8 अप्रैल का इतिहास: पाब्लो पिकासो, ब्रश के उस जादूगर की कहानी जिसने बदल दिया दुनिया का नजरिया
Kaushiki | Apr 08, 2026, 08:00 IST
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पाब्लो पिकासो 20वीं सदी के महान पेंटर थे। उन्होंने क्यूबिज्म और मॉडर्न आर्ट को जन्म दिया। 8 अप्रैल 1973 को फ्रांस में उनका निधन हुआ था। पिकासो की कला आज भी अमर है।
आज के दिन की कहानी: आज हम एक ऐसे शख्स की बात करेंगे जिसने कैनवास पर जादू किया। पाब्लो पिकासो का नाम सुनते ही दिमाग में अजीबोगरीब आकृतियां और रंग घूमने लगते हैं। वे सिर्फ एक पेंटर नहीं थे, बल्कि कला की दुनिया के सबसे बड़े बागी थे। उन्होंने सदियों पुरानी पेंटिंग की रवायतों को तोड़कर अपना एक अलग रास्ता बनाया था।
पिकासो की कला पूरी दुनिया में महकी। 8 अप्रैल 1973 को कला के इस सूरज का सूर्यास्त फ्रांस के मौजिन्स में हुआ। उस वक्त उनकी उम्र 91 साल थी और वे तब भी काम कर रहे थे।
पिकासो ने मरते दम तक ब्रश नहीं छोड़ा, क्योंकि उनके लिए आर्ट ही जिंदगी थी। उनकी मौत ने कला जगत में एक ऐसा खालीपन पैदा किया जो कभी नहीं भरा। आइए आज हम उन्हीं की यादों और उनके ग्रेट आर्टिस्टिक जर्नी को करीब से जानेंगे।
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पाब्लो पिकासो का जन्म 25 अक्टूबर 1881 को स्पेन के मालागा शहर में हुआ था। उनके पिता डॉन जोस रुइज, जो खुद एक पेंटर और आर्ट टीचर थे। उन्होंने ही पिकासो को बचपन से ही ब्रश थमाना सिखाया।
पिकासो की रगों में आर्ट बचपन से ही दौड़ रहा था। उनका जन्म एक मिडिल क्लास फैमिली में हुआ, जहां से उन्होंने कला की दुनिया को बदलने का सपना देखा।
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पिकासो के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने मां बोलने से पहले पिज कहा। स्पेनिश भाषा में पिज का मतलब पेंसिल होता है, जो उनके भविष्य का संकेत था। उनके पिता भी एक पेंटर थे और उन्होंने ही बेटे को पहली बार ब्रश दिया।
महज 13 साल की उम्र में पिकासो अपने पिता से भी बेहतर पेंटिंग करने लगे। उनके पिता ने पिकासो का टैलेंट देखकर खुद पेंटिंग करना ही छोड़ दिया था। उनको स्कूल में पढ़ाई से ज्यादा दीवारों पर चित्रकारी करना पसंद आता था।
पिकासो अपनी क्लास की खिड़की से बाहर देखते और परिंदों के स्केच बनाया करते थे। उनके पिता ने उन्हें बार्सिलोना और मैड्रिड की बेस्ट आर्ट एकेडमी में भेजा था। लेकिन पिकासो को एकेडमी के रटे-रटाए नियम कभी भी रास नहीं आए। वे हमेशा कुछ नया और कुछ अलग करने की फिराक में रहते थे।
![पाब्लो पिकासो | जीवनी, घनवाद, प्रसिद्ध चित्रकलाएँ, गुएर्निका और तथ्य | ब्रिटानिका]()
पिकासो की जिंदगी में एक वक्त ऐसा आया जब उन्होंने सिर्फ नीले रंग चुने। इसे ब्लू पीरियड कहा जाता है, जो उनके दोस्त की खुदकुशी के बाद शुरू हुआ। इस दौरान उनकी पेंटिंग्स में काफी दुख, गरीबी और अकेलापन साफ झलकता था। वे भिखारी, अंधे लोग और लाचार लोगों के चित्र नीले रंगों में बनाते थे।
यह दौर पिकासो के करियर का सबसे इमोशनल और गहरा हिस्सा माना जाता है। वक्त बदला और पिकासो की जिंदगी में प्यार और खुशियों ने दस्तक दी। फिर शुरू हुआ रोज पीरियड। इसमें उन्होंने गुलाबी और नारंगी रंगों का इस्तेमाल किया।
अब उनकी पेंटिंग्स में सर्कस के कलाकार और खुशहाल चेहरों की भरमार होने लगी। इन दो अलग-अलग दौर ने दुनिया को पिकासो की भावनाओं की गहराई दिखाई। लोग हैरान थे कि एक कलाकार रंगों से मूड कैसे बदल सकता है।
![दुनिया के इस महान चित्रकार ने आखिर क्यों जला दी थी अपनी ही पेंटिंग्स, जानें - News18 हिंदी]()
पिकासो ने अपने दोस्त जॉर्ज ब्राक के साथ मिलकर क्यूबिज्म की शुरुआत की थी। इसमें किसी भी चीज को सीधे दिखाने के बजाय टुकड़ों में दिखाया जाता था। उन्होंने चेहरों और चीजों को चौकोर, तिकोने और गोल शेप्स में तोड़ दिया था।
लोगों को शुरुआत में यह सब बहुत अजीब और काफी डरावना लगा था। लेकिन धीरे-धीरे दुनिया को समझ आया कि यह तो भविष्य की कला है। क्यूबिज्म ने इंसान के देखने के नजरिए को पूरी तरह से बदल कर रख दिया।
पिकासो कहते थे कि वे चीजों को वैसा नहीं बनाते जैसा वे देखते हैं। वे चीजों को वैसा पेंट करते थे जैसा वे उनके बारे में सोचते थे। उनकी सबसे मशहूर पेंटिंग लेस डेमोजेल्स डी'एविग्नन ने कला जगत में तहलका मचाया था। यहीं से मॉडर्न आर्ट की असली और ताकतवर शुरुआत मानी जाती है। इनके कुछ पेंटिंग के नाम...
![पाब्लो पिकासो द्वारा 1937 में बनाई गई गुएर्निका।]()
![लेस डेमोइसेल्स डी'एविग्नन, 1907 पाब्लो पिकासो द्वारा]()
![पाब्लो पिकासो – क्या आप जानते हैं? | द कलेक्टर]()
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1937 में जब स्पेन के गुएर्निका शहर पर बमबारी हुई, तो पिकासो का दिल रो पड़ा। उन्होंने अपनी नाराजगी और दुख को एक विशाल पेंटिंग गुएर्निका में उतार दिया। यह पेंटिंग युद्ध के खिलाफ दुनिया का सबसे बड़ा और कड़ा विरोध बन गई। इसमें इंसानों और जानवरों की चीखें और तड़प साफ देखी जा सकती है।
यह पेंटिंग आज भी शांति का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है। गुएर्निका को दुनिया के कई देशों में घुमाया गया ताकि लोग युद्ध को समझें। पिकासो ने इसे ब्लैक, व्हाइट और ग्रे रंगों में बनाकर सबको हैरान कर दिया।
पिकासो का मानना था कि तबाही दिखाने के लिए किसी रंग की जरूरत नहीं होती। ये पेंटिंग पिकासो को सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी भी बनाती है। आज भी इसे देखने वालों की आंखों में आंसू और दिल में सिहरन पैदा होती है।
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8 अप्रैल 1973 को पिकासो ने अपनी पत्नी जैकलीन के साथ डिनर किया। उन्होंने अपने दोस्तों से कहा कि मेरे नाम पर एक जाम पिएं। उसी रात को सोते समय उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वे चल बसे।
पिकासो ने अपने जीवन में लगभग 50 हजार से ज्यादा कलाकृतियां बनाई थीं। इनमें पेंटिंग्स, मूर्तियां, सिरेमिक आर्ट और ड्राइंग्स भी शामिल हैं। उनकी विरासत आज करोड़ों डॉलर की नीलामी में भी दिखाई देती है।
पिकासो की पेंटिंग्स (वॉल पेंटिंग)दुनिया के सबसे महंगे म्यूजियम्स की सबसे बड़ी शान बनी हुई हैं। वे कहते थे कि हर बच्चा कलाकार है, बस बड़े होकर उसे बचाना मुश्किल है। पिकासो ने अपनी आखिरी सांस तक अपने अंदर के उस बच्चे को बचाए रखा। कला की दुनिया में पिकासो का नाम हमेशा अमर और बेमिसाल रहेगा। art
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 8 अप्रैल का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 8 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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पिकासो की कला पूरी दुनिया में महकी। 8 अप्रैल 1973 को कला के इस सूरज का सूर्यास्त फ्रांस के मौजिन्स में हुआ। उस वक्त उनकी उम्र 91 साल थी और वे तब भी काम कर रहे थे।
पिकासो ने मरते दम तक ब्रश नहीं छोड़ा, क्योंकि उनके लिए आर्ट ही जिंदगी थी। उनकी मौत ने कला जगत में एक ऐसा खालीपन पैदा किया जो कभी नहीं भरा। आइए आज हम उन्हीं की यादों और उनके ग्रेट आर्टिस्टिक जर्नी को करीब से जानेंगे।
संतों, रिश्तेदारों के सम्मान में रख लिया था 23 अक्षरों का नाम, मिलिए स्पेन के मशहूर चित्रकार Pablo Picasso से - Pablo Picasso 51st Death Anniversary know some interesting facts ...
बचपन से ही था हुनर
पिकासो की रगों में आर्ट बचपन से ही दौड़ रहा था। उनका जन्म एक मिडिल क्लास फैमिली में हुआ, जहां से उन्होंने कला की दुनिया को बदलने का सपना देखा।
Rs 6.15-Crore Picasso Goes Missing On Way To Exhibition In Spain
जब पिकासो ने बोलना सीखा
महज 13 साल की उम्र में पिकासो अपने पिता से भी बेहतर पेंटिंग करने लगे। उनके पिता ने पिकासो का टैलेंट देखकर खुद पेंटिंग करना ही छोड़ दिया था। उनको स्कूल में पढ़ाई से ज्यादा दीवारों पर चित्रकारी करना पसंद आता था।
पिकासो अपनी क्लास की खिड़की से बाहर देखते और परिंदों के स्केच बनाया करते थे। उनके पिता ने उन्हें बार्सिलोना और मैड्रिड की बेस्ट आर्ट एकेडमी में भेजा था। लेकिन पिकासो को एकेडमी के रटे-रटाए नियम कभी भी रास नहीं आए। वे हमेशा कुछ नया और कुछ अलग करने की फिराक में रहते थे।
पाब्लो पिकासो | जीवनी, घनवाद, प्रसिद्ध चित्रकलाएँ, गुएर्निका और तथ्य | ब्रिटानिका
जब रंगों ने बयां किया दर्द
यह दौर पिकासो के करियर का सबसे इमोशनल और गहरा हिस्सा माना जाता है। वक्त बदला और पिकासो की जिंदगी में प्यार और खुशियों ने दस्तक दी। फिर शुरू हुआ रोज पीरियड। इसमें उन्होंने गुलाबी और नारंगी रंगों का इस्तेमाल किया।
अब उनकी पेंटिंग्स में सर्कस के कलाकार और खुशहाल चेहरों की भरमार होने लगी। इन दो अलग-अलग दौर ने दुनिया को पिकासो की भावनाओं की गहराई दिखाई। लोग हैरान थे कि एक कलाकार रंगों से मूड कैसे बदल सकता है।
दुनिया के इस महान चित्रकार ने आखिर क्यों जला दी थी अपनी ही पेंटिंग्स, जानें - News18 हिंदी
जब आर्ट को मिला नया नजरिया
लोगों को शुरुआत में यह सब बहुत अजीब और काफी डरावना लगा था। लेकिन धीरे-धीरे दुनिया को समझ आया कि यह तो भविष्य की कला है। क्यूबिज्म ने इंसान के देखने के नजरिए को पूरी तरह से बदल कर रख दिया।
पिकासो कहते थे कि वे चीजों को वैसा नहीं बनाते जैसा वे देखते हैं। वे चीजों को वैसा पेंट करते थे जैसा वे उनके बारे में सोचते थे। उनकी सबसे मशहूर पेंटिंग लेस डेमोजेल्स डी'एविग्नन ने कला जगत में तहलका मचाया था। यहीं से मॉडर्न आर्ट की असली और ताकतवर शुरुआत मानी जाती है। इनके कुछ पेंटिंग के नाम...
पाब्लो पिकासो द्वारा 1937 में बनाई गई गुएर्निका।
- गुएर्निका (Guernica, 1937)
यह पिकासो की सबसे शक्तिशाली और राजनीतिक पेंटिंग मानी जाती है।
खासियत: यह स्पेनिश गृहयुद्ध के दौरान हुई बमबारी के दर्द को दिखाती है।
इम्पैक्ट: इसे दुनिया की सबसे बेहतरीन 'एंटी-वॉर' (युद्ध विरोधी) कलाकृति माना जाता है।
लेस डेमोइसेल्स डी'एविग्नन, 1907 पाब्लो पिकासो द्वारा
- डेमोजेल्स डी'एविग्नन (Les Demoiselles d'Avignon, 1907)
इस पेंटिंग ने मॉडर्न आर्ट की नींव रखी थी।
खासियत: इसमें पांच महिलाओं को अजीबोगरीब क्यूबिक और तिकोने शेप्स में दिखाया गया है।
इम्पैक्ट: यहां से क्यूबिज्म की शुरुआत हुई। इसने उस दौर के आर्टिस्ट्स को हैरान कर दिया था।
पाब्लो पिकासो – क्या आप जानते हैं? | द कलेक्टर
- द ओल्ड गिटारिस्ट (The Old Guitarist, 1903)
ये उनके मशहूर ब्लू पीरियड की सबसे यादगार पेंटिंग है।
खासियत: इसमें एक बूढ़े, दुबले-पतले भिखारी को गिटार बजाते दिखाया गया है।
इम्पैक्ट: पूरी पेंटिंग नीले रंगों में डूबी है, जो अकेलेपन और गरीबी के गहरे दुख को बयां करती है।
The Weeping Woman - Wikipedia
- द वीपिंग वुमन (The Weeping Woman, 1937)
ये पेंटिंग इंसानी पीड़ा का एक मास्टरपीस है।
खासियत: इसमें एक महिला को रूमाल से अपने आंसू पोंछते और तड़पते दिखाया गया है।
इम्पैक्ट: ये गुएर्निका का ही एक हिस्सा मानी जाती है, जो युद्ध के बाद के दुख को दर्शाती है।
Pablo Picasso -Garçon à la Pipe (1905) – ART
- गार्कोन ए ला पिपे (Garçon à la pipe, 1905)
यह उनके रोज पीरियड की सबसे खूबसूरत कलाकृति है।
खासियत: इसमें एक युवा लड़के को हाथ में पाइप लिए और सिर पर फूलों का ताज पहने दिखाया गया है।
इम्पैक्ट: 2004 में यह $104 मिलियन में बिकी थी, जिसने उस वक्त नीलामी का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।
Picasso Paintings & Sculptures, Bio, Ideas | TheArtStory
युद्ध की तबाही का सबसे बड़ा गवाह
यह पेंटिंग आज भी शांति का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है। गुएर्निका को दुनिया के कई देशों में घुमाया गया ताकि लोग युद्ध को समझें। पिकासो ने इसे ब्लैक, व्हाइट और ग्रे रंगों में बनाकर सबको हैरान कर दिया।
पिकासो का मानना था कि तबाही दिखाने के लिए किसी रंग की जरूरत नहीं होती। ये पेंटिंग पिकासो को सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी भी बनाती है। आज भी इसे देखने वालों की आंखों में आंसू और दिल में सिहरन पैदा होती है।
शीर्ष 10 सबसे प्रसिद्ध पाब्लो पिकासो चित्रकृतियाँ, रैंक की गईं
पिकासो का आखिरी समय
पिकासो ने अपने जीवन में लगभग 50 हजार से ज्यादा कलाकृतियां बनाई थीं। इनमें पेंटिंग्स, मूर्तियां, सिरेमिक आर्ट और ड्राइंग्स भी शामिल हैं। उनकी विरासत आज करोड़ों डॉलर की नीलामी में भी दिखाई देती है।
पिकासो की पेंटिंग्स (वॉल पेंटिंग)दुनिया के सबसे महंगे म्यूजियम्स की सबसे बड़ी शान बनी हुई हैं। वे कहते थे कि हर बच्चा कलाकार है, बस बड़े होकर उसे बचाना मुश्किल है। पिकासो ने अपनी आखिरी सांस तक अपने अंदर के उस बच्चे को बचाए रखा। कला की दुनिया में पिकासो का नाम हमेशा अमर और बेमिसाल रहेगा। art
Reference Links
- Britannica - Pablo Picasso Biography
- BBC Culture - The Power of Picasso's Guernica
- The Metropolitan Museum of Art - Picasso's Works
- Official Picasso Website
8 अप्रैल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 8 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 217: रोमन सम्राट काराकाला की उनके ही गार्ड ने सड़क किनारे हत्या कर दी।
- 1271: नाइट्स होस्पिटेलर ने मामलूक सुल्तान की सेना के सामने आत्मसमर्पण किया।
- 1341: इतालवी विद्वान पेट्रार्क को रोम में 'शीर्षक कवि' की उपाधि से नवाजा गया।
- 1730: न्यूयॉर्क शहर में पहला यहूदी आराधनालय (Synagogue) बनाया गया।
- 1766: आग से बचने के लिए पहली बार 'फायर एस्केप' (बास्केट और चेन) का पेटेंट हुआ।
- 1820: प्रसिद्ध मूर्ति 'वीनस डी मिलो' ग्रीस के मिलोस द्वीप पर एक किसान को मिली।
- 1832: महान वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन ने रियो डी जनेरियो से अपनी यात्रा शुरू की।
- 1879: दुनिया में पहली बार कांच की बोतलों में दूध बेचना शुरू किया गया।
- 1904: न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध लॉन्गाक्रे स्क्वायर का नाम बदलकर 'टाइम्स स्क्वायर' रखा गया।
- 1912: नील नदी में दो जहाजों की टक्कर से 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई।
- 1947: दिग्गज अमेरिकी उद्योगपति और फोर्ड मोटर्स के संस्थापक हेनरी फोर्ड का निधन।
- 1973: 20वीं सदी के महान कलाकार पाब्लो पिकासो का फ्रांस में 91 वर्ष की आयु में निधन।
- 1978: ब्रिटेन में संसद की कार्यवाही का रेडियो पर नियमित प्रसारण शुरू हुआ।
- 1990: नेपाल के राजा बीरेंद्र ने विरोध के बाद राजनीतिक दलों पर से प्रतिबंध हटाया।
- 1994: अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) सहित सैन्य ठिकानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित हुआ।
- 2005: वेटिकन सिटी में पोप जॉन पॉल द्वितीय को अंतिम विदाई दी गई।
- 2008: यी सो-योन अंतरिक्ष में जाने वाली पहली कोरियाई महिला बनीं।
- 2013: ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर (आयरन लेडी) का निधन।
- 2014: माइक्रोसॉफ्ट ने अपने सबसे लोकप्रिय Windows XP के लिए सपोर्ट बंद कर दिया।
भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1857: आजादी के पहले क्रांतिकारी मंगल पांडे को अंग्रेजों ने फांसी की सजा दी।
- 1929: भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली असेंबली में बम फेंका और गिरफ्तारी दी।
- 1931: महान समाज सुधारक राजा राम मोहन राय अपनी इंग्लैंड यात्रा पर पहुंचे।
- 1950: भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक लियाकत-नेहरू संधि पर हस्ताक्षर हुए।
- 1965: भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा युद्ध (दूसरा कश्मीर युद्ध) की शुरुआत हुई।
- 2015: प्रसिद्ध भारतीय पत्रकार और लेखक जयकांतन का निधन हुआ।
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