ISRO ने स्पेस मिशन में किया बड़ा बदलाव! अब आम भारतीय भी कर सकेंगे अंतरिक्ष की यात्री

Amresh Kushwaha | Apr 29, 2026, 11:17 IST
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isro civilian astronaut mission gaganyaan updates
isro civilian astronaut mission gaganyaan updates

इसरो अब आम नागरिकों को भी अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है। जानें क्या है गगनयान का नया प्लान और कौन बन सकेगा भारत का अगला अंतरिक्ष यात्री...

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब अपने सबसे महत्वाकांक्षी मिशन की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब तक अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए भारतीय वायुसेना का टेस्ट पायलट होना अनिवार्य शर्त थी। वहीं, बहुत जल्द यह दीवार टूटने वाली है।

ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, इसरो अपने अगले एस्ट्रोनॉट बैच में आम नागरिकों (Civilians) को शामिल करने की तैयारी कर रहा है।

चयन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission) के पहले बैच के लिए अब तक केवल वायुसेना के जांबाज पायलटों को ही चुना गया है, क्योंकि शुरुआत में सिस्टम की सुरक्षा और टेस्टिंग सबसे बड़ी प्राथमिकता (Priority) थी। वहीं, अब इसरो की चयन समिति (Selection Committee) ने एक मिश्रित बैच की सिफारिश की है।

योजना के मुताबिक, नए बैच में 6 मिशन पायलट (मिलिट्री बैकग्राउंड) और 4 सिविलियन स्पेशलिस्ट (STEM बैकग्राउंड) शामिल किए जा सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि अब देश के मेधावी वैज्ञानिक और इंजीनियर भी अंतरिक्ष यान की सीट बुक कर सकेंगे।

कौन पहन सकेगा स्पेस सूट?

यह मौका रोमांचक जरूर है, लेकिन इसके मानक बेहद कड़े होंगे। इसरो मुख्य रूप से STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग एंड मैथमेटिक्स) क्षेत्र के विशेषज्ञों को प्राथमिकता देगा।

इन सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स का मुख्य काम सिर्फ सफर करना नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) वाली लैब में वैज्ञानिक प्रयोग (Scientific Experiments) करना और एडवांस सिस्टम को ऑपरेट करना होगा।

इसके साथ ही, मिलिट्री कोटे में भी विस्तार किया जा रहा है। इससे अब फाइटर पायलटों के साथ-साथ कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलटों के लिए भी अंतरिक्ष के द्वार खुल जाएंगे।

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?

इसरो का लक्ष्य अब केवल एक बार इंसानों को अंतरिक्ष में भेजना नहीं है। भारत अब भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksha Station - BAS) बनाने की ओर अग्रसर है। इस बड़े लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक विशाल और कुशल टीम की आवश्यकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इसरो का प्लान साल में कम से कम दो मिशन भेजने और क्रू की संख्या को दो से बढ़ाकर तीन करने का है। इसी जरूरत को देखते हुए एस्ट्रोनॉट्स का कुल पूल बढ़ाकर 40 लोगों तक करने की योजना बनाई गई है।

कब तक संभव होगी पहली उड़ान?

आम नागरिकों के लिए खबर उत्साहजनक है, लेकिन उन्हें अंतरिक्ष तक पहुंचने में अभी थोड़ा इंतजार करना होगा। मौजूदा योजना के अनुसार, सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स की पहली उड़ान चौथे क्रू गगनयान मिशन से शुरू होने की उम्मीद है।

फिलहाल इसरो एक एडवांस एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग फैसिलिटी (Training Facility) तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि आम नागरिकों को अंतरिक्ष की कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार किया जा सके।

नासा से लेकर डेनिस टीटो तक का सफर

दुनिया भर में आम नागरिकों को अंतरिक्ष भेजने का चलन पुराना है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने इसकी शुरुआत बहुत पहले कर दी थी। साल 1966 में नील आर्मस्ट्रांग पहले सिविलियन के तौर पर अंतरिक्ष गए थे (हालांकि वे पूर्व नौसेना पायलट थे)।

वहीं, 2001 में अमेरिकी बिजनेसमैन डेनिस टीटो दुनिया के पहले स्पेस टूरिस्ट बने थे। अब भारत भी उसी आधुनिक राह पर है, जहां अंतरिक्ष में जाने के लिए केवल वर्दी की नहीं, बल्कि विज्ञान के प्रति जुनून की भी जरूरत होगी।

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