NCERT किताब विवाद: SC ने 3 शिक्षाविदों पर बैन वापस लिया, अपना ही आदेश बदला
Pawan Modiya | May 22, 2026, 20:08 IST
22-1
सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की कक्षा 8 की किताब के न्यायपालिका चैप्टर विवाद में तीन शिक्षाविदों पर लगाया बैन वापस लिया। मार्च 2026 का वह आदेश बदला जिसमें उन्हें जानबूझकर तथ्य तोड़ने का दोषी बताया था।
समझें क्या है पूरा मामला
- NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान किताब में न्यायपालिका पर एक विवादित चैप्टर था।
- सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में उस पूरी किताब पर प्रतिबंध लगाते हुए सभी प्रतियां जब्त करने का आदेश दिया था।
- 11 मार्च 2026 को 3 शिक्षाविदों को सरकारी और सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों के शैक्षणिक कार्यों से अलग करने का आदेश दिया गया था।
- 22 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने वह प्रतिबंध आदेश वापस ले लिया और आपत्तिजनक टिप्पणियां भी हटा दीं।
- अदालत ने माना कि चैप्टर सामूहिक प्रयास का नतीजा था, किसी एक व्यक्ति का नहीं।
शुरुआत कहां से हुई
26 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उस किताब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। सभी भौतिक प्रतियां जब्त करने और डिजिटल संस्करण हटाने का आदेश दिया गया। NCERT के निदेशक और स्कूल शिक्षा सचिव को कारण बताओ नोटिस भी जारी हुए। NCERT ने सफाई दी कि किताब में जो भी आया, वह बिल्कुल अनजाने में था।
11 मार्च 2026 का कड़ा आदेश
कोर्ट ने उस आदेश में यह भी दर्ज किया कि इन तीनों ने जानबूझकर और सोच-समझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़ा तथा कक्षा 8 के छात्रों के मन में न्यायपालिका की नकारात्मक छवि बनाने की कोशिश की। यह टिप्पणी तीनों के पेशेवर जीवन के लिए बेहद गंभीर थी।
तीनों शिक्षाविद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
वरिष्ठ अधिवक्ता जे. साई दीपक ने सुपर्णा दीवाकर की ओर से बताया कि उनका इस काम में बहुत सीमित योगदान था। कोर्ट के आदेश से उनकी आजीविका का अधिकार प्रभावित हो रहा था। अदालत ने तब उनकी अर्जी रिकॉर्ड में लेते हुए दो हफ्ते बाद सुनवाई की बात कही।
22 मई को बड़ी राहत
अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, केंद्र शासित प्रदेश और सरकारी वित्तपोषित संस्थाएं इन तीनों शिक्षाविदों को भविष्य में किसी भी शैक्षणिक कार्य से जोड़ने के बारे में अपना स्वतंत्र निर्णय ले सकती हैं। यानी अब कोर्ट का कोई प्रतिबंध उन पर नहीं रहा।
वकीलों ने क्या कहा
न्यायमूर्ति बागची ने हालांकि यह जरूर कहा कि किताब में भ्रष्टाचार को केवल न्यायपालिका की समस्या के रूप में दिखाया गया था। उन्होंने कहा कि किताब में कानूनी सहायता और न्यायपालिका की सकारात्मक भूमिका के बारे में कुछ नहीं था। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि चैप्टर की सामग्री उचित नहीं थी, लेकिन अब यह माना गया कि इसके पीछे कोई बुरी नीयत नहीं थी।
किताब पर प्रतिबंध अभी भी जारी
यह खबर क्यों जरूरी है?
जरूरी FAQ
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट को NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर एक चैप्टर आपत्तिजनक लगा। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने और उसे बदनाम करने की सोची-समझी कोशिश है। अदालत ने आदेश दिया कि सभी भौतिक प्रतियां जब्त हों और डिजिटल संस्करण हटाया जाए। NCERT ने इसे अनजाने में हुई गलती बताया। किताब पर यह प्रतिबंध अभी भी जारी है।
22 मई के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने तीन शिक्षाविदों के बारे में क्या बदला?
22 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 के आदेश में दो बड़े बदलाव किए। पहला, तीनों शिक्षाविदों प्रोफेसर मिशेल दानिनो, सुपर्णा दीवाकर और अलोक प्रसन्न कुमार पर जो प्रतिबंध लगाया गया था कि ये सरकारी और सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थाओं के किसी काम में भाग नहीं ले सकते, वह वापस ले लिया गया। दूसरा, मार्च के आदेश में जो टिप्पणी दर्ज थी कि इन्होंने जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़ा, वह भी हटा दी गई। अदालत ने माना कि इनकी बात सुने बिना यह आदेश पास किया गया था और चैप्टर एक सामूहिक प्रयास था।
NCERT की किताब की समीक्षा के लिए कौन सी समिति बनाई गई है?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है जो NCERT की कक्षा 8 की विवादित किताब के संशोधित चैप्टर की समीक्षा करेगी। इसमें पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा, पूर्व अटॉर्नी जनरल (Attorney General) के.के. वेणुगोपाल और गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रकाश सिंह शामिल हैं। यह समिति भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के साथ समन्वय में काम करेगी, जिसके प्रमुख पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस हैं।
ये खबरें भी पढ़ें...
चंबल अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ड्राइवरों को नहीं, खनन के बड़े खिलाड़ियों को पकड़ो
सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन का अधिकार नहीं, पुरानी वैकेंसी भी नहीं देती गारंटी - सुप्रीम कोर्ट
MP लोकायुक्त को RTI छूट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जवाब नहीं दे सकी सरकार
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari