9 अप्रैल का इतिहास: एडिसन से 17 साल पहले 1860 में रिकॉर्ड हुई थी दुनिया की पहली मानव आवाज
Kaushiki | Apr 09, 2026, 08:00 IST
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क्या आप जानते हैं कि रिकॉर्डिंग का इतिहास कितना पुराना है? अक्सर लोग इसका श्रेय महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन को देते हैं। लेकिन हकीकत में यह कहानी एडिसन से भी पहले शुरू हुई थी। चलिए हम आपको 164 साल पुराने उस रोमांचक दौर में ले चलते हैं।
आज के दिन की कहानी: क्या आप जानते हैं कि रिकॉर्डिंग का असली इतिहास थॉमस एडिसन से भी पुराना है? अक्सर लोग समझते हैं कि आवाज कैद करने की शुरुआत 1877 में हुई थी। लेकिन सच तो ये है कि एडिसन से 17 साल पहले ही एक फ्रांसीसी आविष्कारक ने ये करिश्मा कर दिखाया था।
9 अप्रैल 1860 को एडौर्ड-लियोन स्कॉट ने पहली बार फोनोटोग्राफ के जरिए इंसानी आवाज को कागज पर उतारा था। फोनोटोग्राफ दुनिया का पहला यंत्र था जो आवाज की लहरों को कागज पर रिकॉर्ड करता था।
ये आवाज को सुनने के लिए नहीं, बल्कि उसे विजुअल ग्राफ के रूप में देखने के लिए बनाया गया था। ये विज्ञान और इतिहास का एक ऐसा मिलन था, जिसने खामोश लकीरों को आवाज दे दी। आइए, इस रोमांचक सफर को विस्तार से समझते हैं।
![एडौर्ड-लियोन स्कॉट डी मार्टिनविले - विकिपीडिया]()
एडौर्ड-लियोन स्कॉट (Édouard-Léon Scott de Martinville) पेरिस में एक इन्वेंटर और बुकसेलर थे। उनका दिमाग हमेशा नई वैज्ञानिक खोजों में लगा रहता था। वे आवाज को फोटो की तरह सहेजना चाहते थे।
बात 9 अप्रैल 1860 की है, जब पेरिस की एक लैब में इतिहास रचा गया। फ्रांसीसी आविष्कारक एडौर्ड-लियोन स्कॉट डी मार्टिनविले ने एक अनोखा यंत्र बनाया था।
इस अद्भुत यंत्र का नाम उन्होंने फोनोटोग्राफ (Phonautograph) रखा था। स्कॉट चाहते थे कि वे इंसान की आवाज को कागज पर उतार सकें। उन्होंने इस काम के लिए एक बहुत ही अनोखा तरीका अपनाया था।
![ध्वनि रिकॉर्डिंग की उत्पत्ति: एडौर्ड-लियोन स्कॉट डी मार्टिनविले - थॉमस एडिसन राष्ट्रीय ऐतिहासिक पार्क (अमेरिकी राष्ट्रीय उद्यान सेवा)]()
फोनोटोग्राफ आज के रिकॉर्डर (human) जैसा बिल्कुल नहीं दिखता था। इसमें एक बड़ा हॉर्न लगा हुआ था। हॉर्न के अंत में एक बहुत पतला पर्दा था।
पर्दे से एक छोटी सी सुई जुड़ी हुई थी। हॉर्न में बोलने पर सुई हिलने लगती थी। सुई के सामने एक घूमता हुआ सिलेंडर था। सिलेंडर पर धुएं से काला किया कागज था। सुई उस कागज पर सफेद लकीरें बनाती थी।
![ध्वनि रिकॉर्डिंग की उत्पत्ति: एडौर्ड-लियोन स्कॉट डी मार्टिनविले - थॉमस एडिसन राष्ट्रीय ऐतिहासिक पार्क (अमेरिकी राष्ट्रीय उद्यान सेवा)]()
9 अप्रैल 1860 की वो शाम बहुत यादगार थी। स्कॉट ने हॉर्न के सामने गाना शुरू किया। उन्होंने एक मशहूर फ्रांसीसी लोकगीत को चुना था। उस गीत का नाम "औ क्लेयर डे ला लून" था।
स्कॉट की आवाज ने कागज पर निशान छोड़ दिए। ये दुनिया की सबसे पहली वॉइस रिकॉर्डिंग बनी। हालांकि, स्कॉट इसे कभी खुद सुन नहीं पाए। उनका मकसद सिर्फ आवाज को 'देखना' था।
![Edouard-Leon Scott de Martinville: Recorded Sound's True Inventor]()
साइंस के हिसाब से आवाज सिर्फ एक कंपन है। स्कॉट ने इसी कंपन को भौतिक रूप दिया था। उन्होंने हवा की लहरों को कागज पर उतारा। उन्होंने साबित किया कि आवाज अमर हो सकती है।
कागज पर बनी वो लकीरें ही साउंड वेव्स थीं। यह रिकॉर्डिंग 10 सेकंड की एक छोटी क्लिप थी। लेकिन इसने भविष्य के लिए बड़ा रास्ता खोला।
![Edouard-Leon Scott de Martinville: Recorded Sound's True Inventor]()
थॉमस एडिसन एक महान अमेरिकी आविष्कारक थे, जिन्होंने बिजली के बल्ब और फोनोग्राफ जैसे क्रांतिकारी यंत्र बनाए। उन्हें दुनिया का सबसे सफल इन्वेंटर माना जाता है, जिन्होंने रिकॉर्डेड आवाज को पहली बार सुनने लायक बनाया था। थॉमस एडिसन ने 1877 में अपना फोनोग्राफ बनाया था। एडिसन की मशीन आवाज को वापस सुना सकती थी।
स्कॉट की मशीन सिर्फ रिकॉर्डिंग के काम आती थी।इसी कारण स्कॉट का नाम इतिहास में पीछे छूट गया। लोग एडिसन को ही पहला रिकॉर्डिंग एक्सपर्ट मानने लगे। लेकिन स्कॉट ने ही रिकॉर्डिंग की नींव रखी थी। वह साउंड इंजीनियरिंग के सबसे पहले असली हीरो थे।
![Phonautograph, erfunden von Edouard Leon Scott de Martinville]()
स्कॉट की रिकॉर्डिंग 148 सालों तक मौन रही। साल 2008 में अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कमाल कर दिया। उन्होंने स्कॉट के उन पुराने कागजों को स्कैन किया।
कंप्यूटर की मदद से लकीरों को साउंड में बदला। तब पहली बार दुनिया ने स्कॉट की आवाज सुनी। वह आवाज बहुत धीमी और कुछ डरावनी थी। लेकिन उसने इतिहास के पन्नों को सच कर दिया।
![ज्यादातर लोग नहीं जानते पहली रिकॉर्डिंग का अनोखा सच: 150 साल तक खामोश रही दुनिया की पहली आवाज - first human voice recording 150 years of silence revealed]()
आज हम डिजिटल वर्ल्ड में अपनी आवाजें सहेजते हैं। हम वॉइस नोट्स और पॉडकास्ट का यूज करते हैं। इन सबके पीछे स्कॉट की वो पुरानी मेहनत है। उन्होंने सिखाया कि आवाज को पकड़ा जा सकता है।
आज के स्मार्टफोन और डिजिटल रिकॉर्डर इसी नींव पर खड़े हुए हैं। बिना स्कॉट के शायद हम आवाजों को सहेजने का सपना नहीं देख पाते। ये इन्वेंशन साइंस की दुनिया में एक बहुत बड़ी क्रांति की शुरुआत थी।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 9 अप्रैल का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 9 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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9 अप्रैल 1860 को एडौर्ड-लियोन स्कॉट ने पहली बार फोनोटोग्राफ के जरिए इंसानी आवाज को कागज पर उतारा था। फोनोटोग्राफ दुनिया का पहला यंत्र था जो आवाज की लहरों को कागज पर रिकॉर्ड करता था।
ये आवाज को सुनने के लिए नहीं, बल्कि उसे विजुअल ग्राफ के रूप में देखने के लिए बनाया गया था। ये विज्ञान और इतिहास का एक ऐसा मिलन था, जिसने खामोश लकीरों को आवाज दे दी। आइए, इस रोमांचक सफर को विस्तार से समझते हैं।
एडौर्ड-लियोन स्कॉट डी मार्टिनविले - विकिपीडिया
कौन थे एडौर्ड-लियोन स्कॉट डी मार्टिनविले
बात 9 अप्रैल 1860 की है, जब पेरिस की एक लैब में इतिहास रचा गया। फ्रांसीसी आविष्कारक एडौर्ड-लियोन स्कॉट डी मार्टिनविले ने एक अनोखा यंत्र बनाया था।
इस अद्भुत यंत्र का नाम उन्होंने फोनोटोग्राफ (Phonautograph) रखा था। स्कॉट चाहते थे कि वे इंसान की आवाज को कागज पर उतार सकें। उन्होंने इस काम के लिए एक बहुत ही अनोखा तरीका अपनाया था।
ध्वनि रिकॉर्डिंग की उत्पत्ति: एडौर्ड-लियोन स्कॉट डी मार्टिनविले - थॉमस एडिसन राष्ट्रीय ऐतिहासिक पार्क (अमेरिकी राष्ट्रीय उद्यान सेवा)
फोनोटोग्राफ: आवाज को तस्वीर बनाने वाली मशीन
पर्दे से एक छोटी सी सुई जुड़ी हुई थी। हॉर्न में बोलने पर सुई हिलने लगती थी। सुई के सामने एक घूमता हुआ सिलेंडर था। सिलेंडर पर धुएं से काला किया कागज था। सुई उस कागज पर सफेद लकीरें बनाती थी।
ध्वनि रिकॉर्डिंग की उत्पत्ति: एडौर्ड-लियोन स्कॉट डी मार्टिनविले - थॉमस एडिसन राष्ट्रीय ऐतिहासिक पार्क (अमेरिकी राष्ट्रीय उद्यान सेवा)
9 अप्रैल 1860 का वो ऐतिहासिक पल
स्कॉट की आवाज ने कागज पर निशान छोड़ दिए। ये दुनिया की सबसे पहली वॉइस रिकॉर्डिंग बनी। हालांकि, स्कॉट इसे कभी खुद सुन नहीं पाए। उनका मकसद सिर्फ आवाज को 'देखना' था।
Edouard-Leon Scott de Martinville: Recorded Sound's True Inventor
हवा की लहरों से आवाज का सफर
कागज पर बनी वो लकीरें ही साउंड वेव्स थीं। यह रिकॉर्डिंग 10 सेकंड की एक छोटी क्लिप थी। लेकिन इसने भविष्य के लिए बड़ा रास्ता खोला।
Edouard-Leon Scott de Martinville: Recorded Sound's True Inventor
एडिसन और स्कॉट: एक बड़ी तुलना
स्कॉट की मशीन सिर्फ रिकॉर्डिंग के काम आती थी।इसी कारण स्कॉट का नाम इतिहास में पीछे छूट गया। लोग एडिसन को ही पहला रिकॉर्डिंग एक्सपर्ट मानने लगे। लेकिन स्कॉट ने ही रिकॉर्डिंग की नींव रखी थी। वह साउंड इंजीनियरिंग के सबसे पहले असली हीरो थे।
Phonautograph, erfunden von Edouard Leon Scott de Martinville
2008 में कैसे सुनाई दी 1860 की आवाज
कंप्यूटर की मदद से लकीरों को साउंड में बदला। तब पहली बार दुनिया ने स्कॉट की आवाज सुनी। वह आवाज बहुत धीमी और कुछ डरावनी थी। लेकिन उसने इतिहास के पन्नों को सच कर दिया।
ज्यादातर लोग नहीं जानते पहली रिकॉर्डिंग का अनोखा सच: 150 साल तक खामोश रही दुनिया की पहली आवाज - first human voice recording 150 years of silence revealed
रिकॉर्डिंग का मॉडर्न सफर
आज के स्मार्टफोन और डिजिटल रिकॉर्डर इसी नींव पर खड़े हुए हैं। बिना स्कॉट के शायद हम आवाजों को सहेजने का सपना नहीं देख पाते। ये इन्वेंशन साइंस की दुनिया में एक बहुत बड़ी क्रांति की शुरुआत थी।
Reference Links
- FirstSounds.org - शोध और मूल रिकॉर्डिंग
- Smithsonian Magazine - स्कॉट डी मार्टिनविले का इतिहास
- BBC News - पहली आवाज़ की रिकॉर्डिंग की रिकवरी
- National Public Radio (NPR) - 1860 की रिकॉर्डिंग की रिपोर्ट
9 अप्रैल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 9 अप्रैल (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1413: हेनरी वी को इंग्लैंड के राजा के रूप में ताज पहनाया गया।
- 1544: इटली के युद्ध के दौरान फ्रांसीसी और स्पैनिश सेनाओं के बीच पीडमोंट में भिड़ंत हुई।
- 1669: मुगल बादशाह औरंगजेब ने सभी हिंदू स्कूलों और मंदिरों को गिराने का फरमान जारी किया।
- 1756: बंगाल के नवाब अली वर्दी खान का 80 साल की उम्र में निधन हुआ।
- 1860: स्कॉट डी मार्टिनविले ने 'फोनोटोग्राफ' पर दुनिया की पहली मानव आवाज रिकॉर्ड की।
- 1865: अमेरिकी गृह युद्ध समाप्त हुआ जब रॉबर्ट ई. ली ने उलीस एस. ग्रांट के सामने आत्मसमर्पण किया।
- 1888: एम्स्टर्डम के प्रसिद्ध 'कॉन्सर्टगेबॉव कॉन्सर्ट हॉल' का आधिकारिक उद्घाटन हुआ।
- 1917: प्रथम विश्व युद्ध में कनाडाई सैनिकों ने फ्रांस में 'विमी रिज' की लड़ाई शुरू की।
- 1937: जापान में निर्मित पहले विमान ने जापान से यूरोप के लिए उड़ान भरी।
- 1940: नाजी समर्थन के साथ विदकुन क्विस्लिंग ने नॉर्वे की सरकार पर कब्जा कर लिया।
- 1942: जापानी सेना ने फिलीपींस में बाटन पर कब्जा कर हजारों कैदियों का 'डेथ मार्च' शुरू किया।
- 1948: येरूशलम के पास डीर यासिन में ज़ायोनी समूहों के हमले में 100 से अधिक लोग मारे गए।
- 1957: मिस्र ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए स्वेज नहर को दोबारा खोल दिया।
- 1959: नासा ने अपने पहले सात अंतरिक्ष यात्रियों (मर्करी सेवन) के नाम की घोषणा की।
- 1963: विंस्टन चर्चिल को संयुक्त राज्य अमेरिका की मानद नागरिकता प्रदान की गई।
- 1967: दुनिया के सबसे लोकप्रिय यात्री विमान 'बोईंग 737' ने अपनी पहली सफल उड़ान भरी।
- 1972: सोवियत संघ और इराक के बीच ऐतिहासिक मैत्री संधि पर हस्ताक्षर हुए।
- 1988: ली पेंग को चीन के प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया।
- 1989: एशिया की पहली पूर्ण भूमिगत 'संजय जलविद्युत परियोजना' का शुभारंभ हुआ।
- 1998: सऊदी अरब में मीना के पास भगदड़ मचने से 150 से अधिक हाजियों की मौत हुई।
- 1999: नाइजर के राष्ट्रपति इब्राहिम बारे मैनसारा की हत्या कर दी गई।
- 2002: बहरीन में निगम चुनाव के दौरान पहली बार महिलाओं को हिस्सा लेने की इजाजत मिली।
- 2003: अमेरिकी सेना ने बगदाद पर कब्जा किया और सद्दाम हुसैन की मूर्ति को गिरा दिया।
- 2005: ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स ने अपनी लंबे समय की दोस्त कैमिला पार्कर से विवाह किया।
- 2006: वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि यूरेनस ग्रह के चारों ओर भी शनि की तरह वलय (Rings) मौजूद हैं।
- 2010: रियो डी जेनेरियो में भारी भूस्खलन के कारण लगभग 200 लोग मलबे में दब गए।
- 2012: फेसबुक ने फोटो शेयरिंग ऐप 'इंस्टाग्राम' को 1 बिलियन डॉलर में खरीदने की घोषणा की।
- 2013: फ्रांस की सीनेट ने समलैंगिक विवाह से संबंधित ऐतिहासिक बिल को अपनी मंजूरी दी।
भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1965: कच्छ के रन में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद को लेकर युद्ध छिड़ गया।
- 2004: पुर्तगाल की कोर्ट ने अबू सलेम के प्रत्यर्पण आदेश की फिर से समीक्षा करने का आग्रह किया।
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