28 नवंबर का इतिहास: 1956 का वो ऐतिहासिक पल, जब दिल्ली ने किया चीन के PM चाऊ एन लाई का स्वागत
Kaushiki | Nov 28, 2025, 08:00 IST
Zhou Enlai-visit-india-1956-historical-significance
28 नवंबर 1956 को चीन के प्रधानमंत्री चाऊ एन-लाई ने भारत का दौरा किया था। यह दौरा हिंदी-चीनी भाई-भाई की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण था। साथ ही यह गुटनिरपेक्ष आंदोलन को नई दिशा देने में भी सहायक था।
आज के दिन की कहानी: यह बात है 28 नवंबर 1956 की। तब भारत और चीन के संबंध दोस्ती और भाईचारे की नींव पर टिके थे। इसी दिन चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई (Zhou Enlai) भारत की राजधानी दिल्ली पहुंचे थे।
इस राजकीय यात्रा का उद्देश्य दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच मैत्री को नया आयाम देना था। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने चाऊ एन लाई का गर्मजोशी से स्वागत किया था। इस समय पूरी दुनिया में 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' का नारा गूंज रहा था।
चाऊ एन लाई का यह दौरा इसलिए भी जरूरी था क्योंकि ये पंचशील के सिद्धांतों को वैश्विक स्तर पर प्रमोट करने का एक मौका था। यह यात्रा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और राजनीतिक सहयोग को गहरा करने के लिए मील का पत्थर साबित हुई थी।
![जब चीन के पास नहीं था कोई विमान, नेहरू ने भेजा तो दिल्ली आए थे PM - first nehru zhou enlai summit when china did not even have an aircraft to fly]()
चाऊ एन लाई और जवाहरलाल नेहरू दोनों ही विश्व को शांति और अहिंसा का संदेश देने में विश्वास रखते थे। 1954 में, दोनों देशों ने मिलकर पंचशील के पांच सिद्धांतों पर हस्ताक्षर किए थे।
![what were the panchsheel principles that china is praising now - International news in Hindi चीन कर रहा है जवाहरलाल नेहरू के पंचशील सिद्धांत की तारीफ, इनमें ऐसा क्या था, International Hindi]()
इस ऐतिहासिक मुलाकात में दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर गहन चर्चा की थी। दोनों देशों की समानताएं थीं कि दोनों ही हाल में कोलोनियल रूल से आजाद हुए थे। विकास की राह पर आगे बढ़ रहे थे। इस फ्रेंडली माहौल में, विकास और आपसी सम्मान पर ज्यादा फोकस किया गया था।
![When Nehru rebuffed China's demand for Ladakh - Rediff.com]()
1950 के दशक के मध्य में भारत और चीन के संबंध बेहद मधुर थे। नेहरू और चाऊ एन लाई के बीच एक पर्सनल केमिस्ट्री थी, जिसने राजनयिक संबंधों को मजबूत किया।
![Crossing the point of no return - The Hindu]()
चाऊ एन लाई की 1956 की भारत यात्रा का गहरा प्रभाव था। उन्होंने नेहरू को अपना अच्छा दोस्त बताया था और दोनों नेताओं ने मिलकर वैश्विक शांति के लिए काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
भारत और चीन ने मिलकर संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तीसरी दुनिया के देशों की आवाज को बुलंद किया था। उस समय किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह दोस्ती कुछ ही सालों में सीमा विवाद के चलते खटास में बदल जाएगी।
इस ऐतिहासिक विजिट को आज भी याद किया जाता है, जब दोस्ती कूटनीति से ऊपर थी। यह दिखाता है कि राजनीति में निजी संबंध कितने मायने रखते हैं। भारत-चीन संबंध इतिहास में हमेशा इस सकारात्मक पहल को याद रखेंगे।
![Zhou Enlai: Peacemaker at Bandung - World - Chinadaily.com.cn]()
जब चाऊ एन-लाई भारत पहुंचे, तो भारतीय जनता ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया था। सड़कों पर भीड़ जमा थी और हर जगह "हिंदी-चीनी भाई-भाई" के नारे गूंज रहे थे।
चाऊ एन लाई की इस यात्रा से भारत और चीन के आर्थिक और शैक्षणिक सहयोग को भी बढ़ावा मिला था। दोनों देशों ने ट्रेड और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए बातचीत की थी। हालांकि, इस खुशनुमा माहौल के बावजूद, सीमा विवाद का मुद्दा पूरी तरह से सुलझा नहीं था।
![1955 :: Zhou Enlai With PM Jawaharlal Nehru at Bandung Conference]()
वो आगे चलकर संबंधों में तनाव की वजह बना। यह दौरा नेहरू की विदेश नीति की सफलता का एक प्रतीक था, जहां उन्होंने एशियाई एकता को प्राथमिकता दी थी।
हालांकि, बाद में सीमा विवाद के कारण संबंधों में खटास आई। 1956 का यह दौरा भारत और चीन के इतिहास में आपसी सहयोग और आशावाद का एक स्वर्णिम अध्याय बनकर दर्ज है।
हर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है और 28 नवंबर का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है।
इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी। आइए जानते हैं 28 नवंबर (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं।
आज का इतिहास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...
आज का इतिहास: कैसे खड़ी हुई थी दुनिया की सबसे बड़ी आजादी की मशाल Statue of Liberty
आज का इतिहास : 30 हजार राजपूतों की शहादत की तारीख है 26 अगस्त
आज का इतिहास: Cuban Missile Crisis 1962, जब दुनिया परमाणु युद्ध से सिर्फ एक कदम दूर थी
आज का इतिहास: आजादी से पहले ही भारत बना UN का संस्थापक सदस्य, जानें कैसे रखी गई वैश्विक शांति की नींव
इस राजकीय यात्रा का उद्देश्य दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच मैत्री को नया आयाम देना था। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने चाऊ एन लाई का गर्मजोशी से स्वागत किया था। इस समय पूरी दुनिया में 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' का नारा गूंज रहा था।
चाऊ एन लाई का यह दौरा इसलिए भी जरूरी था क्योंकि ये पंचशील के सिद्धांतों को वैश्विक स्तर पर प्रमोट करने का एक मौका था। यह यात्रा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और राजनीतिक सहयोग को गहरा करने के लिए मील का पत्थर साबित हुई थी।
जब चीन के पास नहीं था कोई विमान, नेहरू ने भेजा तो दिल्ली आए थे PM - first nehru zhou enlai summit when china did not even have an aircraft to fly
पंचशील सिद्धांत: दोस्ती की बुनियाद
- पंचशील (Panchsheel Principles): इसका अर्थ है Five Principles of Peaceful Coexistence।
- दौरों का उद्देश्य: 1956 की यात्रा का एक मुख्य उद्देश्य इन सिद्धांतों को मजबूत करना और उन्हें एशियाई देशों के बीच आदर्श बनाना था।
what were the panchsheel principles that china is praising now - International news in Hindi चीन कर रहा है जवाहरलाल नेहरू के पंचशील सिद्धांत की तारीफ, इनमें ऐसा क्या था, International Hindi
इस ऐतिहासिक मुलाकात में दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर गहन चर्चा की थी। दोनों देशों की समानताएं थीं कि दोनों ही हाल में कोलोनियल रूल से आजाद हुए थे। विकास की राह पर आगे बढ़ रहे थे। इस फ्रेंडली माहौल में, विकास और आपसी सम्मान पर ज्यादा फोकस किया गया था।
When Nehru rebuffed China's demand for Ladakh - Rediff.com
भारत-चीन संबंधों में यह दौर क्यों था खास
- गुटनिरपेक्षता (Non-Aligned Movement): भारत की गुटनिरपेक्ष नीति को चीन ने सकारात्मक रूप से देखा था।
- एशियाई एकजुटता (Asian Solidarity): दोनों नेताओं ने एशियाई एकजुटता पर जोर दिया, खासकर बांडुंग सम्मेलन के बाद।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: इस यात्रा के दौरान सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी सहमतियां बनी थीं।
- यह यात्रा सिर्फ राजनयिक नहीं थी, बल्कि यह पुरानी सभ्यताओं के बीच एक नया अध्याय शुरू करने जैसा था। चाऊ एन लाई ने भारत की विविधता और प्रगति को करीब से देखा था।
Crossing the point of no return - The Hindu
नेहरू और चाऊ एन लाई: दोस्ती की कीमत
भारत और चीन ने मिलकर संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तीसरी दुनिया के देशों की आवाज को बुलंद किया था। उस समय किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह दोस्ती कुछ ही सालों में सीमा विवाद के चलते खटास में बदल जाएगी।
इस ऐतिहासिक विजिट को आज भी याद किया जाता है, जब दोस्ती कूटनीति से ऊपर थी। यह दिखाता है कि राजनीति में निजी संबंध कितने मायने रखते हैं। भारत-चीन संबंध इतिहास में हमेशा इस सकारात्मक पहल को याद रखेंगे।
Zhou Enlai: Peacemaker at Bandung - World - Chinadaily.com.cn
दौरे का लॉन्ग टर्म इफेक्ट्स
चाऊ एन लाई की इस यात्रा से भारत और चीन के आर्थिक और शैक्षणिक सहयोग को भी बढ़ावा मिला था। दोनों देशों ने ट्रेड और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए बातचीत की थी। हालांकि, इस खुशनुमा माहौल के बावजूद, सीमा विवाद का मुद्दा पूरी तरह से सुलझा नहीं था।
1955 :: Zhou Enlai With PM Jawaharlal Nehru at Bandung Conference
वो आगे चलकर संबंधों में तनाव की वजह बना। यह दौरा नेहरू की विदेश नीति की सफलता का एक प्रतीक था, जहां उन्होंने एशियाई एकता को प्राथमिकता दी थी।
हालांकि, बाद में सीमा विवाद के कारण संबंधों में खटास आई। 1956 का यह दौरा भारत और चीन के इतिहास में आपसी सहयोग और आशावाद का एक स्वर्णिम अध्याय बनकर दर्ज है।
References:
- Ministry of External Affairs, Government of India - Official records on India-China relations.
- Selected Works of Jawaharlal Nehru and relevant historical documents on Panchsheel.
- Historical Archives and news reports from 1956 regarding Zhou Enlai's tour.
- Academic studies and books on India's Foreign Policy during the 1950s.
28 नवंबर की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी। आइए जानते हैं 28 नवंबर (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं।
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं
- 936: शी जिंगतांग को लिआओ के सम्राट तैजोंग द्वारा जिनग्य वंश के पहले सम्राट के रूप में देखा गया।
- 1443: ओटोमन साम्राज्य के खिलाफ विद्रोह में, स्केंडरबेग ने क्रुजा को खड़ा किया और अल्बानियाई झंडा उठाया।
- 1520: फर्डिनैंड मैगलन ने प्रशांत महासागर को पार करने की अपनी ऐतिहासिक शुरुआत की।
- 1660: लंदन में ग्रेशम कॉलेज में द रॉयल सोसायटी (Royal Society) का गठन हुआ।
- 1757: ब्रिटेन ने क्लॉस्टर-ज़ेवेन की कन्वेंशन की निंदा की।
- 1775: दूसरा महाद्वीपीय कांग्रेस ने औपचारिक रूप से अमेरिकी नौसेना (US Navy) को स्थापित करने की घोषणा की।
- 1785: होपवेल की संधि पर संयुक्त राज्य अमेरिका और चेरोकी राष्ट्र के बीच हस्ताक्षर किए गए।
- 1806: फ्रांसीसी सैनिकों ने वारसॉ में प्रवेश किया।
- 1814: 'द टाइम्स ऑफ लंदन' पहली बार स्वचालित प्रिंट मशीन से छापा गया।
- 1821: पनामा ने स्पेन से स्वतंत्रता की घोषणा की और ग्रान कोलंबिया में शामिल हुआ।
- 1893: न्यूजीलैंड में राष्ट्रीय चुनाव में पहली बार महिलाओं ने मतदान किया।
- 1912: इस्माइल कादरी ने तुर्की से अल्बानिया के आज़ाद होने की घोषणा की।
- 1919: नैन्सी एस्टर ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में संसद सदस्य के रूप में सेवा करने वाली पहली महिला बनीं।
- 1925: देशी संगीत रेडियो कार्यक्रम ग्रैंड ओले ओप्री नैशविले, टेनेसी में WSM रेडियो पर पहली बार प्रसारित हुआ।
- 1943: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रूजवेल्ट, चर्चिल और स्टालिन ने तेहरान सम्मेलन में युद्ध की रणनीति पर चर्चा की।
- 1960: मोरीटानिया ने औपचारिक रुप से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।
- 1979: एयर न्यूजीलैंड की उड़ान 901 अंटार्कटिका के माउंट रेबस में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे 257 लोग मारे गए।
- 1990: जॉन मेजर ने आधिकारिक तौर पर यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री के रूप में मार्गरेट थैचर का स्थान लिया।
- 1995: 27 उपस्थित राष्ट्रों द्वारा बार्सिलोना संधि पर हस्ताक्षर किया गया।
- 2007: Google ने सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और भू-तापीय ऊर्जा सहित नवीकरणीय ऊर्जा अनुसंधान पर निवेश की योजना की घोषणा की।
- 2012: यूरोपीय आयोग ने तीन प्रमुख स्पैनिश बैंकों के सिकोड़ने और पुनर्गठन की योजना को मंजूरी दी।
- 2012: सीरिया की राजधानी दमिश्क में दो कार बम धमाकों में 54 लोग मारे गए।
- 2013: चीन के पहले चंद्र वाहन का नाम 'यूटू' रखा गया।
- 2014: फ़िनलैंड की संसद ने समान-लिंग विवाह की अनुमति देने के लिए वोट दिया।
भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएं
- 1890: समाजसेवी, लेखक और शिक्षाविद् ज्योतिराव फुले का निधन हुआ।
- 1939: बास्केटबॉल के जनक जेम्स नैस्मिथ का निधन हुआ।
- 1956: चीन के प्रधानमंत्री चाऊ एन-लाई भारत दौरे पर आये।
- 1996: कैप्टन इन्द्राणी सिंह एयरबस ए-300 विमान को कमांड करने वाली पहली महिला बनीं।
- 1997: तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्द्र कुमार गुजराल ने इस्तीफा दिया।
आज का इतिहास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...
आज का इतिहास: कैसे खड़ी हुई थी दुनिया की सबसे बड़ी आजादी की मशाल Statue of Liberty
आज का इतिहास : 30 हजार राजपूतों की शहादत की तारीख है 26 अगस्त
आज का इतिहास: Cuban Missile Crisis 1962, जब दुनिया परमाणु युद्ध से सिर्फ एक कदम दूर थी
आज का इतिहास: आजादी से पहले ही भारत बना UN का संस्थापक सदस्य, जानें कैसे रखी गई वैश्विक शांति की नींव
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari