4 अप्रैल का इतिहास: क्रांतिकारी पत्रकार माखनलाल चतुर्वेदी, जिन्होंने कलम को बनाया आजादी का हथियार
Kaushiki | Apr 04, 2026, 08:00 IST
Makhanlal Chaturvedi Biography
4 अप्रैल 1889 को जन्मे माखनलाल चतुर्वेदी महान कवि और पत्रकार थे। उनकी 'पुष्प की अभिलाषा' आज भी भारतीयों में देशभक्ति का जज्बा भरती है। जानिए उनका पूरा जीवन।
दोस्तों, आज बात करेंगे हिंदी साहित्य के उस दिग्गज की, जिसे दुनिया एक भारतीय आत्मा कहती है। साल 1889 की 4 अप्रैल को मध्य प्रदेश के बाबई गांव में एक बालक जन्मा।
माता-पिता ने नाम रखा माखनलाल, जो आगे चलकर साहित्य का सूरज बना। उनके पिता एक साधारण शिक्षक थे, पर संस्कार बहुत ऊंचे थे। माखनलाल जी ने बचपन से ही गरीबी को बहुत करीब से देखा।
मात्र 16 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। लेकिन उनके भीतर देश के लिए कुछ बड़ा करने की तड़प थी। उन्होंने अपनी कलम उठाई और अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। वह सिर्फ एक लेखक नहीं, बल्कि एक सच्चे सेनानी भी थे।
![Makhanlal Chaturvedi: The Voice of India's Soul in Literature and Journalism - historified]()
माखनलाल जी जानते थे कि कलम की ताकत तलवार से बड़ी होती है। उन्होंने 'प्रभा', 'प्रताप' और 'कर्मवीर' जैसे अखबारों का संपादन किया। उनके शब्द पढ़कर युवाओं के खून में उबाल आ जाता था।
वह गणेश शंकर विद्यार्थी जी को अपना गुरु मानते थे। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वह कई बार जेल भी गए। जेल की कालकोठरी में भी उनकी लेखनी कभी नहीं रुकी।
उन्होंने जेल से ही देशवासियों को जागृत करने वाली कविताएं लिखीं। ब्रिटिश सरकार उनकी धारदार लेखनी से हमेशा बहुत डरी रहती थी। उन्होंने पत्रकारिता को कभी पेशा नहीं, बल्कि मिशन माना।
जब भी देशभक्ति की बात होती है, एक कविता सबसे पहले याद आती है। पुष्प की अभिलाषा कविता ने उन्हें अमर बना दिया। "चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं..." यह पंक्तियां आज भी गूंजती हैं।
इस कविता में एक फूल कहता है कि उसे सैनिकों के रास्ते पर फेंक दो। यह कविता देश के प्रति समर्पण का सबसे सुंदर उदाहरण है। उन्होंने साहित्य के माध्यम से जन-जन को एकता का पाठ पढ़ाया। उनकी कविताएं आज भी स्कूलों में बच्चों को प्रेरित करती हैं। उनके शब्द हमें सिखाते हैं कि देश सबसे ऊपर होता है।
![एक भारतीय आत्मा - दादा माखनलाल - Documentary on Makhanlal Chaturvedi by Electronic Media Students]()
माखनलाल चतुर्वेदी जी हमेशा युवाओं और छात्रों को बहुत प्यार करते थे। उनका मानना था कि छात्र ही देश का आने वाला कल हैं। वह कहते थे कि अपनी भाषा और संस्कृति पर हमेशा गर्व करो। उनका एक विचार था, "समर्पण ही सफलता की पहली सीढ़ी है।" उन्होंने सिखाया कि ज्ञान का असली उद्देश्य समाज की सेवा करना है।
वह सादगी भरा जीवन जीते थे और हमेशा सच बोलते थे। छात्रों को उनसे निर्भीकता और ईमानदारी का गुण सीखना चाहिए। उन्होंने अपनी कविताओं में संघर्ष को ही जीवन का नाम दिया। आज का युवा उनके जीवन से अनुशासन सीख सकता है।
![माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती आज, लेखन के लिए ठुकरा दिया था उन्होंने मुख्यमंत्री का पद]()
हिंदी साहित्य के प्रति उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। साल 1955 में उन्हें पहला 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' दिया गया। उनकी रचना 'हिम तरंगिणी' के लिए उन्हें यह सम्मान मिला।
भारत सरकार ने उन्हें 'पद्म भूषण' से भी सम्मानित किया था। लेकिन उन्होंने हमेशा विनम्रता के साथ अपना काम जारी रखा। मध्य प्रदेश में उनके नाम पर एक पत्रकारिता विश्वविद्यालय भी है।
यह विश्वविद्यालय आज भी हजारों पत्रकारों को तैयार कर रहा है। 30 जनवरी 1968 को इस महान आत्मा ने दुनिया छोड़ दी। पर उनके शब्द और विचार आज भी हमारे बीच जीवित हैं। उनके नाम से मध्यप्रदेश, भोपाल में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भी है।
पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ने अपनी कलम से स्वाधीनता की जो मशाल जलाई, वह आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का जज्बा पैदा करती है। उनका जीवन और साहित्य हमें सिखाता है कि निस्वार्थ सेवा और अटूट समर्पण ही किसी भी राष्ट्र की असली शक्ति होती है।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 04 अप्रैल का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 04 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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माता-पिता ने नाम रखा माखनलाल, जो आगे चलकर साहित्य का सूरज बना। उनके पिता एक साधारण शिक्षक थे, पर संस्कार बहुत ऊंचे थे। माखनलाल जी ने बचपन से ही गरीबी को बहुत करीब से देखा।
मात्र 16 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। लेकिन उनके भीतर देश के लिए कुछ बड़ा करने की तड़प थी। उन्होंने अपनी कलम उठाई और अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। वह सिर्फ एक लेखक नहीं, बल्कि एक सच्चे सेनानी भी थे।
Makhanlal Chaturvedi: The Voice of India's Soul in Literature and Journalism - historified
पत्रकारिता और स्वाधीनता संग्राम में साहस
वह गणेश शंकर विद्यार्थी जी को अपना गुरु मानते थे। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वह कई बार जेल भी गए। जेल की कालकोठरी में भी उनकी लेखनी कभी नहीं रुकी।
उन्होंने जेल से ही देशवासियों को जागृत करने वाली कविताएं लिखीं। ब्रिटिश सरकार उनकी धारदार लेखनी से हमेशा बहुत डरी रहती थी। उन्होंने पत्रकारिता को कभी पेशा नहीं, बल्कि मिशन माना।
पुष्प की अभिलाषा: हर भारतीय की धड़कन
इस कविता में एक फूल कहता है कि उसे सैनिकों के रास्ते पर फेंक दो। यह कविता देश के प्रति समर्पण का सबसे सुंदर उदाहरण है। उन्होंने साहित्य के माध्यम से जन-जन को एकता का पाठ पढ़ाया। उनकी कविताएं आज भी स्कूलों में बच्चों को प्रेरित करती हैं। उनके शब्द हमें सिखाते हैं कि देश सबसे ऊपर होता है।
एक भारतीय आत्मा - दादा माखनलाल - Documentary on Makhanlal Chaturvedi by Electronic Media Students
विद्यार्थियों के लिए सीख
वह सादगी भरा जीवन जीते थे और हमेशा सच बोलते थे। छात्रों को उनसे निर्भीकता और ईमानदारी का गुण सीखना चाहिए। उन्होंने अपनी कविताओं में संघर्ष को ही जीवन का नाम दिया। आज का युवा उनके जीवन से अनुशासन सीख सकता है।
माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती आज, लेखन के लिए ठुकरा दिया था उन्होंने मुख्यमंत्री का पद
साहित्य अकादमी का पहला पुरस्कार
भारत सरकार ने उन्हें 'पद्म भूषण' से भी सम्मानित किया था। लेकिन उन्होंने हमेशा विनम्रता के साथ अपना काम जारी रखा। मध्य प्रदेश में उनके नाम पर एक पत्रकारिता विश्वविद्यालय भी है।
यह विश्वविद्यालय आज भी हजारों पत्रकारों को तैयार कर रहा है। 30 जनवरी 1968 को इस महान आत्मा ने दुनिया छोड़ दी। पर उनके शब्द और विचार आज भी हमारे बीच जीवित हैं। उनके नाम से मध्यप्रदेश, भोपाल में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भी है।
पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ने अपनी कलम से स्वाधीनता की जो मशाल जलाई, वह आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का जज्बा पैदा करती है। उनका जीवन और साहित्य हमें सिखाता है कि निस्वार्थ सेवा और अटूट समर्पण ही किसी भी राष्ट्र की असली शक्ति होती है।
Reference Links
- Official Portal of Government of India - Cultural Profiles
- Sahitya Akademi - List of Winners
- Encyclopedia Britannica - Hindi Literature Section
- Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism
04 अप्रैल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 04 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1287: वारेरु ने निचले बर्मा में हंथावाडी साम्राज्य की स्थापना की और स्वयं को राजा घोषित किया।
- 1660: इंग्लैंड के चार्ल्स द्वितीय ने ताज की बहाली के लिए अपनी शर्तों के साथ 'ब्रेडा की घोषणा' की।
- 1716: रूस और प्रशिया की संयुक्त सेनाओं ने उत्तरी जर्मनी के विस्मार शहर पर कब्जा किया।
- 1721: रॉबर्ट वाल्पोल आधिकारिक तौर पर ग्रेट ब्रिटेन के पहले प्रधान मंत्री बने।
- 1737: एंथनी वैन हेम को डच पेंशन सलाहकार के पद पर नियुक्त किया गया।
- 1768: फिलिप एस्टले ने लंदन में घुड़सवारी प्रदर्शन के लिए पहले आधुनिक एम्फीथिएटर (सर्कस) की स्थापना की।
- 1796: जॉर्जेस क्यूवियर ने जीवाश्म विज्ञान पर अपना पहला ऐतिहासिक व्याख्यान दिया।
- 1814: नेपोलियन ने फ्रांस के सम्राट का पद त्यागा और अपने पुत्र नेपोलियन द्वितीय को उत्तराधिकारी बनाया।
- 1818: अमेरिकी संसद ने राष्ट्रीय ध्वज में 13 लाल पट्टियां और 20 सितारे रखने का निर्णय लिया।
- 1841: विलियम हेनरी हैरिसन कार्यालय में मरने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने (कार्यकाल मात्र 32 दिन)।
- 1857: एंग्लो और फारसी युद्ध की औपचारिक समाप्ति हुई।
- 1859: न्यूयॉर्क में प्रसिद्ध अमेरिकी गीत 'डिक्सी' का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ।
- 1873: दुनिया के सबसे पुराने 'केनेल क्लब' की स्थापना यूनाइटेड किंगडम में की गई।
- 1887: सुसाना मेडोरा साल्टर अमेरिका की पहली महिला मेयर निर्वाचित हुईं।
- 1905: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में आए भीषण भूकंप में लगभग 20,000 लोगों की जान गई।
- 1909: ब्राजील में प्रसिद्ध फुटबॉल टीम 'स्पोर्ट क्लब इंटरनेशनल पोर्टो एलेग्रे' की स्थापना हुई।
- 1916: अमेरिकी सीनेट ने प्रथम विश्व युद्ध में शामिल होने के पक्ष में अपनी सहमति दी।
- 1929: रोमानिया के ब्यूजु में रेलगाड़ी पटरी से उतरने के कारण 20 लोगों की मौत हुई।
- 1932: वैजिस्लाव मरिन्कोविक ने यूगोस्लाविया के प्रधान मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
- 1945: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने जर्मन शहर कासेल पर पूर्ण नियंत्रण किया।
- 1949: शीतयुद्ध के दौरान सामूहिक रक्षा के लिए 'उत्तरी अटलांटिक सैन्य संगठन' (NATO) की स्थापना हुई।
- 1960: अफ्रीकी देश सेनेगल ने फ्रांस से अपनी पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा की।
- 1968: अमेरिकी नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर की मेम्फिस में हत्या कर दी गई।
- 1969: सर्जन डेंटन कोलेई और डोमिंगो लिओटा ने दुनिया का पहला कृत्रिम हृदय प्रत्यारोपित किया।
- 1973: न्यूयॉर्क शहर के 'वर्ल्ड ट्रेड सेंटर' का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन और समर्पण किया गया।
- 1975: बिल गेट्स और पॉल एलन ने मिलकर अल्बुकर्क में 'माइक्रोसॉफ्ट' कंपनी की स्थापना की।
- 1976: कंबोडिया के नेता नॉरडोम सिहानौक को पद से हटाकर खमेर रूज द्वारा गिरफ्तार किया गया।
- 1977: जॉर्जिया में साउदर्न एयरवेज की उड़ान 242 के दुर्घटनाग्रस्त होने से 72 लोगों की मौत हुई।
- 1979: पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी की सजा दी गई।
- 1984: अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने रासायनिक हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध का आह्वान किया।
- 1988: एरिज़ोना के गवर्नर इवान मेखम को महाभियोग में दोषी पाए जाने के बाद पद से हटाया गया।
- 1990: हांगकांग के वर्तमान ध्वज को आधिकारिक तौर पर अपनाया गया।
- 1993: ट्रिश जॉनसन ने लास वेगास एलपीजीए गोल्फ टूर्नामेंट जीता।
- 1993: टॉम शॉ ने 15वां सीनियर गोल्फ ट्रेडिशन खिताब अपने नाम किया।
- 1994: हॉलीवुड अभिनेता टोनी कर्टिस की सफल हार्ट बाईपास सर्जरी की गई।
- 1994: नेटस्केप कम्युनिकेशंस की स्थापना 'मोज़ेक कम्युनिकेशंस' के नाम से हुई।
- 1996: न्यूयॉर्क के रोयाल थिएटर में नाटक 'हवा' का औपचारिक उद्घाटन हुआ।
- 1997: टाइटन 2 (DMSP) रॉकेट को अंतरिक्ष मिशन के लिए सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
- 2002: अंगोला सरकार और UNITA विद्रोहियों के बीच शांति संधि के साथ गृह युद्ध समाप्त हुआ।
- 2005: उत्तरी कैरोलिना ने इलिनोइस को हराकर NCAA पुरुष बास्केटबॉल चैम्पियनशिप जीती।
- 2011: चीनी वैज्ञानिकों ने दावा किया कि उन्होंने मानव दूध देने वाली गायों को सफलतापूर्वक विकसित किया है।
भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1994: भारतीय टीम ने जैकब के मैदान पर मेरिनर्स को 4-3 से हराकर जीत दर्ज की।
- 1997: विश्व बैंक ने भारत को क्रय शक्ति (PPP) के आधार पर दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था घोषित किया।
- 2010: उड़ीसा के कोरापुट में माओवादियों के बारूदी सुरंग विस्फोट में 10 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए।
- 2013: महाराष्ट्र के ठाणे में एक अवैध सात मंजिला इमारत गिरने से 74 लोगों की मौत हुई।
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