WHO की रिपोर्ट में खुलासा- हर दस में चार स्वास्थ्यकर्मी झेलते हैं हिंसा

thesootr Desk | Jul 22, 2026, 21:20 IST
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healthcare workers violence who data
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर 10 में से 4 स्वास्थ्यकर्मी अपने करियर में हिंसा का सामना करते हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इंटरैक्टिव डिजिटल ग्रिड भी जारी किया है। देशभर में हाल में डॉक्टरों पर हुए 100 हमलों का विवरण शामिल है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा का मुद्दा चर्चा में है।
  • मुंबई के डोंबिवली अस्पताल में हुई मारपीट के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक हर 10 में से 4 स्वास्थ्यकर्मी अपने करियर में हिंसा का सामना करते हैं।
  • इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी IMA ने इंटरैक्टिव डिजिटल ग्रिड भी जारी किया है।
  • देशभर में हाल के वर्षों के दौरान डॉक्टरों पर हुए 100 हमलों का विवरण शामिल किया है।

दुनियाभर में गंभीर हुआ मुद्दा

स्वास्थ्यकर्मियों (Healthcare workers)के खिलाफ हिंसा दुनियाभर में एक गंभीर समस्या बन चुकी है। मरीजों या उनके परिजनों की ओर से की जाने वाली हिंसा अब वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय है।

मेडिकल जर्नल ‘एटेंसियन प्राइमरिया’ में प्रकाशित एक समीक्षा के मुताबिक विकसित और विकासशील, दोनों तरह के देशों में डॉक्टर कार्यस्थल पर हिंसा का सामना कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी में डॉक्टरों के हिंसा झेलने की आजीवन दर 91 प्रतिशत है, जो सूची में सबसे अधिक है। चीन में यह आंकड़ा 90 प्रतिशत, पेरू में 84.5 प्रतिशत और तुर्की में 84 प्रतिशत है। भारत में यह दर 77.3 प्रतिशत दर्ज की गई है।

किस देश में कितनी हिंसा

अलग-अलग देशों में डॉक्टरों के हिंसा झेलने की दर अलग पाई गई है। जॉर्डन में यह दर 63 प्रतिशत, बुल्गारिया में 55 प्रतिशत, इटली में 51.5 प्रतिशत और पोलैंड में 51 प्रतिशत है। अमेरिका के इमरजेंसी डॉक्टरों में यह दर 47 प्रतिशत दर्ज की गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक हर 10 में से 4 स्वास्थ्यकर्मी अपने करियर में कम से कम एक बार शारीरिक हिंसा का सामना करते हैं। मौखिक दुर्व्यवहार को भी शामिल कर लिया जाए तो यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से अधिक, यानी करीब 62 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।

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स्पेन ने अपनाया सख्त कानून

कई देशों ने डॉक्टरों पर हिंसा रोकने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए हैं। स्पेन ने डॉक्टरों पर हिंसा (Violence Against Doctors) को राज्य के खिलाफ अपराध माना है।इस कानूनी बदलाव के दो वर्षों के भीतर वहां हिंसा की घटनाओं में करीब 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

यह उदाहरण दिखाता है कि सख्त कानूनी प्रावधान हिंसा कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञ इसे अकेला समाधान नहीं मानते।

सिंगापुर में जुर्माना और जेल दोनों

सिंगापुर में स्वास्थ्यकर्मियों से दुर्व्यवहार करने वालों पर 5,000 सिंगापुर डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दोषी को 12 महीने तक की जेल भी हो सकती है।

कुछ गंभीर मामलों में जुर्माना और जेल, दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। इसके अलावा स्वास्थ्यकर्मियों को हिंसक परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

ब्रिटेन और अमेरिका का तरीका

यूनाइटेड किंगडम में जनरल प्रैक्टिशनर हिंसक मरीजों को अपनी मरीज सूची से हटा सकते हैं। ऐसे मरीजों को स्वास्थ्य प्रणाली में चिह्नित भी किया जाता है, ताकि भविष्य में आवश्यक सतर्कता बरती जा सके।

संयुक्त राज्य अमेरिका के कई राज्यों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले को गंभीर अपराध मानने वाले कानून बनाए हैं। इन कानूनों में दोषियों के लिए कठोर सजा का प्रावधान है।

डोंबिवली की घटना ने फिर छेड़ी बहस

महाराष्ट्र में डोंबिवली में सामने आई एक घटना ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है। सीसीटीवी फुटेज में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को केडीएमसी संचालित शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट करते देखा गया।

इस घटना के बाद भारत में भी स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों में लागू मॉडल पर चर्चा तेज हो गई है।

राष्ट्रीय कानून (National Law) की मांग तेज

भारत के 19 राज्यों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए कानून बने हुए हैं। इसके बावजूद डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों पर हमले की घटनाएं थम नहीं रही हैं।

महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के पूर्व सदस्य डॉ. सुहास पिंगले का कहना है कि देश में अब स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय कानून (National Law) की जरूरत है।महाराष्ट्र में वर्ष 2010 से 2021 के बीच महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस एक्ट के तहत 738 मामले दर्ज किए गए। इनमें से केवल 4 मामलों में ही दोषसिद्धि हो सकी।

एक्सपर्ट कोट्स

डॉ. संतोष कदम, महाराष्ट्र IMA के पूर्व अध्यक्ष मूल स्रोत में उनके विचार अप्रत्यक्ष रूप से दिए गए हैं। कोई सीधा उद्धरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए मुख्य कॉपी में उनकी बात को उनके विचार के रूप में शामिल किया गया है। डॉ. सुहास पिंगले, महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के पूर्व सदस्य मूल स्रोत में उनके विचार भी अप्रत्यक्ष रूप से दिए गए हैं। इसलिए कोई काल्पनिक प्रत्यक्ष उद्धरण शामिल नहीं किया गया है।

FAQ

  1. WHO के मुताबिक कितने स्वास्थ्यकर्मी हिंसा झेलते हैं?
    WHO के अनुसार हर 10 में से 4 स्वास्थ्यकर्मी अपने करियर में शारीरिक हिंसा का सामना करते हैं। मौखिक दुर्व्यवहार को शामिल करने पर यह आंकड़ा करीब 62 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। भारत में डॉक्टरों के हिंसा झेलने की दर 77.3 प्रतिशत बताई गई है।
  2. किस देश में डॉक्टरों पर सबसे ज्यादा हिंसा होती है?
    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जर्मनी में डॉक्टरों के हिंसा झेलने की दर सबसे अधिक 91 प्रतिशत है। इसके बाद चीन में 90 प्रतिशत, पेरू में 84.5 प्रतिशत और तुर्की में 84 प्रतिशत है। अमेरिका के इमरजेंसी डॉक्टरों में यह दर 47 प्रतिशत दर्ज की गई है।
  3. महाराष्ट्र में डॉक्टरों पर हमले के कितने मामले दर्ज हुए?
    वर्ष 2010 से 2021 के बीच महाराष्ट्र में 738 मामले दर्ज किए गए। इनमें से केवल 4 मामलों में ही दोषसिद्धि हो सकी। यह आंकड़ा कानून के कमजोर क्रियान्वयन की ओर संकेत करता है।

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