे बहुत शरारती थे। उन्होंने नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की थी। वह अपने पिता के खिलाफ जाकर फौजी भर्ती की परीक्षा में बैठे।
सैम मानेकशॉ देहरादून की मिलिट्री एकेडमी के पहले बैच के छात्र बने। 1934 में वे भारतीय सेना में एक अफसर के तौर पर शामिल हुए। सैम मानेकशॉ (Sam Manekshaw) को दुनिया सैम बहादुर के नाम से जानती है।
वे भारतीय सेना के पहले फील्ड मार्शल थे। उनका जन्म 3 अप्रैल 1914 को हुआ था और वे अपनी जांबाजी और हाजिरजवाबी के लिए मशहूर थे।
![16 December : "That Memorable Day in History When 93,000 Pakistani Soldiers Kneeled in Surrender Before the Indian Army During the 1971 War” - Jammu Kashmir Now | The facts and information about J&K]()
भारत के लिए उनके कुछ बड़े योगदान:
![16 December : "That Memorable Day in History When 93,000 Pakistani Soldiers Kneeled in Surrender Before the Indian Army During the 1971 War” - Jammu Kashmir Now | The facts and information about J&K]()
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैम मानेकशॉ को सात गोलियां लगी थीं। उनके डॉक्टर ने जीने की उम्मीद लगभग पूरी तरह छोड़ दी थी। जब डॉक्टर ने पूछा क्या हुआ, तो सैम ने हंसकर जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि मुझे बस एक गधे ने लात मारी है। उनकी इस जिंदादिली को देखकर डॉक्टर भी बहुत ज्यादा हैरान रह गए। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें तुरंत मिलिट्री क्रॉस से सम्मानित किया गया।
![Sam Bahadur - a gentleman, a soldier and a wonderful human]()
सैम मानेकशॉ का सबसे बड़ा योगदान 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध था। उस समय इंदिरा गांधी तुरंत युद्ध शुरू करना चाहती थीं। सैम ने अपनी रणनीति के लिए कुछ महीनों का समय मांगा। उन्होंने कहा कि बिना तैयारी के युद्ध करना बहुत घातक होगा।
इंदिरा गांधी उनकी बात मान गईं और तैयारी का समय दिया। दिसंबर 1971 में युद्ध शुरू हुआ और भारत ने इतिहास रचा। महज 13 दिनों के भीतर ही पाकिस्तानी सेना ने हार मान ली।
दुनिया ने देखा कि 90 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया। सैम मानेकशॉ की वजह से ही बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बना।
![भारतीय सेना के सबसे महान नायक फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ आज भी सबसे बड़े प्रेरक हैं - एडीयू - एविएशन डिफेंस यूनिवर्स]()
सैम मानेकशॉ अपनी बेबाकी के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध थे। एक बार इंदिरा गांधी ने उनसे युद्ध की तैयारी पूछी थी। सैम ने उन्हें मुस्कुराते हुए स्वीटी कहकर संबोधित किया था। उन्होंने साफ कहा कि सेना हमेशा जंग के लिए तैयार रहती है। उनकी इसी निडरता ने उन्हें सबका चहेता फौजी बना दिया था।
![सैम मानेकशॉ - विकिपीडिया]()
1973 में जनरल सैम मानेकशॉ भारत का पहला फील्ड मार्शल बनाया गया। यह सम्मान पाने वाले वे भारतीय सेना के पहले अधिकारी थे। रिटायरमेंट के बाद वे तमिलनाडु के कुन्नूर में रहने लगे थे। 27 जून 2008 को इस महान योद्धा ने अंतिम सांस ली। उनके अंतिम शब्द थे, "मैं ठीक हूं" (I am okay)।
फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ सिर्फ एक फौजी नहीं, बल्कि भारतीय सेना के स्वाभिमान का सबसे बड़ा प्रतीक हैं। उनकी जांबाजी और शानदार लीडरशिप ने न केवल 1971 की जंग जीती, बल्कि दुनिया का भूगोल भी बदल दिया। आज भी सैम बहादुर की कहानी हर हिंदुस्तानी के दिल में देशभक्ति का जज्बा और अटूट साहस भर देती है।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 03 अप्रैल का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 03 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
12 जनवरी का इतिहास: National Youth Day, जानें विवेकानंद का भारतीय दर्शन
11 जनवरी का इतिहास: ताशकंद में क्या हुआ था, पढ़ें शास्त्री जी के निधन की कहानी
आज का इतिहास: सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर जानें उनके वल्लभ से सरदार बनने तक का सफर
आज का इतिहास: कैसे खड़ी हुई थी दुनिया की सबसे बड़ी आजादी की मशाल Statue of Liberty
इनकी सूझबूझ और निडरता ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया था। वे भारतीय सेना के पहले अधिकारी थे जिन्हें फील्ड मार्शल की पांच-सितारा रैंक से नवाजा गया।
अपनी बेबाक शैली और सैम बहादुर के नाम से मशहूर इस महान योद्धा की कहानी सिर्फ जंग जीतने की नहीं, बल्कि अटूट हौसले और लीडरशिप की मिसाल है। आज हम उन्हीं की बहादुरी और गौरवशाली जीवन की कहानी को विस्तार से जानेंगे।
Sam Bahadur: An Ode to India's Finest Soldier | YourStory
अमृतसर से शुरू हुआ एक फौजी का सफर
सैम मानेकशॉ देहरादून की मिलिट्री एकेडमी के पहले बैच के छात्र बने। 1934 में वे भारतीय सेना में एक अफसर के तौर पर शामिल हुए। सैम मानेकशॉ (Sam Manekshaw) को दुनिया सैम बहादुर के नाम से जानती है।
वे भारतीय सेना के पहले फील्ड मार्शल थे। उनका जन्म 3 अप्रैल 1914 को हुआ था और वे अपनी जांबाजी और हाजिरजवाबी के लिए मशहूर थे।
16 December : "That Memorable Day in History When 93,000 Pakistani Soldiers Kneeled in Surrender Before the Indian Army During the 1971 War” - Jammu Kashmir Now | The facts and information about J&K
भारत के लिए उनके कुछ बड़े योगदान:
- 1971 का युद्ध: उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारत को मिली ऐतिहासिक जीत थी।
- नया देश (बांग्लादेश): उनकी शानदार रणनीति की वजह से ही दुनिया के नक्शे पर बांग्लादेश का उदय हुआ।
- ऐतिहासिक आत्मसमर्पण: उनके नेतृत्व में 90 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने घुटने टेके थे।
- बहादुरी की मिसाल: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्हें 9 गोलियां लगी थीं, फिर भी वे मौत को मात देकर वापस लौटे।
- लीडरशिप: उन्होंने भारतीय सेना को आधुनिक और अनुशासित बनाने में अहम भूमिका निभाई। वे आज भी हर फौजी के लिए सबसे बड़े इंस्पिरेशन हैं।
16 December : "That Memorable Day in History When 93,000 Pakistani Soldiers Kneeled in Surrender Before the Indian Army During the 1971 War” - Jammu Kashmir Now | The facts and information about J&K
मौत को मात देने वाले जांबाज अफसर
उन्होंने कहा कि मुझे बस एक गधे ने लात मारी है। उनकी इस जिंदादिली को देखकर डॉक्टर भी बहुत ज्यादा हैरान रह गए। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें तुरंत मिलिट्री क्रॉस से सम्मानित किया गया।
Sam Bahadur - a gentleman, a soldier and a wonderful human
1971 की जंग और ऐतिहासिक जीत
इंदिरा गांधी उनकी बात मान गईं और तैयारी का समय दिया। दिसंबर 1971 में युद्ध शुरू हुआ और भारत ने इतिहास रचा। महज 13 दिनों के भीतर ही पाकिस्तानी सेना ने हार मान ली।
दुनिया ने देखा कि 90 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया। सैम मानेकशॉ की वजह से ही बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बना।
भारतीय सेना के सबसे महान नायक फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ आज भी सबसे बड़े प्रेरक हैं - एडीयू - एविएशन डिफेंस यूनिवर्स
इंदिरा गांधी के साथ वो मशहूर किस्सा
सैम मानेकशॉ - विकिपीडिया
फील्ड मार्शल का सम्मान और अंतिम समय
फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ सिर्फ एक फौजी नहीं, बल्कि भारतीय सेना के स्वाभिमान का सबसे बड़ा प्रतीक हैं। उनकी जांबाजी और शानदार लीडरशिप ने न केवल 1971 की जंग जीती, बल्कि दुनिया का भूगोल भी बदल दिया। आज भी सैम बहादुर की कहानी हर हिंदुस्तानी के दिल में देशभक्ति का जज्बा और अटूट साहस भर देती है।
Reference Links
- Indian Army Official Website - Profiles of Field Marshals
- National War Memorial India - General Sam Manekshaw Gallery
- Britannica - Biography of Sam Manekshaw
- Prasar Bharati Archives - 1971 War History
03 अप्रैल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 03 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1043: एडवर्ड द कन्फैसर को इंग्लैंड के राजा के रूप में ताज पहनाया गया।
- 1776: जॉर्ज वाशिंगटन को हार्वर्ड कॉलेज से 'एल.एल.डी' की मानद डिग्री मिली।
- 1783: अमेरिका और स्वीडन के बीच व्यापारिक संबंधों के लिए मैत्री संधि हुई।
- 1860: अमेरिका में लंबी दूरी के संचार के लिए 'पोनी एक्सप्रेस' मेल सेवा शुरू हुई।
- 1895: प्रसिद्ध आयरिश लेखक ऑस्कर वाइल्ड के खिलाफ ऐतिहासिक मुकदमा शुरू हुआ।
- 1922: जोसेफ स्टालिन सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के पहले महासचिव बने।
- 1933: विमान ने पहली बार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के ऊपर से उड़ान भरी।
- 1948: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के पुनर्निर्माण के लिए अमेरिकी 'मार्शल प्लान' लागू हुआ।
- 1949: अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने 'उत्तरी अटलांटिक संधि' (NATO की नींव) पर हस्ताक्षर किए।
- 1973: मोटोरोला के मार्टिन कूपर ने न्यूयॉर्क में दुनिया की पहली मोबाइल फोन कॉल की।
- 1981: दुनिया का पहला सफल पोर्टेबल कंप्यूटर 'ओसबोर्न 1' प्रदर्शित किया गया।
- 1996: क्रोएशिया में अमेरिकी वायु सेना का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें वाणिज्य सचिव रॉन ब्राउन की मौत हुई।
- 2006: नेपाल के माओवादियों ने सरकार के खिलाफ संघर्षविराम की घोषणा की।
- 2011: कजाकिस्तान के राष्ट्रपति चुनाव में नूरसुल्तान नज़रबायेव ने 95% वोटों के साथ जीत दर्ज की।
- 2013: अर्जेंटीना में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा में 100 से अधिक लोगों की जान गई।
भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1914: सैम मानेकशॉ फर्स्ट फील्ड मार्शल ऑफ इंडिया का जन्म अमृतसर में हुआ था।
- 1962: जवाहरलाल नेहरू लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री चुने गए।
- 1999: भारत ने अपने पहले ग्लोबल टेलीकॉम सैटेलाइट INSAT-1E का सफल प्रक्षेपण किया।
- 2001: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन अपनी भारत यात्रा के दौरान यहाँ पहुँचे।
- 2008: मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को 'राष्ट्रीय क्रांतिवीर अवार्ड' से सम्मानित किया गया।
आज का इतिहास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...
11 जनवरी का इतिहास: ताशकंद में क्या हुआ था, पढ़ें शास्त्री जी के निधन की कहानी
आज का इतिहास: सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर जानें उनके वल्लभ से सरदार बनने तक का सफर
आज का इतिहास: कैसे खड़ी हुई थी दुनिया की सबसे बड़ी आजादी की मशाल Statue of Liberty
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari