209 दिन बाद बनी नितिन नवीन की नई टीम, नए चेहरों पर रहा फोकस
Sameer Chougaonkar | Aug 18, 2026, 14:40 IST
नितीन नवीन की नई टीम
भाजपा ने नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने के 209 दिन बाद 65 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम घोषित की। इसमें 51 नए चेहरे और 12 महिलाएं शामिल हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ को खास तवज्जो दी गई है। कई पुराने नेता टीम से बाहर हुए हैं।
आखिरकार भाजपा ने नितिन नवीन के पद संभालने के 209 दिन बाद 65 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी है। इस टीम में 13 उपाध्यक्ष, 8 महासचिव, 16 सचिव और 7 मोर्चों के अध्यक्ष शामिल हैं। टीम में 12 महिलाओं को जगह दी गई है।
2029 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले तमाम राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर टीम नितिन को आकार दिया गया है।
पूरी टीम देखने पर एक बात साफ हो जाती है कि इसे बनाने में काफी रिसर्च की गई है। टीम पर किसी एक नेता की छाप नहीं है। इसमें सामूहिकता के दर्शन हैं। पार्टी के तमाम दिग्गज अपने करीबियों को तमाम कोशिशों के बाद जगह दिलाने में असफल रहे, वहीं कई ऐसे चेहरों को दिल्ली की नेशनल टीम में जगह मिली है, जिन्होंने दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय को ठीक से देखा भी नहीं था।
टीम नवीन पहले की तुलना में अपेक्षाकृत छोटी है और नए चेहरों की भरमार है। नितिन नवीन से पहले अध्यक्ष रहे जेपी नड्डा की टीम में 70 सदस्य थे, जबकि नितिन नवीन ने अपनी टीम की संख्या को 65 पर फिलहाल लॉक कर दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम में 51 नए चेहरे हैं।
यह बता रहा है कि जैसे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने नितिन नवीन को अध्यक्ष बनाते समय दिल्ली में स्थापित पार्टी नेताओं को दरकिनार कर दिया था, वैसे ही दिल्ली के स्थापित नेताओं, लंबे समय से संगठन में काम कर रहे नेताओं और पार्टी मुख्यालय तथा केंद्रीय नेताओं का चक्कर लगाने वालों को नजरअंदाज कर नए और भविष्य की भाजपा के लिए नए चेहरों का चुनाव किया है।
यह आलोचना की जा सकती है और हुई भी कि नितिन नवीन की टीम बनाने में सात महीने का समय क्यों लगा? लेकिन इस आलोचना का जवाब टीम नितिन को ध्यान से देखने पर मिल सकता है। इस टीम में 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम में युवाओं को तरजीह दी गई है। टीम नितिन में 65 में से 42 पदाधिकारी 60 साल से कम उम्र के हैं। 40 साल से कम उम्र के 6, 40 से 49 साल के 15 और 50 से 59 साल के 21 नेताओं को जगह मिली है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दखल भी देखने को मिला है। भाजपा में महासचिव पद से टीम नड्डा से बाहर कर दिए गए राम माधव की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में वापसी हो गई है। अमित शाह की टीम में राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री रहे और फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिए गए सौदान सिंह की फिर से राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री के रूप में वापसी हुई है। स्मृति ईरानी को महासचिव बनाकर संगठन में वापसी तय की गई।
आप पार्टी से आने वाले चुनावी रणनीतिकार और राज्यसभा सांसद संदीप पाठक को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। त्रिपुरा के पूर्व सीएम और सांसद विप्लव देव को महासचिव बनाया गया है।
टीम में भारी बदलाव किया गया है। आठ महासचिवों की टीम में सिर्फ विनोद तावड़े और सुनील बंसल को बरकरार रखा गया है। छह महासचिव नए बनाए गए हैं। विनोद तावड़े को आज ही यूपी का चुनाव प्रभारी बनाया गया है।
16 राष्ट्रीय सचिवों में सिर्फ केरल से आने वाले और कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे एके एंटोनी के बेटे को छोड़कर सभी राष्ट्रीय सचिव नए बनाए गए हैं। सभी मोर्चों की जिम्मेदारी नए नेताओं को दी गई है। युवा मोर्चा पद पर तेजस्वी सूर्या की जगह वडोदरा के सांसद हेमांग जोशी को बनाया गया है।
टीम नितिन नवीन में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ को विशेष महत्व दिया गया है। मध्यप्रदेश से राष्ट्रीय टीम में भागीदारी चार से बढ़कर सात हो गई है। लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। मूल रूप से विदिशा से आने वाले सौदान सिंह को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष से फिर से सह-संगठन महामंत्री बनाया गया है।
राज्यसभा सांसद बंसीलाल गुर्जर को किसान मोर्चे का अध्यक्ष बनाया गया है। मध्यप्रदेश में किसान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं, ऐसे में उनके सामने मध्यप्रदेश के साथ-साथ देश के किसानों को साधने की जिम्मेदारी होगी।
मध्यप्रदेश में महामंत्री रहीं राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है। मध्यप्रदेश के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल को राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक बनाया गया है। इस पद पर मध्यप्रदेश के ही प्रवक्ता डॉ. हितेश वाजपेयी का नाम लगभग तय था, दिल्ली मीडिया के सूत्र बताते हैं कि अंतिम समय में हितेश वाजपेयी की जगह आशीष अग्रवाल को शामिल किया गया।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और खजुराहो से सांसद बीडी शर्मा को संकुल प्रकोष्ठ का संयोजक बनाया गया है। बीडी शर्मा जरूर इस नियुक्ति से निराश हुए होंगे। मोदी सरकार में जगह बनाने से चूके बीडी शर्मा को उम्मीद थी कि टीम नितिन में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया जा सकता है।
इस बात की उम्मीद की जा सकती है कि मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में बीडी शर्मा मंत्री बन सकते हैं। खरगोन सांसद और भील-भिलाला वर्ग से आने वाले गजेंद्र पटेल को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। गजेंद्र पटेल को बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय को साधने की जिम्मेदारी गजेंद्र पटेल के कंधों पर डाल दी है।
दतिया सीट जीतने पर नरोत्तम मिश्रा को टीम नितिन में जगह मिल सकती थी। दतिया की हार ने नरोत्तम के दरवाजे दिल्ली टीम के लिए बंद कर दिए हैं। अर्चना चिटनिस और अरविंद भदौरिया के नाम भी चर्चा में थे, लेकिन जगह नहीं मिली। मध्यप्रदेश के पूर्व संगठन महामंत्री अरविंद मेनन को भी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद थी। अरविंद मेनन को भी झटका लगा है। राष्ट्रीय सचिव के पद से अरविंद मेनन को बेदखल कर दिया गया है।
राजस्थान की बात करें तो राजस्थान से पांच नेताओं को जगह दी गई है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद बरकरार रखा गया है। टीम नितिन में सबसे उम्रदराज वसुंधरा राजे हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और हाल ही में राज्यसभा भेजे गए सतीश पूनिया को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। वह जाट समुदाय से आते हैं और हरियाणा में चुनाव प्रभारी रह चुके हैं। सतीश पूनिया को पंजाब चुनाव प्रभारी आज ही बनाया गया है। ऐसे में अब पंजाब में बीजेपी की जीत सुनिश्चित करने या प्रदर्शन बेहतर करने की जिम्मेदारी उठानी होगी।
उदयपुर सांसद मन्नालाल यादव को एसटी मोर्चा की जिम्मेदारी दी गई है। राजस्थान में आदिवासी क्षेत्रों में बीएपी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की जिम्मेदारी मन्नालाल यादव के कंधे पर होगी। राजस्थान में आर्थिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रह चुके और पेशे से सीए राजेश मंगल को राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। राजेश मंगल राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाए गए पीयूष गोयल के दिशा-निर्देशों में काम करेंगे।
राजस्थान मूल के सुनील बंसल राष्ट्रीय महासचिव पद पर बरकरार रखे गए हैं। सुनील बंसल उत्तर प्रदेश के संगठन महामंत्री रह चुके हैं और ओडिशा और बंगाल चुनाव में उन्होंने अपने संगठन कौशल का लोहा मनवाया है। राजस्थान में महिला मोर्चा की अध्यक्ष राखी राठौर को भी दिल्ली टीम में जगह मिलने की चर्चा थी।
छत्तीसगढ़ से भी दो - दीपक म्हस्के और महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौहान को महिला मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जब छत्तीसगढ़ के प्रभारी थे, उस समय नितिन नवीन ने ओबीसी चेहरे के रूप में रूपकुमारी चौहान को पहचाना था। सांसद बनने के बाद ओबीसी कोटे से रूपकुमारी चौहान को मंत्री बनने की उम्मीद थी, लेकिन तोखन साहू मंत्री बने।
अमित मालवीय की जगह सोशल मीडिया प्रभारी बनाए गए दीपक म्हस्के ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया को शानदार ढंग से संभाला। बंगाल चुनाव में सुनील बंसल के निर्देश पर सोशल मीडिया का शानदार संचालन किया। सोशल मीडिया की जिम्मेदारी सुनील बंसल के कहने पर मिली है, ऐसा पार्टी के सूत्र बताते हैं।
पार्लियामेंट्री बोर्ड में फिलहाल बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन आने वाले दिनों में बदलाव तय है। महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस और शिक्षा मंत्री पद से हटाए गए धर्मेंद्र प्रधान को संसदीय बोर्ड में शामिल किया जा सकता है।
इस टीम को मोदी विजन 2029 के रूप में देखा जा रहा है। मोदी की देखरेख में बनी टीम नितिन क्या कमाल करती है, यह आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा।
कुछ माह बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनाव होने हैं। इस टीम की असली परीक्षा इन चुनावों में होगी। अपनी ही सीट बांकीपुर पर पार्टी की हार को देख चुके नितिन नवीन और उनकी टीम को अभी कई परीक्षाओं से गुजरना होगा। टीम नितिन कितनी सफल होती है, यह आने वाला समय बताएगा।
नोट- प्रिंट मीडिया में दो दशक से सक्रिय समीर चौगांवकर राजनीतिक पत्रकारिता के एक विश्वसनीय और स्थापित नाम हैं। इंडिया टुडे, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका और एशिया टाइम्स सहित देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर उनके लेख प्रकाशित होते हैं। भाजपा, पीएमओ, संसद और आरएसएस की गहरी कवरेज तथा प्रमुख न्यूज चैनलों पर तथ्यपरक राजनीतिक विश्लेषण उनकी पहचान है।इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं।
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2029 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले तमाम राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर टीम नितिन को आकार दिया गया है।
पूरी टीम देखने पर एक बात साफ हो जाती है कि इसे बनाने में काफी रिसर्च की गई है। टीम पर किसी एक नेता की छाप नहीं है। इसमें सामूहिकता के दर्शन हैं। पार्टी के तमाम दिग्गज अपने करीबियों को तमाम कोशिशों के बाद जगह दिलाने में असफल रहे, वहीं कई ऐसे चेहरों को दिल्ली की नेशनल टीम में जगह मिली है, जिन्होंने दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय को ठीक से देखा भी नहीं था।
टीम नवीन पहले की तुलना में छोटी
यह बता रहा है कि जैसे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने नितिन नवीन को अध्यक्ष बनाते समय दिल्ली में स्थापित पार्टी नेताओं को दरकिनार कर दिया था, वैसे ही दिल्ली के स्थापित नेताओं, लंबे समय से संगठन में काम कर रहे नेताओं और पार्टी मुख्यालय तथा केंद्रीय नेताओं का चक्कर लगाने वालों को नजरअंदाज कर नए और भविष्य की भाजपा के लिए नए चेहरों का चुनाव किया है।
23 राज्यों को मिला प्रतिनिधित्व
युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम में युवाओं को तरजीह दी गई है। टीम नितिन में 65 में से 42 पदाधिकारी 60 साल से कम उम्र के हैं। 40 साल से कम उम्र के 6, 40 से 49 साल के 15 और 50 से 59 साल के 21 नेताओं को जगह मिली है।
आरएसएस का दखल भी देखने को मिला
आप पार्टी से आने वाले चुनावी रणनीतिकार और राज्यसभा सांसद संदीप पाठक को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। त्रिपुरा के पूर्व सीएम और सांसद विप्लव देव को महासचिव बनाया गया है।
महासचिवों और सचिवों में बड़ा फेरबदल
16 राष्ट्रीय सचिवों में सिर्फ केरल से आने वाले और कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे एके एंटोनी के बेटे को छोड़कर सभी राष्ट्रीय सचिव नए बनाए गए हैं। सभी मोर्चों की जिम्मेदारी नए नेताओं को दी गई है। युवा मोर्चा पद पर तेजस्वी सूर्या की जगह वडोदरा के सांसद हेमांग जोशी को बनाया गया है।
मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ पर विशेष फोकस
राज्यसभा सांसद बंसीलाल गुर्जर को किसान मोर्चे का अध्यक्ष बनाया गया है। मध्यप्रदेश में किसान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं, ऐसे में उनके सामने मध्यप्रदेश के साथ-साथ देश के किसानों को साधने की जिम्मेदारी होगी।
मध्यप्रदेश को मिली बड़ी हिस्सेदारी
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और खजुराहो से सांसद बीडी शर्मा को संकुल प्रकोष्ठ का संयोजक बनाया गया है। बीडी शर्मा जरूर इस नियुक्ति से निराश हुए होंगे। मोदी सरकार में जगह बनाने से चूके बीडी शर्मा को उम्मीद थी कि टीम नितिन में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया जा सकता है।
इस बात की उम्मीद की जा सकती है कि मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में बीडी शर्मा मंत्री बन सकते हैं। खरगोन सांसद और भील-भिलाला वर्ग से आने वाले गजेंद्र पटेल को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। गजेंद्र पटेल को बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय को साधने की जिम्मेदारी गजेंद्र पटेल के कंधों पर डाल दी है।
दतिया सीट जीतने पर नरोत्तम मिश्रा को टीम नितिन में जगह मिल सकती थी। दतिया की हार ने नरोत्तम के दरवाजे दिल्ली टीम के लिए बंद कर दिए हैं। अर्चना चिटनिस और अरविंद भदौरिया के नाम भी चर्चा में थे, लेकिन जगह नहीं मिली। मध्यप्रदेश के पूर्व संगठन महामंत्री अरविंद मेनन को भी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद थी। अरविंद मेनन को भी झटका लगा है। राष्ट्रीय सचिव के पद से अरविंद मेनन को बेदखल कर दिया गया है।
राजस्थान से भी मजबूत भागीदारी
उदयपुर सांसद मन्नालाल यादव को एसटी मोर्चा की जिम्मेदारी दी गई है। राजस्थान में आदिवासी क्षेत्रों में बीएपी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की जिम्मेदारी मन्नालाल यादव के कंधे पर होगी। राजस्थान में आर्थिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रह चुके और पेशे से सीए राजेश मंगल को राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। राजेश मंगल राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाए गए पीयूष गोयल के दिशा-निर्देशों में काम करेंगे।
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नितिन नवीन का छत्तीसगढ़ से खास नाता
अमित मालवीय की जगह सोशल मीडिया प्रभारी बनाए गए दीपक म्हस्के ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया को शानदार ढंग से संभाला। बंगाल चुनाव में सुनील बंसल के निर्देश पर सोशल मीडिया का शानदार संचालन किया। सोशल मीडिया की जिम्मेदारी सुनील बंसल के कहने पर मिली है, ऐसा पार्टी के सूत्र बताते हैं।
आगे की राह
इस टीम को मोदी विजन 2029 के रूप में देखा जा रहा है। मोदी की देखरेख में बनी टीम नितिन क्या कमाल करती है, यह आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा।
कुछ माह बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनाव होने हैं। इस टीम की असली परीक्षा इन चुनावों में होगी। अपनी ही सीट बांकीपुर पर पार्टी की हार को देख चुके नितिन नवीन और उनकी टीम को अभी कई परीक्षाओं से गुजरना होगा। टीम नितिन कितनी सफल होती है, यह आने वाला समय बताएगा।
नोट- प्रिंट मीडिया में दो दशक से सक्रिय समीर चौगांवकर राजनीतिक पत्रकारिता के एक विश्वसनीय और स्थापित नाम हैं। इंडिया टुडे, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका और एशिया टाइम्स सहित देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर उनके लेख प्रकाशित होते हैं। भाजपा, पीएमओ, संसद और आरएसएस की गहरी कवरेज तथा प्रमुख न्यूज चैनलों पर तथ्यपरक राजनीतिक विश्लेषण उनकी पहचान है।इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं।
FAQ
- भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में कुल कितने सदस्य हैं?
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में कुल 65 सदस्य शामिल किए गए हैं। इसमें 13 उपाध्यक्ष, 8 महासचिव, 16 सचिव और 7 मोर्चों के अध्यक्ष हैं। टीम में 12 महिलाओं को भी जगह दी गई है। - नितिन नवीन की नई टीम बनाने में इतना समय क्यों लगा?
नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने के 209 दिन बाद यह टीम घोषित हुई है। टीम में 23 राज्यों को प्रतिनिधित्व देने और गहरी रिसर्च के कारण इसमें समय लगा। टीम को 2029 लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
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