पत्नी को एक थप्पड़ मारना क्रूरता नहीं, गुजरात HC का बड़ा फैसला

Anjali Dwivedi | Feb 21, 2026, 15:27 IST
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गुजरात हाईकोर्ट ने 1995 के एक सुसाइड केस में पति को बरी करते हुए कहा कि पत्नी को एक बार थप्पड़ मारना क्रूरता नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने निचली अदालत की सजा को पलट दिया है।

अहमदाबाद. रिश्तों की अनबन और कानूनी उलझनों के बीच गुजरात हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि पति का पत्नी को सिर्फ एक बार थप्पड़ मारना क्रूरता नहीं माना जा सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत की सजा को रद्द कर दिया है। यह पूरा मामला साल 1995 का है, जिसमें 31 साल बाद अब नया मोड़ आया है।

क्या हा पूरा मामला

यह मामला वलसाड जिले का है जहां 1995 में शादी के कुछ ही महीनों बाद महिला ने आत्महत्या कर ली थी। मृतका के पिता ने पति पर आरोप लगाया था कि वह अक्सर देर रात घर आता था, पार्टियों में जाता था और उनकी बेटी के साथ मारपीट करता था। शिकायत में यह भी कहा गया कि एक बार पत्नी के मायके में रहने पर पति वहां पहुंचा और उसे थप्पड़ मारा था।

विवाद की मुख्य वजह क्या थी

विवाद की मुख्य वजह तब सामने आई जब यह पता चला कि एक बार पति ने अपनी पत्नी को इसलिए थप्पड़ मारा था। क्योंकि वह बिना बताए अपने मायके में रुक गई थी। पुलिस ने इस मामले में पति के खिलाफ आईपीसी (IPC) की धारा 498ए (दहेज प्रताड़ना और उत्पीड़न) और धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया था। साल 2003 में वलसाड की सत्र अदालत ने पति को दोषी मानते हुए उसे क्रमशः एक साल और सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला

सत्र अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सालों चली कानूनी प्रक्रिया के बाद हाईकोर्ट ने अब अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने माना कि सिर्फ एक थप्पड़ मारना, वह भी उस स्थिति में जब पत्नी बिना सूचना दिए मायके में रुकी हो, उसे क्रूरता नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी को आत्महत्या के लिए उकसाने के पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए, इसलिए दोषी को सजा देना उचित नहीं है।

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