शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Sandeep Kumar | Jul 11, 2026, 20:12 IST
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद केस
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद केस

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को कथित झूठे केस में फंसाने के आरोपों से जुड़ा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा है। कोर्ट ने यूपी सरकार और आशुतोष महाराज से जवाब मांगा है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा मामला हाईकोर्ट पहुंचा है।
  • एक पत्रकार ने झूठे केस की साजिश का आरोप लगाया है।
  • नाबालिग बेटियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।
  • हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी है।
  • आशुतोष महाराज को मामले में पक्षकार बनाया गया है।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई की है। मामला कथित रूप से उन्हें झूठे यौन उत्पीड़न केस में फंसाने की साजिश से जुड़ा है। शाहजहांपुर निवासी पत्रकार रमाशंकर दीक्षित ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ आशुतोष पाण्डेय से जवाब मांगा है।

क्या है आरोप

याचिकाकर्ता रमाशंकर दीक्षित का आरोप है कि कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने दावा किया कि 18 फरवरी 2026 को तीन अज्ञात लोग उनके पास आए। आरोप है कि उन्हें धन का लालच दिया गया। उन पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ झूठा आरोप लगाने का दबाव बनाया गया। याचिका के अनुसार उनकी दो नाबालिग बेटियों का इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। याचिकाकर्ता ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

धमकी देने का आरोप

पत्रकार रमाशंकर दीक्षित ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव ठुकराने के बाद धमकियां दी गईं। उनका कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी मिली। उन्होंने घर की कथित रेकी कराने का भी आरोप लगाया है। याचिका में परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार उनकी दो नाबालिग बेटियां हैं। उन्होंने अदालत से सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।

कोर्ट ने क्या आदेश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने दाखिल अनुपूरक शपथपत्र को रिकॉर्ड पर लेने का आदेश दिया। अदालत ने कार्यालय को शपथपत्र को विधिवत क्रमांकित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ आशुतोष पाण्डेय को याचिका में पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने उनका पूरा पता और जरूरी विवरण दर्ज करने को कहा है।

यूपी सरकार से मांगी रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मौजूद स्थाई अधिवक्ता को निर्देश दिए हैं। अदालत ने एक सप्ताह के भीतर जरूरी जानकारी लेने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को तय की गई है। कोर्ट ने प्रकरण को नए वाद के रूप में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। अब सरकार की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

पुलिस अधिकारियों को निर्देश

हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को भी निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा है। इसमें बरेली परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक शामिल हैं। इसके अलावा शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक और थाना सदर बाजार प्रभारी को भी निर्देश दिए गए हैं। आदेश की प्रति 24 घंटे के भीतर भेजने को कहा गया है।

सुरक्षा पर उठे सवाल

याचिका में पुलिस सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रमाशंकर दीक्षित का कहना है कि शिकायत के बाद सुरक्षा दी गई थी। लेकिन आरोप है कि सुरक्षा में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों ने बयान बदलने का दबाव बनाया। याचिकाकर्ता ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को शिकायतें देने की बात कही है। उनका आरोप है कि प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

आगे की सुनवाई

फिलहाल हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है। इस मामले में आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे फैसला होगा। मामला अब 16 जुलाई 2026 को फिर सुना जाएगा। तब सरकार और अन्य पक्षों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

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