31 दिसंबर को न रहें स्विगी, जोमैटो के भरोसे, हड़ताल पर रहेंगे गिग वर्कर्स, मध्य प्रदेश में है ये हाल
Anjali Dwivedi | Dec 27, 2025, 13:01 IST
gig workers
गिग वर्कर्स ने 31 दिसंबर 2025 को स्विगी, जोमैटो और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हड़ताल का ऐलान किया है। वे ट्रांसपेरेंट पेमेंट और बेहतर सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। हड़ताल का असर न्यू ईयर पर हो सकता है।
पांच प्वाइंट में समझें पूरा मामला
- गिग वर्कर्स ने 31 दिसंबर 2025 को स्विगी, जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हड़ताल की घोषणा की है।
- मुख्य मांगें: पारदर्शी पेमेंट, बेहतर दुर्घटना बीमा, सुरक्षा गियर, और तेज डिलीवरी सेवाओं का बंद होना।
- संघ गिग वर्कर्स के लिए स्पष्ट नियम और सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रही हैं।
- हड़ताल का असर न्यू ईयर की पीक डिमांड पर पड़ सकता है।
- हालांकि सरकार ने गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया है।
हालांकि, मध्य प्रदेश में गिग वर्कर्स की हड़ताल को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। इस बारें में हमने भोपाल के रहने वाले गिग वर्कर अंकित जैन से बात की तो उन्होनें ये बताया-
गिग वर्कर अंकित जैन का कहना है कि उन्हे इस संबंध में अब तक कोई भी आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। साथ ही मेरे किसी भी वर्क ग्रुप में हड़ताल से जुड़ा अब तक कोई मैसेज नहीं आया है।
गिग वर्कर कहते किसे हैं?
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गिग वर्कर्स क्या कहते हैं?
गिग वर्कर्स की प्रमुख मांगें क्या हैं?
- ट्रांसपेरेंट पेमेंट सिस्टम, जिसमें काम के असली घंटे और खर्चों का सही हिसाब किया जाए।
- बेहतर दुर्घटना बीमा और सुरक्षा गियर।
- तेज डिलीवरी सेवाओं का अंत, जैसे कि 10 मिनट में डिलीवरी की सेवाएं, जो उनके लिए खतरनाक हो सकती हैं।
- डेली काम और अनिवार्य आराम के समय मिले।
- अकाउंट सस्पेंशन के बिना प्रक्रिया और एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली बनाई जाए।
- बिना किसी जरूरी कारण के अकाउंट सस्पेंडन किया जाए।
- गिग वर्कर्स की समस्या सुनने के लिए एक प्रॉपर प्लेटफॉर्म बनाया जाए।
- इसके अलावा, वे हेल्थ इंश्योरेंस, दुर्घटना बीमा, और पेंशन जैसी सुविधाएं भी चाहते हैं।
गिग वर्कर्स की सरकार से अपील
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गिग वर्कर्स की अनुमानित संख्या (2024-2025)
नीति आयोग और सरकारी रिपोर्टों (2024-25 के अनुमानों) के अनुसार, इन राज्यों में गिग वर्कर्स की अनुमानित संख्या इस प्रकार है-
| राज्य | अनुमानित गिग वर्कर्स की संख्या | मुख्य जानकारी |
| राजस्थान | 3 लाख से 4 लाख | राजस्थान गिग वर्कर्स के लिए कानून (Gig Workers Act, 2023) बनाने वाला देश का पहला राज्य है। सरकारी अनुमानों के अनुसार यहां करीब 3 लाख से अधिक प्लेटफॉर्म-आधारित श्रमिक हैं। |
| मध्यप्रदेश | 1.5 लाख से 2.5 लाख | इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में ई-कॉमर्स और डिलीवरी सेवाओं के विस्तार के कारण यहां संख्या तेजी से बढ़ रही है। |
| छत्तीसगढ़ | 50,000 से 1 लाख | यहां रायपुर और भिलाई जैसे शहरी क्षेत्रों में गिग अर्थव्यवस्था केंद्रित है। ई-श्रम पोर्टल पर भी यहां के हजारों वर्कर्स रजिस्टर्ड हैं। |
Source: e-Shram Dashboard
गिग वर्कर्स की हड़ताल पर सरकार ने क्या कदम उठाया
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गिग वर्कर्स के हड़ताल का असर क्या होगा?
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गिग वर्कर्स को लेकर संसद में भी उठ चुका है मुद्दा
चड्ढा ने इसे 'गिग इकोनॉमी की सफलता की कहानी' मानने से इनकार करते हुए कहा था कि यह ऐप्स और एल्गोरिदम के पीछे छुपा एक प्रणालीगत शोषण (systemic exploitation) है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि भारत कम वेतन और अत्यधिक बोझ वाले लोगों के सहारे डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण नहीं कर सकता।
I invited Himanshu, a Blinkit delivery boy, over for lunch.
Through his social media post, he had recently shared the harsh realities and miseries faced by riders/delivery boys.
We spoke at length about the high risks, long hours, low pay, and no safety net.
These voices deserve… pic.twitter.com/pTiDOLtr3m
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) December 27, 2025
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