चंपत राय और अनिल मिश्रा ने छोड़ा राम मंदिर ट्रस्ट, चंदा चोरी विवाद के बीच दिया इस्तीफा
Manya Jain | Jun 26, 2026, 13:42 IST
champat rai resigns ram mandir trust vhp
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार वीएचपी ने यह इस्तीफा लिया है। अयोध्या में हलचल तेज हो गई है।
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी के मामले के बीच बड़ी खबर सामने आई है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों ने इसे नैतिकता के आधार पर लिया गया फैसला बताया है।
चंपत राय राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्टमें महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जबकि अनिल मिश्रा सदस्य थे। विपक्ष लंबे समय से इस मामले में चंपत राय का नाम जोड़ते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था।
हालांकि दोनों का नाम एफआईआर में नहीं है, फिर भी उन्होंने पद छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि मामला राजनीतिक रूप से भी काफी गरमा गया था।
अब तक इस केस में 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 2 इस्तीफे सामने आए हैं। फैजाबाद से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा है कि जांच से पहले ही इस्तीफे हो जाने चाहिए थे और जिन पर जिम्मेदारी थी, उनके नाम भी एफआईआर में होने चाहिए थे।
वहीं, उन्होंने इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग भी की है। उधर, एसआईटी एक बार फिर अयोध्या जाने की तैयारी में है, जहां वह नए नामों और पहले गिरफ्तार लोगों से पूछताछ करेगी।
![ram mandir trust controversy]()
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी का मामला कुछ समय से सुर्खियों में है। ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत पर राम जन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इनमें राम शंकर यादव उर्फ टीनू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के नाम हैं।
इनके खिलाफ गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज है। पुलिस अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। बाद में कुल 8 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
चंपत राय ट्रस्ट में महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य थे। दोनों का नाम एफआईआर में नहीं है, फिर भी उन्होंने पद छोड़ दिया।
एसआईटी (SIT – Special Investigation Team) की शुरुआती रिपोर्ट में कड़ी सिफारिशें थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पारदर्शी और निष्पक्ष जांच का स्पष्ट संकेत दे चुके थे। सूत्रों के मुताबिक इस्तीफों को जांच में हुई कार्रवाई से सीधे जोड़कर देखा जा रहा है।
विपक्ष लंबे समय से इस मामले में चंपत राय का नाम जोड़ते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था। मामला राजनीतिक रूप से भी काफी गरमा गया था।
इस पूरे मामले की शिकायत ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई। उन्हें सितंबर 2025 में ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था। फरवरी 2025 में ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उनकी जगह कृष्ण मोहन चुने गए।
हरदोई के रहने वाले कृष्ण मोहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में काम किया। इसके बाद भारतीय वन सेवा आईएफएस (IFS – Indian Forest Service) में महाराष्ट्र कैडर में सेवाएं दीं। 2012 में रिटायरमेंट के बाद सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे।
एसआईटी फिलहाल कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच में जुटी है। आरोपियों के बैंक खाते, संपत्तियां, मोबाइल रिकॉर्ड और कथित लेन-देन की पड़ताल हो रही है। एसआईटी एक बार फिर अयोध्या जाने की तैयारी में है। वहां नए नामों की पहचान और पहले गिरफ्तार लोगों से पूछताछ होगी।
फैजाबाद से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि जांच से पहले ही इस्तीफे हो जाने चाहिए थे। उन्होंने यह भी कहा कि जिन पर जिम्मेदारी थी, उनके नाम भी एफआईआर में होने चाहिए थे। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है।
कई सवाल अभी बाकी हैं। क्या एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में और बड़े खुलासे होंगे? क्या जांच का दायरा और बढ़ेगा? और क्या ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही सामने आएंगे।
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चंपत राय राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्टमें महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जबकि अनिल मिश्रा सदस्य थे। विपक्ष लंबे समय से इस मामले में चंपत राय का नाम जोड़ते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था।
हालांकि दोनों का नाम एफआईआर में नहीं है, फिर भी उन्होंने पद छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि मामला राजनीतिक रूप से भी काफी गरमा गया था।
अब तक इस केस में 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 2 इस्तीफे सामने आए हैं। फैजाबाद से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा है कि जांच से पहले ही इस्तीफे हो जाने चाहिए थे और जिन पर जिम्मेदारी थी, उनके नाम भी एफआईआर में होने चाहिए थे।
वहीं, उन्होंने इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग भी की है। उधर, एसआईटी एक बार फिर अयोध्या जाने की तैयारी में है, जहां वह नए नामों और पहले गिरफ्तार लोगों से पूछताछ करेगी।
ram mandir trust controversy
राम मंदिर चढ़ावा विवाद - अब तक क्या हुआ
इनके खिलाफ गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज है। पुलिस अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। बाद में कुल 8 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने क्यों दिया इस्तीफा
एसआईटी (SIT – Special Investigation Team) की शुरुआती रिपोर्ट में कड़ी सिफारिशें थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पारदर्शी और निष्पक्ष जांच का स्पष्ट संकेत दे चुके थे। सूत्रों के मुताबिक इस्तीफों को जांच में हुई कार्रवाई से सीधे जोड़कर देखा जा रहा है।
विपक्ष लंबे समय से इस मामले में चंपत राय का नाम जोड़ते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था। मामला राजनीतिक रूप से भी काफी गरमा गया था।
कौन हैं शिकायतकर्ता कृष्ण मोहन
हरदोई के रहने वाले कृष्ण मोहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में काम किया। इसके बाद भारतीय वन सेवा आईएफएस (IFS – Indian Forest Service) में महाराष्ट्र कैडर में सेवाएं दीं। 2012 में रिटायरमेंट के बाद सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे।
SIT क्या जांच कर रही है
विपक्ष ने क्या कहा
आगे क्या होगा
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