25 मार्च का इतिहास: कलम के वो सिपाही जो मानवता के लिए शहीद हो गए
Kaushiki | Mar 25, 2026, 08:00 IST
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25 मार्च 1931 को गणेश शंकर विद्यार्थी ने कानपुर दंगों में जान दी। उन्होंने साम्प्रदायिक एकता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। वे 'प्रताप' अखबार के निडर संपादक थे
आज के दिन की कहानी: यह कहानी उस दौर की है जब कलम तलवार से भारी थी। कानपुर की गलियां 25 मार्च 1931 को नफरत की आग में जल रही थीं। चारों तरफ चीख-पुकार मची थी और लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे थे। उसी भीड़ के बीच एक दुबला-पतला शख्स निडर होकर खड़ा था।
हाथ में कोई हथियार नहीं, बस आंखों में इंसानियत की चमक थी। वे दंगाईयों के सामने सीना तानकर खड़े हो गए ताकि बेगुनाहों को बचा सकें। उस महापुरुष का नाम गणेश शंकर विद्यार्थी था, जिन्होंने प्यार के लिए जान दी। वे मरकर भी अमर हो गए और साम्प्रदायिक एकता की मिसाल बन गए।
![About-Ganesh Shankar Vidyarthi]()
गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म 26 अक्टूबर 1890 को प्रयागराज (इलाहाबाद) में हुआ था। उनके पिता जय नारायण एक स्कूल मास्टर थे, जो सादगी और उसूलों के पक्के थे। विद्यार्थी जी का बचपन ग्वालियर में बीता, जहां उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी की।
विद्यार्थीजी बचपन से ही बहुत मेधावी थे और समाज सेवा का जज्बा रखते थे। आर्थिक तंगी की वजह से वे अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए थे। लेकिन पढ़ने के शौक ने उन्हें एक बेहतरीन लेखक और पत्रकार बना दिया।
विद्यार्थीजी ने अपनी कर्मभूमि कानपुर को बनाया और वहीं से क्रांतिकारी पत्रकारिता शुरू की। वे कांग्रेस के सक्रिय नेता और एक निडर समाज सुधारक के रूप में उभरे।
वे महात्मा गांधी के अहिंसा के मार्ग और क्रांतिकारियों के साहस, दोनों का सम्मान करते थे। उनके लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि था, जिसके लिए उन्होंने अपनी कलम को हथियार बनाया।
![हिंदी पत्रकारिता के पितामह गणेश शंकर विद्यार्थी की वैचारिक-राजनीतिक दृष्टि को समझना जरूरी]()
उस दौर में कानपुर शहर साम्प्रदायिक दंगों की आग में जल रहा था। चारों तरफ नफरत का माहौल था और लोग खून के प्यासे थे। विद्यार्थी जी चुपचाप घर पर बैठकर तमाशा नहीं देख सकते थे। वे अकेले ही नफरत की उस भयानक भीड़ के बीच कूद पड़े। उन्होंने हिंदू और मुसलमान दोनों को बचाने का साहसिक प्रयास किया।
![25 मार्च 1931 क्रांतिकारी पत्रकार गणेशशंकर विद्यार्थी का बलिदान - The Narrative World]()
गणेश शंकर विद्यार्थी सिर्फ एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि क्रांतिकारियों के साथी थे। उन्होंने भगत सिंह को अपने अखबार प्रताप में शरण दी थी।
भगत सिंह वहां बलवंत सिंह के नाम से लेख लिखा करते थे। वे क्रांतिकारियों की आर्थिक मदद भी बहुत गुप्त तरीके से करते थे। अंग्रेज सरकार उनकी कलम की ताकत से हमेशा थर-थर कांपती थी।
![Ganesh Shankar Vidyarthi birth anniversary: कलम को हथियार बनाकर अंग्रेजों की नींद उड़ा ले गए थे गणेश शंकर विद्यार्थी - ganesh shankar vidyarthi birth anniversary-mobile]()
गणेश शंकर विद्यार्थी के लिए प्रताप सिर्फ एक अखबार नहीं, बल्कि एक मिशन था। उन्होंने कानपुर से इस साप्ताहिक अखबार की नींव रखी थी। उस दौर में जब प्रेस पर अंग्रेजों का भारी पहरा था, प्रताप ने निडर होकर आवाज उठाई।
गणेश शंकर विद्यार्थी का मानना था कि पत्रकारिता का असल धर्म सत्ता के सामने सच बोलना है। वे कहते थे कि अखबार का काम केवल खबर देना नहीं, बल्कि समाज में चेतना जगाना है। उन्होंने कभी भी ब्रिटिश हुकूमत के आगे घुटने नहीं टेके।
उनकी लेखनी में इतनी ताकत थी कि वह युवाओं के दिल में देशभक्ति की आग जला देती थी। प्रताप पढ़कर ही भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी देश सेवा के लिए प्रेरित हुए थे।
विद्यार्थी जी ने पत्रकारिता को सत्ता का चाटुकार नहीं, बल्कि आजादी का सच्चा हथियार बनाया था। इस अखबार ने किसानों की बदहाली और मजदूरों के शोषण को प्रमुखता से छापा। आम जनता को प्रताप अपना सबसे भरोसेमंद साथी लगने लगा था।
![ganesh shankar vidyarthi death anniversary die in a riot kanpur pratap news paper freedom fighter - दंगा रोकते हुए गणेश शंकर विद्यार्थी हो गए थे शहीद, बापू बोले थे- ये फक्र की]()
25 मार्च 1931 को वे दंगाइयों को समझाने की कोशिश कर रहे थे। कुछ उपद्रवियों ने उन पर अचानक धारदार हथियारों से हमला कर दिया। उन्होंने हंसते-हंसते साम्प्रदायिक एकता की वेदी पर प्राण न्योछावर कर दिए।
उनकी लाश कई दिनों बाद एक अस्पताल के कचरे में मिली थी। गांधी जी ने उनकी मौत पर बहुत भावुक शब्द कहे थे कि काश मुझे ऐसी मौत मिलती।
![1931 में गणेश शंकर विद्यार्थी किस 'सांप्रदायिकता' की भेंट चढ़े थे?]()
आज के दौर में गणेश शंकर विद्यार्थी का व्यक्तित्व और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गया है। आज हम अक्सर छोटी-छोटी बातों पर समाज में नफरत की दीवारें खड़ी कर लेते हैं।
ऐसे में विद्यार्थी जी का जीवन हमें आईना दिखाता है कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कानपुर के दंगों में अपनी जान देकर सिखाया कि किसी भी धर्म का असली मकसद प्यार और भाईचारा फैलाना है।
उनका बलिदान हमें आज के दौर में साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की सीख देता है। हमें उनके निडर विचारों को अपनाना चाहिए ताकि समाज में शांति और एकता का माहौल बना रहे।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 25 मार्च का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 25 मार्च (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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हाथ में कोई हथियार नहीं, बस आंखों में इंसानियत की चमक थी। वे दंगाईयों के सामने सीना तानकर खड़े हो गए ताकि बेगुनाहों को बचा सकें। उस महापुरुष का नाम गणेश शंकर विद्यार्थी था, जिन्होंने प्यार के लिए जान दी। वे मरकर भी अमर हो गए और साम्प्रदायिक एकता की मिसाल बन गए।
About-Ganesh Shankar Vidyarthi
कौन थे गणेश शंकर विद्यार्थी
विद्यार्थीजी बचपन से ही बहुत मेधावी थे और समाज सेवा का जज्बा रखते थे। आर्थिक तंगी की वजह से वे अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए थे। लेकिन पढ़ने के शौक ने उन्हें एक बेहतरीन लेखक और पत्रकार बना दिया।
विद्यार्थीजी ने अपनी कर्मभूमि कानपुर को बनाया और वहीं से क्रांतिकारी पत्रकारिता शुरू की। वे कांग्रेस के सक्रिय नेता और एक निडर समाज सुधारक के रूप में उभरे।
वे महात्मा गांधी के अहिंसा के मार्ग और क्रांतिकारियों के साहस, दोनों का सम्मान करते थे। उनके लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि था, जिसके लिए उन्होंने अपनी कलम को हथियार बनाया।
हिंदी पत्रकारिता के पितामह गणेश शंकर विद्यार्थी की वैचारिक-राजनीतिक दृष्टि को समझना जरूरी
दंगों के बीच शांति का दूत
25 मार्च 1931 क्रांतिकारी पत्रकार गणेशशंकर विद्यार्थी का बलिदान - The Narrative World
क्रांतिकारियों के सच्चे मददगार
भगत सिंह वहां बलवंत सिंह के नाम से लेख लिखा करते थे। वे क्रांतिकारियों की आर्थिक मदद भी बहुत गुप्त तरीके से करते थे। अंग्रेज सरकार उनकी कलम की ताकत से हमेशा थर-थर कांपती थी।
Ganesh Shankar Vidyarthi birth anniversary: कलम को हथियार बनाकर अंग्रेजों की नींद उड़ा ले गए थे गणेश शंकर विद्यार्थी - ganesh shankar vidyarthi birth anniversary-mobile
प्रताप अखबार और पत्रकारिता का धर्म
गणेश शंकर विद्यार्थी का मानना था कि पत्रकारिता का असल धर्म सत्ता के सामने सच बोलना है। वे कहते थे कि अखबार का काम केवल खबर देना नहीं, बल्कि समाज में चेतना जगाना है। उन्होंने कभी भी ब्रिटिश हुकूमत के आगे घुटने नहीं टेके।
उनकी लेखनी में इतनी ताकत थी कि वह युवाओं के दिल में देशभक्ति की आग जला देती थी। प्रताप पढ़कर ही भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी देश सेवा के लिए प्रेरित हुए थे।
विद्यार्थी जी ने पत्रकारिता को सत्ता का चाटुकार नहीं, बल्कि आजादी का सच्चा हथियार बनाया था। इस अखबार ने किसानों की बदहाली और मजदूरों के शोषण को प्रमुखता से छापा। आम जनता को प्रताप अपना सबसे भरोसेमंद साथी लगने लगा था।
ganesh shankar vidyarthi death anniversary die in a riot kanpur pratap news paper freedom fighter - दंगा रोकते हुए गणेश शंकर विद्यार्थी हो गए थे शहीद, बापू बोले थे- ये फक्र की
शहादत की वो दर्दनाक शाम
उनकी लाश कई दिनों बाद एक अस्पताल के कचरे में मिली थी। गांधी जी ने उनकी मौत पर बहुत भावुक शब्द कहे थे कि काश मुझे ऐसी मौत मिलती।
1931 में गणेश शंकर विद्यार्थी किस 'सांप्रदायिकता' की भेंट चढ़े थे?
आज के दौर में उनका महत्व
ऐसे में विद्यार्थी जी का जीवन हमें आईना दिखाता है कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कानपुर के दंगों में अपनी जान देकर सिखाया कि किसी भी धर्म का असली मकसद प्यार और भाईचारा फैलाना है।
उनका बलिदान हमें आज के दौर में साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की सीख देता है। हमें उनके निडर विचारों को अपनाना चाहिए ताकि समाज में शांति और एकता का माहौल बना रहे।
References Links:
- Press Information Bureau (PIB) - Ganesh Shankar Vidyarthi
- Azadi Ka Amrit Mahotsav - Profile of Ganesh Shankar Vidyarthi
- Britannica - Indian Independence Movement Leaders
- National Archives of India - Records of Revolutionary Journalism
25 मार्च की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 25 मार्च (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 708: पोप कांस्टेनटाइन को बीज़ेंटाइन पापेसी के अंतिम पोप के रूप में चुना गया।
- 1306: रॉबर्ट ब्रूस को स्कॉटलैंड के नए राजा के रूप में ताज पहनाया गया।
- 1410: चीनी सम्राट योंगल ने मंगोलों के खिलाफ अपना पहला सैन्य अभियान शुरू किया।
- 1655: क्रिस्टियान हुयेंस ने शनि के सबसे बड़े चंद्रमा 'टाइटन' की खोज की।
- 1668: अमेरिका के इतिहास में पहली बार आधिकारिक घुड़दौड़ का आयोजन किया गया।
- 1669: सिसली के माउंट एटना ज्वालामुखी विस्फोट में 20 हजार से ज्यादा लोग मारे गए।
- 1700: लंदन ने फ्रांस, इंग्लैंड और हॉलैंड के बीच शांति संधि पर हस्ताक्षर किए।
- 1751: एडॉल्फ फ्रेडरिक स्वीडन के नए राजा बने और फ्रेडरिक प्रथम का स्थान लिया।
- 1753: प्रसिद्ध लेखक वोल्टेयर को पर्शिया के राजा फ्रेडरिक द्वितीय की अदालत से छुट्टी मिली।
- 1754: इंग्लैंड और वेल्स में गुप्त विवाह रोकने के लिए नया विवाह अधिनियम लागू हुआ।
- 1802: फ्रांस और ब्रिटेन ने युद्ध रोकने के लिए 'अमीन्स की संधि' पर हस्ताक्षर किए।
- 1807: ब्रिटिश साम्राज्य में 'गुलाम व्यापार अधिनियम' के तहत दास व्यापार को खत्म किया गया।
- 1807: इंग्लैंड में दुनिया की पहली यात्री रेल सेवा आधिकारिक तौर पर शुरू हुई।
- 1811: खगोलशास्त्री ऑनर्रे फ्लॉगारज ने एक विशाल और चमकते हुए धूमकेतु की खोज की।
- 1896: यूनान के एथेंस शहर में आधुनिक ओलंपिक खेलों की भव्य शुरुआत हुई।
- 1911: न्यूयॉर्क की ट्रायंगल शर्टवास्ट फैक्ट्री में आग लगने से 140 मजदूरों की मौत हुई।
- 1917: जॉर्जियाई ऑर्थोडॉक्स चर्च ने अपनी स्वतंत्रता (ऑटोसेफली) को दोबारा बहाल किया।
- 1931: 'स्कॉट्सबोरो बॉयज़' केस शुरू हुआ, जिसने कानूनी सहायता के नए सिद्धांत बनाए।
- 1948: ओक्लाहोमा में दुनिया का पहला सटीक 'बवंडर पूर्वानुमान' (Tornado Forecast) जारी हुआ।
- 1949: सोवियत संघ ने बाल्टिक राज्यों से 90 हजार लोगों को साइबेरिया निर्वासित किया।
- 1957: रोम की संधि से 'यूरोपीय आर्थिक समुदाय' (EEC) की स्थापना की गई।
- 1975: सऊदी अरब के राजा फैसल की उनके ही भतीजे ने गोली मारकर हत्या की।
- 1988: अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने शक्तिशाली अंतरिक्ष यान 'एस 206' का प्रक्षेपण किया।
- 1989: भारत का पहला सुपर कंप्यूटर 'एक्स-एमपी 14' राष्ट्र को समर्पित किया गया।
- 1992: पाकिस्तान ने इंग्लैंड को हराकर पहली बार क्रिकेट विश्व कप का खिताब जीता।
- 1994: यासुनोरी मियाबे ने 1000 मीटर स्केटिंग में नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया।
- 1995: वार्ड कनिंघम ने दुनिया की पहली विकी साइट 'विकी विकीवेब' लॉन्च की।
- 1995: मशहूर मुक्केबाज माइक टायसन तीन साल की सजा काटकर जेल से रिहा हुए।
- 1996: हयाकुताके (Hyakutake) नामक धूमकेतु पृथ्वी के बेहद करीब से होकर गुजरा।
- 1996: मिशेल क्वान ने एडमोंटन में आयोजित लेडीज फिगर स्केटिंग चैंपियनशिप जीती।
- 1996: टॉड एल्ड्रेड ने पुरुषों की श्रेणी में फिगर स्केटिंग चैंपियनशिप का खिताब जीता।
- 2001: अफगानिस्तान के काबुल में आए विनाशकारी भूकंप में एक हजार से ज्यादा लोग मरे।
- 2003: दुनिया का पहला पोर्टेबल कंप्यूटर बनाने वाले एडम ओस्बोर्न का निधन हुआ।
- 2006: अमेरिका के सिएटल में एक बंदूकधारी ने अंधाधुंध फायरिंग कर छह लोगों को मारा।
- 2011: दलाई लामा के राजनीति से इस्तीफे पर तिब्बती समुदाय की राय लेने का फैसला हुआ।
- 2011: भारत में सिक्का गलाने या नोट फाड़ने पर 7 साल की सजा का कानून बना।
- 2012: मिसाइल परीक्षणों पर तनाव के बीच बराक ओबामा दक्षिण कोरिया की यात्रा पर पहुंचे।
- 2013: चीन की सिचुआन नदी में हजारों मृत बत्तखें मिलने से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ीं।
- 2014: केटी फ्रांसिस ने कुकीज़ बेचकर फंड जुटाने का 18,107 बॉक्स का रिकॉर्ड तोड़ा।
- 2014: अभिनेत्री ग्वेनेथ पाल्ट्रो और क्रिस मार्टिन ने अपने तलाक की सार्वजनिक घोषणा की।
भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1905: प्रसिद्ध भारतीय राजनेता और राजनयिक मिर्जा राशिद अली बेग का जन्म हुआ।
- 1931: महान स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी कानपुर दंगों में शहीद हुए।
- 1999: भारत ने आठ वर्गों के पाकिस्तानी नागरिकों को वीजा नियमों में बड़ी छूट दी।
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